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Chapter 5

मिर्च वाला पोहा

Mafia forced bride

अब आशा आंटी चुप थीं।कमरे में एक अजीब सी awkward silence छाई हुई थी।घड़ी की टिक-टिक तक सुनाई दे रही थी।हर चेहरा थोड़ा झुका हुआ, माहौल कुछ ऐसा था जैसे किसी तूफान से पहले की शांति हो।

अचानक रुद्राक्ष की आवाज़ उस सन्नाटे को चीरती हुई गूंजी आशा आंटी, आप मुझे बता रही हैं या फिर...?

उसकी आवाज़ में वो कड़कपन था जो किसी को भी कांपने पर मजबूर कर दे।

वो अपनी बात पूरी करता, उससे पहले ही एक बहुत ही धीमी, डर से भरी आवाज़ कमरे में गूंजी वो... पोहा मैंने बनाया है...

रुद्राक्ष ने जैसे ही ये सुना, उसका चेहरा एकदम ठंडा हो गया।धीरे-धीरे उसकी नज़र उस दिशा में गई, जहां से आवाज़ आई थी।

थोड़ी दूर पर चाशनी खड़ी थी उसकी आंखें नीचे झुकी हुईं, होंठ हल्के कांप रहे थे,चेहरा बिल्कुल फीका, जैसे किसी ने सारा खून निकाल लिया हो।वो इतनी घबराई हुई थी कि उसकी उंगलियाँ fork के किनारे को मरोड़ रही थीं।

रुद्राक्ष ने अपनी गहरी निगाहों से उसे देखा।एक पल के लिए सबकुछ थम गया।वो कुछ नहीं बोला, बस stare करता रहा।कमरे की हवा तक भारी हो गई थी।

फिर अचानक उसके होंठों पर एक devilish smile आई।धीरे-धीरे, उस मुस्कान में कुछ ऐसा था जो किसी की भी रूह कंपा दे।वो बोला अच्छा... तो यहां आओ, और इस पोहे को खाओ।

उसकी आवाज़ calm थी, पर डराने वाली calmness...जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को चुपचाप बुला रहा हो।

सभी लोग उसे देखकर हैरान थे।किसी को समझ नहीं आ रहा था कि वो ये सब क्यों कर रहा है।आशा आंटी की सांसें अटक गईं, पर किसी में हिम्मत नहीं थी बोलने की।

चाशनी का चेहरा और सफेद पड़ गया।वो डर के मारे वहीं खड़ी रह गई,कदम जैसे ज़मीन से चिपक गए हों।

तभी रुद्राक्ष की आवाज़ और भारी हो गई I said... come here.

उसके तीन शब्द, पर उनमें ऐसी ताकत थी कि चाशनी के दिल की धड़कनें एक पल को रुक सी गईं।

वो डरते हुए, अपने धीमे-धीमे कदमों से चलने लगी।

हर कदम जैसे किसी सज़ा की तरफ जा रहा था।

वो रुद्राक्ष के पास आकर खड़ी हो गई,

सिर झुका हुआ, हाथ कांप रहे थे।

रुद्राक्ष ने कोई expression नहीं दिया,उसका चेहरा बिल्कुल emotionless था।वो धीरे से झुका, एक प्लेट में थोड़ा पोहा निकाला।फिर पास रखे red chili powder के बॉक्स को उठाया।

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किसी को कुछ समझ आता, उससे पहले उसने पूरा डब्बा पोहे में खाली कर दिया।पाउडर की लाल परत उस प्लेट पर फैल गई अब वो पोहा नहीं, किसी जलती आग जैसा लग रहा था।

सभी की आंखें बड़ी हो गईं,कमरे में सन्नाटा और गहरा हो गया।हर कोई shock में था।

कभी वो रुद्राक्ष को देखते, कभी उस प्लेट को।

किसी की हिम्मत नहीं थी कुछ कहने की।

रुद्राक्ष ने वो प्लेट उठाई,धीरे-धीरे उसे चाशनी की ओर बढ़ाया और बोला लो, Foxey... अभी इसे सारा finish करो।

