प्लीज़… मेरा हाथ छोड़ दो
Mafia forced brideतेज़ बारिश थी हर ओर सन्नाटा पसरा था । सिर्फ़ बारिश की बूंदों की आवाज़ और एक दिल दहला देने वाला नाजार था
हाईवे के बीचों-बीच, डार्क वर्ल्ड का माफिया गैंग एक लड़की का हाथ कसकर पकड़े खड़ा था। दूसरे हाथ में गन लड़की खुद को छुड़ाने की जी-जान कोशिश कर रही थी,
"प्लीज़… मेरा हाथ छोड़ दो…"
वो बार-बार चिल्ला रही थी, मगर उसकी आवाज़ भी बारिश की तेज़ आवाज़ में डूब गई।
सामने खड़ी थी इंडियन आर्मी लेकिन किसी की आँखों में जोश नहीं था, सबकी नज़रें झुकी हुई थीं। और उनकी लीड कर रहा था… मेजर विक्रम राठौड़ उस लड़की का पिता।
विक्रम ने भारी आवाज़ में कहा, देख, दुश्मनी मुझसे है… मेरी बेटी को छोड़ दे।"
माफिया ने एक शैतानी हंसी के साथ कहा,"कैसे छोड़ दूं मेजर साहब?
तूने मेरी जान मुझसे छीन ली थी… अब मैं भी तुझे वही दर्द दूंगा।"
विक्रम गरजा, "मैंने उसे नहीं मारा था। इंडियन आर्मी ने नहीं चलाई थी वो गोली।"
झूठ! माफिया चीखा "मैंने अपनी आँखों से देखा था। गोली तुमने ही चलाई थी। और अब… अब मैं वो करूंगा जो तुझे मरने से भी ज़्यादा तकलीफ देगा।"
तभी एक जवान गुस्से में चिल्लाया, हिम्मत है तो सामने आ, माफिया! लड़की को छोड़ दे वरना तेरे आदमियों की लाशें बिछा देंगे यहां!"
और अचानक...एक गोली चली।एक सिपाही घायल हो गया।
माफिया बोला,"पहले अपने साथी तो देख लो… सब मेरे कब्ज़े में हैं।"
लड़की अब तक चीख रही थी। उसकी उंगलियों के नाखून लड़के की कलाई पर गहरे घाव छोड़ चुके थे, मगर उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ा।
मेजर विक्रम की आँखों में आंसू थे। उसने कहा,"जो चाहिए, मैं देने को तैयार हूं… बस मेरी बेटी को छोड़ दे।"
माफिया ने गुस्से में कहा, "मेरे पास सब कुछ है सिवाय मेरी जान के, जो तूने मुझसे छीनी। अब प्यार के बदले प्यार चाहिए।तेरे पास एक मिनट है… सोच ले तेरे सोल्जर या तेरी बेटी?
चारों ओर सोनाटा पसरता था बस बारिश की आवाज़ मैनेजर विक्रम की सांसें तेज़ हो गईं। वो एक पल को देख नहीं पाया फिर उसने सिर झुकाकर कहा, मेरे सोल्जर पल भर में… पूरी दुनिया थम गई।
वो लड़की जो अब तक बस 'पापा… प्लीज़…' कहती रही थी, उसकी जुबान अब बंद थी।उसकी आँखें अब आंसू नहीं बहा रही थीं
क्योंकि अब कुछ बचा ही नहीं था।
कंपकंपाते होठों से निकला "पापा… आप… ये नहीं कर सकते…"
और तभी… माफिया के चेहरे पर एक जीतती हुई मुस्कान आई।
उसने विक्रम की आंखों में झाँकते हुए कहा, "प्यार के बदले प्यार हिसाब बराबर ये बोल कर वो गाड़ी की और चल दिए गाड़ियों का काफिला बढ़ने लगा। लड़की को खींचकर अंदर ले गया दरवाज़ा बंद हुआ और काफिला गायब हो गया
पीछे बस बचा था… एक बाप… जिसका सीना तो था, पर दिल टूट चुका था। एक सोल्जर का कर्तव्य निभाया पर बाप का हार गया,
एक सोल्जर तो जीत पर पिता हार गया। विक्रम राठौड़ अब भी उसी जगह खड़ा था। गाड़ियाँ जा चुकी थीं। जवान उसे देख रहे थे,
पर किसी में कुछ कहने की हिम्मत नहीं थी।
वो ज़मीन पर बैठ गया,भीगी मिट्टी पर हाथ रखकर बस फुसफुसाया —
"माफ़ करना बेटा मैं तुझे नहीं बचा सका
