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Chapter 10

The Mysterious Locket ✅ - Episode 10

The Mysterious Locket ✅

रुद्रांश ने फिर तलवार चलाई।एक चमक हुई—और उसका दूसरा हाथ भी कटकर गिर गया।

चारों ओर खून फैल गया।अमृता लगातार दर्द से तड़पने लगी।उसकी आँखें गुस्से, अपमान और दर्द से लाल हो गईं।

“रुको, रुद्रांश ! तू ऐसा करने की हिम्मत कैसे कर सकता है!”

आर्यजीत घबराकर चिल्लाया।लेकिन रुद्रांश ने ठंडी हँसी हँसी।

उसने तलवार चलाई—तलवार साँप की तरह तेजी से आगे बढ़ी।

पुफ्फ!

एक हल्की आवाज़ हुई—और आर्यजीत का सागर सीधे फट गया।

उसके अंदर जमा सारी ऊर्जा एक गुब्बारे की तरह बाहर निकल गई।वह दर्द से कराह उठा।

उसका चेहरा बहुत बदसूरत हो गया।

वह चिल्लाया—“तूने मुझे अपंग बना दिया?”

रुद्रांश मुस्कराया—“तुझे अपंग बनाया?”

“तुझे मार नहीं रहा, यही तेरे लिए बहुत बड़ी दया है।”

“अगर मेरी बुआ का ख्याल न होता,तो अब तक पूरा कुशवाहा परिवार खत्म हो चुका होता।”

फिर उसने ठंडे स्वर में कहा—“अमृता ने मेरा ऊर्जा केंद्र तोड़ दिया था।”

“और तू, आर्यजीत — तूने सब कुछ देखते हुए भी कुछ नहीं किया।”

“तूने मेरा शक्ति एसेन्स ब्लड अपनी नौकरानी की बेटी को दे दिया।”

“याद रखना— अमायरा का अंजाम भी तुझसे बेहतर नहीं होगा।”

दोनों हाथ कट जाने के बाद भी अमृता गुस्से से चिल्लाई—“रुद्रांश , दुष्ट!”

“तूने मेरे साथ ऐसा करने की हिम्मत कैसे की?”

“प्रताप परिवार तुझे जरूर मार डालेगा!“और अमायरा मेरा बदला जरूर लेगी!”

तभी—

स्विश!

रुद्रांश की तलवार बिजली की तरह आगे बढ़ी।

उसने सीधे अमृता के माथे के बीच वार किया।

उसकी आँखें अविश्वास से फैल गईं।उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि रुद्रांश सच में उसे मार देगा।

कुछ ही क्षणों में—उसकी आँखों से आँसू और पछतावा निकलने लगा।

उसे नहीं पता था—उसे अपने किए पर पछतावा था…

या इस बात का कि उसने शुरुआत में ही रुद्रांश को खत्म नहीं किया।

“त… तुम… तुम…”

अमृता के मर जाने के बाद आर्यजीत का चेहरा बहुत डरावना और उदास हो गया था। उसकी आँखों में गुस्सा भरा हुआ था, लेकिन उससे भी ज्यादा उसके अंदर पछतावा और अफसोस था।

उसे सच में उस दिन लिए गए अपने फैसले पर पछतावा हो रहा था।

असल में, उसे पहले से पता था कि अमृता ने रुद्रांश का ऊर्जा केंद्र नष्ट कर दिया था।

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लेकिन उसने यह सोचकर कुछ नहीं किया कि रुद्रांश उसकी बेटी अमायरा के लायक नहीं है।

इसी वजह से उसने अमृता को रुद्रांश पर चोरी-छिपे हमला करने की छूट दे दी थी।

उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि—जिस रुद्रांश का ऊर्जा केंद्र नष्ट हो चुका था, वह अचानक इतना बदल जाएगा, और प्रताप परिवार के बैटल गार्ड तक को मार डालेगा।

अब उसकी ताकत मूवमेंट रियल्म तक पहुँच चुकी थी।

आर्यजीत ने गुस्से से कहा—“रुद्रांश , तुमने जो किया है… क्या तुम्हें प्रताप परिवार और शक्ति अकादमी से डर नहीं लगता?”

