ANANT GRANTH - Episode 5
ANANT GRANTHसुबह धीरे- धीरे बैजलपुर गाँव पर उतर रही थी.
रात की ठंडक अब हल्की धूप में घुलने लगी थी. खेतों पर जमी ओस की बूंदें सूरज की पहली किरणों में चमक रही थीं, जैसे छोटे- छोटे सितारे धरती पर बिखर गए हों. पक्षियों की चहचहाहट फिर से हवा में गूंजने लगी थी. सब कुछ सामान्य था.
लेकिन.
ध्रुव राज के लिए.
अब कुछ भी सामान्य नहीं था.
वह पूरी रात नहीं सोया था.
उसने रात भर अभ्यास किया.
ऊर्जा को महसूस किया.
उसे नियंत्रित किया.
बार- बार.
उसका शरीर थका हुआ था.
लेकिन.
उसकी आँखें.
वह थकी नहीं थीं.
वे और तेज हो गई थीं.
वह अब अपने घर की छत पर खडा था.
वही जगह.
जहाँ से उसकी यह यात्रा शुरू हुई थी.
उसने आसमान की ओर देखा.
सूरज धीरे- धीरे ऊपर उठ रहा था.
लेकिन आज.
उसे सिर्फ सूरज नहीं दिख रहा था.
उसे ऊर्जा दिखाई दे रही थी.
हल्की सुनहरी ऊर्जा.
जो हर दिशा में फैल रही थी.
यह. दिन की ऊर्जा है.
अंदर की आवाज ने कहा.
ध्रुव ने धीरे से सिर हिलाया.
मतलब. हर समय अलग ऊर्जा होती है.
हाँ.
और अगर तुम उन्हें समझ जाओ.
तो तुम और भी तेजी से बढ सकते हो.
ध्रुव की आँखों में चमक आ गई.
तो. मुझे हर चीज को समझना होगा.
वह कुछ पल तक वहीं खडा रहा.
फिर उसने नीचे देखा.
गाँव धीरे- धीरे जाग रहा था.
लोग अपने काम पर निकल रहे थे.
सब कुछ वैसा ही था.
लेकिन.
ध्रुव अब वैसा नहीं था.
अब. मुझे दो जिंदगी जीनी होंगी.
उसने मन ही मन कहा.
एक. सामान्य.
और एक. असली.
उसके होंठों पर हल्की मुस्कान आई.
और दोनों में. मैं ही जीतूंगा.
उसी समय—
नीचे से उसकी माँ की आवाज आई—
ध्रुव! उठ गया क्या? आज फिर Collage नहीं जाएगा क्या?
ध्रुव थोडा मुस्कुराया.
आ रहा हूँ माँ!
उसने आखिरी बार आसमान की ओर देखा.
फिर.
धीरे- धीरे सीढियों की ओर बढ गया.
घर के अंदर.
सब कुछ पहले जैसा था.
माँ रसोई में थीं.
बहन तैयार हो रही थी.
पिता अखबार पढ रहे थे.
ध्रुव ने उन्हें देखा.
और उसके अंदर एक अलग ही भावना आई.
मैं. इन्हें भी मजबूत बनाऊँगा.
उसने मन ही मन कहा.
कोई भी. इन्हें नुकसान नहीं पहुँचा पाएगा.
उसकी आँखों में एक दृढता आ गई.
माँ ने उसकी ओर देखा—
क्या सोच रहा है इतना?
ध्रुव ने हल्का सा मुस्कुराया—
कुछ नहीं. बस. ऐसे ही.
माँ ने सिर हिलाया—
जल्दी खा ले. देर हो जाएगी.
ध्रुव चुपचाप बैठ गया.
उसने खाना शुरू किया.
लेकिन इस बार.
उसका ध्यान पूरी तरह यहाँ था.
हर कौर.
हर स्वाद.
सब कुछ पहले से ज्यादा स्पष्ट था.
ये भी ऊर्जा है.
उसने सोचा.
