ड्रग्स और 50 लड़कियां
अपहरण चक्रव्यूहखिड़की से आती हुई सूरज की तेज़ किरणें सीधे अंश के चेहरे पर पड़ीं। उसकी भौंहें हल्की सिकुड़ गईं, मानो नींद में ही रोशनी उसे चुभ रही हो। धीरे-धीरे उसने करवट बदली, लेकिन रोशनी ने अब पूरा चेहरा ढक लिया था। कुछ ही पल में उसकी नींद खुल गई। उसने बिस्तर से उठकर एक झटके में अपनी आँखें मलते हुए घड़ी की ओर देखा।
"ओह नो…" वह अचानक चौंक पड़ा। "सुबह के आठ बज चुके हैं! और अभी तक मैं तैयार ही नहीं हुआ…"
उसने अपने दोनों हाथों से सिर पकड़ लिया, माथे पर हल्का पसीना झलक गया था। आवाज़ में घबराहट थी, जैसे कोई बड़ा काम छूट गया हो।
"मैं जल्दी से तैयार हो जाता हूँ…" बड़बड़ाते हुए वह बिस्तर से उठा। बिखरे हुए तकिये और मुड़ा-तुड़ा कंबल वहीं छोड़कर सीधे बाथरूम की ओर भागा।
कुछ देर बाद शीशे के सामने खड़े होकर उसने जल्दी-जल्दी दाढ़ी बनाई, शर्ट पहनी, टाई बाँधी। लेकिन इतनी जल्दीबाज़ी में उसके बाल अस्त-व्यस्त रह गए। उसने एक कंघी उठाई और जल्दी-जल्दी उन्हें सँवारने लगा।
लगभग 9:00 बजे अंश अपने काम पर पहुँच गया। ऑफिस का गेट पार करते ही उसके कदम तेज़ हो गए। चेहरा थोड़ी थकान और घबराहट से भरा था।
इशकी पहले से वहीं खड़ी उसका इंतज़ार कर रही थी। उसे देखते ही उसने आँखें तरेरीं, "तुम इतना लेट कैसे हो गए, अंश?"
अंश ने हड़बड़ी में मुस्कुराने की कोशिश की। "वो… वो… सुबह मेरी आँख जल्दी नहीं खुली। अलार्म भी शायद बंद हो गया होगा।" उसने कंधे उचकाए। "तुम बताओ, कोई बात है क्या? तुम टेंशन में लग रही हो।"
इशकी ने गहरी साँस भरी और गंभीर स्वर में बोली, "हाँ… बात तो है। और अगर तुम सुनोगे तो तुम भी टेंशन में आ जाओगे।"
अंश की आँखें चौड़ी हो गईं। "मैं टेंशन में आ जाऊँगा? आखिर ऐसी कौन सी बात हो सकती है? बताओ ज़रा।"
इशकी ने उसकी ओर सीधे देखते हुए कहा, "बताती हूँ… पहले चलो। पुराने चौराहे के पास खबर मिली है कि वहाँ किसी आदमी का मर्डर हुआ है।"
"मर्डर?"
दोनों तेज़ कदमों से घटनास्थल की ओर बढ़े।
पुराने चौराहे का इलाका सुनसान था। पुलिस पहले से मौजूद थी। चारों ओर बैरिकेडिंग लग चुकी थी और भीड़ को दूर रोका गया था। पीली पट्टियों से घिरा हुआ इलाका अजीब-सा सन्नाटा पैदा कर रहा था।
अंश और इशकी जैसे ही अंदर पहुँचे, उनके कदम धीमे हो गए। ज़मीन पर खून फैला हुआ था और बीच में एक लाश पड़ी थी।
वह आदमी लगभग 5 फुट 7 इंच लंबा था। उसके कपड़े बुरी तरह अस्त-व्यस्त थे। सबसे ध्यान खींचने वाली चीज़ उसके सीने पर 6 इंच लंबी तिरछी कट थी। ऐसा लग रहा था जैसे किसी तेज़ धार वाले हथियार से वार किया गया हो। बाकी शरीर पर कोई निशान नहीं था। चेहरा शांत दिख रहा था, लेकिन आँखें आधी खुली थीं।
अंश धीरे से झुककर लाश को ध्यान से देखने लगा। उसके चेहरे पर गंभीरता थी।
"लाश को अच्छे से चेक करो," उसने आवाज़ दी। "और इसे पोस्टमार्टम के लिए भेजो। देखते हैं रिपोर्ट से और क्या पता चलता है।"
उसने चारों ओर नज़र घुमाई, "आस-पास छानबीन करो। शायद खूनी के बारे में कोई सुराग मिल सके।"
मयंक, जो अंश का जूनियर था, दस्ताने पहनकर लाश की जेबें टटोलने लगा। कुछ ही देर में उसने आवाज़ लगाई, "सर!"
अंश और इशकी ने एक साथ उसकी ओर देखा। मयंक ने हाथ में मुड़ा-तुड़ा सा कागज़ का टुकड़ा पकड़ा हुआ था।
"इस आदमी की जेब से अख़बार के कुछ टुकड़े मिले हैं," मयंक ने कहा। "इसके अलावा आस-पास से और कुछ नहीं मिला।"
अंश ने कागज़ लिया और ध्यान से देखने लगा। पुराने कागज़ की खुशबू और पीलापन बता रहे थे कि यह हाल का नहीं है।
"ठीक है," अंश ने धीरे-धीरे सिर हिलाया। "अब सब वापस चलते हैं।"
पुलिस वैन में लौटते समय माहौल में खामोशी थी। इशकी बार-बार सोच रही थी कि यह मर्डर सीधा-सादा मामला नहीं है। अंश की आँखें भी बार-बार उस अख़बार के टुकड़े पर जा रही थीं।
कुछ देर बाद मयंक उसके पास आया। "सर, ये वो अख़बार का टुकड़ा जो उसकी जेब में से मिला था। शायद इससे कुछ पता चल सके। वैसे यह टुकड़ा थोड़ा पुराना लग रहा है।"
अंश ने कागज़ को फिर से खोला। टुकड़ा फटा हुआ था, लेकिन बीच में बड़े काले अक्षरों में लिखा साफ दिख रहा था
"ड्रग्स और 50 लड़कियाँ…"
इसके आगे के शब्द गायब थे, फटे हुए हिस्से ने पूरी लाइन छिपा दी थी।
इशकी ने तुरंत अंश की ओर देखा। "ड्रग्स और… 50 लड़कियाँ?" उसकी आवाज़ काँप रही थी। "क्या ये… वही नेटवर्क तो नहीं जिससे हम पहले ही जूझ रहे थे?"
अंश का चेहरा गंभीर हो गया। उसने धीरे से कहा, "हो सकता है। लेकिन अभी कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी।"
उसने अख़बार का टुकड़ा मयंक को वापस देते हुए आदेश दिया, "मयंक, पता करो ये अख़बार कब का है। किस तारीख़ का है? और इस आदमी के बारे में पूरी जानकारी निकालकर लाओ। ये कौन है? कहाँ रहता था? और इस अख़बार के टुकड़े से इसका क्या संबंध है?"
मयंक ने सिर झुकाकर कहा, "जी सर!"
अंश ने गहरी साँस ली। उसकी नज़रें अब भी उसी अधूरे वाक्य पर अटकी हुई थीं। उसके दिमाग़ में बस एक ही सवाल घूम रहा था
"क्या यह मर्डर किसी बड़े रैकेट की कड़ी है?"