“आज तुम्हें थोड़ी देर के लिए संतोष मिल सकता है,

लेकिन बाद में तुम्हें इसका पछतावा जरूर होगा।”

रुद्रांश का चेहरा बिल्कुल शांत था।उसके होंठों पर हल्की मुस्कान थी।

उसने बस एक शब्द कहा—“ओह।

यह छोटा-सा जवाब सुनकर आर्यजीत का चेहरा और भी काला पड़ गया।

बाकी बचे कुशवाहा परिवार के लोगों के चेहरे भी गुस्से और डर से भर गए।

तभी एक बुजुर्ग गुस्से से चिल्लाया—“रुद्रांश , तुम…”

लेकिन वह अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि—

पुफ्फ!

रुद्रांश ने तलवार घुमाई।एक ही वार में उस बुजुर्ग का सिर तरबूज की तरह फट गया।

चारों ओर खून फैल गया।रुद्रांश ने ठंडे स्वर में कहा— “मैं कुशवाहा परिवार के किसी भी व्यक्ति की बात नहीं सुनना चाहता।”

“तुम लोगों से मुझे घिन आती है।”फिर उसने अपनी तेज़ नजरों से आर्यजीत को देखा और कहा—“मैंने तुम्हें इसलिए नहीं मारा, क्योंकि पिछले बारह सालों में तुमने मेरे साथ कुछ हद तक ठीक व्यवहार किया था।”

“लेकिन तुम्हें अपंग बनाना जरूरी था।”

“अगर मेरी बुआ न होती,तो अब तक तुम्हारी कब्र पर घास उग चुकी होती।”

“मैंने तुम्हारा ऊर्जा केंद्र तोड़कर अपनी बुआ की तरफ से बदला लिया है।”

“यह सब तुम्हारे अपने कर्मों का फल है!!!यह कहकर रुद्रांश मुड़ा और कुशवाहा परिवार से बाहर निकल गया।

आर्यजीत का चेहरा पूरी तरह उदास हो चुका था।

अब उसके दिल में अंतहीन पछतावा था।उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।क्या यही वह परिणाम था जो वह चाहता था?

कुशवाहा परिवार के कई बुजुर्ग मर चुके थे। अमृता भी मर चुकी थी। वह खुद अपंग हो चुका था।

अब कुशवाहा परिवार लगभग खत्म हो चुका था।

तभी—सूर्यप्रताप ठंडी हँसी के साथ बोला—“हाहाहा!”

“कुशवाहा परिवार के मुखिया, अभी तो तुम बहुत ताकतवर बन रहे थे।”

“आज के बाद तुम्हारे कुशवाहा परिवार की सारी संपत्ति हमें बिना शर्त दे देनी चाहिए।

“वरना, तुम्हारे परिवार का जो भी सदस्य बाहर निकलेगा— हम उसे मार देंगे!”

यह सुनकर आर्यजीत का चेहरा और भी गंभीर हो गया।

तभी मनीष ने ठंडे स्वर में कहा—“रुद्रांश जैसा प्रतिभाशाली युवक था,

और कुशवाहा परिवार ने उसके साथ विश्वासघात किया।”

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“अब जो हो रहा है, वह तुम्हारे कर्मों का फल है।”

इतना कहकर वह अपने लोगों के साथ वहाँ से चला गया।

कुछ ही देर में—कुशवाहा परिवार का पूरा माहौल उजाड़ और सुनसान हो गया।

हर व्यक्ति के चेहरे पर डर और उदासी थी।कुशवाहा परिवार की नई पीढ़ी के लोग गुस्से और असंतोष से बोल उठे—“यह रुद्रांश इतना ताकतवर कैसे हो गया?”

“उसकी किस्मत अचानक कैसे बदल गई?”

उधर—जब रुद्रांश सन सिटी छोड़ने ही वाला था, तभी पीछे से एक भारी आवाज़ आई—“युवा मित्र , जरा रुकिए!”

