Rebirth Of Demon King Rudransh - Episode 3
Rebirth Of Demon King Rudransh**रुद्रांश का प्रतिशोध: मौर्य परिवार का पतन**
अनामिका के कमरे से बाहर जाने के बाद रुद्रांश बिस्तर पर बैठ गया। वह अभी अपने हाथों पर बने रहस्यमयी आध्यात्मिक रून्स (Spiritual Runes) को देखकर अपने आंतरिक द्वंद्व को शांत करने की कोशिश कर रहा था। उसने एक बार फिर अपने भीतर मौजूद उस सुनहरे कंकाल पर ध्यान केंद्रित किया, कन्तु इस बार उसमें कोई हलचल नहीं हुई। धीरे-धीरे वे प्राचीन रून्स उसके शरीर की गहराइयों में समा गए और कमरे में चारों तरफ फैली बर्फीली धुंध और थंडी डेमन क्यूई (Demon Qi) भी वापस उसके भीतर खिंच गई।
तभी, रुद्रांश ने अपनी बंद आंखें खोलीं। जैसे ही उसने अपने भीतर **'स्वर्ग भक्षक युद्ध कानून' (Heaven Devouring War Law)** की ऊर्जा को एक बार फिर से टटोला, उसके शरीर में एक तीव्र विस्फोट सा हुआ। उसकी चेतना और उसका अस्तित्व बदल गया। उसकी आंखें मदिरा के समान गहरी और खून जैसी सुर्ख लाल हो गईं, मानो साक्षात यमराज की नजरें हों। उसके भीतर से निकलने वाली काली, विनाशकारी क्यूई इतनी भयानक थी कि ऐसा लग रहा था मानो वह तब तक शांत नहीं होगी जब तक इस संसार का आखिरी इंसान खत्म नहीं हो जाता।
अपनी इस असीम और खूंखार शक्ति को देखकर रुद्रांश के चेहरे पर एक क्रूर मुस्कान आ गई। वह कमरे में जोर-जोर से हंसने लगा, "हाहाहा... दिव्यांशी! सूर्यवर्धन! तुम दोनों थोड़ा और इंतजार करो। एक दिन मैं तुमसे वह सब कुछ वापस छीन लूंगा जो कभी मेरा था!"
अभी वह अपनी इस नई शक्ति को पूरी तरह समझ भी नहीं पाया था कि अचानक बाहर से बहुत तेज शोर-शराबा सुनाई देने लगा। कई लोगों के कदमों की आहट और चीख-पुकार सुनकर रुद्रांश ने अपने विचारों को रोका और बाहर निकलने की सोची। लेकिन इससे पहले कि वह अपनी जगह से हिल पाता, एक जोरदार धमाके के साथ उसके कमरे का भारी लकड़ी का दरवाजा टूट कर बिखर गया!
धूल के गुबार के बीच से १०-१५ युवा लड़के बेहद आक्रामक अंदाज में कमरे के भीतर घुस आए। उन सब के आगे उनका लीडर खड़ा था—मौर्य परिवार का युवा मालिक, **विक्रम मौर्य**।
रुद्रांश ने जैसे ही उसे देखा, उसकी लाल आंखों में ठंडक और बढ़ गई। उसने शांत पर भारी आवाज में कहा, "विक्रम मौर्य! तुम्हारी यह हिम्मत? तुम इस कबीले के युवा मालिक हो तो क्या इसका मतलब तुम जो चाहो वो करोगे?"
विक्रम मौर्य घमंड में चूर होकर जोर से हंसा और बोला, "अरे! कबाड़ अर्जुन, तुम अभी तक मरे नहीं? कल की वह लात-घूंसों वाली बेरहम पिटाई भूल गए जो आज मेरे सामने इतनी ऊंची आवाज में बात करने का दुस्साहस कर रहे हो?" यह सुनकर विक्रम के पीछे खड़े उसके सारे चाटुकार साथी ठहाके लगाकर हंसने लगे।
इतने में ही, बाहर से अनामिका बदहवास हालत में भागती हुई आई। उसका पूरा शरीर डर से कांप रहा था, लेकिन रुद्रांश को खतरे में देखकर वह अपनी जान की परवाह किए बिना रुद्रांश के आगे ढाल बनकर खड़ी हो गई। वह रोते हुए हाथ जोड़कर बोली, "युवा मालिक विक्रम, कृपया मास्टर को छोड़ दीजिए! इन्हें कुछ मत कहिए, मैं आपके पैर पड़ती हूँ!"
लिखित नियमों के अनुसार विक्रम मौर्य **Body Tempering Realm के 9th Level** पर था, जो कभी भी **Qi Condensation Realm** में कदम रख सकता था। वहीं अनामिका महज एक नश्वर (Mortal) दासी थी। विक्रम ने घृणा से अनामिका की तरफ देखा तक नहीं, उसने बस लापरवाही से अपना भारी हाथ हवा में लहराया और अनामिका को एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया।
थप्पड़ इतना भयानक था कि अनामिका हवा में लहराती हुई दूर जा गिरी। यदि विक्रम ने अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल किया होता, तो वह नश्वर लड़की वहीं खून की धुंध में बदल जाती, लेकिन उसने ऐन वक्त पर अपना हाथ रोक लिया था।
विक्रम ने जमीन पर दर्द से कराहती अनामिका को देखा और वासना और क्रूरता से भरी हंसी के साथ बोला, "कुतिया! तू इतनी खूबसूरत है, लेकिन इस गटर के नाले जैसे कचरे में तूने ऐसा क्या देख लिया? तू रुक, एक बार मैं इस कीड़े से निपट लूं, फिर तुझसे आराम से बात करता हूं।"
यह कहकर विक्रम मौर्य जैसे ही रुद्रांश की कॉलर पकड़ने के लिए आगे बढ़ा, कमरे का तापमान अचानक शून्य से भी नीचे गिर गया। रुद्रांश की लाल आंखें अंधेरे में साक्षात राक्षस की तरह चमक उठीं। उसने अनामिका की तरफ देखा जो दर्द से रो रही थी, और उसके पत्थर दिल के कोने से एक ऐसी खूंखार चीख उठी जिसने सदियों पुराने डेमन किंग को पूरी तरह जगा दिया।
रुद्रांश ने एक ठंडी, कांपती हुई आवाज में कहा, "विक्रम मौर्य... तूने आज अपनी मौत के वारंट पर खुद दस्तखत किए हैं।"