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Chapter 1

Magic Pen - Episode 1

Magic Pen

पुरानी डायरी और सुनहरी स्याही

​आर्यन को पुरानी चीज़ें बहुत पसंद थीं। एक बरसात की दोपहर, जब वह अपने दादाजी के अटारी (attic) की सफाई कर रहा था, उसे एक धूल भरी लकड़ी की पेटी मिली। अंदर एक बहुत ही पुरानी, नक्काशीदार फाउंटेन पेन थी। उसकी स्याही का रंग गहरा काला नहीं, बल्कि सुनहरी (golden) था।

​पहला जादू

​उत्सुकता में, आर्यन ने पास रखी एक रफ कॉपी पर एक छोटा सा कागज़ का जहाज़ बनाया। जैसे ही उसने पेन को कागज़ से हटाया, कुछ अजीब हुआ। कागज़ पर बनी स्याही चमकने लगी और देखते ही देखते, वह छोटा सा चित्र कागज़ से उठकर हवा में तैरने लगा। वह एक असली, छोटी लकड़ी की नाव बन चुकी थी, जो कमरे की हवा में ऐसे तैर रही थी जैसे वह शांत तालाब का पानी हो।

​आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। वह समझ गया कि यह कोई साधारण पेन नहीं थी।

​एक नेक इरादा

​उसी शाम, आर्यन पार्क में बैठा था। उसने देखा कि पास ही एक छोटी बच्ची, मीरा, उदास बैठी थी। उसका पालतू खरगोश खो गया था। वह रो रही थी।

​आर्यन के दिल में एक विचार आया। उसने अपनी जेब से वह जादुई पेन निकाली। उसने स्केचबुक में एक प्यारा सा खरगोश बनाया। उसने पूरे मन से कल्पना की कि वह खरगोश मीरा के पास जाए।

​"जादू सिर्फ तब काम करता है, जब मन में किसी का भला करने का इरादा हो।"

​आर्यन ने पेन को कागज़ पर रखा। चित्र हिलने लगा। धीरे-धीरे, कागज़ का वह चित्र एक जीवित, उछलते-कूदते खरगोश में बदल गया और घास पर उतर आया। वह सीधा दौड़ता हुआ मीरा के पास गया और उसकी गोद में जाकर बैठ गया।

​अंत

​मीरा के चेहरे पर जो मुस्कान आई, वह आर्यन के लिए किसी भी जादू से बढ़कर थी। उसने अपनी डायरी और वह पेन वापस बैग में रख ली। उसे समझ आ गया था कि उसके हाथ में एक ऐसी शक्ति थी जो उदासी को खुशी में बदल सकती थी, लेकिन उसे इसका इस्तेमाल बहुत सावधानी से करना था।

​जादू तो बस एक जरिया था—असली जादू तो दूसरों की मदद करने की उसकी नीयत में था।

एपिसोड 2: परछाइयों का चोर (The Shadow Thief)

​जादुई पेन को मिले एक हफ़्ता हो चुका था। आर्यन ने समझदारी दिखाते हुए उसका इस्तेमाल बंद कर दिया था। वह जानता था कि इतनी बड़ी शक्ति का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है। लेकिन जादू को शायद कुछ और ही मंज़ूर था।

​एक अजीब सुबह

​सोमवार की सुबह जब आर्यन स्कूल के लिए निकला, तो मौसम अजीब सा था। सूरज पूरी तरह चमक रहा था, लेकिन सड़क पर चलते लोगों में कुछ अजीब बात थी। आर्यन ने ध्यान से देखा और उसके होश उड़ गए—सड़क पर चल रहे किसी भी इंसान की परछाई (shadow) नहीं थी!

​लोग बिना परछाई के भूतों की तरह चल रहे थे। तभी आर्यन की नज़र सड़क के कोने पर खड़े एक अजीब आदमी पर पड़ी। उसने एक लंबा, काला कोट पहना हुआ था और उसके हाथ में एक बड़ा सा जूट का बोरा था। वह बोरा अजीब तरीके से हिल रहा था, जैसे अंदर कोई चीज़ छटपटा रही हो।

​आर्यन ने नीचे देखा, उस आदमी के पैर के पास एक नहीं, बल्कि दर्जनों परछाइयां ज़मीन पर रेंग रही थीं, जो उस बोरे के अंदर खिंची चली जा रही थीं। वह आदमी लोगों की परछाइयां चुरा रहा था!

​जादुई पेन का आह्वान

​जैसे ही उस परछाई चोर की नज़र आर्यन पर पड़ी, उसने एक कुटिल मुस्कान दी। उसने आर्यन की परछाई को खींचने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया। आर्यन को महसूस हुआ कि उसके पैर भारी हो रहे हैं और उसकी ताकत कम हो रही है। (परछाई सिर्फ धूप का हिस्सा नहीं होती, वह इंसान की आत्मा की ऊर्जा भी होती है!)

​बिना वक्त गंवाए, आर्यन ने अपने बैग से वह जादुई सुनहरी पेन और अपनी स्केचबुक निकाली। घबराहट में उसके हाथ कांप रहे थे, लेकिन उसने अपनी पूरी एकाग्रता जुटाई और पन्ने पर जल्दी-जल्दी एक "चमकता हुआ सूरजमुखी का फूल" (Glowing Sunflower) बनाया।

​जैसे ही अंतिम रेखा पूरी हुई, डायरी से एक तीव्र, सुनहरी रोशनी निकली।

​जादू का नियम: रोशनी के सामने अंधेरा कभी टिक नहीं सकता।

​स्केचबुक से वह सूरजमुखी का फूल बाहर आया और हवा में तैरते हुए किसी मिनी-सूरज की तरह चमकने लगा। उसकी रोशनी इतनी तेज़ और पवित्र थी कि परछाई चोर चिल्ला उठा। तेज़ रोशनी पड़ते ही चोर का बोरा फट गया।

​आज़ादी और एक नया रहस्य

​बोरा फटते ही, कैद की गई सैकड़ों परछाइयां आज़ाद हो गईं और तैरती हुई अपने-अपने मालिकों के पास वापस लौट गईं। लोगों को पता भी नहीं चला कि उनके साथ क्या हुआ था, लेकिन वे अचानक खुद को तरोताजा महसूस करने लगे।

​रोशनी के प्रभाव से वह परछाई चोर धुएं में बदलने लगा। गायब होने से ठीक पहले, उसने आर्यन की तरफ देखा और फुसफुसाया:

​"तुमने सिर्फ एक मोहरे को हराया है, लड़के... 'काले साम्राज्य' को तुम्हारी इस सुनहरी पेन की तलाश सदियों से है। वे आ रहे हैं..."

​चोर गायब हो चुका था। पार्क में सिर्फ आर्यन और हवा में तैरता वह जादुई सूरजमुखी का फूल बचे थे। आर्यन ने फूल को हाथ में लिया, तो वह वापस एक सुनहरी स्याही की बूंद बनकर उसकी पेन में समा गया।

​आर्यन का दिल ज़ोर से धड़क रहा था। उसे समझ आ गया था कि यह पेन सिर्फ खुशियां बांटने के लिए नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ी मुसीबत और ज़िम्मेदारी की शुरुआत थी। 'काला साम्राज्य' क्या था? और वे इस पेन का क्या करना चाहते थे?

​कहानी जारी है...

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