Viraj The God Of Cultivation World - Episode 4
Viraj The God Of Cultivation Worldनीलामी घर से निकलने के बाद विराज सिंह परिवार की ओर निकल गया या लेकिन उसने ध्यान दिया कि उसके पीछे कुछ लोग लगे हुए थे शायद उसका पीछा कर रहे थे विराज के चेहरे पर एक ठंडी मुस्कान आ गई और वह धीरे- धीरे आगे बढने लगा थोडी देर ऐसे ही चलने के बाद वह एक कलियारे में पहुंचा जो दोनों तरफ से सुनसान था था वहां पहुंचकर वह रुक गया और जोर से बोल कब तक तुम लोग ऐसे ही मेरा पीछा करते रहोगे बाहर आ जाओ इतना कहते ही कुछ लोग अंधेरे से बाहर निकाल ले और विराज को देखने लगे उसमें से एक काले कपडे वाले व्यक्ति ने कहा जो कि उनका लीडर लग रहा था क्या बात है बच्चे तुम तो काफी तेज निकले बिल्कुल सिंह परिवार के युवा मास्टर होने के लायक यह देखकर विराट ने मुस्कुराते हुए कहा वह तो तुम लोग कौन से परिवार से हो मुझे अंदाजा लगाने दो वर्मा शर्मा या धवल परिवार यह सुनकर कमांडर का चेहरा काला पड गया और उसने गुस्से से कहा तुम्हें इससे कोई लेना देना नहीं है तुमने जो नीलामी से सामान खरीदा है वह वापस करो हो सकता है हम थोडी दया करें और तुम्हें छोड दे यह सुनकर विराज हंसा और उसने कहा चलो देखते हैं कौन किसको मारता है यह सुनकर कमांडर जोर से हंसने लगा और बोला बहुत अच्छा बहुत अच्छा अब सब बर्बाद नहीं करें सभी हमला करो जैसे ही कमांडर ने कहा उसके पीछे वाले दस लोग विराज की और बडे लेकिन जैसे ही मेरी विरासत के पास पहुंचने वाले थे एक ठंडी चमक चांदी जैसी पहले और दस sir गली में पड गए चारों ओर खून बिखर गया यह देखकर कमांडर अक्का- बक्का रह गया और उसके पर कंपनी वालों उसने भी राज की ओर देखा जो मुस्कुरा रहा था उसकी मुस्कान देखकर कमांडर का दिल ढल गया उसने कहा तुम तुम कौन हो विराज ने कहा इससे क्या फर्क पडता है तुम वैसे भी करने वाले हो इतना कहकर विराज ने अपनी उंगलियों को जोडा और एक चांदी जैसी रोशनी निकली जिससे कमांडर का शरीर दो हिस्सों में cut गया इतना करने के बाद विराजमान से गायब हो गया जैसे कि वह वहां पर था ही नहीं विराज के जाने के बाद वहां पर बीस लोग ओर आए जैसे ही उन्होंने घडी का मंजर देखा वह सब ठीकठाक गए उनमें से एक ने कहा यह सब किसने किया यह लोग धवल परिवार से लग रहे हैं दोनों घुटने एक दूसरे की ओर देखा और वहां से निकल गए यह सोचकर कहीं उन पर इल्जाम ना लग जाए जाए शाम तक यह खबर चारों ओर फैल गई की दौड परिवार के दस लोगों को किसी ने मार डाला सिंह परिवार में नीलामी घर से लौट के बाद विराज ने अपनी साधना जारी रखें विराज आपको और गठन के शिखर पर था और वह गोल्डन कोलकाता में कदम रखते ही वाला था इसलिए वह लगातार साधना कर रहा था ताकि वह गोल्डन कोर की सीकर पर पहुंच सके और इस शहर से निकाल कर अपने पिता की तलाश में जा सके विराज को इस दुनिया के साधन के शिखर पर पहुंच कर सत्ताईस सवर्गों में वापस पहुंचाना था जब विराज इस बारे में सोच रहा था तभी महान बुजुर्ग अंदर आए और तिरस्कार से उसकी ओर देखते हुए कहा कल से प्रतियोगिता शुरू हो जाएगी और एक नया युवा स्वामी चुना जाएगा तुम्हें इतना सुनते ही विराज नहीं होने बीच में ही ठोक दिया और कहां मुझे इस छोटा परिवार की प्रतियोगिता में कोई दिलचस्पी नहीं है तुम्हें