कोई मिल गया ( koi mil gaya ) - Chapter 12
कोई मिल गया ( koi mil gaya )मरने की कोई वजह ?
वो लड़की जो बस कुदने को तैयार थी अपना चेहरा घुमाकर अपने पास खड़े रूद्रज को देखती है।
रूद्रज उस लड़की की तरफ नहीं देख रहा था वो ऊपर से निचे देख रहा था अभी वो सोच रहा था अगर यह लड़की यहाँ से निचे कुदी तो जिंदा बचेगी या फिर नहीं,,, उसका दिमाग उसके सामने एक फिल्म बनाकर उसको दिखा रहा था,, कि अगर यह लड़की निचे गिरी तो इसके साथ क्या क्या होगा, तभी वो लड़की कहती है।
जिंदगी में कोई ऐसे पुछने वाला नहीं है,,
तो बस इसलिए जिंदगी खत्म करना है ?
नहीं,, वजह बहुत होती है मरने के पिछे ? यह एक वजह ही नहीं है और भी है,, बहुत सारी हैं।
तो छोटी छोटी वजह से जिंदगी खत्म करने पर सब सही हो जाता है,,,
पता नहीं ?
फिर क्यों मरना ! पहले सारी वजह पता करो उसके बाद मरना,, तुम्हारे मरने के बाद क्या बदल जाएगा, क्या मरने के बाद वो हासिल हो जाएगा जो जिते जी तुमको नहीं मिला है, अगर नही, तो मरना कोई बैस्ट ओपशन नहीं है और वैसे भी अगर तुम यहाँ से कुदी तो तुम मरोगी नहीं,, तुम्हारे बांए हाथ में दो फैक्चर आएगें, तुम्हारा हाथ जिंदगी भर काम नहीं करेगा और बाई तरफ चेहरे की हालत बिगड़ जाएगी।
तुमको कैसे पता यह सब ? वो लड़की रूद्रज की बात सुनकर हैरानी से कहती है।
रूद्रज उसको कुछ कहने की बजाय है पुल से नीचे की तरफ कूद जाता है और उसे लड़की की तरफ देखते हुए कहता है अगर यकीन नहीं हो रहा है तो कुद कर देख लो ।
वह लड़की अब भी वही पुल पर खड़ी रहती है जबकि रूद्रज वापस कार की तरफ चला गया था और कार के पास खड़ी झलक रूद्रज को वापस आता देख हैरान रह जाती हैं " यह वापस आ रहा है इस लड़की को बचाना था जबकि यह लड़की तो वहीं पर खड़ी है उसे बचाने गया था या फिर सैर सपाटा करने।
रूद्रज कार तक आता है तब तक वो लड़की भी मरने का इरादा ड्रॉप कर चुकी थी, रूद्रज की बातें सिधी थी बिना उलझन भरी पर उन बातो का मतलब समझ कर वो लड़की इतना समझ चुकी थी कि उसके मरने से कुछ बदलने वाला नहीं है जो परिस्थितियां आज है वो कल नहीं होगी,, और वक्त इतना भी मुश्किल नहीं होता कि गुजार नहीं जा सकता है बस उसको वक्त बिताना है और फिर सब सही होगा।
ऐसा क्या कहा तुमनें उस लड़की से मैने तो सोचा कोई फिल्मी सिन होगा तुम उस लड़की को लेकर इस तरफ गिरोगे,, और व़ो लड़की मरने की दोबारा कोशिश करेगी, तुम उसको फिर से पकड़ोगे और वो लड़की रोते हुए तुम्हारे गले लग जाऐगी।
सिन अच्छा था मिस हो गया , ऐसा भी कर सकता था ना मैं।
रूद्रज झलक को देखकर ऐसी शक्ल बनाता है जैसे उसको अफसोस हो रहा हो कि वो यह सिन नहीं कर पाया।
उसकी ऐसी शक्ल देखकर झलक मुह बनाते हुए बोली " रहने दो तुम तो हल्के में ही लोगे मुझे, अब हमें देरी हो रही है तो चले।
रूद्रज झलक को कुछ ना कहकर गाड़ी में बैठ जाता है दुसरी तरफ झलक भी आकर गाड़ी में बैठ जाती है।
एक बात बताओं, अगर आज वो लड़की मर जाती तो ,,,
तो ? उसके नाम का एक इंसान दुनिया से कम हो जाता और क्या !
पर उसके परिवार को तकलीफ होती ना,, झलक खिड़की से बाहर कि तरफ देखते हुए कहती है,,
आईथिंक कुछ वक्त के लिए, उसके बाद वो उसको भुलकर अपनी लाइफ में आगे बढ़ जाते और क्या !