रुद्रांश ने पीछे मुड़कर देखा। वह सिटी लॉर्ड सूर्यप्रताप ही था।

रुद्रांश ने आँखें सिकोड़कर कहा—“कुशवाहा परिवार को मैंने खत्म किया है।”

“क्या सिटी लॉर्ड सूर्यप्रताप उन्हें न्याय दिलाने आए हैं?”

उसकी आँखों में हल्की हत्या की भावना चमक रही थी।

यह देखकर सूर्यप्रताप घबरा गया।उसने तुरंत सिर हिलाया और हाथ हिलाते हुए कहा—“मैं ऐसा करने की हिम्मत कैसे कर सकता हूँ?”

“तुम इतने शक्तिशाली हो,अगर मेरा पूरा सिटी लॉर्ड महल भी तुम पर हमला करे—तो शायद हम सब अपनी जान ही गँवा देंगे।”

रुद्रांश ने भौंहें सिकोड़कर पूछा—“तो फिर आप यहाँ किसलिए आए हैं?”

सूर्यप्रताप कुछ देर चुप रहा।फिर उसने अपने कपड़ों से एक पत्र निकाला।रुद्रांश ने वह पत्र लिया और हैरान होकर पूछा—“यह क्या है?”

सूर्यप्रताप बोला—

“यह संप्रदाय का सिफारिश पत्र है।”

यह सुनते ही रुद्रांश की आँखें सिकुड़ गईं।“आप मुझे स्वर्ण संप्रदाय का सिफारिश पत्र दे रहे हैं?”

सूर्यप्रताप ने सिर हिलाया और कहा—“मैंने सुना है कि आर्यजीत की बेटी अमायरा शक्ति अकादमी में शामिल हो गई है।”

“अगर तुम उससे मुकाबला करना चाहते हो,तो तुम्हें भी किसी बड़े संगठन में शामिल होना पड़ेगा।”

“वरना तुम हमेशा कमजोर स्थिति में रहोगे।“हालाँकि स्वर्ण संप्रदाय शक्ति अकादमी जितना बड़ा नहीं है, लेकिन फिर भी वह एक बहुत शक्तिशाली संगठन है।”

“मेरी जानकारी के अनुसार—बीस दिन बाद स्वर्ण संप्रदाय नए लोगों की भर्ती शुरू करेगा।”

“तुम इस सिफारिश पत्र को लेकर वहाँ परीक्षा दे सकते हो।”

रुद्रांश कुछ देर सोच में पड़ गया।उसे पता था कि अगर उसे भविष्य में अमायरा से बदला लेना है, तो अकेले उसकी ताकत काफी नहीं होगी।

उसे किसी बड़े संगठन की जरूरत होगी।फिर उसे अचानक एक बात याद आई।

उसने सूर्यप्रताप से पूछा—“यह सिफारिश पत्र आपके पास कैसे आया?”

“सन सिटी तो एक छोटा शहर है।“और स्वर्ण संप्रदाय तो उत्तरी क्षेत्र की बड़ी ताकत है।”

“फिर आपके पास यह पत्र कैसे?सूर्यप्रताप मुस्कराया और बोला—

“यह पत्र बहुत पुराना है।“मेरे पिता जब अपनी साधना यात्रा से लौटे थे,तो वे यह सिफारिश पत्र साथ लाए थे।”

“कहा जाता है कि उन्होंने स्वर्ण संप्रदाय के एक बुजुर्ग की मदद की थी।”

“इसलिए उन्हें यह पत्र मिला।”

“उन्होंने कहा था—जब हमारे परिवार में कोई बहुत प्रतिभाशाली युवक पैदा हो,तो उसे यह पत्र देकर स्वर्ण संप्रदाय भेजना।”

“लेकिन उसके कुछ समय बाद ही मेरे पिता की मृत्यु हो गई।

यह कहते समय सूर्यप्रताप थोड़ा भावुक हो गया।

रुद्रांश ने पूछा—“तो आपने यह पत्र अपने परिवार के किसी युवक को क्यों नहीं दिया?”

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