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Chapter 3

ANANT GRANTH - Episode 3

ANANT GRANTH

धूल अभी पूरी तरह बैठी भी नहीं थी.

हवा में अभी भी उस टकराव की गूंज बाकी थी.

पेडों की टहनियाँ धीरे- धीरे हिल रही थीं, जैसे अभी भी उस विस्फोट की ताकत को याद कर रही हों. जमीन पर बने गड्ढे इस बात के गवाह थे कि यह कोई साधारण लडाई नहीं थी.

ध्रुव राज वहीं खडा था.

उसकी साँसें तेज थीं, लेकिन अब उनमें डर नहीं था.

सिर्फ ध्यान था.

पूरी तरह केंद्रित ध्यान.

उसकी आँखें सामने खडे उस आदमी पर जमी हुई थीं, जिसकी लाल चमकती आँखें अब पहले से ज्यादा गंभीर हो चुकी थीं.

कुछ पल पहले तक उसके चेहरे पर जो खिल्ली उडाने वाली मुस्कान थी.

वह अब गायब हो चुकी थी.

उसकी जगह अब एक ठंडी, गहरी नजर थी.

जैसे वह अब ध्रुव को एक साधारण इंसान नहीं. बल्कि एक चुनौती के रूप में देख रहा हो.

हूँ.

उस आदमी ने धीरे से साँस छोडी, तो तुम सच में अलग हो.

उसकी आवाज अब पहले जैसी हल्की नहीं थी.

अब उसमें वजन था.

एक ऐसा वजन. जो अनुभव से आता है.

ध्रुव ने कुछ नहीं कहा.

वह बस खडा रहा.

लेकिन उसके अंदर बहुत कुछ चल रहा था.

उसका दिल.

उसकी ऊर्जा.

उसकी सोच.

सब कुछ एक नई लय में आ चुका था.

अनंत साधना विधि.

उसने मन ही मन दोहराया.

और उसी पल—

उसे महसूस हुआ.

उसकी ऊर्जा अब पहले से ज्यादा तेजी से बह रही है.

जैसे वह हर पल सीख रहा हो.

हर पल मजबूत हो रहा हो.

आदमी ने अपना सिर थोडा झुकाया.

दिलचस्प. उसने कहा, तुम अभी- अभी जागे हो. और फिर भी मेरे हमले को रोक पाए.

उसने एक कदम आगे बढाया.

लेकिन अब.

मैं खेलना बंद करता हूँ.

उसके शब्द हवा में भारी हो गए.

अगले ही पल—

उसके शरीर के चारों तरफ काली ऊर्जा घूमने लगी.

धीरे- धीरे.

वह ऊर्जा घनी होती गई.

जैसे अंधेरा खुद उसके चारों ओर इकट्ठा हो रहा हो.

ध्रुव की आँखें सिकुड गईं.

यह. पहले से अलग है.

हाँ.

उसके अंदर से आवाज आई, अब वह गंभीर है.

ध्रुव ने अपनी सांसों को नियंत्रित किया.

उसने अपनी ऊर्जा को महसूस किया.

और इस बार—

वह सिर्फ उसे महसूस नहीं कर रहा था.

वह उसे समझ रहा था.

उसने अपने पैरों को जमीन पर मजबूती से टिकाया.

उसकी उँगलियाँ हल्की सी मुडीं.

और उसके चारों तरफ भी.

एक हल्की सी रोशनी फैलने लगी.

पहले बहुत धीमी.

फिर धीरे- धीरे तेज.

उसके आसपास की हवा बदलने लगी.

जैसे दो अलग- अलग शक्तियाँ एक ही जगह पर टकराने की तैयारी कर रही हों.

आदमी ने अपनी आँखें थोडी चौडी कीं.

ओह.

वह हल्का सा मुस्कुराया, तुम सिर्फ बचाव नहीं करोगे.

तुम लडोगे भी.

ध्रुव ने धीमे से कहा—

मैं हारने के लिए नहीं आया.

एक पल का सन्नाटा.

और फिर—

धडाम!

दोनों एक साथ हिले.

आदमी की गति बहुत तेज थी.

लेकिन इस बार—

ध्रुव तैयार था.

उसने अपनी ऊर्जा को पैरों में केंद्रित किया.

और उसी गति से साइड में हट गया.

लेकिन इस बार—

वह भागा नहीं.

