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Chapter 1

ANANT GRANTH - Episode 1

ANANT GRANTH

साल दो हजार छब्बीस.

बिहार राज्य. मुंगेर जिला. बैजलपुर गांव.

सुबह अभी पूरी तरह जागी नहीं थी. आसमान के किनारों पर हल्की लालिमा फैल रही थी, जैसे रात और दिन के बीच कोई धीमी बातचीत चल रही हो. खेतों पर ओस की बूँदें चुपचाप चमक रही थीं, और हल्की ठंडी हवा मिट्टी की खुशबू को पूरे माहौल में घोल रही थी. दूर कहीं किसी किसान के बैलों की घंटी की आवाज धीरे- धीरे सुनाई दे रही थी, और उसी के साथ एक साधारण से घर की छत पर खडा था—ध्रुव राज.

ध्रुव राज.

इक्कीस साल का.

एक साधारण सा लडका.

लेकिन उसकी आँखें साधारण नहीं थीं.

वह छत के किनारे खडा था, दोनों हाथ पीछे बाँधे हुए, और उसकी नजरें आसमान में कहीं दूर टिकी हुई थीं. ऐसा नहीं था कि वह पहली बार आसमान देख रहा था, लेकिन आज उसकी आँखों में एक अलग ही गहराई थी, जैसे वह किसी जवाब की तलाश में हो. ऐसा जवाब जो उसे खुद भी ठीक से समझ नहीं आ रहा था.

उसने धीरे से लंबी साँस ली. ठंडी हवा उसके चेहरे से टकराई, लेकिन उसे सुकून नहीं मिला.

क्यों लगता है. कि मैं यहाँ का नहीं हूँ.

उसने बहुत धीमी आवाज में खुद से कहा.

नीचे आँगन में उसकी माँ चूल्हा जला रही थीं. लकडियों की हल्की- हल्की चटकने की आवाज ऊपर तक आ रही थी. घर बहुत बडा नहीं था, लेकिन उसमें एक अपनापन था—दीवारों पर पुरानी पुताई, कोनों में रखे हुए बर्तन, और हर चीज में एक सादगी.

ध्रुव.

नीचे से उसकी माँ की आवाज आई, कब तक ऊपर खडा रहेगा? Collage नहीं जाना क्या?

ध्रुव ने आँखें बंद कीं, जैसे खुद को वापस इस दुनिया में खींच रहा हो.

आ रहा हूँ माँ. उसने जवाब दिया, लेकिन उसकी आवाज में वही खोया हुआपन था.

वह धीरे- धीरे सीढियों से नीचे उतरने लगा. हर कदम जैसे सोच- समझ कर रख रहा हो. जैसे उसके अंदर कोई और दुनिया चल रही हो, और यह दुनिया सिर्फ एक परत हो.

नीचे पहुँचते ही उसकी छोटी बहन ने उसे देखा और हँसते हुए बोली—

भइया फिर से आसमान देख रहे थे क्या? वहाँ क्या मिलता है आपको?

ध्रुव हल्का सा मुस्कुराया, लेकिन इस बार उसकी मुस्कान थोडी सच्ची थी.

शायद. जवाब. उसने धीरे से कहा.

बहन ने आँखें गोल कर लीं—

आप तो पूरे पागल हो गए हो।

माँ ने बीच में टोका—

ज्यादा बात मत कर, पहले खाना खा ले. ठंडा हो जाएगा।

ध्रुव चुपचाप बैठ गया. उसके सामने साधारण सा नाश्ता रखा गया—रोटी और सब्जी. उसने खाना शुरू किया, लेकिन उसका ध्यान खाने में नहीं था.

हर कौर के साथ उसका मन कहीं और भटक रहा था.

उसे ऐसा क्यों लग रहा था कि आज कुछ अलग होने वाला है.

कुछ ऐसा. जो उसकी पूरी जिंदगी बदल देगा.

कुछ देर बाद.

ध्रुव अपने Collage के लिए निकल गया. रास्ता वही पुराना था—कच्ची सडक, दोनों तरफ खेत, और बीच- बीच में छोटे- छोटे घर. गाँव के लोग अपने- अपने काम में लगे हुए थे, लेकिन ध्रुव को आज हर चीज थोडी अलग लग रही थी.

जैसे वह सब कुछ पहली बार देख रहा हो.

जैसे हर आवाज. हर हवा का झोंका. उससे कुछ कहने की कोशिश कर रहा हो.

