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Chapter 10

आलसी योद्धा - Episode 10

आलसी योद्धा

"आकाश का पतन"

पूरा आकाश अचानक नीचे दब गया।

धड़ाऽऽऽऽम!

ऐसा लगा मानो स्वयं स्वर्ग किसी अदृश्य हाथ से धरती की ओर धकेला जा रहा हो।

हजारों ब्रह्मांडीय द्वार काँप उठे।

उनके भीतर खड़ी दानव सेनाओं के चेहरों पर पहली बार भय दिखाई दिया।

शून्य सम्राट की विशाल आँखें सिकुड़ गईं।

“यह... असंभव है।”

अथर्व अभी भी अपने सिंहासन पर आधा लेटा हुआ था।

उसने कोई मुद्रा नहीं बनाई।

कोई मंत्र नहीं बोला।

कोई दिव्य अस्त्र नहीं निकाला।

बस उँगली से हवा में एक छोटा सा चक्र बनाया।

और मुस्कराया।

“झुको।”

एक शब्द।

सिर्फ एक शब्द।

लेकिन उस शब्द के साथ—

पूरा आकाश गर्जना करने लगा।

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【सर्वोच्च कौशल सक्रिय】

"आलस्य का सार्वभौमिक आदेश"

प्रभाव:

जिसके भीतर इच्छा होगी, वह झुक जाएगा।

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धड़ाम! धड़ाम! धड़ाम!

लाखों दानव घुटनों पर गिर पड़े।

सैकड़ों दानव राजा धरती से चिपक गए।

यहाँ तक कि ब्रह्मांडीय द्वार भी नीचे झुकने लगे।

नगर के लोग स्तब्ध रह गए।

“उसने... पूरी सेना को एक शब्द से रोक दिया!”

क्यू खुशी से उछल पड़ा।

“यही है मेरे मालिक की असली शक्ति!”

लेकिन तभी—

शून्य सम्राट हँसा।

पहले धीरे।

फिर जोर से।

“हाहाहा!”

“अच्छा है... बहुत अच्छा है...”

“अब मुझे यकीन हो गया।”

अथर्व ने भौंह उठाई।

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“किस बात का?”

शून्य सम्राट की तीसरी आँख भयानक प्रकाश से चमक उठी।

“कि तुम वास्तव में वही हो...”

“आलसी सम्राट का पुनर्जन्म!”

पूरा संसार शांत हो गया।

हवा रुक गई।

समय मानो ठहर गया।

अथर्व पहली बार गंभीर दिखाई दिया।

“पुनर्जन्म?”

शून्य सम्राट बोला—

“दस लाख वर्ष पहले... तुमने सम्पूर्ण शून्य लोक को नींद में डुबो दिया था।”

“तुम्हारे कारण देवता सो गए।”

“राक्षस सो गए।”

“यहाँ तक कि समय भी सो गया।”

नगर के लोगों की आँखें फैल गईं।

क्यू काँप उठा।

“तो... मालिक सचमुच कोई प्राचीन सम्राट हैं?”

अथर्व ने सिर खुजलाया।

“मुझे तो कुछ याद नहीं।”

अचानक—

उसके मस्तिष्क में तेज दर्द उठा।

धाऽऽऽम!

टूटे हुए दृश्य उसकी आँखों के सामने चमकने लगे।

एक सुनहरा सिंहासन।

अनगिनत ब्रह्मांड।

और उसके सामने घुटनों पर झुके असंख्य देवता।

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【स्मृति मुहर कमजोर हुई】

जागृत स्मृति: 1%

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अथर्व का चेहरा पहली बार बदल गया।

“ये दृश्य...”

लेकिन इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता—

शून्य सम्राट ने दोनों हाथ फैला दिए।

उसके पीछे के हजारों द्वार एक साथ फट गए।

धड़ाऽऽऽम!

उनसे अनगिनत काली ऊर्जा निकलने लगी।

पूरा आकाश अंधकार से भर गया।

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【निषिद्ध कला】

"अनंत शून्य सेना"

स्थिति: पूर्ण सक्रिय

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इस बार केवल लाखों नहीं—

अरबों दानव प्रकट होने लगे।

नगर के लोगों के चेहरों पर निराशा छा गई।

“ये... ये तो अंत है...”

क्यू तक डर गया।

“मालिक... ये संख्या बहुत ज्यादा है।”

लेकिन अथर्व ने केवल एक लंबी जम्हाई ली।

फिर सिस्टम स्क्रीन खोली।

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【आलस्य पॉइंट स्टोर】

उपलब्ध पॉइंट:

999,999

विशेष वस्तु उपलब्ध:

"परम विश्राम घंटी"

मूल्य:

500,000 पॉइंट

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अथर्व की आँखें चमक उठीं।

“ओह?”

“ये दिलचस्प लग रहा है।”

उसने बिना सोचे खरीद बटन दबा दिया।

डिंग!

एक छोटी सुनहरी घंटी उसके हाथ में प्रकट हुई।

घंटी देखने में साधारण थी।

लेकिन जैसे ही वह प्रकट हुई—

शून्य सम्राट का चेहरा बदल गया।

पहली बार...

उसकी आँखों में भय दिखाई दिया।

“नहीं...!”

“वो वस्तु यहाँ कैसे हो सकती है?!”

क्यू हक्का-बक्का रह गया।

“मालिक, ये घंटी क्या करती है?”

अथर्व ने घंटी को उलट-पलट कर देखा।

फिर आलस से बोला—

“पता नहीं।”

“चलो बजाकर देखते हैं।”

और अगले ही पल—

उसने घंटी हिला दी।

टन...

एक हल्की सी ध्वनि पूरे ब्रह्मांड में फैल गई।

और उसी क्षण—

कुछ ऐसा हुआ जिसने स्वयं शून्य सम्राट को भी भयभीत कर दिया।

जारी रहेगा...

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