सच में दिन-ब-दिन पागल होते जा रही है - Chapter 2
अजनबी आहटअब आगे -
चिराग ब्रेकफास्ट करने के बाद ऑफिस जाने के लिए निकल पड़ा, मेंशन से बाहर निकाल तो सूर्या कार के पास खड़ा था और अपनी बॉस को आता देख आकार का दरवाजा ओपन किया|
चिराग जाकर उसमें बैठ गया और कुछ ही देर बाद वह ऑफिस पहुंच गया |
The Group of Hinduja Head Quarter
चिराग ऑफिस पहुंचने ही तेजी से चलते हुए अंदर जा रहा था, सामने से उसे बहुत लोग सेल्यूट दे रहे थे, बगैर वह किसी की तरफ देखें सीधे लिफ्ट से होते हुए अपने केबिन में पहुंचा |
उसके केबिन में आते ही थोड़ी देर बाद उसका मैनेजर निलेश केबिन में उसके सामने मौजूद खड़ा होकर आज के सारे रिपोर्टिंग शेड्यूल बताने लगा कि आज कौन-कौन सी मीटिंग और कितने बजे हैं..?
यहां तक की आज के काम के साथ-साथ अगले दिन का भी काम का रिपोर्ट उसके पास तैयार रहता है..!
उसका मैनेजर निलेश सब कुछ बताये जा रहा था कि चिराग बीच में उसे टोकते हुए कहा_" कल मॉर्निंग में कोई मीटिंग मत रखना, अगर कुछ इंपॉर्टेंट मीटिंग रहेगा तो 3:00 बजे के बाद ही रखना.. क्योंकि कल मुझे माधव अंकल की बेटी के वेडिंग में जाना है..! "
चिराग का इतना कहना कि निलेश अपना सिर हाँ में हिलाते हुए जाने को हुआ कि उतने में चिराग उसे वापस रोकते हुए कहा_" सुनो.. वेडिंग में गिफ्ट देने के लिए एक एक्सपेंसिव कार बुक करवा दो..! "
निलेश तुरंत अपना सिर हा में हिलाया और केबिन से बाहर निकाला और एक महंगी का लैंबॉर्गिनी तुरंत बुक कर दिया |
दूसरी तरफ अंधेरी - माधव ठाकुर का घर -
घर का हर एक सदस्य बहुत बिजी था, देखकर ही पता चल रहा था कि किसी को सांस लेने के लिए भी टाइम नहीं है, हर कोई कुछ ना कुछ काम कर रहा था |
कोई अपने कपड़े लेकर यहां वहां जा रहा था... तो कोई मेहंदी लगा रहा था.. तो कोई अपना सिंगर कर रहा था... जिसे देखो वह बिजी, पर वही ऊपर वाले कमरे में एक लड़की चुपचाप बैठी थी |
यह कोई और नहीं बल्कि दिया थी उसकी आंखों में अभी भी नहीं था, जो देखकर पता चल रहा था कि उसे हर कोई जबरदस्ती उठा रहा हो, और वैसे भी सूरज निकल आया था और शादी का घर हो तो लोग कहां सोते हैं..!