उसका दोस्त राहुल रास्ते में मिल गया.

ओए ध्रुव! राहुल ने आवाज लगाई, आज फिर तू किसी और दुनिया में खोया हुआ लग रहा है।

ध्रुव ने उसकी तरफ देखा.

तुझे कभी ऐसा नहीं लगता कि. हमारी जिंदगी में कुछ missing है?

राहुल ने हँसते हुए कहा—

हाँ, पैसे. और girlfriend।

ध्रुव हल्का सा हँसा, लेकिन फिर तुरंत गंभीर हो गया.

नहीं. मेरा मतलब. कुछ और. कुछ बडा.

राहुल ने कंधे उचकाए—

भाई, तू ज्यादा सोचता है. चल Collage देर हो रही है।

दोनों साथ चलने लगे, लेकिन ध्रुव का मन अब भी उसी सवाल में उलझा हुआ था.

Collage पहुँचने के बाद.

क्लास चल रही थी, लेकिन ध्रुव की आँखें बार- बार खिडकी की तरफ जा रही थीं. बाहर आसमान साफ था, लेकिन उसे बार- बार ऐसा लग रहा था कि कुछ होने वाला है.

कुछ. जो सिर्फ उसे दिखाई देगा.

उसका दिल धीरे- धीरे तेज धडकने लगा.

और तभी.

एक पल के लिए.

आसमान में एक हल्की सी चमक हुई.

इतनी तेज कि कोई और notice नहीं कर पाया.

लेकिन ध्रुव ने देख लिया.

उसकी साँस अटक गई.

ये. क्या था.

उसने धीरे से खुद से कहा.

उसका दिल अब और तेज धडक रहा था.

उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने उसे बुलाया हो.

जैसे कोई शक्ति उसे अपनी तरफ खींच रही हो.

उसने फिर से आसमान की तरफ देखा.

लेकिन अब सब कुछ सामान्य था.

जैसे कुछ हुआ ही न हो.

ध्रुव ने अपनी मुट्ठी कस ली.

कुछ तो है.

उसने मन ही मन कहा.

और उसी पल.

उसे यह एहसास हो गया—

उसकी जिंदगी अब वैसी नहीं रहने वाली.

कुछ शुरू हो चुका था.

धीरे. बहुत धीरे.

लेकिन निश्चित रूप से. कॉलेज की घंटी बज चुकी थी, लेकिन ध्रुव राज के भीतर जो हलचल शुरू हुई थी, वह किसी भी आवाज से शांत होने वाली नहीं थी. वह क्लासरूम की खिडकी के पास बैठा था, उसकी उँगलियाँ मेज पर बहुत धीमे- धीमे थाप दे रही थीं, जैसे वह अपने ही दिल की धडकन को समझने की कोशिश कर रहा हो. बाहर आसमान अब साफ था, नीला और शांत. लेकिन ध्रुव को उसमें एक छुपी हुई बेचैनी महसूस हो रही थी.

उसके कानों में प्रोफेसर की आवाज जा रही थी, लेकिन शब्द जैसे अर्थ खो चुके थे. हर वाक्य उसके दिमाग से टकराकर वापस लौट जा रहा था. उसके भीतर एक अजीब सी खिंचाव थी. जैसे कोई अदृश्य धागा उसे कहीं बुला रहा हो.

ध्रुव.

अचानक राहुल की धीमी आवाज आई, तू सच में ठीक है ना?

ध्रुव ने धीरे से उसकी तरफ देखा. उसकी आँखों में हल्की सी चमक थी, लेकिन साथ में एक गहराई. जैसे वह कुछ देख चुका हो जो बाकी नहीं देख पाए.

मुझे लग रहा है. मुझे कहीं जाना चाहिए. उसने बहुत धीरे कहा.

कहाँ? राहुल ने भौंहें चढाईं.

ध्रुव ने सिर हिलाया—

पता नहीं. बस. जाना है.

राहुल ने आधा हँसते हुए कहा—

भाई, तू आज पूरा फिल्मी मूड में है।

लेकिन इस बार ध्रुव ने मुस्कुराया भी नहीं.

क्लास खत्म हुई.

छात्र धीरे- धीरे बाहर निकलने लगे, हँसी, बातचीत, कदमों की आवाज. सब कुछ सामान्य था. लेकिन ध्रुव के लिए हर आवाज जैसे दूर से आ रही थी.