वह आगे बढा.

उसने अपनी मुट्ठी कस ली.

और सीधे आदमी की ओर वार किया—

ठाक!

दोनों की ताकत टकराई.

हवा में एक झटका फैला.

ध्रुव का हाथ पीछे गया.

लेकिन वह गिरा नहीं.

उसने तुरंत संतुलन बनाया.

अच्छा.

आदमी ने कहा, तुम्हारी ताकत बढ रही है.

ध्रुव ने कोई जवाब नहीं दिया.

उसकी आँखों में अब सिर्फ एक चीज थी—

लडाई

और उसी पल—

उसके हाथ में पकडा अनंत ग्रंथ हल्का सा चमका.

जैसे वह इस टकराव को देख रहा हो.

जैसे वह इंतजार कर रहा हो.

अगले बदलाव का.

रात की गहराई अब और भारी हो चुकी थी.

हवा स्थिर नहीं थी. बल्कि काँप रही थी.

जैसे हर कण इस टकराव की तीव्रता को महसूस कर रहा हो.

ध्रुव राज और वह रहस्यमयी आदमी अब एक- दूसरे के सामने खडे नहीं थे.

वे अब भिड चुके थे.

ठाक! धम्म! ठक!

हर टकराव के साथ हवा में कंपन फैल रहा था.

ध्रुव की मुट्ठियाँ अब पहले से तेज चल रही थीं.

उसकी चाल में अब झिझक नहीं थी.

हर हरकत में एक सीख थी.

हर वार में एक बढती हुई समझ.

आदमी ने एक तेज घुमाव लिया और अपनी कोहनी ध्रुव की तरफ बढाई—

धडाक!

ध्रुव ने तुरंत अपना हाथ उठाकर उसे रोका.

लेकिन उस टक्कर की ताकत इतनी थी कि उसके पैर जमीन पर कुछ इंच पीछे खिसक गए.

ध्रुव की आँखें एक पल के लिए सिकुडीं.

यह. अब भी मुझसे मजबूत है.

हाँ.

अंदर की आवाज ने कहा, लेकिन अंतर कम हो रहा है.

ध्रुव ने गहरी सांस ली.

उसने महसूस किया—

उसका शरीर हर टक्कर के साथ ढल रहा है.

जैसे वह लडाई को सीख रहा हो.

आदमी पीछे हटा.

उसने अपनी उंगलियों को मोडा.

और उसके चारों ओर काली ऊर्जा फिर से घूमने लगी.

तुम्हारी प्रगति तेज है.

उसने कहा, लेकिन. पर्याप्त नहीं.

उसने दोनों हाथ आगे किए.

और इस बार—

काली ऊर्जा सिर्फ एक पंजे का आकार नहीं बनी.

वह फैलने लगी.

लंबी. घुमावदार. तेज.

जैसे अंधेरे की कई धाराएँ.

अब देखो.

उसने धीरे से कहा.

और अचानक—

वे सारी धाराएँ ध्रुव की तरफ झपट पडीं—

स्वीश! स्वीश! स्वीश!

ध्रुव की आँखें फैल गईं.

इतने सारे.

उसने तुरंत अपनी ऊर्जा को केंद्रित किया.

उसके आसपास हल्की रोशनी फैल गई.

उसने अपने शरीर को हल्का किया.

और फिर—

वह हिलने लगा.

तेज.

बहुत तेज.

एक धार उसके पास से गुजरी—

फट!

उसके कपडे का किनारा cut गया.

दूसरी—

उसने झुककर बचा लिया.

तीसरी—

उसने हाथ से रोकी.

आह!

हल्की सी जलन हुई.

लेकिन इस बार—

वह रुका नहीं.

उसने हर वार को पढना शुरू कर दिया.

हर गति.

हर दिशा.

जैसे उसका दिमाग और शरीर एक हो गए हों.

तुम. सीख रहे हो.

आदमी की आवाज आई.

इस बार.

उसकी आवाज में हल्की सी चिंता थी.

ध्रुव ने एक गहरी सांस ली.

और उसी पल—

उसके अंदर कुछ बदला.

जैसे कोई और ताला खुल गया हो.

उसकी ऊर्जा अचानक तेज हो गई.

उसकी आँखों में चमक आ गई.

यह क्या.

आदमी एक पल के लिए रुका.