ऐसा नहीं हो सकता कोई कभी मरे ही ना,,, झलक तुरंत रूद्रज को देखकर कहती है।
तुम क्या चाहती हो इस दुनिया में लोगों की भीड़ बढ़ती जाए, जो जन्म लेता है उसको मरना भी होता है यह सत्य है पर बैमौत मरना सुसाइड करना यह,, बस अपने दर्द की नुमाइश करने जैसा है।
झलक कुछ वक्त तक रूद्रज कौ कहती है क्योंकि यह बात कहते वक्त रूद्रज के फैस के एक्सप्रेशन अलग थे, उसको जानना था कि रूद्रज ऐसा क्यों बोल रहा है पर तब एक एयरपोर्ट आ गया था।
रूद्रज कार पार्किंग एरिया में रोकता है दोनों कार से निकलकर एयरपोर्ट के अंदर चले जाते हैं रूद्रज ने झलक का सामान नहीं उठा रखा था झलक ने अब भी अपना सामान खुद ही उठा रखा था । वह आगे आगे चल रहा था और झलक अपना सामान लिए हुए उसके पीछे-पीछे जा रही थी । कुछ वक्त बाद में फ्लाइट का अनाउंसमेंट होता है रूद्रज झलक को देखते हुए बोला
" अब तुम जाओ '
झलक हा में सर हिलाकर आगे बढ़ जाती है और रूद्रज वापस जाने के लिए पलट जाता है,, रूद्रज का बिहेवियर झलक को अजीब भी लग रहा था पर वो रूद्रज को कुछ भी नहीं कहती है और फ्लाइट में चली जाती है।
वही रूद्रज एयरपोर्ट से निकल गया था वो अब बनारस की सड़कों को फुल स्पीड में कार दौड़ा रहा था,, उसकी कार स्पीड बहुत तेज थी,, अगर कार गलती से भी कही अगर टक्करा जाए तो तो उसके चिथड़े उड़ सकते थे।
पर रूद्रज को इससे फर्क नहीं पड़ रहा था वो एक जगह आकर कार रोकता है और सिट बैल्क निकालता है तभी उसको झलक की सिट पर उसका झुमका दिखाई देता है।
रूद्रज कुछ वक्त तक उस झुमके को देखता रहता है फिर उसको उठा पॉकेट में डाल लेता है और कार से बाहर निकल जाता है।
वो इस वक्त था उसी पुल पर जहाँ से वो लड़की गिर रही थी ।
वो उस पुल पर वापस से ऊपर की तरफ जाकर खड़ा हो जाता है वो पुल काफी गहरा था निचे एक नदी लगातार बहती जा रही थी ऐसा बिल्कुल नहीं था कि वो लड़की यहाँ से गिरती और जिंदा बच जाती। रूद्रज ने उससे झूठ कहा था और उस लड़की ने उसके झूठ पर विश्वास कर लिया था।
रूद्रज के दोनों हाथ पॉकेट में थे और वो वैसे ही उस पुल से निचे की तरफ कुद जाता है और एक जोर का शौर पानी में होता है और कुछ वक्त में पानी शांत हो जाता है।
अगली सुबह :-
झलक रात को ही घर आ गयी थी इस वक्त वो अपने कमरे में सो रही थी।
जब वहाँ पर स्वेता आ जाती है वो झलक को देखती है जिसका ब्लैकेट आधा निचे गिरा हुआ था और आधा ऊपर था यह देखकर वो मुस्कुरा देती है और ब्लैकेट को उठाते हुए बोली " झलक बच्चा उठिए देखिए सुबह हो गयी है और आज आपको कॉलेज भी तो जाना है।
झलक दुसरी तरफ मुह घुमाते हुए बोली " माँ थोड़ी देर और सोने दे ना,, मुझे अभी निंद आ रहा है।
आप कॉलेज के लिए लैट हो जाएगी बच्चा ! अंशिका तो रेड्डी भी हो गयी है,,, ।
झलक उठ कर बैठ जाती है उसके सारे बाल बिखरे हुए थे,, वो स्वीता की तरफ पीठ करके बैठ जाती है स्वीता मुस्कुराते हुए झलक के बाल बांधने लग जाती है और वो उसके बालों को जुड़ा बनाते हुए बोली " आप तैयार होकर निचे आ जाए हम नाश्ता लगा रहे हैं आपके लिए ' ।
झलक हा में सर हिला देती है स्वीता रूम से चली जाती है झलक वापस सोने की फिराक़ में थी उसको सुबह सुबह बहुत ज्यादा निंद आती थी अगर उसकी नजर घंडी पर नहीं जाती तो वो वापस सो भी जाती,, घंडी में इस वक्त साढ़े आठ हो रखा था जिसे देखकर झलक कि निंद ही उड़ जाती है।
