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Chapter 11

आलसी योद्धा - Episode 11

आलसी योद्धा

"परम विश्राम घंटी"

टन...

घंटी की ध्वनि बहुत हल्की थी।

इतनी हल्की कि नगर के कई लोगों को लगा जैसे उन्होंने कुछ सुना ही नहीं।

लेकिन अगले ही क्षण—

पूरा ब्रह्मांड काँप उठा।

धड़ाऽऽऽऽम!

हजारों तारामंडल एक साथ चमकने लगे।

अनगिनत लोकों में सोई हुई प्राचीन शक्तियाँ जाग उठीं।

और शून्य सम्राट का चेहरा भय से विकृत हो गया।

“असंभव!”

“परम विश्राम घंटी नष्ट हो चुकी थी!”

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【परम विश्राम घंटी सक्रिय】

विशेष प्रभाव:

सभी शत्रुओं की लड़ने की इच्छा समाप्त।

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एक पल बाद—

अजीब दृश्य सामने आया।

जो दानव सेना अभी युद्ध के लिए गरज रही थी...

वही सेना अचानक जम्हाई लेने लगी।

“आऽऽह...”

“मुझे नींद आ रही है...”

“युद्ध बाद में कर लेंगे...”

धड़ाम!

धड़ाम!

धड़ाम!

अरबों दानव एक-एक करके गिरने लगे।

कुछ ही सेकंड में—

पूरा आकाश खर्राटों की आवाज से भर गया।

घ्र्र्र्र...

घ्र्र्र्र...

नगर के लोग मुँह खोले खड़े रह गए।

“उसने... पूरी सेना सुला दी?”

क्यू गर्व से सीना फुलाकर बोला—

“यही तो मेरे मालिक हैं!”

अथर्व ने स्वयं भी जम्हाई ली।

“अच्छी वस्तु है।”

“पैसे वसूल।”

शून्य सम्राट क्रोध से काँप उठा।

उसकी तीसरी आँख से नीली ज्वालाएँ निकलने लगीं।

“बस!”

“मैं स्वयं तुम्हारा अंत करूँगा!”

धाऽऽऽम!

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उसका विशाल शरीर दरार से बाहर निकलने लगा।

पहले सिर।

फिर कंधे।

फिर पूरा धड़।

जैसे-जैसे वह बाहर आया—

आकाश टूटने लगा।

धरती में दरारें पड़ने लगीं।

समुद्र उफनने लगे।

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【पूर्ण अवतरण प्रगति】

10%

20%

35%

50%

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क्यू का चेहरा सफेद पड़ गया।

“मालिक!”

“उसे बाहर आने से रोकिए!”

“अगर वो पूरी तरह उतर आया तो पूरा संसार नष्ट हो जाएगा!”

अथर्व ने ऊपर देखा।

फिर धीरे-धीरे उठकर खड़ा हो गया।

इस बार—

उसके चेहरे पर आलसी मुस्कान नहीं थी।

पूरा वातावरण अचानक भारी हो गया।

नगर के लोग काँप उठे।

क्योंकि पहली बार—

अथर्व से ऐसी आभा निकल रही थी जो किसी साधारण इंसान की नहीं थी।

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【प्राचीन स्मृति जागृत】

स्मृति स्तर: 5%

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उसकी आँखों में सुनहरे ब्रह्मांड घूमने लगे।

और अचानक—

एक नाम उसके मन में उभरा।

"अनंत निद्रा सम्राट"

अथर्व कुछ पल चुप रहा।

फिर माथा पकड़ लिया।

“ओह...”

“अब कुछ-कुछ याद आ रहा है।”

शून्य सम्राट रुक गया।

उसकी आँखों में भय झलकने लगा।

“नहीं...”

“तुम्हारी स्मृतियाँ वापस नहीं आनी चाहिए थीं!”

अथर्व ने उसकी ओर देखा।

उसकी आवाज पहले से बिल्कुल अलग थी।

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शांत।

गहरी।

और अत्यंत प्राचीन।

“दस लाख वर्ष पहले...”

“मैंने तुम्हें सील किया था।”

पूरा संसार स्तब्ध रह गया।

शून्य सम्राट एक कदम पीछे हट गया।

“चुप रहो!”

“तुम अब वो नहीं रहे!”

अथर्व मुस्कराया।

“शायद।”

“लेकिन तुम्हारी किस्मत आज भी उतनी ही खराब है।”

इतना कहकर उसने दाहिना हाथ आगे बढ़ाया।

और उसी क्षण—

उसके पीछे का सुनहरा द्वार पूरी तरह खुल गया।

धाऽऽऽऽम!

द्वार के भीतर से अनंत प्रकाश निकला।

उस प्रकाश में हजारों दिव्य सिंहासन दिखाई दे रहे थे।

और सबसे ऊपर—

एक खाली स्वर्ण सिंहासन।

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【सम्राट सिंहासन प्रकट】

स्थिति:

सीलबंद शक्ति का केंद्र

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जैसे ही वह सिंहासन दिखाई दिया—

देवताओं की आत्माएँ झुक गईं।

प्राचीन ड्रैगन घुटनों पर आ गए।

यहाँ तक कि समय का प्रवाह भी धीमा पड़ गया।

शून्य सम्राट की आवाज काँप उठी।

“वो सिंहासन...”

“वो वास्तव में वापस आ गया...”

अथर्व ने गहरी साँस ली।

फिर आलस से कहा—

“इतना खड़े रहने से थक गया हूँ।”

“चलो... इसे खत्म करते हैं।”

और अगले ही पल—

वह सीधे उस स्वर्ण सिंहासन पर बैठ गया।

जैसे ही वह बैठा—

पूरे ब्रह्मांड में एक प्राचीन घोषणा गूँज उठी।

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【सर्वोच्च घोषणा】

"अनंत निद्रा सम्राट लौट आया है।"

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और उसी क्षण—

शून्य सम्राट के चेहरे पर पहली बार पूर्ण आतंक दिखाई दिया।

जारी रहेगा...

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