कोई मिल गया ( koi mil gaya ) - Chapter 10
कोई मिल गया ( koi mil gaya )रूद्रज जो अब तक एक तरफ बैठा झलक को डुबते देख रहा था,, उसके चेहरे पर कोई घबराहट नहीं थी, थी तो बस लापरवाही थी वो बस ऐसे बैठा झलक को डुबते देख रहा था अब जब झलक पुरी तरह पानी में डुब जाती है तब जाकर वो अपनी जगह से उठता है और पानी के बहाव की तरफ किनारे पर भागने लगता है एक मौका ऐसा आता है जहाँ उसके कदम हल्के रूकते है और अगले पल ही वह पानी में छपाक से छंलाग लगा देता है।
और वो पानी के अंदर चला जाता है एक पल के लिए पानी ठहर सा जाता है तभी रूद्रज पानी से बाहर निकलता है और इस वक्त उसके साथ झलक भी थी , जिसे रूद्रज ने अपने एक हाथ से थाम रखा था वही दूसरी तरफ वो अपने एक हाथ से स्वीमिंग कर रहा था।
आस पास खड़े लोग दोनों को देख रहे थे रूद्रज झलक को लेकर किनारे तक पहुचंता है तभी दो तिन आदमी आगे आकर उसकी मदद करना चाहते है वो हाथ आगे बढ़ाकर झलक कौ पकड़ना चाहते थे, पर जब रूद्रज की जलती निगाहें उनकै ऊपर पड़ती है तो वो पिछे हट जाते हैं रूद्रज झलक को गोद में उठा लेता है।
झलक का शरीर उसके हाथों में झुल रहा था ऐसा लग रहा था जैसे झलक में कोई जान है ही नहीं, रूद्रज झलक को घाट के ऊपर ले जाकर लेटाता है और उसकै चेहरे को देखते हुए, उसकै सिनै पर दोनों हाथ रखकर प्रेस करता है।
ऐसा वो तिन से चार बार करता है तब जाकर झलक खांसने लगती है वो जोर से खांसते हुए उठकर बैठ जाती है।
उसकी धड़कन बहुत फास्ट चल रही थी वो आसपास देखती है तो कुछ लोग उसको देख रहे थे तभी उसकी नज़र रूद्रज पर जाती है जो अब उसकै पास से खड़ा हो गया था और अपनी पैंट पोकेट में हाथ डाले उसको देख रहा था।
झलक रूद्रज को देखकर गुस्से में कहती है " तुम पागल आदमी, तुमको में ढुबते हुए दिखाई नहीं दे रही थी में तुम्हें आवाज लगा रही थी और तुम इतना शांति से कैसे बैठे रह सकते हो?
क्योंकि मैं देख रहा था कोई इंसान अपनी जान बचाने के लिए कोशिश कब तक कर सकता है पर तुमसे यह उम्मीद करना बेकार था तुम इस पानी में चार मिनट तिन सेकण्ड नहीं टिक पाई।
झलक रूद्रज को ऐसे देखती है जैसे किसी पागल को देख रही हो वो गुस्से में उठते हुए बोली " अगर तुम मेरी जगह होते तो क्या करते बताना जरा।
लास्ट तक कोशिश करता!
और तुम्हारा लास्ट कब तक आता, ।
जब तक दस दिन गुज़र नहीं जाते तब तक ! मैं एक बार में दस दिन तक बिना खाए पिए पानी में रह सकता हु,,।
इतना कहकर वो वहा से जाने लगता है रूद्रज की बात सुनकर झलक का मुह खुला का खुला रह गया था ।
हैऐऐ तुम पागल हो। ? झलक रूद्रज को जाते देखकर पिछे से चिल्लाते हुए कहती है रूद्रज रूकता और हल्का सा टर्न होकर झलक को देखकर बोला " यप।
झलक उसको देखती रह जाती है वही रूद्रज उसको वही छोड़कर आगे चला गया था झलक मन ही मन बोली " यह कैसा इंसान है बेसर्म भी और पागल भी मम्मा जान किस जन्म का बदला लेकर गयी आप हमसे ' ।
वो अब नदी की तरफ देखते हुए बोली " जो भी हो मम्मा जान हम किसी कि जिंदगी में जबरदस्ती नहीं घुसेंगे, आप हमें इस शादी में बांध कर हमें छोड़कर चली गई पर , यही शादी ज्यादा वक्त कि नहीं है,, मम्मा जान रियली सॉरी मम्मा जान।
आई लव यू, एंड एवरी डै मिस यू,, ।
तभी उसको एक बच्चे की आवाज सुनाई देती है " दीदी,, दीदी।
हा कहिए क्या हुआ, कुछ चाहिए आपको,, झलक उस बच्चे को देखकर कहती है।
वो बच्चा एक तरफ इशारा करते हुए कहता है वो भईया आपको बुला रहे हैं।
झलक उस तरफ देखती है जहाँ रूद्रज लापरवाही से खड़ा उसको ही देख रहा था वो उस बच्चे के बाल बिगाड़ते हुए उस तरफ चली जाती है।
रूद्रज इस वक्त पार्किंग में खड़ा था झलक उसके पास जाकर बोली " चले !
