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Chapter 3

कोई मिल गया ( koi mil gaya ) - Chapter 3

कोई मिल गया ( koi mil gaya )

रात आठ बजे

सिटी हाॅस्पिटल

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एक कार सिटी हाॅस्पिटल के आगे आकर रूकती है और उसमें से एक ब्लैक शर्ट ब्लैक पैंट और ब्लैक सुज पहनने एक लड़का बाहर निकलता है छ: फुट हाइट, हल्की बियर्ड, सुनहरी ब्राउन आंखे एक हाथ में वाॅच और एक हाथ में मोली का धागा बंधा हुआ था उसने शर्ट की बाजु को फोल्ड करके कोहनी तक कर रखा था।

शर्ट के ऊपरी तिन बटन खुले थे जिससे उसका चौडा सिना दिखाई दे रहा था और उसके गले में पहना रूद्राक्ष का मोती दिखाई दे रहा था वो लड़का अपनी गहरी सुनहरी भुरी आंखों से सिटी हाॅस्पिटल को देखता है और अपने कदम अंदर की तरफ बढ़ा देता है।

वही झलक ICU के बाहर बैठी थी उसकी आंखों में अब भी नमी थी जो उसके आंखों में ठहर गयी थी एक पल में उसकी जिंदगी बदल रही थी जिसके लिए वो खुद को तैयार कर रही थी तभी कदमों की आवाज उसके कानों में पड़ती है पर झलक एक बार भी ऊपर की तरफ नहीं देखती है उसके पास बैठी स्वेता खड़े होते हुए कहती है " रूद्रज आ गए तुम ' वो लड़का और कोई नहीं रूद्रज चौहान था चौहान खानदान का छोटा बेटा ' ।

रूद्रज अपनी माँ को देख सर हिला बोला " आपके सामने खड़ा हु इसका मतलब क्या हो सकता है माँ ' स्वेता का मुह बन जाता है तभी उसके पिछे से अंशिका आते हुए पानी का बोतल स्वेता को देते हुए कहती है " छोटे कभी तो सही से जवाब दिया कर ' ।

सही जवाब देना मेरे जेनेटिक्स में नहीं है, अब जिस काम के लिए बुलाया है वो करें, यह कहते हुए वो एक नज़र वही बैठी झलक पर डालता है जो गर्दन झुकाए बैठी थी वो तुंरत उससे नजर हटाकर स्वेता को देखता है, तभी स्वेता कहती है " मैने तुम्हारे पापा से कहा था वकील भेजने को अभी तक,,,, लो आ गए,, यह कहते हुए वो पिछे की तरफ इशारा करती है।

वहाँ एक उम्र दराज शख्स जिसकी उम्र लगभग पचास के आसपास थी और उसके हाथ में एक फाइल थी वो उनके पास आकर कहता है " थोड़ा लेट हो गया उसकै लिए माफ करें ' ।

" कर दिया ' रूद्रज शांत नजरों से वकील की तरफ देखते हुए कहता है वकील तुंरत उसकी तरफ देखने लग जाता है स्वेता रूद्रज के कंधे पर मारते हुए उसको आंखे दिखाकर कहती है " रूद्रज बडे़ है वो आपसे , कुछ तो तमीज से बात करो '

जब है ही नहीं तो बात कैसे करूं और यह लेटे आए हैं साॅरी कहा है तो मैने इनको माफ कर दिया बस इतना ही तो है, स्वेता आगे कुछ नहीं कहती है वो झलक को देखती है जो अब भी वैसे ही बैठी थी स्वेता झलक के कंधे पर हाथ रखतै हुए कहती है " झलक बेटा उठो, रूद्रज आ गया है, झलक जो बिल्कुल शांत बैठी थी स्वेता के कहने पर नजर उठाकर उसको देखती है और खडी़ हो जाती है।

