Rebirth Of Emperor Yoddha - Chapter 13
The Emperor Yoddhaउसके सीने में तेज़ दर्द हुआ। एक चीख निकली, और वो पूरा उड़कर बाहर गिर गया।
इस अचानक दृश्य ने सबको हैरान कर दिया।
"बेकार! मेरे सामने चिल्लाने की हिम्मत कैसे की?" विवान ने तिरस्कार से कहा। उसकी ऊँची नज़रों ने विनायक के दिल को झकझोर दिया।
"कुत्ते के बच्चे, मैं तेरे हाथ-पैर तोड़ दूँगा और तुझे घुटनों पर भीख माँगने को मजबूर करूँगा!"
विनायक का चेहरा लाल हो गया। वो ये अपमान कैसे बर्दाश्त करता? वो दर्द से उछला, उसका शरीर काँप उठा। उसके शरीर में एक अजीब सी ताकत जागी, जैसे कोई रहस्यमयी साँस उठी हो।
"रक्त की शक्ति!"
"विनायक की मध्य लेवल की प्रतिभा सचमुच रक्त की शक्ति जगा सकती है?"
"यकीन नहीं होता!"
"विवान के लिए बुरा हुआ।"
विनायक का चेहरा क्रूर था। वो उछला और खतरनाक मुस्कान के साथ बोला, "हाँ, ये हमारे तनेजा परिवार की रक्त शक्ति है, 'बैल का टकराव'। मेरे लिए लेट जा!"
विनायक ने विवान के सिर पर मुक्का मारा। मुक्के पर हल्की लाल रोशनी थी, जिससे सबका दम घुट रहा था।
वो ज़ोरदार दबाव देखकर सबके रोंगटे खड़े हो गए।
"विवान !"
शनि और अंशुमान चिल्लाए। वो जल्दी से आगे बढ़ने वाले थे। भले ही वो विनायक का मुकाबला न कर सकें, फिर भी उलझ सकते थे। अगर विवान अकेले लड़ा, तो हड्डी टूटना छोटी बात थी, जान का सवाल था।
विवान विनायक के मुक्के का मुकाबला नहीं कर पा रहा था। वो लड़खड़ाया और अचानक अपना पैर उठाया।
"धम!"
सबने एक धीमी आवाज़ सुनी। फिर देखा कि विनायक का शरीर विवान के पैर से भूत की तरह टकराया। वो फिर से जाँघों के बीच में लगा। ये पक्का और सटीक था।
"आह!"
विनायक ने दोनों हाथों से अपनी जाँघें पकड़ लीं। उसका चेहरा दर्द से मुड़ गया। उसकी करुण चीख कानों को चीर रही थी। आँसू और नाक से पानी बह रहा था। उसका चेहरा उबले हुए सूअर के कलेजे जैसा लाल हो गया।
उसकी जाँघों से दिल दहला देने वाला दर्द उठ रहा था। उसे और डर इस बात का था कि मानो कुछ टूट गया हो।
"अरे, बुरा हुआ!"
वहाँ मौजूद सब लोग अजीब लग रहे थे, जैसे उन्हें कब्ज़ हो। उनकी जाँघों में ठंडक थी, और वो अनजाने में कुछ कदम पीछे हट गए। उन्होंने फटने की आवाज़ भी सुनी। ये बिल्कुल तबाह करने वाला था।
"साले, मैं..."
विनायक ने ठंडी साँसें लीं। उसकी आवाज़ काँप रही थी। उसका चेहरा उदास था, जैसे खून टपक रहा हो। उसने दर्द सहने की कोशिश की। वो पागल कुत्ते की तरह विवान पर झपटा। उसका दाहिना मुक्का ज़ोर से नीचे गिरा।
वो विवान को सबक सिखाने को तैयार नहीं था।
ये एक ज़ोरदार मुक्का था।
पहाड़ जितना ताकतवर, तूफान की तरह गरजता हुआ। इसकी ताकत पहले से भी ज़्यादा थी। सबके चेहरे बदल गए!
विनायक की ताकत को कम नहीं आँका जा सकता था।
"पछताना नहीं जानता।" विवान की आँखें ठंडी थीं। वो एक कदम आगे बढ़ा और अपना दाहिना पैर फिर से उठाया, विनायक की जाँघों की ओर।
विनायक का चेहरा बदल गया। उसने जल्दी से हवा में अपनी स्थिति बदली। लेकिन विवान का दाहिना पैर काँप रहा था, अनिश्चित था। वो उसके सारे चकमे को ढक रहा था। विनायक डर गया। चाहे वो कैसे भी बचता, सब बेकार था। वो नंगे मेमने की तरह था, जिसे काटा जाना था।
विनायक खुली आँखों से देख रहा था। विवान का दाहिना पैर फिर से उसकी जाँघों में ज़ोर से लगा। उस धीमी आवाज़ ने सबको काँपने पर मजबूर कर दिया।
"आउच, आउच..."