तभी पीछे से एक हाथ उसके कंधे पर रखा गया।
एक तेज़ और समझदार अफसर। विक्रम का सबसे भरोसेमंद साथी।
"सर, हम कुछ कर सकते हैं। अभी भी।हमें अपनी बेटी को वापस लाना होगा एक बाप की हार को एक फौजी की जीत में बदलना होगा।"
विक्रम ने आँखें उठाईं। अब उसमें आंसू नहीं थे वो कुछ नहीं करेंगे मेरी बेटी को में ये जानता हूं और अगर वो हमरी पास रहीं तो जरूर खतरा होगा इसलिए उस को उस के ही साथ रहने दो उस घर में ज्यादा सेफ होगी। रुद्रांश राठौर करेगा उसे दुनिया से हिफाजत । ये मुझे पूरा विश्वास है
तो चलिए मिलते हैं अपने कहानी के हीरो से रुद्रांश सिंह रायजादा उम्र 26 और 26 साल में इतना सब कुछ हासिल कर लिया सब कुछ होता पर भी अकेले हैं
तो बात करते हैं हमरी चासनी राठौर की जिस की उम्र 20 साल की है आपनी नटखट अंदाज से सब का दिल जीत लेती है क्या इसी दिल से रुद्रांश का दिल को पिघला सकती है या फीर मर जाएगी उसकी मासूमियत उसका नटखट
तो चले कहानी की ओर।
सड़कें खाली थीं, लेकिन एक गाड़ी 180 की स्पीड पर शहर की धड़कनों को चीरती चली जा रही थी। उसके अंदर बैठा था एक नाम रुद्रांश सिंह रायज़ादा।
काले रंग की फुल-स्लीव शर्ट उसकी मस्कुलर बॉडी पर यूँ लग रही थी जैसे लोहे पर चमड़ा चढ़ा हो। उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं था, पर उसकी आँखें... बहुत कुछ कह रही थीं।
गाड़ी एक विला के सामने आकर रुकती है। रुद्रांश उतरता है। और उस लड़की मतलब चाशनी को लगभग घसीटते हुए विला में ले गया।
उस ने बार बार हाथ छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी पर कहा वो रुद्रांश के आगे टिक पाती।
रुद्राक्ष के के जाते हैं दरवाजे ऑटोमेटिक खुल रही थी वो अपने तेज कदमों से विला के अन्दर जा रहा था। जैसे ही विला में कदम रखा उस ने एक झटके से चाशनी का हाथ छुड दिया और वो फर्श पर जा गिरी।
घर सारे मेंबर ये देख हैरान थे उन को विश्वास नहीं हो रहा था रुद्राक्ष किसी के साथ ये हरकत करेगा।
तभी एक औरत ने चिल्ला कर कहा ये क्या तरीका है रुद्राक्ष उस को चोट लग गई है।
मां आप को उस कातिल के बेटी की चिंता हो रही है जिस ने आप का सिंदूर चेन्नई की कोशिश की उस की जैसे ही अपने मुंह से अपनी पती की बात सुनी नैन्सी जी का चेहरा कठोर हो गया
चाशनी खड़ी हुई और दरवाजे की ओर भागने लगी इस उम्मीद से इधर से भागा निकल सकतीं हैं पर मासूम को नहीं पता था ये विला का डोर भी रूद्राक्ष के इशारे पर खुलता था।
चाशनी दरवाजे तक पहुंच गई थी और बार बार दरवाजा को खोलने की कोशिश कर रही थी।
बार-बार हैंडल घुमाया... धक्का दिया... झटके से खींचा. पर दरवाज़ा नहीं खुला
किसी के चेहरे पर चाशनी के लिए कोई दाय ना फिकर नहीं थी , थी तो बस नफ़रत।
कुछ देर बाद रुद्राक्ष चाशनी के ओर बढ़ा और उस का हाथ पकड़ ले कर विला के बीच बीच खड़ा कर दिया।
और उस के गोल गोल घुमाने लगा कुछ देर में एक पंडित आया विला में पंडित दे सब कन्फ्यूजन में रूद्राक्ष को देख रहे थे । और फिर रुद्रांश ने कुछ ऐसा बोला जिससे सबके होश उड़ गए
तो क्या बोला होगा रुद्राक्ष ने जानने के लिए बने रहिए हमारे साथ ।