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Chapter 1

कोई मिल गया ( koi mil gaya ) - Chapter 2

कोई मिल गया ( koi mil gaya )

आशिक बहुत हुए हैं जमाने में

पर प्यार मुक्मल जिते जी किसी का ना था।

कहानी पहले भी अधुरी थी

कहानी आज भी अधुरी है

बस फर्क़ इतना है वो कहानी बैगानों की थी

और यह कहानी हमारी है। ।

खुले बालों को समेटते हुए एक लड़की अपनी डायरी में इन कुछ शब्दों को लिखकर डायरी बंद करके चैयर से उठ खडी़ होती है उसके चेहरे पर अजीब सा सुकून था, वो लड़की जिसके बाल उसकी कमर से निचे तक बिखरे हुए थे वो उनका जुडा़ बनाकर समेट रही थी आंखों में काजल जो उसकी गहरी नीली आंखों को और खुबसूरत बना रहे थे।

तभी एक आवाज उसके कानों में सुनाई दी " झलक ,, कहा है आप, हम कबसे आपको आवाज लगा रहे हैं।

जी मम्मा हम बस आ रहें थे पर यह बाल है जो हमसे समेटे नहीं जा रहे आप हमारी मदद कर दे ना प्लीज,, ।

रागिनी जो अभी अभी कमरे में दाखिल हुई थी झलक की आवाज़ में परेशानी समझ पर मुस्कुराते हुए बोली " आपको हमने कितनी बार कहा है आप बालों का कद छोटा करवा ले, पर नहीं आप तो हमारी बात मानने को तैयार ही नहीं है चलिए यहाँ बैठिये आप, ।

रागिनी झलक को सोफे पर बिठाते हुए कहती है आपको तो पता है ना मम्मा जान हम बाल नहीं कटवा सकतें क्योंकि हमें लंबे बाल बहुत ज्यादा पसंद है और हमारे बाल है भी इतने खुबसूरत हम इनको नहीं कटवाने वालें और सबसे बड़ी बात विप्लव जी को हमारे लंबे बाल सबसे ज्यादा पसंद है ।

विप्लव का नाम सुनकर रागिनी के होठों की मुस्कान पल भर में बदल जाती है, विप्लव वही लड़का है जिसके साथ रागिनी ने अपनी बेटी का रिश्ता तय किया था, पर अब रागिनी को अपने फैंसले पर ही शर्मिंदगी महसूस हो रही थी क्योंकि विप्लव को उसने किसी और लड़की के साथ देखा था वो भी किस्स करते हुए, और अपनी बेटी के होने वाले पति को किसी और के साथ देखकर उसको बहुत गुस्सा भी आया था, और वो वही से विप्लव के घर जाकर रिश्ता तोड़कर भी आ गयी थी।

जहाँ पर विप्लव की माँ से उसको बहुत खरी खोटी भी सुनने को मिली थी जो उसके और उसकी बेटी के चरित्र पर थी जो वो हमेशा लोगों से अपने लिए सुनती आ रही थी क्योंकि कोई नहीं जानता था झलक का पिता कौन है जिसके लिए रागिनी हमेशा से लोगों से ताने सुनते आई थी पर आज झलक के बारे में वैसी बात सुनकर उसके दिल में असीम दर्द हुआ था।

वो अपने ख्यालों को झटक देती है अभी भी उसके दिल में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था जिसे वो बार बार इगनोर करती जा रही थी रह रह कर उसके कानों में विप्लव की माँ शिला की आवाज सुनाई दे रही थी " तो तुम्हारी बेटी कौनसी दुध की धुली है क्या पता कितनो के साथ चक्कर चला रही है, जैसी माँ वैसी बेटी तो होगी ही, तुम्हारा गंदा खुन ही तो उसकी रंगों में दौड़ रहा है।

रागिनी जबरदस्ती अपने चेहरे पर मुस्कान लेकर झलक के बालों का जुड़ा बनाते हुए खडी़ होकर कहती है " झलक आज स्वेता और उसकी बेटी अंशिका आ रही है हमसे मिलने, हम पहले तुमको बताना भूल गए थे। झलक के चेहरे के भाव एक पल को बदल जातें हैं।