रूद्रज अपना फोन उसके सामने करते हुए बोला " यह लो डैड को कॉल करो और उनको कहो की हमें न्यु कार चाहिए ।
क्या ?
तुमको कम सुनाई देता है क्या, ।
झलक रूद्रज की बात सुनकर उसको घुरते हुए बोली " मुझे सही से सुनाई देता है पर जब कार हमारे पास है तो हम न्यु कार क्यों ले रहे हैं।
क्योंकि हमारी कार चोरी हो गयी, रूद्रज लापरवाही से कहता है झलक को जैसे सदमा लगता है वो चिल्लाते हुए बोली " और तुम यहाँ खड़े खड़े किसका इंतजार कर रहे हो पुलिस कंपलेन क्यों नहीं किया,, और ऐसे हमारी कार चोरी कौन कर सकता है।
रूद्रज अपने कान में अंगुली डालकर कान हिलाते हुए कहता है " मुझे सुनाई देता है तुम धिरे भी बोल सकती हो,,, ।
जो मैंने पूछा है उसका जवाब दो,, झलक रूद्रज का हाथ निचे करते हुए गुस्से से कहती है।
तुम्हे जो मैने कहा है तुम वो नहीं कर सकती क्या ? डैड को काॅल करो।
में क्यों करू आप भी तो कर सकते हो, और हमें पुलिस स्टेशन जाना चाहिए ना,, झलक इरिटेट होते हुए कहती है।
रूद्रज अपने हाथ की तर्जनी अंगुली को हल्का दबाते हुए बोला " मुझसे टाइम वैस्ट नहीं किया जाता है तुम डैड को काॅल कर भी रही हौ या में तुम्हें यही छोड़कर जाऊ ' ।
झलक रूद्रज को गुस्से से देखती है उसका मन कर रहा था वो रूद्रज की बेवकूफी पर उसका सर फोड़ दे पर वो ऐसा कर भी नहीं सकती थी।
वो गुस्से से फोन हाथ में लेती है और रूद्रज के स्क्रीन पर चार से पांच लोगों की wallerpaper देखती है जिसमें दो लड़की तो वही थी जिसकी तस्वीर उसके कमरे में लगी हुई थी और दो लड़के थे जिनमे एक तैरहा चौदहा साल का बच्चा था,, वो उसको इग्नोर मारती है।
और हर्षवर्धन को कॉल मिला देती है रूद्रज अब उससे कुछ दुरी पर खड़ा था उसकी चाल में लापरवाही थी वो अपने आसपास ऐसे देख रहा था जैसे उसको किसी चीज की खोज हो।
उधर दुसरी तरफ :-
हर्षवर्धन इस वक्त एक मिटिंग अटैंड कर रहै थे जब उनका फोन रिंग करने लगता है आज पहली बार ही ऐसा हुआ था जब वो फोन को साइलेंट करना भुले थे, सभी एम्प्लाई उनकी तरफ देखने लग जाते हैं।
हर्षवर्धन अपने फोन की तरफ देखते हैं नंबर देखकर वो भी आश्चर्यचकित रह जाते हैं इस नंबर से शायद ही उनके पास इन सालों में कॉल आया था, वो सबको एक्सक्यूज कर मिंटिग हॉल से बाहर की तरफ चले जाते हैं।
और बाहर जाते ही वो कॉल रिसीव करते हैं जब सामने से झलक की आवाज आती है " हैलो अंकल,,
झलक बेटे आप ? क्या हुआ सब ठीक है ना !
अंकल वो हमें आपसे कुछ कहना था वो दरसल हमारी कार चोरी हो गई है , हमनें कहा इनसे की पुलिस स्टेशन चले पर यह जा नहीं रहे हैं, और आपसे कहने को बोला है कि न्यु कार चाहिए !
झलक एक ही सांस में हर्षवर्धन को सबकुछ बता देती है हर्षवर्धन निराशा में गर्दन हिलाते हुए बोले " यह तिसरी कार है जो इनकी चोरी हुई है, यह लड़का कभी नहीं सुधर सकता पहले इसका करैडिट कार्ड इसके पास था, तो यह लापरवाही करते अब हमने इनसे वो भी छिन लिया तो भी यह लापरवाही कर रहे हैं।
हम बोलतै है किसी को आप कहा हो इस वक्त ?
झलक रूद्रज को देखते हुए कहती है " हम घाट पर है अभी !
