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Chapter 2

अपहरण चक्रव्यूह - Chapter 3

अपहरण चक्रव्यूह

अब तक

अंश “तीन लड़कियों के अपहरण वाले दिन, तू हर जगह मौजूद था। और तेरा नंबर हर बार टावर से मिला है। अब भी कहेगा कुछ नहीं पता?”

विक्रम घबराया गया “सर, मैं सच कह रहा हूँ… किसी ने मुझसे गाड़ी किराए पर ली थी… कैश दिया, कोई डिटेल नहीं ली…”

इशकी: “किसने?”

विक्रम: “नाम नहीं पता… एक आदमी था… चेहरा नहीं दिखा, पर वो हर बार रात 1 बजे मिलने आता था… और कार 4 बजे वापस कर जाता था।”

अब आगे

अंश ने विक्रम की कैब की ग्लव बॉक्स खोली – **एक ब्लैक मास्क और लेटेक्स के दस्ताने** मिले।

इशकीदस्ताने उठाते हुए "ये तुम्हारे नहीं हैं न? क्योंकि इनपर *ब्लड सैंपल के दाग हैं!"

विक्रम का चेहरा सफेद पड़ गया "न-नहीं सर! वो आदमी... वो यही छोड़ जाता था!"*

अंश ग्लव बॉक्स में और छानबीन करते हुए और ये?..."

उसने एक USB ड्राइव निकाली, जिस पर "R3:21" लिखा था

USB की मेटाडेटा से पता चला फाइल्स अपलोड की गई थीं दिल्ली के एक *एडवांस्ड A.I. लैब* से!

इशकी कंप्यूटर पर टाइप करते हुए "सर, ये लैब कम्युनिकेशन मिनिस्ट्री* के अंडर है! वही जहाँ से SUV रजिस्टर्ड थी!"

अंश गंभीर "मतलब... ये केस सरकार के अंदर किसी बड़े आदमी तक जाता है!"

क्या ये हो सकता अब तक जितनी भी लड़कियों गायब हुई है वो विदेश भेज दी गई रेड लाइट एरिया के लिए अंश ने मन मैं सोच इस केस को जितना सुलझाने की कोशिश कर रहा हूं उतना ही उलझते जा रहा है

अंश ने USB को अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़ा, उसकी नजरें इशकी से मिलीं। रेड लाइट एरिया? नहीं... ये कुछ ज्यादा ही बड़ा है," उसने धीरे से कहा, इन लड़कियों को विदेश भेजने की जरूरत नहीं... वो तो यहीं कहीं हैं... और हमें उन्हें ढूंढना है!" और हम ने तो दिल्ली का हर एक इलाका ढूंढ लिया हमें कही नहीं मिली हो क्या रहा एक साल से लड़की गायब होती जा रही है और कुछ सबूत हमारे हाथ नहीं लगा

अंश ने USB को गाड़ी पर पटकते हुए आँखें बंद कर लीं। "एक साल... अनगिनत लड़कियाँ... और हमारे हाथ खाली उसने कर्कश आवाज़ में कहा। इशकी ने देखा कि उसकी मुट्ठियाँ इतनी कसकर भिंची थीं कि नाखून हथेली में घुस रहे थे।

इशकी का फ़ोन बजा और उठने के साथ उसके चेहरे पर चिंता की रेखा देखने लगी।

सर एक और लड़की का किडनैप हुआ है सर सेक्टर 12 से एक और केस! 19 साल की मेडिकल स्टूडेंट, अभी 15 मिनट पहले कॉलेज से गायब हुई। CCTV में दिखा कि एक *काली SUV* ने उसे उठाया... पर नंबर प्लेट नहीं दिखी!"

अंश थाने के मेन गेट से अंदर दाखिल हुआ। आँखों में वही पुरानी तपिश थी, पर चेहरा उतना ही शांत। अंदर जवानों की हलचल थी—कुछ CCTV फुटेज देख रहे थे, तो कुछ फोन कॉल्स पर थे।

सिर्फ एक सन्नाटा था जो हर शोर के पीछे दबा हुआ था—एक डर का सन्नाटा। पाँच साल से हर रोज़ की तरह एक और लड़की गायब हुई थी, पर फर्क ये था कि अब केस अंश मल्होत्रा के हाथों में था।

अंश ने सीधा पूछताछ कक्ष की ओर कदम बढ़ाए, जहाँ दो लड़के पहले से बैठे थे।

कमरे में बस एक टेबल, दो कुर्सियाँ और एक बल्ब लटका था। दोनों लड़कों की आँखों में नींद और डर का मिलाजुला असर था।

अंश ने कुर्सी खींची और बिना समय गंवाए पहला सवाल पूछा

"नाम?"

