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बेकाबू जुनून: एक नफ़रत, एक मोहब्बत
Romance
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बेकाबू जुनून: एक नफ़रत, एक मोहब्बत

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"बेकाबू जुनून" अर्नव और रिद्धिमा की एक ऐसी नफ़रत, डर और आकर्षण से भरी लव स्टोरी है, जो एक जबरन और तनावपूर्ण शादी से शुरू होती है। रिद्धिमा, जो एक सहमी हुई और मासूम लड़की है, अर्नव के सख्त और गुस्सैल मिज़ाज से बेहद डरती है। अपनी सुहागरात के दिन, घबराहट और खौ...

Storyline

"बेकाबू जुनून" अर्नव और रिद्धिमा की एक ऐसी नफ़रत, डर और आकर्षण से भरी लव स्टोरी है, जो एक जबरन और तनावपूर्ण शादी से शुरू होती है। रिद्धिमा, जो एक सहमी हुई और मासूम लड़की है, अर्नव के सख्त और गुस्सैल मिज़ाज से बेहद डरती है। अपनी सुहागरात के दिन, घबराहट और खौफ के मारे वह कमरे को अंदर से लॉक कर लेती है। वहीं अर्नव, जो रिद्धिमा से बेइंतहा मोहब्बत करता है लेकिन अपना हक जताने के मामले में बेहद आक्रामक और बेकाबू है, खिड़की और बालकनी के रास्ते कमरे के अंदर दाखिल हो जाता है। शुरुआत में दोनों के बीच जबरदस्त टकराव, गुस्सा और डर का माहौल बनता है। लेकिन जब अर्नव रिद्धिमा की आँखों में अपने लिए खौफ और आँसू देखता है, तो उसका सख्त दिल पिघलने लगता है। वह धीरे-धीरे रिद्धिमा को यह अहसास कराने की कोशिश करता है कि उसका गुस्सा नफ़रत नहीं, बल्कि उसे खोने का डर और जुनून है। कहानी आगे बढ़ती है जहाँ रिद्धिमा का डर धीरे-धीरे अर्नव के लिए एक अनजाने प्यार में बदलने लगता है, और दोनों अपनी गलतफहमियों को पीछे छोड़कर एक-दूसरे के करीब आते हैं। चैप्टर 1,-रात के बारह बज चुके थे। हैवी शादी के लहंगे में लिपटी रिद्धिमा के हाथ-पैर ठंडे पड़ रहे थे। दरवाज़े पर हो रही तेज़ दस्तक उसके दिल की धड़कनें बढ़ा रही थी। "रिद्धिमा! दरवाज़ा खोलो, वरना अंजाम बहुत बुरा होगा!" अर्नव की कड़क और गुस्सैल आवाज़ कमरे के बाहर से गूँज रही थी। रिद्धिमा शादी के इस भारी माहौल और अर्नव के सख्त रवैये से इतनी डरी हुई थी कि उसने हिम्मत करके कमरे की कुंडी अंदर से चढ़ा दी थी। बाहर दरवाज़ा पीटे जाने की आवाज़ें आ रही थीं, लेकिन रिद्धिमा कोने में सिमटी बैठी रही। कुछ देर बाद बाहर सन्नाटा छा गया। रिद्धिमा ने राहत की साँस ली और सोचा कि शायद अर्नव चला गया है। भारी गहने और भारी-भरकम साड़ी का बोझ सहना मुश्किल हो रहा था, इसलिए उसने खुद को सहज करने के लिए चेंज करना शुरू किया। तभी अचानक बालकनी के काँच के दरवाज़े से हल्की सी आहट हुई। रिद्धिमा ने पलटकर देखा तो उसकी साँसें वहीं थम गईं। अर्नव बालकनी के रास्ते कमरे के अंदर दाखिल हो चुका था और उसकी तीखी नज़रें सीधे रिद्धिमा पर टिकी थीं। "तुम्हे क्या लगा, एक मामूली कुंडी मुझे रोक लेगी?" अर्नव ने भारी आवाज़ में कहा और उसकी तरफ कदम बढ़ाने लगा। घबराहट और शर्म के मारे रिद्धिमा ने झट से शॉल उठाकर खुद को ढकने की कोशिश की और पीछे हटने लगी। "अर्नव... प्लीज, पीछे हटिए..." उसकी आवाज़ डर के मारे काँप रही थी। लेकिन अगले ही पल अर्नव ने उसकी नाज़ुक कलाई को पकड़कर उसे अपने करीब खींच लिया। रिद्धिमा का दिल सीने में तेज़ी से धड़कने लगा। अर्नव के चेहरे पर जो गुस्सा था, वह रिद्धिमा की बेबसी और मासूमियत को देखकर धीरे-धीरे पिघलने लगा, और कमरे का माहौल डर से बदलकर एक अनजानी नज़दीकी में ढलने लगा।

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