ठीक है में बोलता हु और रिपोर्ट में करवा दुंगा स्टेशन में आप बेफ्रिक रहे, झलक ठीक है बोलकर फोन काट देती है अब उसको यह समझ नहीं आ रहा था कोई इतना लापरवाह कैसे हो सकता है।
क्या इसके पास पैसे है इसलिए इसको पैसो की कोई फ्रिक नहीं, पर फिर भी इतना लापरवाह होना तो गलत है ना , झलक मन ही मन बड़बड़ाते है उसके मन में रूद्रज की इमेज एक नाकारा, बेसरम और लापरवाह इंसान की बनती जा रही थी, उसकी हरकते उसको अच्छा नहीं एक बुरा इंसान बना रही थी।
रूद्रज इस वक्त एक पैड कै पास खड़ा था और उसके पीठ लगाए हुए वो सिगरेट का कस ले रहा था झलक उससे कुछ दुर खडी़ थी रूद्रज एक टक बहती हुई नदी के पानी की गहराई को देख रहा था और सिगरेट पिए जा रहा था।
वहा पर उसने एक नहीं ना जाने कितनी सिगरेट के कस लगा डाले थे तब जाकर उनके पास एक आदमी आता है।
वो रूद्रज की तलाश कर सिधा उसके करीब आते हुए बोला " हैलो सर आपकी कार ' ।
रूद्रज अब जाकर अपनी नजरें हटाता है और उस आदमी से कार की चाबी लेता है। वो आदमी वहा से चला जाता है झलक एक तरफ बैठी थी वो भी अब खडी़ होकर उसके पास आ जाती है रूद्रज कार को देखता है जो ब्लैक कलर की कार का न्यु एडीशन था पर उसको देखकर रूद्रज का मुह बन जाता है।
झलक उसको देख रही थी रूद्रज को मुह बनाता देखकर उसका मन अब और ज्यादा खट्टा हो जाता है वो दरवाजा खोलकर कार के अंदर बैठ जाती है।
रूद्रज कार में बैठ उसको स्टार्ट करता है होटल की तरफ चल देता है कुछ वक्त में उनकी कार होटल में आकर रूकती है।
दोनों की रास्ते में एक बार भी बात नहीं हुई थी दोनों अंदर चले जाते है झलक को भुख लगा था वो रूद्रज से इस बारे में कहने ही वाली थी कि रूद्रज बोला " कमरें में जाकर खाना ओडर कर देना मुझे डिस्टर्ब मत करना , और आठ बजे तुम्हारी फ्लाइट है तो रेड्डी रहना।
और तुम ?
मुझे फ्लाइट नहीं पसंद में कार से आउगा, कब आउगा पता नहीं, तभी लिफ्ट ओपन होता है और रूद्रज बाहर निकल जाता है झलक पिछे यह समझती रह जाती है कि रूद्रज के कहने का मतलब क्या था वो लिफ्ट से बाहर निकल रूद्रज को कुछ कहती उससे पहले ही रूद्रज अपने कमरे में जा चुका था।
झलक उसके कमरे के दरवाजे को देखते हुए मन ही मन बोली " बड़ा अजीब लड़का है इसके साथ में रही तो मुझे लगता है मेरी आधी से ज्यादा बाते मेरे अंदर ही रह जानी हैं, अच्छा है यह मेरे साथ नहीं रहना चाहता है।
वो बड़बड़ाते हुए अपने कमरे के अंदर चली जाती है
शाम सात बजे
झलक रेड्डी थी वापस बनारस से मुंबई जाने के लिए वो एक बार अपना फोन देखती है जिसमें उसका और उसकी मम्मा का फोटो लगा हुआ था अब वो अपना सामान लेकर कमरे से बाहर आती है तब उसको रूद्रज भी बाहर मिल जाता है जो अभी अभी बाहर निकला था।
वो झलक को एक नज़र देखकर बोला " चले ?
झलक हा में सर हिला देती है रूद्रज आगे बढ़ जाता है झलक उसके पिछे अपना छोटा सा बैग उठाकर जा रही थी कुछ ही वक्त में वो दोनों कार में बैठे थे।
रूद्रज चुप चाप कार ड्राइव कर रहा था वही झलक बनारस को देख रही थी जहाँ वो अपनी मम्मा को हमेशा के लिए छोड़कर जा रही थी।
अभी वो हाइवे पर थे जहाँ रूद्रज अचानक कार रोक देता है और झलक का चेहरा डैस्कबोर्ड से जाकर टक्कराता है।
क्या कर रहे हो तुम,, वो गुस्से में कहते हुए रूद्रज की तरफ देखती है जो अब कार से बाहर निकल गया था झलक उसको जाता देख रही थी रूद्रज एक तरफ अपने कदम बढ़ा रहा था जहाँ हाइवे कै ऊपर बने उस पुल की दिवार पर एक लड़की खड़ी थी ,
क्या यह सुसाइड कर रही है चलो अच्छा है आज इसने पहली बार कुछ अच्छा काम तो किया, झलक भी कार से बाहर निकल जाती है तब तक रूद्रज उस लड़की के पास पहुंच चुका था।
उस लड़की की उम्र यही कोई इक्कीस साल के आस पास होगा,, ग्रे कलर की शोर्ट कुर्ती और वाइट पैंट पहनने वो लड़की आंखों में आंसू लिए कुदने को तैयार ही थी जब रूद्रज उसके बगल में खड़ा होते हुए निचे देखने लगता है।