स्वेता दोनों को हाॅस्पिटल में बने मंदिर में लेकर जाती हैं सबसे पहले वो मंदिर में रखा सिंदूर उठाकर रूद्रज के सामने करती है रूद्रज एक नज़र सिंदूर की तरफ देख स्वेता की तरफ देखता है स्वेता उसको आंखों से इशारा करते हुए कहती है " झलक की मांग में लगाएं ' ।

रूद्रज अपना हाथ बढाकर सिंदूर उठाता है और झलक की तरफ देखता है जो अब भी उसको नहीं देख रही थी वह सामने लगी गणपति जी की मुर्ति को देखें जा रही थी रूद्रज उसकी मांग में सिंदूर लगा देता है स्वेता अपने गले से चैन निकाल कर रूद्रज को झलक को पहनाने का कहती है रूद्रज वो चैन झलक के गले में डाल‌ देता है।

स्वेता वकील को इशारा करती है तो वो अपने हाथ में पकड़े पैपर आगे बढा देता है रूद्रज साइन कर देता है स्वेता झलक को देखती है जो अब भी गणपति को देखे जा रही थी स्वेता उसके कंधे पर हाथ रखती है तो झलक उनकी तरफ देखने लगती है स्वेता उसको पैन पकडा़ देती है झलक पैपर को देखती है और साइन कर देती है दोनों एक दूसरे को‌ माला पहनाते है और अंशिका दोनों की पिक्चर क्लिक कर लेती है।

अब हम जाए ' झलक की धिमी आवाज सबको सुनाई पड़ती है स्वेता हा में सर हिला देती है झलक वहाँ से वापस चली जाती है उसने एक बार भी रूद्रज को नहीं देखा था और रूद्रज के लिए यह शौक था क्योंकि कोई भी लड़की उसको देखकर उससे नजरें नहीं हटा पाती थी और इस लड़की ने उसको एक बार भी नहीं देखा था।

वो कंधे उचका मन में कहता है " इतना हैन्सम लड़का सामने खड़ा है फिर भी इस लड़की ने एक बार भी मुझे नहीं देखा पर मुझे क्या नहीं देखना है तो मत देखो ' इतना कहकर वो स्वेता को देखकर कहता है अब अगर आपका काम हो गया तो मैं जाऊ मेरे दोस्त मेरा वैट कर रहे हैं ' ।

स्वेता उसको आंखें दिखाते हुए कहती है " खबरदार अगर ऐसा किया तो पहले रागिनी से मिल लो उसके बाद तुम हमारे साथ मुंबई जाने तक हमारे साथ रहोगे अब झलक की शादी हो गई है तुम्हारे साथ मत भूलों यह ' ।

" और आप भी ना भुले मुझे जबरदस्ती बांधा है आपने ' अगर भाई यहाँ होते तो आज मेरी जगह वो होतें इतना कहकर वो आगे बढ़ जाता है तो स्वेता उसका हाथ पकड़ कहती है " खबरदार रूद्रज अगर तुमने यह बात फिर से कही तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा अब तुम चुपचाप मेरे साथ चलों ' यह कहकर वो रूद्रज पर गुस्से भरी नजर डालती है और आगे बढ़ जाती है।

रूद्रज भी उनके पिछे चला जाता है और उसके साथ अंशिका भी आगे बढ़ जाती है झलक इस वक्त रागिनी के पास थी वो रागिनी के हाथ को पकडे़ हुए थी वो रागिनी को देखकर कहती है " मैने आपका कहा मान लिया अब आप सर्जरी के तैयार हो ना ' रागिनी झलक की मांग देख रही थी और साथ में उसको डाॅक्टर की बात याद आ रही थी जो रागिनी के होश में आने से पहले बात कर रहे थे " डाॅक्टर कह रहे थे कि इस लैडी को शायद नहीं बचा पाएगें, बैटर होगा इनकी सर्जरी ना करे क्योंकि वो बहुत रिस्की है ज्यादा से ज्यादा यह दो दिन की मेहमान है क्योंकि इनकी कैंसर की सैल्स बाॅडी के अंदर फट गयी है जिस वजह से इनको सांस लेने में प्रोब्लम है और इसी वजह से इनको हार्ट अटैक आया था।

इनकी बेटी को देखा तुमने बाहर बैठी अब तक रो रही है, डाॅक्टर ने कहा है कि वो कोशिश करेंगे शायद ये बच जाए पर इनके बचने के चांस बहुत कम है !