शरीर की ऊर्जा.
अंदर की आवाज ने कहा—
तुम तेजी से सीख रहे हो.
ध्रुव ने हल्का सा सिर झुकाया.
लेकिन उसी पल—
उसने कुछ महसूस किया.
बहुत हल्का.
लेकिन साफ.
जैसे कोई.
उस पर नजर रख रहा हो.
उसका दिल एक पल के लिए धीमा हुआ.
उसने धीरे से सिर उठाया.
और दरवाजे की ओर देखा.
कुछ नहीं था.
सब सामान्य था.
लेकिन.
वह एहसास.
अब भी था.
यह फिर से.
उसने मन ही मन कहा.
हाँ.
आवाज ने उत्तर दिया.
तुम अकेले नहीं हो.
ध्रुव की मुट्ठी हल्की सी कस गई.
उसने अपने परिवार की ओर देखा.
वे अब भी अनजान थे.
सब कुछ सामान्य.
लेकिन.
ध्रुव जानता था—
खतरा अब शुरू हो चुका है.
और इस बार.
वह सिर्फ खुद के लिए नहीं लडेगा.
वह सबके लिए लडेगा.
सुबह अब पूरी तरह जाग चुकी थी.
धूप आँगन में फैल चुकी थी.
रसोई से आती खुशबू पूरे घर में घुल रही थी.
सब कुछ सामान्य था.
लेकिन ध्रुव राज के अंदर जो चल रहा था.
वह सामान्य नहीं था.
वह चुपचाप बैठा खाना खा रहा था.
लेकिन उसकी इंद्रियाँ.
अब हर दिशा में फैली हुई थीं.
चम्मच की हल्की आवाज.
चूल्हे की जलती लकडियों की खडक.
बहन की चप्पलों की आहट.
सब कुछ.
असामान्य रूप से स्पष्ट था.
मैं. हर चीज सुन पा रहा हूँ.
उसने मन ही मन कहा.
यह तुम्हारी इंद्रियों का विकास है.
अंदर की आवाज ने शांत स्वर में उत्तर दिया.
और जैसे- जैसे तुम आगे बढोगे.
यह और तेज होगा.
ध्रुव ने धीरे से सिर हिलाया.
लेकिन उसी पल—
वह एहसास फिर आया.
कोई. उसे देख रहा था.
इस बार.
थोडा और स्पष्ट.
उसकी आँखें धीरे- धीरे दरवाजे की ओर उठीं.
दरवाजा खुला था.
बाहर धूप थी.
गली में लोग आ- जा रहे थे.
सब कुछ सामान्य.
लेकिन.
उसकी नजर एक पल के लिए ठहर गई.
गली के कोने पर.
एक आदमी खडा था.
साधारण कपडे.
लेकिन.
उसकी आँखें.
सीधे ध्रुव पर टिकी थीं.
ध्रुव का दिल एक पल के लिए रुक गया.
यह वही है.
उसने मन ही मन कहा.
नहीं.
आवाज ने कहा.
यह अलग है.
ध्रुव ने ध्यान से देखा.
आदमी ने हल्का सा सिर झुकाया.
जैसे वह जानता हो.
कि ध्रुव उसे देख रहा है.
फिर.
वह मुडा.
और भीड में गायब हो गया.
ध्रुव की मुट्ठी कस गई.
ये लोग. कितने हैं.
उसने धीरे से पूछा.
बहुत.
आवाज ने कहा.
और अब. वे तुम्हें ढूंढ रहे हैं.
ध्रुव कुछ पल के लिए चुप हो गया.
फिर उसने गहरी साँस ली.
तो. मुझे भी तैयार रहना होगा.
उसकी आँखों में एक ठंडी दृढता आ गई.
कुछ देर बाद.
ध्रुव Collage के लिए निकल चुका था.
रास्ता वही था.
लेकिन आज.
हर कदम सावधानी से भरा हुआ था.
उसकी नजरें लगातार चारों ओर घूम रही थीं.