स्तर. बढ रहा है.

अंदर की आवाज ने कहा.

ध्रुव ने अपनी मुट्ठी कस ली.

अब उसे हर चीज और स्पष्ट दिख रही थी.

काली धाराएँ.

अब धीमी लग रही थीं.

आदमी की गति.

अब पढने लायक थी.

ध्रुव ने एक कदम आगे बढाया.

फिर दूसरा.

और फिर—

वह अचानक गायब हो गया—

क्या—?

आदमी की आँखें फैल गईं.

अगले ही पल—

ध्रुव उसके सामने था—

उसकी मुट्ठी सीधे आदमी के पेट की ओर—

धडाम!

एक जोरदार टक्कर.

आदमी पीछे की ओर उछल गया.

उसका शरीर हवा में कुछ पल के लिए रुका.

फिर—

धम्म!

वह जमीन पर गिरा.

धूल उडी.

सन्नाटा.

ध्रुव वहीं खडा था.

उसकी सांसें तेज थीं.

लेकिन उसकी आँखों में अब एक नई चीज थी—

आत्मविश्वास

आदमी धीरे- धीरे उठा.

उसके होंठों से हल्का सा खून निकला.

उसने उसे हाथ से पोंछा.

और फिर.

वह मुस्कुराया.

लेकिन इस बार—

वह मुस्कान अलग थी.

खतरनाक.

अब. मजा आएगा.

उसने धीमे से कहा.

ध्रुव की भौंहें सिकुड गईं.

उसे महसूस हुआ—

यह अभी खत्म नहीं हुआ है.

बल्कि.

अब असली लडाई शुरू हो रही है.

और उसी पल—

अनंत ग्रंथ उसके हाथ में तेजी से चमका.

जैसे वह इस क्षण का इंतजार कर रहा था.

जैसे अगला रहस्य.

बस खुलने ही वाला हो. रात अब पूरी तरह स्थिर नहीं थी.

वह काँप रही थी.

जैसे इस टकराव ने आसपास की हवा को भी अस्थिर कर दिया हो.

ध्रुव राज वहीं खडा था, उसकी साँसें गहरी थीं, उसकी छाती धीरे- धीरे उठ रही थी और गिर रही थी, लेकिन उसके भीतर जो ऊर्जा बह रही थी. वह अब पहले से कहीं ज्यादा तीव्र हो चुकी थी.

उसकी आँखें सामने खडे उस आदमी पर जमी थीं.

जो अभी- अभी जमीन से उठकर खडा हुआ था.

उसके होंठों से निकली खून की पतली रेखा अब भी चमक रही थी.

लेकिन उसके चेहरे पर कोई दर्द नहीं था.

बल्कि.

एक अजीब सी खुशी थी.

तुमने मुझे चोट पहुँचाई.

उसने धीमी लेकिन भारी आवाज में कहा.

उसकी आँखों की लाल चमक और तेज हो गई.

काफी समय बाद.

ध्रुव चुप रहा.

लेकिन उसके अंदर एक हल्का सा तनाव पैदा हुआ.

ये. खुश क्यों है.

उसने मन ही मन सोचा.

क्योंकि.

अंदर की आवाज आई, अब वह पूरी ताकत दिखाएगा.

ध्रुव की मुट्ठी अपने आप कस गई.

उसने अपनी सांसों को और स्थिर किया.

उसने महसूस किया—

उसकी ऊर्जा अब सिर्फ बह नहीं रही.

वह उभर रही है.

जैसे वह बाहर आना चाहती हो.

और तभी—

धडाम!

आदमी के शरीर से अचानक एक विशाल काली ऊर्जा फूट पडी.

वह ऊर्जा अब पहले जैसी नहीं थी.

वह भारी थी.

घनी थी.

जैसे अंधेरा खुद जीवित हो गया हो.

उसके चारों तरफ वह ऊर्जा घूमने लगी.

धीरे- धीरे.

उसका आकार बदलने लगा.

उसकी पीठ के पीछे.

काली ऊर्जा से बने दो बडे पंख उभर आए.

ध्रुव की आँखें एक पल के लिए चौडी हो गईं.

ये. क्या है.

आदमी ने अपने कंधों को हल्का सा घुमाया.

यह. मेरी असली शक्ति है.

उसने धीमे से कहा.