तभी दुसरी नर्स कहती है पर डाॅक्टर ने फाइव प्रसेंट चांस बताएं है उनकी बेटी को ' उसकी बात सुनकर वो नर्स कहती है ' वो इसलिए कि डाॅक्टर तनेजा कश्यप यहाँ मौजूद होती पर उनकी अमरजेंसी सर्जरी आ गयी है और उस मरीज को वो बहुत पहले से ट्रीटमेंट दे रही थी तो उनको वहाँ जाना पड़ा।

इस बिच दोनों नर्सों का जरा भी ध्यान नही था कि रागिनी होश में आ गयी है रागिनी जब कुछ नहीं कहती है तो झलक उसका हाथ हिलाते हुए कहती है " मम्मा जान क्या हुआ आप कुछ बोल क्यों नहीं रहें ' तभी दरवाजा खुलता है और स्वेता के साथ रूद्रज अंदर आता है रूद्रज रागिनी को देख रहा था और रागिनी उसको स्वेता रागिनी को देखकर कहती है रागिनी यह रूद्रज मेरा बेटा इसकी शादी झलक से करवाई है मैंने तुम फ्रिक मत करो हम है झलक के साथ अब सर्जरी के लिए मना मत करना , और बेकार का कुछ भी ऐसा वैसा नहीं सोचना।

रागिनी स्वेता को देखकर मुस्कुरा देती है और झलक के हाथ को अपने होठों के पास लेकर जाती है और चुमते हुए कहती है " मुझे कुछ हो जाए तो मेरी बेटी का ख्याल रखना स्वेता ' आपको कुछ नहीं होगा मम्मी जान आप ऐसी बातें करना बंद करें प्लीज ' ।

झलक रूआंसा आवाज में कहती है कुछ वक्त बाद रागिनी की सर्जरी स्टार्ट हो जाती है डाॅक्टर ने सारी कंडिशन झलक को बता दी थी राजेश और सुनिता अब तक यही पर थे झलक के साथ और रूद्रज भी रूका था झलक icu के बाहर सोफे पर बैठी थी उसकी नजरें icu के दरवाजे पर टीकी हुई थी जहाँ से उसको उम्मीद थी कि उसकी मम्मा जान वापस आएगी, स्वेता ने उसको खाना खिलाना चाहा पर झलक ने नहीं खाया ।

हाॅस्पिटल की सारी फोर्मलटी रूद्रज ने पूरी कर दी थी पांच घंटे की लंबी सर्जरी के बाद डाॅक्टर बाहर आते है इस वक्त उसकै चेहरे पर मास्क और हाथो में दस्ताने थे और चेहरे पर थकावट नजर आ रही थी डाॅक्टर को देखतें ही झलक उठ खडी़ होती है वो डाॅक्टर को देखकर कहती है " डाॅक्टर मम्मा,,,,, वो इससे आगे कुछ नहीं कह पाती है क्योंकि डाॅक्टर ने पहले ही ना में चेहरा हिला दिया था।

और झलक के कदम लड़खड़ा गए थे उसकी आंखों से आंसू बह निकले और वो धम से वापस सोफे पर बैठ गयी, डाॅक्टर स्वेता को देखता है जिसकी आंखें भर आई थी वो कहते हैं " हमनें बहुत कोशिश की थी पर हम उनको नहीं बचा पाए साॅरी,,, ।

