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ड्रैगन सम्राट
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अध्याय — अग्निपंखों की आखिरी उड़ान रात असामान्य रूप से शांत थी। आसमान में चंद्रमा दिखाई नहीं दे रहा था। काले बादलों की मोटी परत ने पूरे आकाश को ढक रखा था। दूर-दूर तक फैले पर्वतों के बीच केवल तेज हवाओं की आवाज सुनाई दे रही थी। लेकिन उस रात जंगल में एक और आवा...
Storyline
अध्याय — अग्निपंखों की आखिरी उड़ान रात असामान्य रूप से शांत थी। आसमान में चंद्रमा दिखाई नहीं दे रहा था। काले बादलों की मोटी परत ने पूरे आकाश को ढक रखा था। दूर-दूर तक फैले पर्वतों के बीच केवल तेज हवाओं की आवाज सुनाई दे रही थी। लेकिन उस रात जंगल में एक और आवाज थी। किसी के तेजी से भागने की। टूटती हुई शाखाएँ... सूखे पत्तों पर पड़ते कदम... और किसी के घबराकर तेज-तेज साँस लेने की आवाज। एक औरत अपने बेटे का हाथ पकड़े हुए अंधेरे जंगल में भाग रही थी। उसकी उम्र देखने में लगभग तीस वर्ष की लग रही थी, लेकिन उसकी आँखों में हजारों वर्षों का दर्द था। उसके लंबे काले बाल हवा में उड़ रहे थे। उसके कपड़े जगह-जगह से फट चुके थे। उसके चेहरे पर मिट्टी लगी थी। लेकिन इन सबसे ज्यादा डरावनी चीज उसकी आँखें थीं। उन आँखों में भय था। ऐसा भय जिसे देखकर लगता था कि वह औरत मृत्यु से नहीं, बल्कि किसी ऐसी शक्ति से भाग रही है जिसके सामने मृत्यु भी छोटी लगती थी। उसका बेटा लगभग दस वर्ष का था। वह भी लगातार भाग रहा था। लेकिन उसकी साँसें भारी हो चुकी थीं। उसके छोटे-छोटे हाथ अपनी माँ के हाथ को कसकर पकड़े हुए थे। "माँ..." उसने काँपती आवाज में कहा। औरत ने पीछे मुड़कर देखा। "चुप रहो, आरव।" "लेकिन माँ... हम भाग क्यों रहे हैं?" औरत कुछ क्षण चुप रही। उसने अपने बेटे की ओर देखा। उसकी आँखों में अचानक आँसू आ गए। उसने अपने बेटे का चेहरा दोनों हाथों में पकड़ लिया। "क्योंकि वे तुम्हें ढूँढ रहे हैं।" आरव की आँखें फैल गईं। "कौन?" औरत ने तुरंत उसके मुँह पर हाथ रख दिया। "धीरे बोलो।" आरव ने डरते हुए सिर हिलाया। कुछ क्षण दोनों वहीं खड़े रहे। चारों ओर सन्नाटा था। और फिर... दूर कहीं आसमान में लाल रोशनी दिखाई दी। औरत का चेहरा सफेद पड़ गया। "वे आ गए..." उसने बेटे का हाथ पकड़ा। "चलो!" दोनों फिर दौड़ पड़े। लेकिन इस बार वह औरत सामान्य मनुष्य की तरह नहीं दौड़ रही थी। उसके पैरों के नीचे जमीन हल्की-सी जलने लगी थी। उसकी गति अचानक कई गुना बढ़ गई। कुछ ही क्षणों में वह और उसका बेटा जंगल के बहुत अंदर पहुँच गए। वहाँ एक विशाल चट्टान थी। औरत चट्टान के सामने रुक गई। उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया। उसकी हथेली से हल्की लाल रोशनी निकली। चट्टान पर एक प्राचीन चिन्ह चमक उठा। अचानक चट्टान दो हिस्सों में बँट गई। अंदर एक गुफा थी। औरत ने आरव को भीतर धकेला। "अंदर जाओ।" "माँ?" "जाओ!" आरव डर गया। "माँ, आप भी चलो।" औरत ने उसे गले लगा लिया। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। "मैं तुम्हारे साथ हूँ।" "लेकिन..." "मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगी।" आरव ने उसकी कमर पकड़ ली। "माँ, मुझे डर लग रहा है।" औरत ने उसकी पीठ सहलाई। "डरना गलत नहीं है, आरव।" "लेकिन?" "लेकिन डर के कारण अपनी असली शक्ति को भूल जाना गलत है।" आरव ने अपनी माँ की ओर देखा। "मेरी कौन-सी शक्ति?" औरत कुछ पल उसे देखती रही। फिर
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