लड़की की स्मगलिंग
अपहरण चक्रव्यूहअब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ चुकी थी। सबके मन में यही सवाल था कि आखिर उस आदमी की मौत कैसे हुई।
अंश ने डॉक्टर से कहा अंश: "डॉक्टर, रिपोर्ट में क्या आया? उस इंसान की मौत किस वजह से हुई है?"
डॉक्टर: "देखिए! इस आदमी को मरे हुए लगभग 10 घंटे हो चुके हैं।
इसके शरीर पर सबसे पहले धारदार हथियार से बहुत गहरा वार किया गया। ये घाव काफी बड़ा और गंभीर था। उसके बाद इसके शरीर में बहुत ज़्यादा मात्रा में ड्रग्स इंजेक्ट किया गया। उसी ज़हरीली मात्रा की वजह से इसकी मौत हो गई।
इसके शरीर में केवल एक तरह का ड्रग्स नहीं मिला है, बल्कि चार से पाँच अलग-अलग तरह के ड्रग्स मिले हैं। इनमें से एक ड्रग्स तो ऐसा है, जो कभी तनाव दूर करने की दवा के रूप में बिकता था।
लेकिन इस दवा की वजह से कई लोगों की मौत हो चुकी थी, इसलिए सरकार ने इस पर दो साल पहले बैन लगा दिया था
बाकी जो ड्रग्स मिले हैं, वे भी कोई मामूली ड्रग्स नहीं हैं। ये आसानी से नहीं मिलते और बहुत महंगे होते हैं।"
डॉक्टर की ये बातें सुनकर अंश गहरी सोच में पड़ गया। उसने मन ही मन कहा अगर ये ड्रग्स इतनी आसानी से नहीं मिलते, तो फिर ये इंसान के शरीर में कैसे आए? आखिर खूनी के पास इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स आया कहाँ से?"
इतने में मयंक वहाँ आता है।
मयंक: "सॉरी सर! आने में थोड़ी देर हो गई।"
अंश: "कोई बात नहीं मयंक, जल्दी बताओ क्या जानकारी मिली उस इंसान के बारे में और अखबार के टुकड़े के बारे में?"
मयंक: सर, इस आदमी का नाम नरेंद्र है। उम्र लगभग 47 साल है। इस पर कई एफ.आई.आर दर्ज थीं। उस पर ड्रग्स स्मगलिंग और अवैध काम रखने के आरोप लगे थे। ये पूरी फ़ाइल है, इसमें इसके बारे में सारी जानकारी है।
हालाँकि इसके खिलाफ कई केस दर्ज थे, लेकिन कानून को इसके खिलाफ कभी कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इस वजह से ये कभी गिरफ्तार नहीं हुआ।
और जो अखबार का टुकड़ा हमें इसकी जेब में मिला, वो तीन साल पुराना है। उस समय एक ट्रक में 50 लड़कियां और ड्रग्स पकड़े गए थे और पुलिस का मानना था कि वो सब इसी नरेंद्र के थे।
इसके परिवार के बारे में और ये कहाँ रहता है, इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है, लेकिन हम जल्द ही पता लगा लेंगे।
अंश: हम्म... इतना तो साफ है कि जिसने भी इसे मारा है, वो ड्रग्स और उस अखबार की खबर दोनों से जुड़ा हुआ है। तभी तो उसने इसे मारने के बाद अखबार का टुकड़ा इसकी जेब में डाल दिया।"
फिर अंश ने मयंक से कहा अंश: मयंक, उस अखबार की खबर जिसने छापी थी, उस पत्रकार के बारे में पता करो। शायद उससे हमें इस केस में और जानकारी मिल पाए।
मयंक: "सर, थोड़ा मुश्किल होगा। लेकिन कोशिश करके पता लगाया जा सकता है कि वो जर्नलिस्ट कौन था। बस थोड़ा समय लगेगा।
अंश: ठीक है, लेकिन कोशिश जल्दी करना। जैसे भी हो, ये जानकारी हमें चाहिए।"
उसके बाद अंश ने अपनी टीम से कहा अंश: "आज का वर्क खत्म हो गया है। अब सब अपने-अपने घर जा सकते हैं।"
फिर उसने ज़ोर से कहा अंश: "जरा जल्दी करो, हमें निकलना है। रात बहुत हो चुकी है।"
उसने इशकी को पास बुलाया अंश: "इशकी, जरा इधर आओ।"
इशकी: "क्या हुआ?"
अंश: "जरा ये सामान देखो, जो इस इंसान के पास से मिले हैं। इसमें सोने की चैन है, महंगी घड़ी है... लेकिन सोचने वाली बात ये है कि इसके पास न तो फोन था और न ही पर्स। हर इंसान के पास फोन और पर्स तो होता ही है। पर्स में उसकी आईडी भी होती है, जिससे हमें इसके बारे में और जानकारी मिल सकती थी। लेकिन इसके पास दोनों चीजें नहीं हैं।"
इशकी: "हम्म... ऐसा भी तो हो सकता है कि खूनी नहीं चाहता था कि हमें इसके बारे में ज़्यादा जानकारी मिले। या फिर हो सकता है कि उसका किसी और को मारने का भी प्लान हो, जो हमें इसके फोन से पता चल सकता था।"
अंश: "हाँ, तुम्हारी बात बिल्कुल सही है। अगर ऐसा है, तो शायद खूनी ने फोन अपने पास रख लिया होगा।
लेकिन सोचने वाली बात ये है कि उसने अखबार का टुकड़ा जेब में डालकर जरूर ये बताना चाहा है कि ये आदमी ड्रग्स और लड़की की स्मगलिंग केस से जुड़ा है। या फिर शायद वो हमें गुमराह करना चाहता है, ताकि हमारा पूरा ध्यान इसी केस पर लगा रहे। और इस बीच अगर उसका मकसद किसी लड़की को किडनैप करना है, तो हम उसका असली प्लान पकड़ ही न पाएँ।"
अंश थोड़ी देर रुककर बोला
अंश: "बस, एक बार उस जर्नलिस्ट के बारे में पता चल जाए जिसने ये खबर छापी थी, तब कुछ बातें साफ हो जाएँगी।"
फिर अंश ने कहा– अंश: "ठीक है, अब यहाँ से चलते हैं। बहुत देर हो गई है। कल हमें जल्दी भी आना है।"
वो गाड़ी निकालते हुए बोला
अंश: तुम लोग जल्दी आओ।
इसके बाद अंश, इशकी अपने-अपने घर की तरफ जाने लगे।
इशकी (हँसते हुए): "ओके! गुड नाइट, कल मिलते हैं। और हाँ, कल टाइम से आना। आज की तरह लेट मत होना।"
अंश मुँह बनाते हुए "हाँ, ठीक है... अब जाओ। बाय।"
इतना कहकर अंश गाड़ी अपने घर की ओर मोड़ देता है। लेकिन जब वो पुराने चौराहे के पास से गुजरता है, तो उसकी गाड़ी की रफ्तार धीमी हो जाती है। वो कुछ देर सोचता है, फिर गाड़ी दोबारा तेज करके घर की ओर घुमा लेता है।
घर पहुँचते ही उसने खुद से कहा
"चलो, बहुत नींद आ रही है। अब सो जाना चाहिए।