वह बिना कुछ बोले उठ खडा हुआ.

राहुल ने उसे रोका—

अरे घर नहीं चलना क्या?

ध्रुव ने एक पल के लिए उसे देखा. फिर बोला—

तू जा. मुझे थोडा काम है.

कैसा काम? राहुल ने पूछा.

ध्रुव ने बस इतना कहा—

जरूरी.

और वह चल पडा.

Collage से बाहर निकलते ही हवा थोडी ठंडी हो गई थी. सूरज अब ढलने की ओर बढ रहा था, और उसकी रोशनी लंबी परछाइयाँ बना रही थी. सडक पर भीड कम थी, और धीरे- धीरे वह गाँव की तरफ बढने लगा.

लेकिन वह सीधा रास्ता नहीं ले रहा था.

उसके कदम खुद- ब- खुद मुड रहे थे.

एक पुराने रास्ते की ओर.

जहाँ वह कभी नहीं गया था.

उसका दिल अब और तेज धडक रहा था.

हर कदम के साथ उसे लग रहा था कि वह किसी बहुत बडी चीज के करीब जा रहा है.

कुछ देर बाद.

वह एक सुनसान जगह पर पहुँच गया.

चारों तरफ झाडियाँ.

बीच में एक पुराना, लगभग भूला हुआ रास्ता.

और सामने. एक छोटा सा टीला.

ध्रुव रुक गया.

उसकी साँसें भारी हो गई थीं.

यहीं. उसने खुद से पूछा.

और तभी.

हवा अचानक रुक गई.

पेडों की पत्तियाँ स्थिर हो गईं.

जैसे समय खुद थम गया हो.

अचानक—

आसमान में वही चमक फिर दिखाई दी.

लेकिन इस बार.

वह बहुत तेज थी.

इतनी तेज कि ध्रुव की आँखें खुद- ब- खुद सिकुड गईं.

एक तेज रौशनी का गोला आसमान से नीचे गिरने लगा.

धीरे.

बहुत धीरे.

जैसे समय को खींच कर लंबा कर दिया गया हो.

ध्रुव की आँखें उस पर टिकी थीं.

उसकी साँसें थम गईं.

हर पल एक युग जैसा लग रहा था.

और फिर—

धडाम!

वह रौशनी का गोला जमीन से टकराया.

लेकिन आवाज बहुत धीमी थी.

जैसे किसी ने उसे दबा दिया हो.

धूल हवा में उठी.

लेकिन तुरंत ही रुक गई.

सब कुछ. असामान्य था.

ध्रुव धीरे- धीरे आगे बढा.

उसके कदम बहुत सावधान थे.

जैसे वह किसी पवित्र जगह में प्रवेश कर रहा हो.

हर कदम के साथ उसका दिल और जोर से धडक रहा था.

वह उस जगह के पास पहुँचा.

जहाँ रौशनी गिरी थी.

और फिर.

उसने देखा.

वहाँ. एक किताब थी.

लेकिन वह कोई साधारण किताब नहीं थी.

उसका रंग गहरा काला था.

इतना गहरा कि जैसे वह रोशनी को भी निगल रहा हो.

उसकी सतह पर अजीब से चिन्ह बने हुए थे.

जो धीरे- धीरे चमक रहे थे.

जैसे वह साँस ले रही हो.

ध्रुव कुछ पल तक बस उसे देखता रहा.

उसकी आँखें उस किताब से हट ही नहीं रही थीं.

उसके भीतर एक अजीब सा आकर्षण था.

जैसे वह किताब उसे बुला रही हो.

ये. क्या है.

उसने फुसफुसाते हुए कहा.

लेकिन कोई जवाब नहीं आया.

सिर्फ एक गहरी खामोशी.

उसने धीरे- धीरे अपना हाथ आगे बढाया.

उसकी उँगलियाँ हल्की सी काँप रही थीं.

जैसे वह खुद भी नहीं जानता था कि वह क्या करने जा रहा है.

और फिर.

जैसे ही उसकी उँगलियाँ उस किताब को छुईं—

झटाक!

एक तेज ऊर्जा उसके पूरे शरीर में दौड गई.

उसकी आँखें तुरंत बंद हो गईं.

उसका शरीर एक पल के लिए जम गया.

उसके दिमाग में जैसे हजारों आवाजें एक साथ गूँज उठीं.

अनगिनत शब्द.

अनजानी भाषाएँ.