वो जल्दी से उठ जाती है और भागते हुए वाशरूम में घुस जाती है कुछ वक्त में वो नहाकर बाहर आती है उसके चेहरे पर चिढ़ साफ दिखाई दे रही थी।
वो जल्दी जल्दी तैयार होती है और निचे चली जाती है इस वक्त उसमें यैलो कलर का अनारकली सुट पहन रखा था और बालों की चोटी बनाई हुई थी जो उसकी कमर से निचे तक झुल रही थी।
आ गयी आप, हमें लगा आप दोबारा सो गयी हम आपको देखने ही आ रहे थे,, स्वीता झलक को देखते हुए कहती है।
झलक अपना फर्श एक तरफ रखते हुए दादी के पास बैठते हुए बोली " सो जाते अगर वक्त पर नजर नहीं जाता तो माँ,, ।
हा पता था रागिनी ने बताया था एक बार उसको सबसे ज्यादा मुश्किल काम आपको सुबह जल्दी उठाना लगता था,, ।
हा वो तो दो घंटे पहले ही उठाने लग जाती थी तब जाकर हम वक्त पर उठ पाते थे कभी कभी तो हम कॉलेज के लिए लेट भी हो जाते थे,, ।
झलक हल्का मुस्कुराते हुए कहती है।
पर यहाँ यह चांस आपको नही मिलने वाला भाभी,, क्योंकि माँ को पता है हमारी निंद कैसे भागेगी,,
अंशिका मुस्कुराते हुए स्वीता की तरफ देखती है स्वीता उसको देखकर बोली " तुम हमारा सिक्रेट रिविल नहीं कर सकती हो,,
कैसा सिक्रेट ?
हम बताते हैं बेटा आपको स्वर्णा बोली,, स्वीता उनको बताने से रोक रही थी पर स्वर्णा झलक को बताते हुए कहती है।
आप एक बार घड़ी देख लो आपको पता चल जाएगा,, झलक तुरंत घड़ी की तरफ देखती है और टाइम देखकर उसकी आंखे बड़ी हो जाती है।
इसका मतलब, आपने हमारी घड़ी का टाइम आगे कर दिया था,, अब तक सुना था और आज देख भी लिया,, ।
हा तो हम क्या करते ऐसा ना करे तो उठता कौन है इस घर में सबके सब एक जैसे ही है सबको उठाने के लिए हमें रोज कुछ ना कुछ करना ही होता है।
तभी अंशिका बोली " और हा माँ हमेशा ऐसा नहीं करती है कयी बार तो यह टाइम चेंज ही नहीं करती है और हमको लगता है कि हम थोड़ा और सो ले और इसी चक्कर में लेट भी हो जाते हैं ।
सब बाते सुनकर झलक को इतना समझ आ गया था कि उसको वक्त पर उठना ही होगा वरना जिस हिसाब से वो उठती है उस हिसाब से तो वो रोज लेट ही होने वाली है,, कुछ वक्त बाद वो नाश्ता करके अंशिका के साथ कॉलेज के लिए निकल जाती है।
आज भले ही उसका पहला दिन था पर उसको ऐसा कुछ लग नहीं रहा था अंशिका उसको कॉलेज के बारे में बता रही थी झलक और रूद्रज दोनों की एक क्लास ही अलग थी एक वक्त झलक जहाँ कि Home Science की क्लास होती थी उसी वक्त रूद्रज की Business Communication , Economics & Accounts की क्लास होता था।
बाकी सभी क्लासे उनकी साथ ही थी इसलिए अंशिका उसको रूद्रज के दोस्तों के बारे में बता रही थी।
अंशिका दी,, मुझे आपका एक फैवर चाहिए,, अचानक झलक कहती है
आपको पुछने की जरूरत थोड़ी है झलक आप बताओं,,
वो हम और रूद्रज पति पत्नी है यह बात आप किसी को मत बताना, हम नहीं चाहते हैं कॉलेज में अभी किसी को पता चले, और जहाँ तक मुझे लगता है रूद्रज भी यही चाहते हैं।
उस नालायक का तो तुम छोडो़ ही वो कॉलेज आ जाए वही बहुत, अभी वो बनारस में ही रह गया है दस दिन तक तो वो वैसे भी नहीं आने वाला है,, और उसकी वो गर्लफ्रेंड, तुम्हे उससे कोई दिक्कत नहीं है क्या?