जो करना है करो मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है मैं बहुत जल्दी यह परिवार छोडकर जा रहा हूं यह सुनकर प्रथम बुजुर्ग हक्का- बक्का रह गया मैं कुछ बोल नहीं वाला था तभी विराज ने कहा यदि तुमने दोबारा एक साथ भी बोला तो मैं तुम्हें मार डालूंगा निकल जाओ यहां से इतना कह कर विराज ने एक ताकतवर घोडा छोडा उसकी ताकत महसूस कर कर बुजुर्ग कहां पर और उसने कहा कोर गठन का शिकार तुम कोर गठन के शिखर पर पहुंच गए यह सुनकर विराज ने उसकी और देखा और कहा जैसा कि मैंने कहा मुझे तुम्हारी परिवार की छोटी- मोटी प्रतियोगिताओं में कोई दिलचस्पी नहीं है तुम्हें जो करना है करो अब यहां से निकल जाओ इतना कह कर भी राज नहीं तलवार की रोशनी छोटी और बुजर के कांप उठा उसे रोशनी में एक मृत्यु की आभा महसूस हुई और वह जल्दी से पीछे हट गया विराज ने बुजुर्ग को नहीं मारा हालांकि उसे इन लोगों का बताओ पसंद नहीं था परंतु यह लोग उसके पिता के परिवार के थे इसलिए वह इन्हें कुछ नहीं करना चाहता था प्रथम बुजुर्ग को भगाने के बाद विराज ने फिर से साधना शुरू की ऐसे ही तीन महीने बीत गए विराज के कमरे में विराज के चारों ओर एक गहरी थी और नीली आभा फैली हुई थी एक धमाके के साथ विराज के शरीर से एक गहरी आभा निकली जिससे पूरा कल्याणपुर का आसमान काला पड गया गया और कल्याणपुर ही नहीं आसपास के सभी शहरों के ऊपर गाडी बादल छा गए कल्याणपुर से लगभग बीस हजार मिल के क्षेत्र में काले बादल छाए हुए थे चारों ओर बिजलियां गिर रही थी रही थी कल्याणपुर के ऊपर भी गहरी नीली बिजलियां बादलों में चल रही थी चारों ओर हवाएं तेज होने लगी नीचे कल्याणपुर में विराज के कमरे में विराज का शरीर और गहरी नीली आप छोडने लगा कल्याणपुर के चारों ओर भी गहरा अंधकार छाने लगा कल्याणपुर की है हरकत आसपास के नौ राज्यों में फैल चुकी थी सभी राज्यों में मुख्य नगरों के शाही परिवारों में कई बूढे राक्षसों ने अपनी आंखें खोली और कल्याणपुर की ओर देखने लगे कल्याणपुर के नजदीक सबसे ताकतवर संप्रदाय जिसे सर्वोच्च संप्रदाय कहा जाता था सर्वोच्च संप्रदाय की गहराइयों में पांच बुजुर्गों ने अचानक अपनी आंखें खोली इन पांच बुजुर्गों से गहरी आभा निकल रही थी यह पांचो बुजुर्ग अधृ राजा क्षेत्र में थे तभी एक और आवाज गंजी यह अब है अर्थ राजा क्षेत्र को पार कर चुकी थी की थी पांचो बुजुर्गों ने सम्मान की दृष्टि से उनकी और देखा का आवाज ने कहा एक महान प्रतिभा का जन्म हुआ है इसे हमारे संप्रदाय में भर्ती करो किसी भी कीमत पर जो ढूंढो इसे पाँच बुजुर्ग हैरान हो गए एक बुजुर्ग ने कहा पूर्वज क्या हमें शिष्यों को भेजना चाहिए पूर्वज ने कहा नहीं तुम सब शिवम जाओ इसे किसी भी हालत में ढूंढो ऐसी हरकत पैदा करने वाला बच्चा कोई खास शारीरिक संरचना वाला होना चाहिए ऐसी ही एक घटना आसपास के कई संप्रदायों में हुई कल्याणपुर से दूर राज्य में स्थित है एक और संप्रदाय में जिसे अमर तलवार संप्रदाय कहा जाता था उसमें गहराइयों में दस बुजुर्गों ने अचानक आंखें खोली और कल्याणपुर की ओर गहराई से देखा एक यह दस के दस बुजुर्ग अर्ध राजा क्षेत्र में थे थे और वे सभी पूर्वजों की गहराइयों के कमरों में देख रहे थे अंदर से एक आवाज ऊंची सभी बुजुर्ग समझाएं और इस नए शिष्य