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Chapter 8

एक बच्ची मिली थी उस का मर्डर हो गया

अपहरण चक्रव्यूह

Next day

मयंक अपना काम कर रहा था तभी उस पर अननोन नंबर से मैसेज आया जिस पर देखा था रुम नंबर69

मयंक को कुछ ठीक नहीं लगा वो तुरंत ही उस होटल के निकल गया कुछ तेरे बाद वो रुम के बाहर खड़ा था रूम नंबर 69 का दरवाजा अंदर से लॉक था और उस पर "डु नॉट डिस्टर्ब" का बोर्ड लगा हुआ, बाहर से अंदर चल रहे गाने की आवाज साफ सुनाई दे रही थी मयंक दरवाजा खटखटाने लगता है बहुत खटखटाने पर भी कोई दरवाजा नहीं खोलता है, मयंक रिसेप्शन से उस कमरे की दूसरी चाबी लेकर दरवाजा खोल कर रूम के अंदर चला जाता है।

अंदर कमरे में बहुत अंधेरा होता है और तब तक गाने की आवाज भी बंद हो जाती है वह अपनी मोबाइल का फ्लैशलाइट चालू करता है, जैसे ही फ्लैशलाइट ऑन करता है उसकी रोशनी सामने खड़े एक शख्स के चेहरे पर पड़ती है उसे देखकर उसका दिमाग सुन्न पड़ जाता है......

... सामने खड़े शख्स ने काले रंग की जैकेट वाली हुडी पहन रखी थी और अपने चेहरे पर भी काले रंग का मास्क लगा रखा था, लाइट की रोशनी से उसकी भूरी आंखें साफ दिखाई दे रही थी, आंखों में रोशनी पड़ने पर भी बिना पलकें झपकाए मयंक वो को देख रहा था उसे ऐसे घुरता देख मयंक सहम कर वो दो कदम लड़खड़ा कर पीछे हट जाता है और दीवार से टिक जाता है.....

इतने में मयंक की नजर उस शख्स के हाथों के दस्ताने पर पड़ती है जिनपर से खून टपक कर नीचे फर्श पर गिर रही थी उसके एक हाथ में एक फुट लंबी,तेज धार वाली कुल्हाड़ी जिस पर भी खून लग हुआ था, और उस शख्स के पीछे एक लड़की जमीन पर पड़े होते हैं उनके हाथ की उंगलियां हल्की सी हरकत कर रही थी शरीर से खून लगातार बह रहा होता है, और अचानक उनकी हरकत बंद हो जाती है।

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ये देखने के बाद मयंक कांपते हुए हाथों से अंश को कॉल करता है पर हड़बड़ाहट में उसका फोन नीचे गिर जाता है, जल्दी से अपना फोन उठाकर वापस सामने देखता है तो वो शख्स वहा मौजूद नहीं होता इतने में अंश कॉल उठा लेता है।

मयंक - "ह..... हैलो! सर वो..वो का जो कुछ दिन पहले एक बच्ची मिली थी उस का मर्डर हो गया।"

अंश - "तुम वहीं रुको! मैं जल्दी आ रहा हूं,बस ये बताओ तुम कहां हो?, तुम अपना लाइव लोकेशन मुझे भेज दो।"

इतना कहकर अंश फोन रख देता है और तुरंत ही वहां से होटल की तरफ निकल जाता है, अभिमन्यू15 मिनट के अंदर वहां पहुंच जाता है, होटल पहुंचते अंश दौड़ते हुए रूम नंबर 69 की तरफ जाता है वहां पहुंचकर वह देखता है कि कमरे में बहुत अंधेरा होता है, वह स्विच बोर्ड ढुंढने लगता है, स्विच मिलते ही वह लाइट का बटन दबाता है।

लाइट ऑन होते ही......अंदर का नजारा देखकर कुछ देर के लिए अंश भी हैरान हो जाता है, मारने वाला किसी को इतनी बेदर्दी से कैसे मार सकता है? ये सवाल अंश के मन में उठने लगा, उसके शरीर और चेहरे पर बहुत से चोटों के निशान थे उस के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था और उसके खून से कमरे का फर्श लाल हो गया था।

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इतना देखने के बाद उसकी नजर दरवाजे की तरह एक कोने में एकदम शांत बैठे मयंक पर पड़ती है, वो बस एकटक सामने पड़ी लाश को देख रहा था, अंश उसके पास जाकर उसे वहां से चलने के लिए कहता है, मयंक के मन में उस खून और उसके खून करने के तरीके को देखकर उसके मन में दहशत आ गई थी अंश उसे वापस भेज देता है और बॉडी को भी फॉरेंसिक लैब भिजवा देता है।

अंश पूरे कमरे की तलाशी लेता है, कमरे में उसे कुछ रंगीन कांच के टुकड़े जिन पर फोन लगा हुआ था और एक टूटा हुआ फोन मिला कमरे की खिड़की खुली हुई थी दीवाल में नीचे से लेकर ऊपर तक एक पाइप लगी हुई थी उसके सहारे से ऊपर आना और नीचे जाना कोई मुश्किल बात नहीं थी।

कांच के टुकड़े और फोन को अंश एक पॉलिथीन में डालकर अपनी जेब में रख लेता है और रिसेप्शनिस्ट के पास जाकर होटल के बाहर की सीसीटीवी फुटेज दिखाने को कहता है..... रिसेप्शनिस्ट उसे होटल के बाहर के सीसीटीवी फुटेज दिखाता है, उस फुटेज में 7:14 को वही शख्स पाइप की मदद से उस कमरे में चला जाता है, लगभग 7:40 को को वह उस पाइप की मदद से वापस नीचे उतर कर दूसरी दिशा में जाने लगता है अंश यह बात नोटिस करता है कि खूनी लंगड़ा कर चल रहा होता है पर क्योंकि वह दूसरी दिशा में जा रहा था इसलिए अंश फिर एक बार उसका चेहरा नहीं देख पाता है थोड़ी देर में वो शख्स अंधेरे में कही गुम हो जाता है।

इतना देखने के बाद अंश को फिर से अफसोस होता है कि उसका चेहरा नहीं देख पाया और वह होटल से निकल कर वापस चला जाता है, वहां पहुंचकर वो देखता है कि, मयंक अब भी एकदम शांत होकर कुर्सी पर बैठा हुआ था, बाकी लोग भी उस लड़की की बॉडी को देखने के बाद थोड़ी देर के लिए शांत हो गए थे।

अंश -" मयंक! क्या हुआ तुम्हें ? तुमने कुछ देखा क्या हुआ था? क्या तुमने उसका चेहरा देखा?"

मयंक - न...... नहीं! मैंने उसका चेहरा नहीं देखा,कैसे देखता उसने अपना चेहरा ढक रखा था बस उसकी बड़ी-बड़ी भूरे रंग की आंखें दिखाई दे रही थी, जिसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी से नहीं डरता, मी नजर हटते ही वो एक पल मे कहां गायब हो गया पता ही नहीं चला।

नेहा - मुझे तो अब तक यह समझ नहीं आ रहा कि नरेंद्र और नवीन को तो इसने ज्यादा चोट पहुंचाए फिर ये लड़की

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