तभी कमरे का दरवाजा खुला और एक लड़की तेजी से अंदर आते हुए बोली_" दीया यह क्या हाल बना के रखा है तुमने , चाची जी कब से चिल्लाए जा रही है, और शादी का घर है... और तुम्हें देखकर तो ऐसा लग रहा है कि तुम कामवाली बाई है... अरे बड़े भाई की शादी है.. और बहने ठुमका ना लगाये.. तो क्या फायदा..! पर तुम्हें तो देख कर कुछ और ही लग रहा है, कल तक तो तुम मे बहुत एनर्जी था... पर अब क्या हो गया? कहां गया तुम्हारी एनर्जी..?? "
उसका इतना कहना कि वह एकदम अंगड़ाई लेते हुए अपने शरीर को कड- कड के तोड़ने लगी, जैसे की उसका शरीर नहीं कोई सूखी हुई लकड़ी हो... जिसमें से टूटने की आवाज आ रहा था |
और उसकी ऐसी हरकतें देख वह लड़की बोली_" दीया यह किसी हरकतें हैं.... पागल हो गई है क्या? ये यह मर्दों की तरह कैसे अपने शरीर को तोड़ रही है... सच में दिन-ब-दिन पागल होते जा रही है..! "
वह लड़की चिल्ला ही रही थी कि दीया वापस बेड पर फैल कर लेट गई और उसे इस तरह वापस सोता देख वह आगे गई और उसका हाथ पकड़ कर जोर से झकझोरते हुए उठाकर बिठा दी और उसके गाल पर हल्के हाथ से चपात मारते हुए बोली_" अगर अब तुम सोई?? तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.. आई बात समझ में.. चलो अब जल्दी उठ जाओ..! "
दीया उबासी लेते हुए अलसी आवाज में बोली_" द.. दीपिका दी, सच कह रही हू.. बहुत नींद आ रहा है... पूरी रात सो नहीं पाई... जब रात को हम आए... तब से मेरा बदन-बदन टूट रहा है.. ऐसा लग रहा जैसे कोई मेरे सर पर बैठा हो.... कोई मुझे मे समा गया हो...! "
दीया के मुंह से बहकी-बहकी बातें सुनकर दीपिका अपनी आंख गोल-गोल घूमने लगी और अपने दोनों हाथ कमर पर रख तेज आवाज में बोली _" मैडम, टाइम देखो... दोपहर होने को आ गया है.. कल शादी है, और जरा भी टाइम नहीं है.. और तुम महारानी इधर आकर आराम से सो रही हो, अभी जब नीचे जाओगे ना फिर देखो, चाचा जी तुम्हारी क्या हाल करती है..बहुत गुस्से में है..! "
पर दीया को देखकर तो ऐसा लग रहा था जैसे उसे किसी के बातों से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है |
जो देख दीपिका उसके पास आई और उसके चेहरे पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोली_" अच्छा! सुनो... रात मे सोने से पहले मालिश कर दूंगी, अब जल्दी से फ्रेश हो जाओ, वरना तुम्हें डांट पड़ेगा.. सब लोग तैयार हो गए कुछ ही देर में हल्दी की रस्म चालू होने वाला है..! "
दीपिका यह बोलते वक्त ध्यान से देख रही थी, क्योंकि दीया कभी भी इतनी लापरवाह तो नहीं थी, पर आज वह लापरवाही कर रही थी, वैसे तो दिया उसके चाचा की बेटी थी |
दीपिका के प्यार से कहने के बाद अब जाकर कहीं दीया उठी और सीधी वॉशरूम में गई, वॉशरूम में आने के बाद भी वह अंगड़ाई ले रही थी, उसे देख ऐसा लग रहा था कि बरसों से वह एक ही जगह पर लेटी हो..!
वह हाथ में साबुन को लेकर उसकी खुशबू सूँघ रही थी, वह अजीबो गरीबों हरकतें करने लगी थी, कुछ ही देर में वह फ्रेश होकर वॉशरूम से बाहर निकली |
दीया जब वॉशरूम से बाहर निकली, तो देखी सामने ड्रेसिंग टेबल के सामने दीपिका बैठकर तैयार हो रही थी, उसने yellow कलर का लहंगा पहने बैठी हुई थी और बेड पर सेम डिजाइन Yellow कलर का लहंगा दीया के लिए भी रखा हुआ था |
दीया को देखकर दीपिका मुस्कुराते हुए बोली _" जल्दी से पहले मुझे तैयार होने में मदद करो, उसके बाद में तुम्हें तैयार कर दूंगी.. नीचे तो सभी लोगों ने Yellow कलर का ही पहना है, सभी लोग इतने प्यारे दिख रहे हैं... क्या ही तुम्हें बताऊं..? "
दीया इस वक्त अपने शरीर पर सिर्फ टॉवेल लपेटी हुई थी और वह बेड के पास जाकर lehenga choli को हाथ में लिए ध्यान से देखने लगी |
उसको इस तरह देखता देख दीपिका मिरर में से उसे देख रही थी और अजीब सा चेहरा बनाते हुए पीछे पलट कर उसे देख बोली _" दीया तुमने तो हद कर दिया है, तुम्हें जितना हम लोग जल्दी करने के लिए कह रहे हैं तुम जानबूझकर और लेट कर रही हो.. हल्दी का रसम चालू हो जाएगा और भाई की प्यारी दोनों बहने अभी तक तैयार नहीं हुई... सब यही कहेंगे..! "
To be continue.....
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