minifm
लॉर्ड ऑफ कलियुग
Romance
Completed hi

लॉर्ड ऑफ कलियुग

0.0Rating0 reviews
0Reads0 likes
0ChaptersCompleted

एपिसोड 39 — पहला द्वार महल की नींव काँप रही थी। पत्थरों के बीच से सुनहरी और काली ऊर्जा की धाराएँ बाहर निकल रही थीं। आकाश में बादल गोलाकार घूम रहे थे। शून्य सेना, जो कुछ क्षण पहले महल पर हमला करने के लिए आगे बढ़ रही थी, अचानक पीछे हटने लगी। अर्जुन ने यह देखा...

Storyline

एपिसोड 39 — पहला द्वार महल की नींव काँप रही थी। पत्थरों के बीच से सुनहरी और काली ऊर्जा की धाराएँ बाहर निकल रही थीं। आकाश में बादल गोलाकार घूम रहे थे। शून्य सेना, जो कुछ क्षण पहले महल पर हमला करने के लिए आगे बढ़ रही थी, अचानक पीछे हटने लगी। अर्जुन ने यह देखा तो उसकी नजर आर्यमित्र पर गई। आर्यमित्र के चेहरे पर पहली बार भय दिखाई दे रहा था। अर्जुन ने पूछा, “आर्यमित्र, क्या हो रहा है?” आर्यमित्र ने उसकी ओर देखा। “पहला द्वार खुल गया है।” “कौन-सा द्वार?” “वही जिसे तुमने स्वयं बंद किया था।” अर्जुन ने तुरंत पूछा, “मैंने क्यों बंद किया था?” आर्यमित्र ने उत्तर देने से पहले महल के नीचे उठती ऊर्जा को देखा। “क्योंकि उस द्वार के पीछे जो है…” वह रुक गया। “उसे इस संसार में आने दिया गया तो कई लोक खतरे में पड़ सकते हैं।” अर्जुन की आँखें गंभीर हो गईं। “और अनाया ने उसे खोल दिया?” “उसने जानबूझकर नहीं खोला।” “फिर?” “उसकी शक्ति उस ताले की कुंजी है।” अर्जुन ने मुट्ठी कस ली। “तो उसे बंद कैसे करेंगे?” आर्यमित्र ने अर्जुन की तरफ देखा। “तुम्हें करना होगा।” “मैं?” “हाँ।” “मुझे तो यह भी नहीं पता कि यह द्वार क्या है।” आर्यमित्र ने कहा, “तुम्हें याद नहीं है।” “लेकिन?” “तुम्हारे शरीर को याद है।” --- महल के भीतर अनाया अभी भी उसी कमरे में खड़ी थी। उसकी हथेली पर सुनहरा चिन्ह चमक रहा था। उसके सामने खड़ा रहस्यमयी व्यक्ति लगातार पीछे हट रहा था। अनाया ने पूछा, “आप मुझसे डर क्यों रहे हैं?” उस व्यक्ति ने उत्तर नहीं दिया। अचानक कमरे की दीवारों पर बने सभी पुराने चित्र चमक उठे। एक के बाद एक कई चित्र जीवित होने लगे। पहले चित्र में एक विशाल साम्राज्य दिखाई दिया। दूसरे में युद्ध। तीसरे में एक विशाल द्वार। चौथे चित्र में एक योद्धा उस द्वार के सामने खड़ा था। अनाया उस योद्धा को देखती रही। “ये पापा हैं।” रहस्यमयी व्यक्ति ने कहा, “हाँ।” “उन्होंने ये द्वार बंद किया था?” “हाँ।” “क्यों?” वह कुछ पल चुप रहा। फिर बोला, “क्योंकि वह जानते थे कि अगर यह शक्ति गलत हाथों में गई…” उसने चित्र की ओर देखा। “…तो कोई भी ब्रह्मांड सुरक्षित नहीं रहेगा।” अनाया ने पूछा, “और अब?” उसने धीरे से कहा, “अब तुम्हारे कारण द्वार फिर खुल रहा है।” अनाया डर गई। “तो क्या मैं बुरी हूँ?” वह व्यक्ति कुछ क्षण उसे देखता रहा। फिर पहली बार उसके चेहरे पर नरमी आई। “नहीं।” “फिर?” “तुम कुंजी हो।” अनाया ने पूछा, “कुंजी किसकी?” उसने उत्तर दिया— “तुम्हारे पिता की विरासत की।” --- युद्धभूमि महल के बाहर शून्य सेना फिर आगे बढ़ी। आर्यमित्र ने तलवार उठाई। “अर्जुन!” “हाँ?” “तुम्हें भीतर जाना होगा।” अर्जुन ने सामने हजारों योद्धाओं को देखा। “और आप?” आर्यमित्र मुस्कुराया। “मैं इन्हें रोकूँगा।” अर्जुन ने कहा, “आप अकेले हैं।” “मैं पहले भी अकेला लड़ चुका हूँ।” अर्जुन ने आर्यमित्र की आँखों में देखा। उसे अचानक एक झलक दिखाई दी। एक बहुत पुराना युद्ध। आर्यमित्र घायल था। और अर्जुन उसके सामने खड़ा था। अर्जुन की आवाज जैसे उस पुराने दृश्य में

All Chapters

No chapters available.

Latest Reviews

No reviews yet.

Latest Comments

No comments yet.