उसकी आवाज़ में एक खतरनाक playfulness थी,

जैसे वो उसकी तकलीफ को देखकर enjoy करने वाला हो।

चाशनी ने प्लेट की तरफ देखा।वो साफ देख सकती थी कि उसमें पोहे से ज्यादा लाल मिर्च भरी पड़ी है।

उसके होंठ कांपने लगे।उसकी आंखों में डर साफ झलक रहा था।

वो कुछ कहना चाहती थी पर आवाज़ नहीं निकल रही थी।बस होंठ हिले, पर शब्द गले में ही फंस गए।

रुद्राक्ष ने उसे घूरते हुए कहा मैंने कहा... अभी इसे finish करो!

उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी कि कमरे की दीवारें तक गूंज उठीं।सब लोग एकदम frozen थे।कोई कुछ नहीं बोल पा रहा था।

चाशनी के हाथ बुरी तरह कांप रहे थे।प्लेट उसके हाथों से लगभग फिसलने वाली थी।

तभी रुद्राक्ष ने आगे बढ़कर उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।उसकी पकड़ इतनी सख्त थी कि चाशनी के हाथ पर लाल निशान उभर आए।

वो उसी के हाथ में प्लेट थमाते हुए बोला जल्दी से इसे finish करो, right now. मेरे पास इतना फालतू टाइम नहीं है। तुम्हारा नाटक और आशु देखने आए लिए मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है।

उसकी आंखों में बिल्कुल भी रहम नहीं था।वो उसे इस तरह देख रहा था जैसे उसकी तकलीफ भी उसे छोटी लग रही हो।

चाशनी की आंखों में आंसू भर आए।वो रुद्राक्ष की आंखों में झांकी , कोई इंसानियत नहीं। बस था तो केवल नफरत और नफरत इतना थी की चाशनी के पल भर में जान ही ले लें ।

चाशनी ने कांपते हुए हाथों से एक स्पून उठाया।धीरे से पोहे का एक निवाला लिया,और उसे अपने मुंह में डाल लिया।

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जैसे ही लाल मिर्च उसके होंठों से लगी, उसका पूरा चेहरा मुरझा गया जैसे किसी ने उसके भीतर की सारी हिम्मत खींच ली हो।

उसकी आंखें अपने आप बंद हो गईं,और आंसू उसके गालों पर लुढ़कने लगे, गर्म और खामोश।उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसने आग खा ली हो।गला जलने लगा, सांसें तेज़ हो गईं,

मुँह के अंदर जलन ऐसे थी जैसे किसी ने अंगार भर दिए हों।पर फिर भी उसने एक शब्द भी नहीं कहा।

वो बस वहीं खड़ी रही… चेहरे पर दर्द की एक परत थी,

आंखों में पानी और डर दोनों एक साथ थे।

होंठ कांप रहे थे, पर आवाज़ नहीं निकल रही थी।

और सामने खड़ा था रुद्राक्ष जिसकी निगाहें अब भी उसी पर टिकी थीं उसकी आंखों में कोई softness नहीं थी,

बस आंखों में गुस्सा जो किसी को भी कंपा दे।

वो एक इंच भी नहीं हिला,सिर्फ खड़ा होकर उसे देखता रहा जैसे उसे हर सेकंड उसके दर्द का हिसाब लेना हो।

मेरे दर्द के आगे तेरा दर्द छोटा है,

तुने हँस कर रात गुज़ारी है,

हमने तो हर रात किसी की याद में,

आँसुओं की बारिश उतारी है।

तू कहे तो हँसी तेरे चेहरे पे ला दूँ,

पर क्या करूँ, अपने जख्म अब छुपाए नहीं जाते।

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सरस्वती कुमारी

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