असंख्य चित्र.

उसे लगा जैसे वह गिर रहा है.

बहुत गहराई में.

अंधेरे में.

लेकिन उसी अंधेरे में.

एक हल्की सी रोशनी भी थी.

और उस रोशनी से.

एक आवाज आई.

बहुत गहरी.

बहुत शांत.

लेकिन बेहद शक्तिशाली.

ध्रुव राज.

उसका नाम.

उस आवाज ने उसका नाम लिया.

तुम चुने गए हो.

ध्रुव का दिल एक पल के लिए रुक गया.

उसकी चेतना जैसे टूटने लगी.

अनंत ग्रंथ तुम्हारा इंतजार कर रहा था.

उसकी साँसें भारी हो गईं.

उसका शरीर काँपने लगा.

अब. तुम्हारी यात्रा शुरू होती है.

और उसी पल.

सब कुछ अंधेरा हो गया.

ध्रुव जमीन पर गिर पडा.

उसके हाथ में वही किताब थी.

लेकिन अब.

वह किताब हल्की सी चमक रही थी.

और आसमान.

फिर से सामान्य हो चुका था.

जैसे कुछ हुआ ही न हो.

लेकिन सच यह था—

सब कुछ बदल चुका था.

कुछ पल. या शायद बहुत देर. समय का कोई अर्थ नहीं रह गया था.

ध्रुव राज की चेतना गहरे अंधेरे में डूबी हुई थी, लेकिन वह अंधेरा खाली नहीं था. उस अंधेरे के भीतर कुछ था. कुछ ऐसा जो जीवित था. जो देख रहा था. जो प्रतीक्षा कर रहा था.

धीरे- धीरे.

बहुत धीरे.

उस अंधेरे के बीच एक हल्की सी रेखा उभरी. जैसे किसी ने दूर कहीं एक दीपक जलाया हो. वह रोशनी स्थिर नहीं थी, वह सांस ले रही थी. फैल रही थी. सिमट रही थी.

और फिर—

उस रोशनी के बीच एक विशाल द्वार दिखाई दिया.

द्वार. जो किसी भी इंसानी समझ से परे था.

उस पर बने चिन्ह लगातार बदल रहे थे. जैसे वे जीवित हों. जैसे वे कोई भाषा हों जो अभी तक इस दुनिया में अस्तित्व में ही नहीं आई.

ध्रुव उस द्वार के सामने खडा था.

न वह चला था. न उसने कुछ किया था. लेकिन वह वहाँ था.

उसने अपने हाथों को देखा. फिर अपने शरीर को. सब कुछ ठीक था. लेकिन फिर भी कुछ अलग था.

मैं. कहाँ हूँ. उसकी आवाज धीमी थी, लेकिन वह अंधेरे में गूंज गई.

जवाब में.

खामोशी नहीं आई.

बल्कि वही आवाज. जो पहले आई थी.

गहरी. शांत. लेकिन इतनी शक्तिशाली कि शब्द सीधे आत्मा में उतर जाएँ—

यह. तुम्हारी चेतना का द्वार है.

ध्रुव की आँखें चौडी हो गईं.

कौन. उसने पूछा.

कुछ पल के लिए सब कुछ स्थिर हो गया.

फिर द्वार के ऊपर बने चिन्ह तेजी से चमकने लगे.

और धीरे- धीरे.

द्वार खुलने लगा.

जैसे ही द्वार खुला—

एक प्रचंड ऊर्जा की लहर बाहर आई.

इतनी तीव्र कि ध्रुव पीछे की ओर खिंच गया.

लेकिन वह गिरा नहीं.

वह बस स्थिर हो गया.

उसकी आँखें उस द्वार के अंदर झाँकने लगीं.

और जो उसने देखा.

उसने उसकी पूरी सोच बदल दी.

द्वार के अंदर.

एक अनंत पुस्तकालय था.

जहाँ तक नजर जाती थी.

सिर्फ किताबें.

हर दिशा में.

हर स्तर पर.

हर आयाम में.

किताबें ही किताबें.

लेकिन वे साधारण नहीं थीं.

हर किताब से अलग- अलग रंगों की ऊर्जा निकल रही थी.

कुछ किताबें आग जैसी लाल थीं.

कुछ गहरे नीले.

कुछ सुनहरी.

और कुछ. इतनी काली कि जैसे वे अस्तित्व को ही निगल रही हों.

