Mafia forced bride - Chapter 2
Mafia forced brideचाशनी हैरान, डरी हुई और थरथराती सी खड़ी थी। उसके चारों तरफ नज़रे थी मगर कोई हमदर्दी नहीं, कोई राहत नहीं बस घूरती हुई, तिरस्कार भरी आंखें।
रुद्राक्ष ने उसका हाथ कस कर पकड़ रखा था, उसने झटके से छुड़ाने की कोशिश की,"छोड़ो मुझे!" उसकी आवाज़ कांप रही थी।
मगर रुद्राक्ष नहीं रुका वो उसे गोल-गोल घुमा रहा था जैसे कोई खिलौना हो,उसके चेहरे पर गुस्से और जुनून का अजीब सा मेल था।
फिर… रुक कर बोला "शादी होगी… यहीं… अभी… और सबके सामने!"
सब चौंक गए।किसी को यकीन नहीं हुआ —रुद्राक्ष सिंह रायजादा… ये कर सकता है?
चाशनी का चेहरा ज़र्द पड़ गया। उसकी आँखों में आंसू भर आए थे
पर वह रो नहीं रही थी…बस काँप रही थी…
"शादी…?" उसके लबों से धीमी, टूटी हुई आवाज़ निकली।
रुद्राक्ष की आँखों में आग थी। वो उसकी तरफ झुका, इतना करीब कि चाशनी की सांसें रुक गईं।
"हाँ… शादी!""ना सिंदूर… ना मंगलसूत्र… ना सात फेरे…""बस एक नाम… एक इल्ज़ाम… एक रिश्ता…" वो उसकी कलाई खींचता है और सबके सामने खड़ा कर देता है।
"अब ये मेरी है… रुद्राक्ष सिंह रायजादा की!"
"इसकी इज़्ज़त, इसका नाम… सब मुझसे जुड़ चुका है।" होगा पर सिर्फ नाम से इस पर तो मेरा हक तो होगा पर इस का मेरे पर नहीं
तभी उस के कानों में आवाज आईं रुद्राक्ष क्या आप पागल हो गए हो क्या शादी का मतलब भी पता है
रुद्राक्ष ने बोला प्लीज़ भाभी मेरे मामले में ना पड़े । तभी पलक ने कहा कैसे ना पड़े आप कब से किसी कमजोरी को निशाना बनाने लगे । जरा जिस लड़की को ले कर आये है उस बच्ची का चेहरा देखना कैसे कंप रही है
चाशनी की आँखों से एक आंसू टपका। वो उसे पलकों में छिपाना चाहती थी, पर छुप नहीं पाया। "आप ऐसा नहीं कर सकते…"
उसकी आवाज़ टूटी… कांपती हुई…
रुद्राक्ष चाशनी की और मूड़ा "मैं जो चाहता हूँ… वो करता हूँ… और अब मुझे बस ये चाहिए…" और देखता हूं कौन रोकता है
"मंत्रों की जरूरत नहीं… बस गवाह चाहिए!" चाशनी को जबरन पास खींचकर खड़ा करता है
वो एक इशारा करता है उसका असिस्टेंट कुछ कागज़ात लेकर सामने आता है।
"Marriage Agreement – Witnessed. Certified. Registered."
पूरा विला में एक सन्नाटा छा गया।रुद्राक्ष ने वो पेपर्स चाशनी की तरफ बढ़ाए "साइन करो।" चाशनी की आँखों में गीले इनकार थे।
वो बहुत धीरे से, मगर साफ़-साफ़ ना में सिर हिलाने लगी।
"मैं… ये नहीं कर सकती…""ये शादी नहीं है… ये ज़बरदस्ती है…"
रुद्राक्ष की आँखें सिकुड़ गईं, एक पल की खामोशी…और फिर…
रुद्राक्ष ने अपनी गन निकाली… और एक ज़ोरदार फायर किया सीधा चाशनी के पैरों के पास!