विनायक का चेहरा तुरंत सिकुड़ गया। उसकी आँखें फटने को थीं। वो ज़मीन पर लेटकर रोने लगा। उसकी आवाज़ इतनी दुखी थी कि सुनने वाले की आँखें नम हो जाएँ।
अब तो बेवकूफों को भी कुछ गलत लगा।
"क्या बात है? ये तो बहुत रहस्यमयी है!"
"विनायक तो मानव लेवल के मध्य चरण का मार्शल कलाकार है। उसने रक्त की शक्ति भी जगा ली। फिर वो विवान के पैरों से दो बार कैसे हार गया?"
"कमाल का पैर!"
सब दर्शक हैरान थे और अजीब नज़रों से बोल रहे थे।
"विवान , तू..."
शनि और अंशुमान भी हैरान और स्तब्ध थे।
"कुत्ते के बच्चे, रुक! मुझे मौका मत दे, वरना मैं तुझे अच्छा दिखाऊँगा।"
विनायक ज़मीन पर लोट रहा था। उसे राहत की साँस लेने में काफी वक्त लगा। उसने विवान को ज़हरीली नज़रों से देखा, जैसे उसे हज़ार टुकड़ों में काट देना चाहता हो।
विवान पहले ही जाने के लिए मुड़ चुका था। ये सुनकर वो अचानक पलटा। उसकी ठंडी आँखों ने विनायक को सिहरा दिया।
"अगर तूने मुझे फिर गाली दी, तो मैं तुझे मार डालूँगा!" विवान के शब्द सच्चे थे।
उसकी आवाज़ बर्फीली थी, जैसे नर्क से आ रही हो। विनायक गाली देना चाहता था, लेकिन विवान की आँखें देखने के बाद उसका शरीर काँप उठा। बाकी गालियाँ उसके मुँह में अटक गईं। उसका शरीर बेकाबू काँपने लगा।
विवान ने उसका मज़ाक उड़ाया, फिर अचानक पलटा और तेज़ कदमों से वहाँ से चला गया। पीछे छात्रों का एक समूह स्तब्ध रह गया।
विनायक , विवान की पीठ को देखते हुए, सपने में था।
"ये छोटा सा बदमाश!" विनायक ने गहरी साँस ली। उसकी आँखों में क्रूर भाव चमक रहा था।
आज क्या हो गया?
कुछ समय पहले ही युद्ध मंच पर उसने विवान को बुरी तरह पीटा था। उसे लगभग मार ही डाला था। फिर उसकी ताकत अचानक इतनी कैसे बढ़ गई।
विनायक को पिछली लड़ाई याद आई। वो अपने दिल की सिहरन को रोक नहीं पाया।
विवान के दोनों पैर भगवान के पैरों जैसे थे। अपने शानदार कौशल से उसने सब कुछ अपने कब्जे में कर लिया। वो मानव लेवल के शुरुआती योद्धा जैसा बिल्कुल नहीं था।
"बड़े भाई, बड़े भाई, आप ठीक हैं?"
विनायक के तीनों साथी एक-एक करके ज़मीन से उठे और डरते हुए बोले।
"तुमने कहा था कि मुझे कुछ काम है, लेकिन मुझे इलाज कक्ष तक पहुँचा दो। आह, मेरे बच्चे!" विनायक ने अपने टूटे अंगों को महसूस किया और फिर चीखा। उसकी आँखें ज़हरीली थीं, और दिल क्रूर। वो दहाड़ा, "विवान , रुक! विनायक को ये बदला लेना ही होगा।"
विनायक के चारों आदमियों से छुटकारा पाकर, विवान तेज़ी से प्रशिक्षण कक्ष की ओर चल पड़ा। शनि और अंशुमान भी जल्दी उसके पीछे हो लिए।
"विवान , तू ठीक है ना? ये तो कमाल हो गया!"
शनि और अंशुमान ने उत्साह से कहा। वो अभी भी विवान की ताकत की प्रक्रिया में डूबे थे।
"तुम दोनों ठीक हो?" विवान ने चिंता से उनकी ओर देखा।
"हम ठीक हैं। हाहा, इस बार तो मज़ा आ गया। मुझे लगता है विनायक अब हमारे पास आने की हिम्मत नहीं करेगा।" शनि उत्साहित थी।
अंशुमान उत्साह के बाद चिंतित हो गई, "विनायक तनेजा के परिवार का बेटा है। उसे इस तरह पीटा, कहीं कोई मुसीबत न हो जाए?"