ध्रुव की साँसें तेज हो गईं.

ये. सब क्या है.

उसकी आवाज अब काँप रही थी.

लेकिन इस बार डर से नहीं.

अचंभे से.

वही आवाज फिर गूंजी—

यह. अनंत ग्रंथ का आंतरिक लोक है.

यहाँ हर ज्ञान. हर शक्ति. हर कला. हर सत्य. विद्यमान है.

ध्रुव के भीतर कुछ टूट गया.

या शायद. कुछ जाग गया.

और यह सब. उसने मुश्किल से कहा.

आवाज ने उत्तर दिया—

अब. तुम्हारा है.

उसके शब्द जैसे बिजली बनकर ध्रुव के भीतर दौड गए.

मेरा.

अचानक—

उसके सामने एक किताब प्रकट हुई.

वही काली किताब.

जो उसने जमीन से उठाई थी.

लेकिन अब वह अलग थी.

उसकी सतह पर बने चिन्ह अब स्पष्ट थे.

वे धीरे- धीरे बदल रहे थे. जैसे वे जीवित हों.

किताब अपने आप खुली.

पहला पन्ना.

उस पर लिखा था—

अनंत ग्रंथ का प्रथम धारक: DRUV RAJ”

ध्रुव की आँखें उस नाम पर टिक गईं.

हर अक्षर जैसे उसकी आत्मा में उतर रहा था.

अचानक—

उस पन्ने से एक तेज प्रकाश निकला.

और सीधे उसके माथे में समा गया.

आह्ह.

ध्रुव दर्द से नहीं.

बल्कि अत्यधिक ऊर्जा से काँप उठा.

उसके दिमाग में अनगिनत सूचनाएँ प्रवेश करने लगीं—

साधना के तरीके.

ऊर्जा को नियंत्रित करने के सूत्र.

शरीर और आत्मा के संतुलन के रहस्य.

उसने खुद को संभालने की कोशिश की.

लेकिन यह सब बहुत ज्यादा था.

बहुत तेज.

बहुत गहरा.

और फिर—

वह आवाज अंतिम बार गूंजी—

प्रथम कौशल प्रदान किया जा रहा है.

एक पल का सन्नाटा.

अनंत साधना विधि.

जैसे ही ये शब्द पूरे हुए—

ध्रुव के शरीर में ऊर्जा का विस्फोट हुआ.

उसकी हर नस. हर कोशिका. हर सांस.

सब कुछ बदलने लगा.

उसे महसूस हुआ—

उसका शरीर हल्का हो रहा है.

लेकिन साथ ही. बेहद शक्तिशाली.

उसकी आँखें बंद थीं.

लेकिन उसे सब कुछ दिखाई दे रहा था.

ऊर्जा के प्रवाह.

हवा की गति.

यहाँ तक कि. अपने दिल की हर धडकन.

और उसी पल—

किताब का दूसरा पन्ना हल्का सा चमका.

लेकिन खुला नहीं.

जैसे वह इंतजार कर रहा हो.

जैसे कह रहा हो—

और शक्ति चाहिए.

धीरे- धीरे.

सब कुछ शांत होने लगा.

ऊर्जा स्थिर हो गई.

आवाज गायब हो गई.

ध्रुव की आँखें खुलीं.

वह फिर उसी सुनसान जगह पर था.

जमीन पर खडा.

हाथ में वही किताब.

लेकिन अब.

सब कुछ अलग था.

हवा अलग महसूस हो रही थी.

धरती अलग.

आसमान अलग.

और सबसे ज्यादा—

वह खुद अलग था.

उसने धीरे से अपनी मुट्ठी बंद की.

और एक हल्की सी ऊर्जा उसकी हथेली के चारों तरफ घूमने लगी.

ध्रुव की आँखों में अब कोई उलझन नहीं थी.

कोई डर नहीं था.

सिर्फ एक चीज थी—

असीम शक्ति की शुरुआत

उसने आसमान की ओर देखा.

इस बार.

वह जवाब नहीं ढूंढ रहा था.

अब वह खुद जवाब बनने वाला था.

अब. कोई मुझे रोक नहीं सकता.

उसने बहुत धीरे. लेकिन पूरी दृढता के साथ कहा.

और दूर कहीं.

अदृश्य रूप से.

जैसे पूरा ब्रह्मांड उसकी इस घोषणा को सुन रहा था.

एक नई कहानी शुरू हो चुकी थी.

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