यह कहकर डाॅक्टर गर्दन झुका देता है और वहाँ से चला जाता है झलक एक जगह बैठी लगातार जमीन को घुरे जा रही थी और उसकी आंखों से आंसू गिरते जा रहे थे ' रूद्रज स्वेता के कंधे पर हाथ रख लेता है स्वेता जो अब तक अपने आंसू रोके खडी़ थी खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रही थी अब वो रो पड़ती है रागिनी उसकी सबसे अच्छी दोस्त जो थी उसकी आँखों के सामने रागिनी के साथ बिताए सारे पल एक साथ आ रहें थे रूद्रज उनको गले लगा लेता है।

अंशिका जो बैठें बैठें सो गयी थी आवाज सुनकर उठ गयी थी, ।उसकी आंखों में भी आंसू आ जाते हैं वही सुनिता झलक को संभाल रही थी झलक कुछ भी रिएक्ट नहीं कर रही थी बस उसकी आंखों से लगातार आंसू निचे गिरते जा रहे थे।

और वो बिल्कुल मुर्ति के जैसे बैठी थी अगली सुबह इस वक्त, सभी एक नदि के किनारे मौजूद थे वो जगह बिल्कुल शांत थी जहाँ इस वक्त रागिनी का अंतिम संस्कार होना था झलक उनके म्रृत शरीर के पास खडी़ थी वो एक टक रागिनी के चेहरे को देख रही थी कुछ वक्त बाद पंडित जी की आवाज आती है " बेटा आगे की विधि करैं ' झलक एक आखिरी बार अपनी मम्मा जान का चेहरा देखती है और उसके चेहरे को उस वाइट कपड़े से कवर कर देती है।

इस वक्त वो कल वाले कपडों में ही थी वो पडि़त जी की तरफ देखती है और उनके द्वारा बताई जा रही हर एक विधि को पुरा करती जा रही है इस वक्त वो‌ बिलकुल एक रोबोट के जैसे कार्य पुरे कर रही थी कुछ वक्त बाद उसकी आँखों के सामने रागिनी की जलता शरीर था जो अब पंचतत्व में विलिन हो रहा था।

झलक अब स्वेता की तरफ देखती है और कहती है " आप सब घर जाए मैं आ जाऊगी मुझे कुछ वक्त तक मम्मा के साथ रहना है ' स्वेता मना करने को हुई की सुनिता ने उसका हाथ पकड़ उसको रोक लिया और कहती है " इसको यही रहने देते हैं झलक अब तक एक बार भी रोई नहीं है और रागिनी उसके लिए उसका सबकुछ थी, वो कह रही है तो वो घर आ जाएगी हमें उसे अकेला छोड़ देना चाहिए ' ।

स्वेता झलक को देख हा में सर हिला देती है रूद्रज एक नज़र झलक की पीठ देखता है और वो भी उनके साथ चला जाता है इस वक्त वहाँ पर झलक अकेले खडी़ थी ऐसे ही चार घंटे बित जाते हैं झलक एक टक उसी जगह देख रही थी जहाँ अब रागिनी का शरीर राख में तब्दील हो गया था।

तभी पडित पिछे से आवाज लगाकर कहता है " बेटा आप अस्थियों को इस कलश में इकट्ठा कर ले ' झलक गर्दन घुमाकर उनकी तरफ देखती है इस वक्त उसकी आंखे बिल्कुल लाल हो रखी थी वो हा में सर हिला देती है और कलश हाथ में लेकर आगे बढ़ जाती है।

वो रागिनी की अस्थियाँ उस कलश में डाल रही थी कुछ वक्त बाद उसके हाथ में कलश था जिस पर लाल कपड़ा बंधा हुआ था झलक उस कलश को देखकर कहती है " I hate you मम्मा जान , आप ऐसे मुझे बिच रास्ते मे कैसेें छोड़कर चली गई !

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