MiniFM
Previous
Next
Chapter 12

आलसी योद्धा - Episode 12

आलसी योद्धा

"सम्राट का आदेश

【सर्वोच्च घोषणा】

"अनंत निद्रा सम्राट लौट आया है।"

━━━━━━━━━━━━━━━

घोषणा की गूँज पूरे ब्रह्मांड में फैल गई।

अनगिनत लोकों में छिपे प्राचीन देवता काँप उठे।

बंद पड़े मंदिर स्वयं खुल गए।

सदियों से बुझी हुई दिव्य ज्योतियाँ फिर जल उठीं।

और युद्धभूमि के बीच—

शून्य सम्राट के चेहरे पर पहली बार पूर्ण भय दिखाई दिया।

“नहीं...!”

“यह नहीं हो सकता!”

“तुम्हारी शक्ति तो मैंने स्वयं सील कर दी थी!”

अथर्व स्वर्ण सिंहासन पर आराम से बैठा था।

एक हाथ गाल पर टिका हुआ।

दूसरे हाथ में वही सुनहरी घंटी।

उसने आलस से कहा—

“हाँ, कुछ ऐसा ही था।”

“लेकिन सच कहूँ... मुझे ठीक से याद नहीं।”

क्यू का मुँह खुला का खुला रह गया।

“मालिक!”

“इतनी बड़ी बात भूल गए?!”

अथर्व ने कंधे उचकाए।

“मैं बहुत सोता हूँ।”

धड़ाम!

क्यू सीधे जमीन पर गिर पड़ा।

━━━━━━━━━━━━━━━

इस बीच—

शून्य सम्राट ने अचानक दोनों हाथ आकाश की ओर उठा दिए।

उसकी तीसरी आँख से काली और नीली ऊर्जा निकलने लगी।

पूरे ब्रह्मांड में मौजूद शून्य ऊर्जा उसकी ओर उमड़ने लगी।

समुद्र काले पड़ गए।

तारे बुझने लगे।

आकाश फटने लगा।

━━━━━━━━━━━━━━━

【निषिद्ध बलिदान】

"अंतिम शून्य अवतार"

सक्रिय...

━━━━━━━━━━━━━━━

50%

70%

90%

━━━━━━━━━━━━━━━

शून्य सम्राट का शरीर बढ़ने लगा।

पहाड़ उसके घुटनों तक भी नहीं पहुँच रहे थे।

उसकी साँस से तूफान पैदा हो रहे थे।

उसकी धड़कनों से पृथ्वी काँप रही थी।

नगर के लोग निराशा से भर गए।

Advertisement

“ये शक्ति...”

“इससे कोई नहीं जीत सकता...”

लेकिन अथर्व ने केवल एक जम्हाई ली।

“उफ्फ... फिर वही नाटक।”

फिर उसने सिंहासन के बाजू पर हाथ मारा।

टक!

एक छोटा सा सुनहरा बटन बाहर निकल आया।

क्यू ने आँखें फाड़ दीं।

“मालिक... ये क्या है?”

“पता नहीं।”

“दबाकर देखते हैं।”

“मालिक मत—!”

क्लिक!

अथर्व ने बटन दबा दिया।

━━━━━━━━━━━━━━━

【गुप्त सुविधा सक्रिय】

"सम्राटीय सहायक प्रणाली"

━━━━━━━━━━━━━━━

अचानक—

सुनहरे प्रकाश का विस्फोट हुआ।

और उसके सामने एक लड़की प्रकट हुई।

सुनहरे बाल।

लाल आँखें।

शाही पोशाक।

चेहरे पर हल्की नाराज़गी।

उसने आते ही अथर्व को घूरा।

“आखिरकार याद आया मुझे बुलाना?”

अथर्व चौंक गया।

“तुम कौन?”

लड़की की आँख फड़क गई।

“मैं कौन?!”

“मैं आपकी सम्राटीय सहायक हूँ!”

“दस लाख वर्षों से आपकी प्रतीक्षा कर रही हूँ!”

क्यू हक्का-बक्का रह गया।

“एक और सहायक?!”

लड़की ने क्यू की ओर देखा।

“और ये फर वाला जीव कौन है?”

“मैं महान क्यू हूँ!”

“अच्छा... पालतू हो।”

“क्या?!”

दोनों तुरंत झगड़ने लगे।

━━━━━━━━━━━━━━━

उधर—

शून्य सम्राट का अंतिम रूप लगभग पूरा हो चुका था।

लेकिन पहली बार—

उसके चेहरे पर घबराहट दिखाई दी।

क्योंकि वह लड़की उसे पहचानती थी।

और उसकी आँखों में डर नहीं था।

लड़की ने शून्य सम्राट को देखकर आह भरी।

Advertisement

“अरे... ये अभी तक जिंदा है?”

पूरा संसार स्तब्ध।

“अभी तक... जिंदा है?”

जिस अस्तित्व से सभी काँप रहे थे—

उसे उसने ऐसे कहा जैसे कोई पुराना कीड़ा हो।

शून्य सम्राट गरजा—

“चुप रहो!”

“मैं अब पहले जैसा नहीं हूँ!”

लड़की मुस्कराई।

“और सम्राट भी पहले जैसे नहीं हैं।”

“अब वो और भी खतरनाक हैं।”

अथर्व ने भौंह उठाई।

“मैं?”

“हाँ।”

“पहले आप मेहनत करके जीतते थे।”

“अब आप आलस से जीतते हैं।”

“और यह ज्यादा डरावना है।”

क्यू ने गंभीरता से सिर हिलाया।

“सही बात है।”

अथर्व कुछ पल चुप रहा।

फिर बोला—

“ये तारीफ थी या अपमान?”

तभी—

लड़की अचानक गंभीर हो गई।

उसने आकाश की ओर देखा।

फिर धीमी आवाज में कहा—

“सम्राट... समस्या आ गई है।”

अथर्व ने जम्हाई लेते हुए पूछा—

“अब क्या हुआ?”

लड़की की आँखें सिकुड़ गईं।

“शून्य सम्राट अकेला नहीं है।”

पूरा वातावरण ठंडा पड़ गया।

“क्या मतलब?”

लड़की ने काँपते आकाश की ओर इशारा किया।

आकाशीय दरार के भीतर—

धीरे-धीरे चार नई आँखें खुल रही थीं।

हर आँख शून्य सम्राट से भी अधिक भयावह आभा छोड़ रही थी।

━━━━━━━━━━━━━━━

【चेतावनी】

"चार प्राचीन शून्य सम्राट जाग रहे हैं"

स्थिति:

अत्यंत संकट

━━━━━━━━━━━━━━━

इस बार—

अथर्व भी कुछ सेकंड के लिए चुप हो गया।

फिर उसने लंबी साँस ली।

“उफ्फ...”

“आज तो सच में आराम नहीं मिलेगा।”

और आकाशीय दरार के भीतर से—

एक रहस्यमयी हँसी गूँज उठी।

जारी रहेगा...

Was this chapter good?