को ढूंढने कुछ भी हो जाए यह हमारे अमर तलवार संप्रदाय में भर्ती होना चाहिए ऐसे ही करते- करते नौ राज्यों में यही घटना हुई वापस कल्याणपुर में आते हुए विराज ने अपनी आंखें खोली और अपने शरीर की आदत को जाचने लगा मुझे विश्वास नहीं हो रहा मैं एक अमर सम्राट होते हुए भी अपने शरीर की छुपी हुई संरचना को नहीं ढूंढ पाया ऐसा लगता है कि किसी बहुत ही ताकतवर व्यक्ति ने इसे एक बंधन से छुपाया था जिसे मैं स्वयं भी ना देख पाऊं लगता है जन्म में बहुत सी चीज हैं जो मुझे मेरे बारे में नहीं पता मेरे शरीर की संरचना यदि मुझे इसके बारे में पता होता तो मैं कुछ बंधन बनाकर इसे स्वर्गीय दांव से छुपा देता यह संरचना नौ स्वर्ग में प्रथम हमिंग दिव्य अमर शरीर है नौ अमर स्वर्ग में सबसे महत्वपूर्ण रचना जो लाखों सालों में देखी गई है और यह मेरे पास है यह सोचकर विराज के चेहरे पर एक मुस्कान बन गई मेरी यह शारीरिक संरचना की जागरूकता न कई लोगों का ध्यान खींचा है लगता है मुझे जल्दी से जल्दी पूर्वी महाद्वीप को छोडना होगा वैसे भी यह एक बंजारा जगह है और मुझे लगता है कि इस घटना ने कई ताकतवर लोगों का ज्ञान की इच्छा होगा इस बारे में विराज बिल्कुल भी गलत नहीं था पूर्वी महाद्वीप भी नहीं बल्कि दक्षिणी उत्तरी मध्य महादेव और अन्य जगहों पर भी सभी ने इस घटना की ओर ध्यान दिया था और कई ताकतवर लोगों को भेजा था अब विराज लगता है मैं गोल्डन कोर के शिकार तक पहुंचने का इंतजार नहीं कर सकता मुझे आज ही निकालना चाहिए वैसे भी मैं आप गोल्डन कर के प्रथम क्षेत्र में हूं और यात्रा के बीच में भी मैं सफर के जारी अपनी साधना को बढा सकता हूं नीलामी घर से प्राप्त नक्शे को देखते हुए विराज ने सोचा इस नशे के अनुसार दक्षिणी महादेव की ओर एक प्राचीन चित्रकला है जिसे अमरावती शहर में होना चाहिए तो मुझे पहले दक्षिण की ओर निकालना चाहिए यह सोचकर फिर आज अपने कमरे से गायब हो गया सिंह परिवार में विराज हमेशा अकेला ही रहता था और नहीं उसकी कोई दोस्त थे वह हमेशा अलग स्थल रंग रहता था वह केवल अपने पिता से ही बातें करता था जिस कारण से उसकी परिवार में बाकी लोगों से कोई खास बंधन नहीं था क्योंकि फिर उसके खून के रिश्तेदार नहीं थे किसी कारण से विराज को अपने मुख्य परिवार से अलग करके इस शाखा परिवार में भेजा गया था जहां पर वह अपने पिता के साथ कुछ वर्ष रहा था यह सब का परिवार भी विराज के परिवार का ही हिस्सा था परंतु इस शाखा परिवार को यह नहीं पता था कि सिंह परिवार एक महान शक्ति है जो की मध्य महादेव की दस महान शक्तियों में से एक है एक है ऐसा इसलिए क्योंकि मुख्य परिवार इसी शहर से मध्य महाद्वीप में गया था विराज ने उसके पिता से सुना था यदि तुम कभी साधना शुरू करो और उच्च क्षेत्र में पहुंचे तभी तुम परिवार में वहां पर जाना वहां के सभी लोग तुमसे बहुत प्यार करते हैं लेकिन कुछ लोग है जो तुम्हें मारना चाहते हैं और वह सब तुम्हारी रक्षा नहीं कर सकते यह याद करते हुए भी राज नहीं सोचा लगता है मुझे पहले मध्य महादेव जाने की नहीं सोचनी चाहिए बल्कि मुझे चारों महाद्वीपों की यात्रा करनी चाहिए और अपनी ताकत को बढाना चाहिए पहले दक्षिण महादेव जाकर मैं अमरावती क्षेत्र में प्रयास करूंगा यह सोचकर विराज दक्षिण की ओर निकल गया