"व... विक्की, साहब।" पहले लड़के ने कहा।

"पूरा नाम, और उम्र?" अंश की आवाज़ में गूंजी।

"विक्की सिंह ठाकुर, 22 साल।"

"और तू?" उसने दूसरे लड़के की तरफ देखा।

"सौरव शर्मा... मैं बस इसका दोस्त हूँ, मुझे कुछ पता नहीं..."

अंश ने एक हल्की सी मुस्कान दी—"अभी तक किसी ने तुमसे पूछा भी नहीं था कि तुम क्या जानते हो। ये बेचैनी क्यों?"

कमरा में फिर से शान्ती छा गई।

"रात को 12:15 पर तुम दोनों उस गली में क्या कर रहे थे जहाँ से गायब लड़की की आखिरी लोकेशन मिली थी?"

सौरव ने कुछ कहने की कोशिश की, पर विक्की ने पहले कहा—"साहब, सच में हम बस टैक्सी चला रहे थे, हमारी कोई गलती नहीं।"

"बिल्कुल। क्योंकि हर अपहरण के पास एक टैक्सी वाला लड़का ही मिलता है, है ना?"

अंश की आंखें और लाल हो गई।

"तुम्हारे फोन में ‘मिस रिया’ नाम से जो चैट्स हैं, उनमें क्यों लिखा है ‘कल रात सब तय है, बस वक्त पर पहुंच जाना’?"

विक्की की सांस अटक गई। उसने इधर-उधर देखा—"साहब वो... वो तो मज़ाक था… रिया मेरी दोस्त है…"

अंश ने एक लाल फाइल निकाली और टेबल पर पटकी।

"रिया? जो अभी एक घंटे से लापता है? और जिसकी आखिरी कॉल तुम्हारे नंबर पर थी?"

विक्रम अब कांप रहा था।

बाहर, हॉल में इशकी सबूतों की लाइन से जुड़ी एक नई कड़ी खोज रही थी। एक लड़की की डायरी पुलिस के हाथ लगी थी, जो अपने अपहरण से दो दिन पहले लिखी गई थी।

डायरी की आखिरी पंक्ति:

"अगर मैं कल लौटूं न, तो समझना कि ये शहर लड़कियों से नहीं, शिकार से भरा है..."

इशकी के होंठ सख्त हो गए।

"सर !" वो दरवाज़ा खोलते हुए चिल्लाई।

"हमें तुरंत गर्ल्स प्रोटेक्शन हॉस्टल की CCTV निकालनी होगी। रिया के गायब होने से एक दिन पहले वहाँ कुछ अजीब हुआ था।"

थोड़ी ही देर बाद एक और CCTV फुटेज सामने आया। अंश और इशकी देख रहे थे

एक नकाबपोश आदमी हॉस्टल के बाहर कई बार आता-जाता दिखा। अंधेरा था, पर उसकी चाल कुछ जानी-पहचानी लग रही थी।

अंश ने फौरन कैमरा रोका"ज़ूम करो इस फ्रेम पर।" ज़ूम हुआ।

फ्रेम में एक टैटू नजर आया गर्दन के ठीक पीछे — सांप का।

"सांप...?" इशकी चौंकी।

"हां... अब ये टैटू दिल्ली में कोई नहीं बनाता इसका मतलब ये इस कंट्री का नहीं है

इशकी तुम इस टैटू के बारे में पता करो क्या कोई है तो इस को‌ दिल्ली में बनावत है और किस-किस ने बनवाया है उन सब को थाने ले कर आ जाओ।

क्या अंश और इशकी सांप के इस काले खेल की जड़ तक पहुंच पाएंगे?

क्या विक्रम और सौरव सिर्फ मोहरे थे?

और… अगली लड़की कौन होगी?

जानने के लिए बने रहिए हमारे साथ और कहानी कैसी लगी मुझे कमेंट करके जरूर बताइए ।

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