क्या ? स्वेता आंटी आ रही है क्या मम्मी जान आप भी ना आप अब हमें बता रही हो ? आज तो हम आपके चेकअप के लिए हाॅस्पिटल जाने वाले थे ना ।

अचानक रागिनी का हाथ अपने सिने पर चला जाता है और वो दर्द में तड़पते हुए निचे गिर जाती है वो पहले से बिमार थी उसको ब्रेस्ट कैंसर था जिसमें उसका इलाज चल रहा था पर उनकी फाइनेंशियल कंडिशन इतनी अच्छी नहीं थी कि वो अपना इलाज किसी बडे़ हाॅस्पिटल या सर्जन से करवा सके फिर भी झलक अपनी माँ के लिए दिन रात मेहनत करती थी वो पढाई के साथ जाॅब भी करती थी ।

और घर आकर वो अपना एक सिलाई स्टोर भी चलाती थी पर अचानक रागिनी की यह हालत देखकर झलक घबरा जाती है और वो जल्दी से रागिनी को पकड़ लेती है क्योंकि वो निचे गिरने वाली थी " म्ममा जान, क्या हुआ आपको म्ममा आप ठीक तो है देखो मुझे डर लग रहा है प्लीज आप खुद को संभाले रखें हम हम अभी हाॅस्पिटल चलते हैं, ।

रागिनी की हालत ऐसी नहीं थी कि वो कुछ भी बोल पाए उसके शब्द जैसे उसके गले में अटक गये हो और उसके सिने का दर्द बढ़ता जा रहा था झलक की आंखों में आंसू आ जाते हैं और वो रागिनी को बहुत मुश्किल से बैड पर लेटाते हुए उसके गाल को थपथपाते हुए बोली " मम्मा जान हम अभी आए बस दो मिनट हा दो मिनट, इतना कहकर वो बाहर की तरफ जल्दी से भाग जाती है पर उसकी बुरी किस्मत वो ठीक से भाग भी नहीं पाती है और उसका पैर उसके दुप्पटे में उलझता है और वो बहुत जोर से गिरती है और उसका सर सामने ही दरवाजे के हैंडल पर लग जाता है और एक पल को तो उसको ऐसा महसूस होता है जैसे " उसका सर फुट गया और उसका सर चक्कराने लग जाता है ।

वो बहुत मुश्किल से खुद को संभालती है और अपनी चोट पर ध्यान ना देते हुए उठकर खडी़ हो जाती है और जल्दी से बाहर जाती है अपने पडोस के एक घर के आगे जाकर जोर से दरवाजा खटखटाने लग जाती है " सुनिता आंटी राजेश अंकल प्लीज दरवाजा खोलिए,, , अंकल अंकल,,, आवाज लगाते हुए वो साथ में रो रही थी तभी दरवाजा खुलता है अंदर से एक चालिस साल का आदमी बाहर आते हुए बोला " क्या हुआ झलक बेटा आप ऐसे क्यों,,,,, आगे की बात उसके मुंह में रह जाती है क्योंकि झलक के चेहरे पर खुन की लकीर खिंच चुकी थी।

झलक जल्दी से रोते हुए कहती है " अंकल वो मम्मा पता नहीं उनको,,, उनको क्या हो गया है आप,,, आप चलिए ना,, राजेश कै पिछे ही उसकी वाइफ सुनिता भी आ गयी थी दोनों जब यह सुनते है तो जल्दी से भागते हुए उनके घर की तरफ जातें हैं झलक भी उनके साथ थी जब वो अंदर आकर देखतें है तो रागिनी बेहोश बैड पर थी।

तिनो तो एक पल को रूक जातें हैं झलक के पुरे शरीर में अलग सी घबराहट जगह ले लेती है एक पल को‌ तो ऐसे जैसे उसकी पुरी जिंदगी रूक गयी हो उसके सर से खुन बह रहा था पर उसको उसका ख्याल नही था ख्याल था तो बस अपनी जिंदगी के आखिरी सहारे का और वो सिर्फ रागिनी थी जिसके अलावा उसका कोई अपना नहीं था जिसको वो अपना परिवार कह सकें।