उसकी आवाज अब गूंज रही थी.

जैसे उसमें कई आवाजें एक साथ मिल गई हों.

अब. देखते हैं.

उसने अपना हाथ उठाया.

और इस बार—

काली ऊर्जा सिर्फ बह नहीं रही थी.

वह सिमट रही थी.

एक बिंदु में.

छोटा.

लेकिन बेहद घना.

ध्रुव का दिल जोर से धडकने लगा.

ये. बहुत खतरनाक है.

अंदर की आवाज ने चेतावनी दी.

ध्रुव ने तुरंत अपनी ऊर्जा को केंद्रित किया.

उसके शरीर के चारों तरफ रोशनी और तेज हो गई.

उसने अपने पैरों को जमीन पर मजबूती से टिकाया.

अगर मैं पीछे हटा.

उसने सोचा.

तो खत्म.

उसकी आँखों में दृढता आ गई.

तो. सामने से.

आदमी ने वह काला बिंदु ध्रुव की ओर फेंका—

जाओ.

और उसी पल—

ध्रुव भी हिला—

अब!

उसने अपनी सारी ऊर्जा अपने हाथ में इकट्ठा की.

उसकी हथेली में एक तेज रोशनी उभरी.

पहले से कहीं ज्यादा चमकीली.

जैसे एक छोटा सूरज.

और फिर—

दोनों शक्तियाँ आमने- सामने—

धीरे.

बहुत धीरे.

जैसे समय खुद रुक गया हो.

हर पल खिंच गया.

ध्रुव की आँखें उस टकराव पर टिकी थीं.

उसका दिल.

एक- एक धडकन.

जैसे गूंज रही थी.

धक.

धक.

धक.

और फिर—

धडामMMMMM!

एक भयानक विस्फोट.

हवा चारों तरफ बिखर गई.

पेड झुक गए.

जमीन काँप गई.

धूल और ऊर्जा का तूफान उठ खडा हुआ.

कुछ पल तक.

कुछ भी दिखाई नहीं दिया.

सिर्फ शोर.

और फिर.

धीरे- धीरे.

सब शांत होने लगा.

धूल बैठने लगी.

हवा स्थिर होने लगी.

और जब सब साफ हुआ—

वहाँ.

सिर्फ एक आकृति खडी थी.

ध्रुव राज.

उसके कपडे थोडे फटे हुए थे.

उसकी साँसें तेज थीं.

लेकिन.

वह खडा था.

मजबूती से.

उसकी आँखों में अब डर नहीं था.

सिर्फ एक चीज थी—

विजय की शुरुआत

आदमी.

वह जमीन पर गिरा हुआ था.

उसकी काली ऊर्जा अब गायब हो रही थी.

उसकी आँखों की लाल चमक धीमी पड रही थी.

वह ध्रुव की ओर देख रहा था.

तुम.

उसने मुश्किल से कहा.

तुम. कौन हो.

ध्रुव धीरे- धीरे उसकी ओर बढा.

उसके कदम अब भारी नहीं थे.

स्थिर थे.

मैं.

उसने शांत आवाज में कहा.

ध्रुव राज हूँ.

उसने अपनी मुट्ठी हल्की सी खोली.

और उसकी हथेली में फिर वही रोशनी उभरी.

आदमी की आँखों में डर आ गया.

नहीं.

कृप—”

शांत रहो.

ध्रुव ने धीमे से कहा.

उसने कोई क्रूरता नहीं दिखाई.

उसने बस उसे देखा.

और फिर—

उसकी चेतना चली गई.

लडाई खत्म हो चुकी थी.

रात फिर से शांत हो गई.

लेकिन.

यह सिर्फ शुरुआत थी.

ध्रुव ने आसमान की ओर देखा.

उसकी सांसें धीरे- धीरे सामान्य हो रही थीं.

और तभी—

उसके हाथ में पकडा अनंत ग्रंथ तेजी से चमका.

दूसरा पन्ना.

धीरे- धीरे खुलने लगा.

ध्रुव की आँखों में चमक आ गई.

अब. अगला कदम.

उसकी आवाज धीमी थी.

लेकिन उसमें एक अटूट विश्वास था.

और दूर कहीं.

जैसे पूरा ब्रह्मांड फिर से उसकी ओर देख रहा था.

एक नई शक्ति जन्म ले चुकी थी.

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