हर इंसान.
हर हरकत.
सब कुछ वह देख रहा था.
तुम्हें डर लग रहा है.
आवाज ने पूछा.
ध्रुव ने हल्का सा मुस्कुराया.
डर. नहीं.
सिर्फ. सतर्क हूँ.
आवाज कुछ पल के लिए चुप रही.
फिर—
अच्छा है.
Collage के पास पहुँचते ही.
भीड बढने लगी.
छात्र हँसते- बोलते अंदर जा रहे थे.
सब कुछ सामान्य.
लेकिन ध्रुव को.
कुछ अलग महसूस हो रहा था.
जैसे.
भीड में कोई.
उसे देख रहा हो.
उसने धीरे- धीरे अपनी चाल धीमी की.
उसकी आँखें भीड में घूमने लगीं.
और तभी—
उसे फिर वही एहसास हुआ.
तीन अलग- अलग दिशाओं से.
तीन नजरें.
उस पर टिकी हुई थीं.
उसका दिल अब तेज धडकने लगा.
तीन.
उसने मन ही मन कहा.
हाँ.
आवाज ने उत्तर दिया.
और ये. पहले से ज्यादा मजबूत हैं.
ध्रुव ने गहरी साँस ली.
उसने अपनी ऊर्जा को भीतर समेटा.
यहाँ. नहीं.
उसने सोचा.
यह जगह. सही नहीं है.
वह धीरे- धीरे Collage के अंदर चला गया.
लेकिन उसकी इंद्रियाँ अब पूरी तरह सक्रिय थीं.
हर दिशा.
हर कोना.
वह सब कुछ महसूस कर रहा था.
और तभी—
Collage के गलियारे में.
उसका दोस्त राहुल उसके सामने आ गया.
अरे भाई!
राहुल ने हँसते हुए कहा.
आज तो तू और भी सीरियस लग रहा है.
ध्रुव ने उसे देखा.
कुछ पल के लिए.
उसके चेहरे पर वही पुरानी दोस्ती वाली भावना आई.
लेकिन फिर.
उसने धीरे से कहा—
राहुल.
आज. मेरे पास मत रहना.
राहुल चौंक गया.
क्यों.
ध्रुव की आँखें गहरी हो गईं.
बस. मान ले.
राहुल कुछ समझ नहीं पाया.
लेकिन.
उसने पहली बार ध्रुव को इतना गंभीर देखा.
ठीक है.
उसने धीरे से कहा.
ध्रुव ने हल्का सा सिर हिलाया.
और आगे बढ गया.
उसकी चाल अब धीमी थी.
लेकिन हर कदम.
तैयारी से भरा हुआ.
क्योंकि अब—
शिकार शुरू हो चुका था.
और इस बार.
ध्रुव शिकार नहीं था.
वह शिकारी बनने वाला था. कॉलेज का गलियारा.
भीड से भरा हुआ.
छात्र इधर- उधर जा रहे थे.
हँसी. बातचीत. कदमों की आवाज.
सब कुछ सामान्य दिख रहा था.
लेकिन ध्रुव राज के लिए.
यह जगह अब युद्धभूमि बन चुकी थी.
उसकी चाल धीमी थी.
लेकिन हर कदम सोचा- समझा था.
उसकी आँखें हर दिशा में घूम रही थीं.
तीन.
उसने मन ही मन दोहराया.
हाँ.
आवाज ने कहा.
वे अभी भी तुम्हें देख रहे हैं.
ध्रुव ने गहरी साँस ली.
उसने अपनी ऊर्जा को भीतर समेटा.
वह इसे दिखाना नहीं चाहता था.
अभी नहीं.
मुझे उन्हें अलग करना होगा.
उसने सोचा.
एक साथ नहीं.
वह धीरे- धीरे सीढियों की ओर बढा.
ऊपर की मंजिल.
कम भीड.
कम शोर.
सही जगह.
जैसे ही वह ऊपर पहुँचा.