उसकी जिंदगी का एकमात्र सहारा सिर्फ रागिनी थी राजेश रागिनी की सांस चैक करता है जो अब बहुत धिमे चल रही थी वो सुनिता को देख बोला " सुनिता जाओ ओटो रोको जल्दी हमें हाॅस्पिटल चलना होगा, सुनिता हा में सर हिला जल्दी से बाहर चली जाती है।

झलक अपनी माँ के चेहरे को देखें जा रही थी राजेश रागिनी को गोद में उठाते हुए झलक को देखकर कहता है " झलक,,,,,,, झलक जैसे यहाँ थी नहीं राजेश अब उसको जोर से आवाज लगाते हुए बोला " झलक,,, झलक जैसे अपने होश में आती है वो राजेश को देखती है राजेश बाहर जातें हुए कहता है " जल्दी लाॅक करो हम हाॅस्पिटल चल रहे हैं।

झलक हा में सर हिलाती है और जल्दी से अपना फोन उठाती है और घर को लाॅक करती है सुनिता तब तक ओटो को रोके खडी़ थी राजेश रागिनी को ओटो में बिठाता है और वो और झलक दोनों रागिनी को लेकर हाॅस्पिटल के लिए निकल जाते हैं किसी को यह ख्याल नही आता की वो एम्बुलेंस को बुला ले , ।

कुछ ही वक्त में हाॅस्पिटल पहुंच जाते हैं हाॅस्पिटल घर से आधे घंटे की दूरी पर था और जाते ही रागिनी को एडमिट कर लिया जाता है और उसको icu में लेकर जाया जाता है।

उधर घर पर

एक ब्लैक कलर की कार घर के बाहर आकर रूकती है सुनिता जो घर से बाहर अभी निकली थी क्योंकि उसको हाॅस्पिटल जाना था वो कार को झलक के घर के बाहर रूका देख रूक जाती है कार से एक औरत और एक लड़की बाहर निकलते हैं वो दोनों बड़ी फैमली से लग रही थी उनका ड्रेसिंग सेंस ही बता रहा था वो आम फैमली से तो नहीं है।

वो दोनों घर के अंदर जाने को हुई की दरवाजे पर ताला लगा देख एक दूसरे को देखती है तभी सुनिता उनके पास आते हुए कहती है " जी आप कौन और आपको किससे मिलना था वो औरत और लड़की दोनों एक साथ सुनिता को देखते हैं फिर घर को वो औरत कहती है " जी वो हम रागिनी के दोस्त है और उससे मिलने आए थे पर उसने तो कहा था वो घर पर मिलेगी क्या वो कही बाहर,,,,,, ।

वो‌ आगे कुछ कहती उससे पहले ही सुनिता कहती है " वो हाॅस्पिटल में है उस औरत और उसके साथ वाली लड़की दोनों की आंखे बड़ी हो जाती है वो स्वेता और उनकी बेटी अंशिका थी जो मुंबई में रहते हैं और वो बैंगलोर सिर्फ रागिनी से मिलने आई थी रागिनी स्वेता की बेस्ट फ्रेंड थी दोनों बचपन से साथ रही थी पर शादी के बाद स्वेता मुंबई में सैटल हो गयी थी।

पर कैसे क्या हुआ उसको, झलक को वो ठीक है हाॅस्पिटल ? स्वेता जल्दी से कहती है उसकी सुबह ही तो रागिनी से बात हुई थी तब तक सब ठीक था फिर अब कैसे क्या ? उसको समझ नहीं आता है सुनिता रागिनी के बारे में स्वेता को बता देती है और तिनो साथ में ही हाॅस्पिटल में चली जाती है।

