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Arjun The Martial Shol
Romance
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Arjun The Martial Shol

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इस दुनिया में, ताकत ही सब कुछ है। जिनके पास शक्ति है, वे बादलों के पार उड़ते हैं और आसमान से उन कमजोर लोगों को हिकारत से देखते हैं, जो सिर्फ जिंदा रहने के लिए तड़प रहे हैं!<br>​यहाँ 'द बुक ऑफ द वे' (मार्ग का ग्रंथ) के अनुसार, लड़ने की क्षमता य...

Storyline

इस दुनिया में, ताकत ही सब कुछ है। जिनके पास शक्ति है, वे बादलों के पार उड़ते हैं और आसमान से उन कमजोर लोगों को हिकारत से देखते हैं, जो सिर्फ जिंदा रहने के लिए तड़प रहे हैं!<br>​यहाँ 'द बुक ऑफ द वे' (मार्ग का ग्रंथ) के अनुसार, लड़ने की क्षमता या 'युद्ध-आत्मा' (War Spirit) एक जन्मजात प्रतिभा है। योद्धा अपने शरीरों को शारीरिक ताकत के चरम तक ट्रेन तो कर सकते हैं, लेकिन असली महाशक्ति पाने के लिए इंसान को इस दुनिया से परे, अध्यात्म की दुनिया से एक युद्ध-आत्मा को जगाना होता है।<br>​हर मार्शल आर्ट्स का अभ्यास करने वाला योद्धा, अपनी खुद की खूबियों के आधार पर, आत्माओं की दुनिया का एक दरवाजा खोलकर इस युद्ध-आत्मा को जगा सकता है। ये आत्माएं अलग-अलग रूपों में प्रकट होती हैं—जैसे तलवार और भाले जैसे हथियार, या फिर बाघ और ड्रैगन जैसे शक्तिशाली जानवर।<br>​इन युद्ध-आत्माओं के कई प्रकार होते हैं, जिन्हें सात स्तरों (रैंक) में बांटा गया है: लाल, नारंगी, पीला, जेड ग्रीन (हल्का हरा), पन्ना हरा, नीला और बैंगनी। लाल-स्तर की युद्ध-आत्मा से ऊपर की ओर बढ़ते हुए, हर स्तर के साथ शक्ति कई गुना बढ़ती जाती है।<br>​शर्मा निवास—रानीखेत, उत्तराखंड<br>​एक विशाल पवित्र वेदी (Altar) पर, कई युवा लड़कियां पालथी मारकर बैठी थीं। उनके ठीक ऊपर, अजीब और बेहद खूबसूरत पत्थरों पर उकेरे गए प्राचीन प्रतीकों (Runes) से एक चकाचौंध कर देने वाली रोशनी निकल रही थी। उस वेदी और लड़कियों को चारों ओर से कुछ युवाओं ने घेर रखा था, जो उनके 'मार्ग-रक्षक' (Road Protectors) थे। उन सभी की उम्र महज़ 15 या 16 साल की थी।<br>​"आत्मा का द्वार खोलो!" एक बुजुर्ग ने ऊंचे स्वर में घोषणा की।<br>​वेदी के ठीक सामने, शर्मा परिवार के एक सबसे बड़े बुजुर्ग ने एक पवित्र पात्र से जल ग्रहण किया, अपनी हथेली पर कई रहस्यमयी आकृतियां बनाईं, और फिर घुटनों के बल बैठकर अपना माथा जमीन से टिका दिया।<br>​बुज़, बुज़!<br>​अचानक आसमान से रोशनी की तेज़ किरणें नीचे आईं और उन्होंने उन युवा लड़कियों के शरीरों को एक अजीब सी ऊर्जा के घेरे में लपेट लिया।<br>​बुजुर्ग ने गंभीर आवाज में कहा, "अपने मन को काबू में रखो और इस शक्ति को महसूस करो। आत्मा का द्वार तुम्हारे बिल्कुल करीब खुलने वाला है।"<br>​यह वेदी विशेष रूप से शर्मा परिवार द्वारा तैयार की गई थी ताकि परिवार के बच्चों के लिए आध्यात्मिक द्वार खोला जा सके। इस वेदी का उपयोग करने से आध्यात्मिक द्वार खोलने और एक शक्तिशाली युद्ध-आत्मा से जुड़ने की सफलता की संभावना बहुत बढ़ जाती थी। इस तरह की वेदी बनाना बेहद खर्चीला काम था, जिसमें बेहिसाब पैसा और ताकत लगती थी। इसे चालू करने के लिए बहुत सारे कीमती संसाधनों की जरूरत होती थी। इसलिए, शर्मा परिवार जैसा एक बड़ा और रसूखदार खानदान ही, जिसके पास कई प्रतिभाशाली बच्चे हों, वेदी से आध्यात्मिक द्वार खोलने का ऐसा बड़ा कारनामा कर सकता था।

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