नहीं,,
वा यार कैसी पत्नी हो तुम,, ।
अभी हमारा रिश्ता वैसा है कहा जहाँ हमें जलन होगी,, ।
वो भी है।
दोनों बाते करते हुए कॉलेज पहुंच जाती है । अंशिका झलक को सबसे पहले एचओडी के ओफिस में लेकर जाती है जहाँ कुछ फोर्मलटिज बाकी थी जिसको वो पुरा करती है।
उसके बाद दोनों बाहर आ जाती है अंशिका टाइम देखते हुए बोली " झलक तुम्हारा क्लास दस मिनट के बाद शुरू होने वाला है तुमको लेफ्ट की तरफ जाना है और फोर्थ रूम में तुम्हारा क्लास है।
सबसे पहली क्लास विजय सर की है, तो बेस्ट ओफ लक,, हम दोनों कैंटिन में मिलेगें।
झलक हा में सर हिला देती है उसके बाद दोनों अपने अपने रास्ते चली जाती है कॉलेज अच्छा खासा बड़ा था और बहुत खुबसूरत था झलक अपना फोन निकाल कर देखती है वो यह देख रही थी कि रूद्रज ने उसको मैसेज किया की नहीं रूद्रज का मैसेज ना आया देखकर वो बोली " हु यह भी भला कोई बात होती है इंसान को कम से कम मैसेज करके पुछ भी लेना चाहिए कि पहुंच गयी है कि नहीं, क्या हो अगर रास्तै में फ्लाइट क्रेश हो जाए तो?
कैसा इंसान है यह खैर खबर लेना भी नहीं जानता क्या ?
तभी झलक सामने से आ रही शिप्रा से टक्कराते टक्कराते बचती है,, ओहह बहनजी संभाल के,, तुम ?
तुम यहाँ भी आ गयी ?
क्या मतलब है तुम्हारा में यहाँ आ नहीं सकती ? झलक शिप्रा को आंखे छोटी करके देखकर कहती है।
बाय द वे इसको छोड़ो, यह बताओ रूद्रज कॉलेज आया है तुम दोनों तो एक घर से ही आज हो ना, तो उसका फोन नहीं मिल रहा है तुम मुझे बता सकती हो,, ।
मुझे नहीं पता जाकर खुद देख लो,,, झलक हल्का गुस्से में कहती है और शिप्रा के साइड से निकल कर आगे बढ़ जाती है,, शिप्रा के साथ ही उसकी एक दोस्त आयशा भी थी वो आयशा को देखकर बोली " यह ऐसे जवाब क्यों देकर गयी है।
आयशा अपने कंधे ऊपर की तरफ उठा देती है शिप्रा मुह बनाते हुए एक बार झलक को देखकर कहती है " पता नहीं रूद्रज के भाई को यह लड़की पसंद कैसे आई है,, बिल्कुल बहनजी लगती है यह,, कोई स्टाइल नहीं है इसका।
झलक क्लास में पहुंच चुकी थी अभी कुछ बच्चे ही क्लास में आज हुए थे वो एक नज़र सबको देखती है और बिच मे लगी हुई चैयर पर बैठ जाती है।
सब उसको देखते हैं और अपनी अपनी बातों में फिर से लग जाते हैं वही झलक एक बार फिर अपने फोन को देखती है अब उसके दिमाग में शिप्रा की बात आ रही थी " रूद्रज का फोन नहीं मिल रहा है।
" एक बार ट्राई करके देखु क्या,, पर में क्यों देखु जब वो भी नहीं कुछ पुछ सकता तो मैं क्यों करूँ,, पर में उस के बारे में सोच ही क्यों रही हु, मुझे क्लास पर ध्यान देना है भाड़ में जाए रूद्रज चौहान,,,, ।
वही दूसरी तरफ बनारस,,,
उसी पुल के निचे वाली नदी के किनारे रूद्रज का फोन शर्ट पड़ा हुआ था और उसी के किनारे रूद्रज एक पत्थर के सहारे लेटा हुआ था, उसका एक हाथ में सुजन आ गया था और वो बहुत दर्द कर रहा था।
रूद्रज आंखे बंद करके दर्द बर्दाश्त कर रहा था वो उठना चाह रहा था पर उसके पैर में भी दर्द था, पर फिर भी उसके चेहरे पर वही लापरवाही थी जो कुदने से पहले थी,, ।
उसने ऊपर से कुदने से पहले एक बार भी नहीं सोचा कि उसके साथ कुछ भी हो सकता है, ऐसे उसकी मौत भी हो सकती है, या उसके शरीर का कुछ हिस्सा टुट भी सकता है जो टुट गया था,, उसको बस कुदना था वो कुद गया, वो मुश्किल से उस पत्थर के सहारे उठता है और अपने फोन और शर्ट को उठाता है।
उसके पुरे शरीर में दर्द की लहर दौड़ जाती है और ना चाहते हुए भी उसके शरीर से दर्द की आह निकल जाती है वो गहरी सांस लेकर दर्द को बर्दाश्त करने लगता है।
और अपने लंगडाते पैर के साथ वो वहां से जाने लगता है।