उसने कदम रोक दिए.
सन्नाटा.
नीचे की आवाजें अब धीमी हो गई थीं.
उसने धीरे- धीरे पीछे देखा.
कोई नहीं.
लेकिन.
वह एहसास.
अब भी था.
वे पास आ रहे हैं.
आवाज ने चेतावनी दी.
ध्रुव ने अपनी मुट्ठी हल्की सी कस ली.
उसकी साँसें अब स्थिर थीं.
उसका दिल.
धीरे. लेकिन मजबूत धडक रहा था.
और तभी—
टप. टप.
कदमों की आवाज.
सीढियों से.
कोई ऊपर आ रहा था.
ध्रुव ने अपनी नजर उसी दिशा में टिकाई.
और कुछ ही पल बाद—
एक लडका सामने आया.
Collage का ही छात्र.
साधारण चेहरा.
लेकिन.
उसकी आँखें.
वह खाली थीं.
जैसे उसमें कोई भावना नहीं थी.
ध्रुव की आँखें सिकुड गईं.
पहला.
उसने मन ही मन कहा.
लडका कुछ कदम दूर आकर रुक गया.
उसने सिर हल्का सा तिरछा किया.
और फिर—
उसके होंठों पर एक अजीब सी मुस्कान आई.
तुम. वही हो.
उसने धीमे से कहा.
ध्रुव ने सीधा जवाब दिया—
और तुम. मेरे रास्ते में हो.
लडका हल्का सा हँसा.
हम सब हैं.
उसके शब्दों के साथ ही—
उसकी आँखों में हल्की सी चमक आई.
और उसके शरीर के चारों तरफ.
एक हल्की सी ऊर्जा घूमने लगी.
ध्रुव ने तुरंत महसूस किया—
यह पहले वाले से कमजोर नहीं है.
तैयार हो जाओ.
आवाज ने कहा.
ध्रुव ने धीरे से अपनी हथेली खोली.
उसमें हल्की रोशनी उभरने लगी.
लेकिन इस बार.
वह उसे छिपा रहा था.
नियंत्रित कर रहा था.
लडके ने अचानक कदम बढाया—
तेज.
बहुत तेज.
स्वीश!
वह सीधा ध्रुव की ओर झपटा—
ध्रुव पहले से तैयार था—
उसने साइड में हटते हुए उसका वार बचाया—
ठक!
लडके का हाथ दीवार से टकराया.
लेकिन.
उसने तुरंत दूसरा वार किया—
इस बार.
और तेज.
ध्रुव ने उसे हाथ से रोका—
धड!
दोनों की ताकत टकराई.
ध्रुव के पैर हल्के से पीछे खिसके.
यह. मजबूत है.
उसने सोचा.
लेकिन.
उसकी आँखों में डर नहीं था.
सिर्फ ध्यान.
एक- एक करके.
उसने खुद से कहा.
उसने अपनी ऊर्जा को थोडा और बाहर आने दिया.
उसकी हथेली में रोशनी अब साफ दिख रही थी.
लडके की आँखों में हल्का सा बदलाव आया—
तो. यही है.
उसने धीमे से कहा.
और उसी पल—
उसने अपने दोनों हाथ फैलाए—
उसके शरीर से ऊर्जा तेजी से बाहर निकलने लगी.
जैसे वह अपनी पूरी ताकत दिखाने वाला हो.
ध्रुव ने गहरी साँस ली.
उसने अपनी ऊर्जा को केंद्रित किया.
अब छिपाने का समय नहीं था.
आओ.
उसने धीरे से कहा.
दोनों आमने- सामने खडे थे.
सन्नाटा.
एक पल का.
और फिर—
धडाम!
दोनों एक साथ भिड गए—
हवा फिर से काँप उठी.
और नीचे.
भीड को अभी तक कुछ पता नहीं था.
लेकिन ऊपर.
एक और युद्ध शुरू हो चुका था.
और इस बार—
ध्रुव और भी मजबूत था.