हाॅस्पिटल में

झलक ने हाॅस्पिटल फिस जमा करा दी थी उसने जो इतने महिने में अपनी माँ की सर्जरी के लिए पैसा जमा किये जा थे अब वो ही पैसे उसके पास बचे थे बाकी जो वो घर के राशन पानी के लिए अलग से रखती थी उसको उसने हाॅस्पिटल फिस में जमा करा दिया था वो और राजेश अभी icu के बाहर ही खड़े थे डाॅक्टर जब से अंदर गये थे तब से अब तक बाहर नहीं आए थे अभी बिस मिनट का वक्त हो गया था झलक की आंखों से लगातार आंसू गिर रहे थे।

तभी डाॅक्टर icu से बाहर आते है दरवाजा खुलने की आवाज से राजेश और झलक दोनों जल्दी से आगे बढते हैं झलक डाॅक्टर को देखकर कहती " डाॅक्टर वो मम्मा,,, वो ठीक है ना ?

डाॅक्टर पहले झलक को देखते है फिर राजेश को और अपने चेहरे पर लगाया मास्क हटाते हुए कहता है " इनको हार्ट अटैक हुआ है और साथ में ट्यूमर भी है अब इनकी सर्जरी करना जरूरी है क्योंकि टयुमर फैलता जा रहा है और ऐसा ही रहा तो यह मुश्किल से दस दिन जिंदा रहेगी ' ।

झलक के पैरों के निचे से जैसे जमीन खिसक जाती है वो डाॅक्टर की बात सुनकर रोते हुए कहती है " नहीं डाॅक्टर उनको कुछ नहीं होगा, आप आप सर्जरी करें उनकी मेरी मम्मा को कुछ नहीं होना चाहिए प्लीज डाॅक्टर ' ।

राजेश झलक के कंधे पर हाथ रखतें हुए कहता है " झलक बेटा संभालो अपने आप को कुछ नहीं होगा भाभी को, ।

झलक अपने दोनों हाथों से बारी बारी अपनी आंखों से बह रहें आंसू पोंछते हुए डाॅक्टर को देख रही थी डाॅक्टर झलक को देखकर कहता है " हम सर्जरी कर देंगे पर,,,, कुछ complications है,, आप कैबिन में आए हम वहाँ बैठकर बात करते हैं।

complications यह शब्द सुनते ही झलक का दिल जोर से शौर करने लगता है उसका डरना भी लाजमी था क्योंकि रागिनी का टयुमर लास्ट स्टेज पर था जिसका पता सिर्फ झलक को था पर वो इतनी कमजोर नहीं थी जो इस सिचुएशन से डर जाए वक्त और हालात ने उसको मैच्योर बना दिया था बीस साल की झलक की लाइफ अब तक बहुत मुश्किल आई थी।

बिना पिता के मां बेटी का गुजारा मुश्किल से हुआ था रागिनी सिलाई का काम करके घर चलाती थी झलक जब काॅलेज में एडमिशन लिया था तब से वो अपने खर्चे खुद उठाने लग गयी थी पर तभी उसको अपनी माँ की बिमारी का पता चलता है और एक काॅलेज going लड़की पर पुरे घर की जिम्मेदारी आ जाती है।

झलक राजेश के साथ डाॅक्टर के कैबिन में चली जाती है डाॅक्टर मनोज अपने हाथ में पकड़ा मास्क टैबल पर रखते हुए अपनी चैयर की तरफ बढ़ जाते हैं और झलक और राजेश को बैठने का इशारा करते हैं, दोनों बैठ जाते हैं।

झलक के अंदर इस वक्त उथल पुथल मची थी वो खुद को बहुत मुश्किल से संभालते हुए कहती है " डाॅक्टर क्या काॅम्पलिकेशन है आप बताओं, डाॅक्टर हा में सर हिला बोले " देखिए बेटा आपको पहले भी पता है उनको ट्युमर है अब उनके हार्ट की दो नसें भी ब्लॉक हो गई है इसलिए हमें इनकी दो सर्जरी करनी होगी हम सर्जरी कर भी देंगे पर फिर भी इनके बचने के चांस बहुत कम है मतलब फाइव प्रसेंट है, ।

झलक जब यह सुनती है तो आंखों में ठहरी नमी अब आंसू बनकर बाहर का सफर तय करने लग जाती है।

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