"अरे, मुसीबत क्या?" शनि ने मज़ाक में कहा, "छात्रों के बीच लड़ाई तो आम बात है। जब तक कोई जान नहीं जाती, कॉलेज इसका ज़िम्मेदार नहीं होगा। तनेजा के पास कहने को कुछ नहीं है। पिछले बार विनायक ने विवान को युद्ध मंच पर लगभग मार ही डाला था। कॉलेज ने , तो उसका ध्यान नहीं रखा।"
अंशुमान के चेहरे पर चिंता थी, "तनेजा और कॉलेज की बात छोड़ो, मुझे विनायक के बड़े भाई की चिंता है।"
"वो?"
शनि का चेहरा भी गंभीर हो गया। विभास, विनायक से दो साल बड़ा है। वो कॉलेज के उन्नत वर्ग का छात्र है। मानव लेवल के आखिरी चरण का मास्टर है। प्रान्त लेवल में बस एक कदम दूर है। कॉलेज में वो बड़ा नाम है।
"वो ऐसा नहीं करेगा, ना?" शनि चिंतित थी।
विनायक अपने भाइयों से कहीं ज़्यादा खतरनाक है। कॉलेज के छात्र उससे डरते हैं।
विवान ने दोनों को चिंतित देखा। उसके दिल में गर्मजोशी आई। वो मुस्कुराया, "अगर विनायक ने कुछ करने की हिम्मत की, तो उसका बड़ा भाई भी आएगा, तो मैं उसे भी पीट दूँगा।"
शनि और अंशुमान ने ठंडी साँस ली। विवान को देखकर हैरान रह गए।
कुछ दिनों में विवान की ताकत और हिम्मत इतनी बदल गई थी। दोनों के दिल में उसके लिए सम्मान जाग उठा।
तीनों कुछ बातें करते हुए प्रशिक्षण टॉवर तक पहुँच गए।
ऊँचा प्रशिक्षण टॉवर आसमान छू रहा था।
विवान अंदर चला गया। अचानक लोगों की आवाज़ें गूँजने लगीं।
आर्याव्रत ट्रेनिंग कॉलेज मायालोक राज्य का पहला कॉलेज था। विनायक , शनि , अंशुमान और दूसरे शाही अधिकारियों के बच्चों के अलावा, देश भर से प्रतिभाशाली छात्र थे। आर्याव्रत ट्रेनिंग कॉलेज में दाखिल होना, बड़ा मौका था। मौका मिलते ही कई लोग प्रशिक्षण टॉवर में डूब जाते थे।
इसलिए, कॉलेज के प्रशिक्षण कक्ष हमेशा भरे रहते थे। कतार में लगना पड़ता था।
"अरे, ये तो विवान है, जिसे विनायक ने पिछले बार युद्ध मंच पर बेहोश कर दिया था? सुना था वो मर रहा था, पर कुछ दिनों में ठीक हो गया?"
"चुप रह, धीरे बोल। ये राजा यशवंत का भतीजा और राजा राजा धृतराष्ट्र का पोता है। सावधान रह, कहीं मुसीबत न हो जाए।"
"हम्म, मुझे नहीं लगता वो कुछ कर पाएगा। वो तो बस एक नाजायज़ औलाद है। सुना है वो सोलह साल का है, और उसने अभी तक खून नहीं जगाया। अगर वो जल्दी कॉलेज का टेस्ट पास नहीं करता, तो शायद खून की समस्या की वजह से आर्याव्रत ट्रेनिंग कॉलेज से निकाला जाने वाला पहला शख्स होगा।"
"अजीब बात है। भले ही खून कमज़ोर हो, कम से कम पहला लेवल तो जगा लेना चाहिए। ऐसा कम होता है कि खून बिल्कुल न जगे।"
सुना है वो नाजायज़ पैदा हुआ है। उसका खून पिछले पीढ़ी से मिला है। शायद उसका बाप घटिया था..."
भीड़ में कई लोग विवान को देखकर फुसफुसाने लगे।
विवान की खास पहचान और खून न जागने की बात ने उसे कॉलेज में मशहूर कर दिया था।
खासकर कुछ आम बच्चों के लिए, जो शुरू से ही बड़ों के बच्चों के खिलाफ थे, विवान गपशप का निशाना था।
"तुम क्या कह रहे हो?"