"आहहह!!"चीख निकल गई चाशनी के मुँह से…
गोलियाँ उसे छुई नहीं, मगर इतना करीब से चलीं कि उसकी टाँगें लड़खड़ा गईं,वो काँपती हुई पीछे हटने लगी।
रुद्राक्ष की आँखें अब डार्क हो गई थी थीं…जैसे होश और पागलपन का फ़र्क मिट चुका हो।
"मैं कह रहा हूँ साइन करो!!""वरना अगली गोली सीधे तुम पर लगगी
अभी नहीं साइन किया, तो अगली गोली वार्निंग नहीं होगी…" चाशनी की साँसे तेज़ हो चुकी थीं होंठ काँप रहे थे…आँखें डर से चौड़ी हो गई थीं।
वो पीछे हटना चाहती थी, मगर उसका पैर लड़खड़ा गया, और वो गिरते-गिरते बची। रुद्राक्ष ने झुककर उसकी ठोड़ी पकड़ ली, और आँखों में आँखें डालकर कहा "अब ये तुम्हारी मर्जी से नहीं, मेरी ज़िद से होगा…"
क्योंकि जब रुद्राक्ष सिंह रायजादा कुछ ठान लेता है…तो कानून भी उसके सामने सिर झुका देता है।"
चाशनी ने पूरे आपने लाइफ में इस तरह का कोई सीन नहीं देखा था उस का डर से पूरा हाल हो रहा था पर फीर भी वो खड़ी रही।
चाशनी के हाथ काँप रहे थे…उसने लाइफ में कभी ऐसी डरावनी आँखों से नहीं देखा था कोई रिश्ता।
लेकिन आज…एक पेपर पर उसके डर ने उसके नाम से हार मान ली।
उसने साइन कर दिया। एक स्याही की लकीर थी, पर उसके लिए वो लकीर नहीं… जंजीर थी।
और जैसे ही उसने साइन किया, रुद्राक्ष की आँखों में जीत की आग चमक उठी।वो पेपर उठाता है, और शैतानों जैसी हँसी हँसता है।
इतनी तेज़… इतनी डरावनी की घर का हर एक सदस्य सिहर गया।
तो आज मेरी शादी हुई है तोहफा तो बनता है ना, सबको!"
पूरा फैमिली चुप थी। रुद्राक्ष की निगाहें सीधी चाशनी पर टिकी थीं,
वो उसकी ओर बढ़ा और तेज़ आवाज़ में बोला –"लिटिल फॉक्सी!"
चाशनी की आँखें चौंकी… वो नाम उस ने पहली बार सुना वो आज पर देखने लगी। की किस नाम है पर कोई नहीं आया तो समझ गई वो उस को ही बोल रहा है
रुद्राक्ष ने अपने नौकरों को इशारा किया,और उन्होंने सामने एक बाल्टी, झाड़ू, पोछा ला कर रख दिया बिल्कुल चाशनी के कदमों के पास।
मेरी तरफ से शादी की बहुत-बहुत बधाई हो! अब से तुम्हारा हनीमून शुरू नहीं तुम्हारी ड्यूटी शुरू होगी!
वो सर्वेंट की तरफ मुड़ा "आज से इस हवेली के सारे सर्वेंट्स छुट्टी पर हैं! सबको उनकी सैलरी मिलेगी… मज़े की छुट्टी मिलेगी…"
लेकिन अब से काम कौन करेगा?"वो फिर चाशनी की तरफ देखता है उसके चेहरे पर क्रूर मुस्कान है।
Little Foxy!
अब ये रायजादा विला की बहू नहीं…""रायजादा विला की नौकरानी है!
कोई बोल नहीं रहा था।सबके चेहरे सन्न थे…और चाशनी…
वो उस झाड़ू-बाल्टी को देख रही थी जो अब उसका पहला शादी का तोहफा बन चुका था।
आँखें भर आईं, मगर फिर भी वो कुछ नहीं बोली…क्योंकि कुछ रिश्ते आवाज़ छीन लेते हैं।