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Chapter 4

ANANT GRANTH - Episode 4

ANANT GRANTH

रात बीत चुकी थी.

लेकिन ध्रुव राज के लिए समय जैसे थम गया था.

उसके सामने जमीन पर पडा वह आदमी अब पूरी तरह बेहोश था. उसके शरीर से निकलती काली ऊर्जा धीरे- धीरे गायब हो चुकी थी, जैसे वह कभी थी ही नहीं. चारों तरफ फिर वही सन्नाटा लौट आया था, लेकिन अब यह सन्नाटा पहले जैसा साधारण नहीं था.

यह सन्नाटा. बदलाव का था.

ध्रुव कुछ पल वहीं खडा रहा.

उसकी साँसें अब सामान्य हो रही थीं, लेकिन उसका मन अभी भी उस लडाई के हर पल को दोहरा रहा था.

हर वार.

हर बचाव.

हर ऊर्जा का टकराव.

उसे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था.

मैंने. सच में उसे हरा दिया.

उसने धीरे से खुद से कहा.

यह सिर्फ शुरुआत है.

अंदर की आवाज ने शांत स्वर में कहा.

ध्रुव ने अपनी मुट्ठी खोली.

उसकी हथेली में हल्की सी रोशनी अब भी घूम रही थी.

लेकिन अब वह अनियंत्रित नहीं थी.

वह स्थिर थी.

उसके नियंत्रण में.

उसने धीरे से उस रोशनी को खत्म किया.

और अपनी नजर उस काली किताब पर डाली—

अनंत ग्रंथ.

किताब अब पहले से ज्यादा चमक रही थी.

जैसे वह जीवित हो.

जैसे वह इस पल का इंतजार कर रही हो.

और तभी—

चमक.

किताब के अंदर से तेज रोशनी निकली.

ध्रुव की आँखें अपने आप उस पर टिक गईं.

दूसरा पन्ना.

धीरे- धीरे खुलने लगा.

समय जैसे फिर धीमा हो गया.

हर पल लंबा हो गया.

पन्ने के किनारे धीरे- धीरे उठे.

और फिर—

वह पूरी तरह खुल गया.

ध्रुव की साँस अटक गई.

उस पर जो लिखा था.

वह साधारण शब्द नहीं थे.

वे जीवित थे.

वे चमक रहे थे.

और जैसे ही ध्रुव ने उन्हें देखा—

वे शब्द उसकी आँखों से होते हुए सीधे उसके दिमाग में उतर गए.

द्वितीय कौशल: शरीर सुदृढीकरण विधि”

अचानक—

उसके शरीर में एक नई ऊर्जा की लहर दौडी.

उसकी मांसपेशियाँ हल्की सी कस गईं.

उसकी हड्डियाँ जैसे मजबूत होने लगीं.

हर कोशिका.

हर नस.

सब कुछ बदलने लगा.

आह.

इस बार हल्का सा दर्द था.

लेकिन वह दर्द बुरा नहीं था.

वह. विकास का दर्द था.

ध्रुव के पैर जमीन में हल्के से धँस गए.

उसकी मुट्ठियाँ अपने आप कस गईं.

उसका शरीर काँप रहा था.

लेकिन उसकी आँखों में डर नहीं था.

वह इस बदलाव को स्वीकार कर रहा था.

धीरे- धीरे.

सब शांत हो गया.

ऊर्जा स्थिर हो गई.

ध्रुव ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं.

और जैसे ही उसने एक कदम आगे बढाया—

ठक.

जमीन पर उसका कदम पहले से ज्यादा भारी था.

लेकिन उसका शरीर हल्का महसूस हो रहा था.

एक अजीब सा संतुलन.

यह. कितना अलग है.

उसने धीरे से कहा.

तुम्हारा शरीर अब पहले जैसा नहीं रहा.

आवाज ने उत्तर दिया.

यह अब शक्ति को सह सकता है.

ध्रुव ने अपने हाथों को देखा.

हल्का सा दबाव डाला.

उसकी नसें उभर आईं.

और उसमें बह रही ऊर्जा अब साफ दिखाई दे रही थी.

मतलब. अब मैं और भी ज्यादा.

उसने अधूरी बात कही.

हाँ.

आवाज ने कहा.

अब तुम और भी ज्यादा शक्तिशाली हो सकते हो.

ध्रुव की आँखों में चमक आ गई.

लेकिन उसी पल—

उसका ध्यान जमीन पर पडे उस आदमी पर गया.

वह अब भी बेहोश था.

लेकिन.

उसके शरीर से हल्की- हल्की ऊर्जा फिर से उठने लगी थी.

ध्रुव की भौंहें सिकुड गईं.

यह. अभी खत्म नहीं हुआ.

उसने धीरे से कहा.

हवा फिर से भारी होने लगी.

और इस बार.

कुछ अलग था.

जैसे कोई और.

कुछ और.

उन्हें देख रहा हो.

ध्रुव ने धीरे- धीरे अपना सिर उठाया.

उसकी नजरें अंधेरे में घुस गईं.

और उसे महसूस हुआ—

यह सिर्फ एक दुश्मन नहीं था.

यह शुरुआत थी.

रात अब फिर से शांत दिख रही थी.

लेकिन यह शांति अब धोखा थी.

ध्रुव राज बिल्कुल स्थिर खडा था, उसकी आँखें उस बेहोश पडे आदमी पर टिकी हुई थीं, जिसके शरीर से फिर से हल्की- हल्की काली ऊर्जा उठने लगी थी. हवा में एक अजीब सी ठंडक फैल गई थी. पहले से ज्यादा गहरी. जैसे कोई अनदेखी उपस्थिति आसपास मंडरा रही हो.

ध्रुव ने धीरे- धीरे साँस ली.

इस बार उसने सिर्फ हवा नहीं खींची.

उसने महसूस किया.

ऊर्जा के कण. जो हवा में तैर रहे थे.

और उसी पल—

उसे एक और एहसास हुआ.

कोई. उन्हें देख रहा था.

तुमने भी महसूस किया.

अंदर की आवाज गूंजी.

ध्रुव ने बिना इधर- उधर देखे धीरे से कहा—

हाँ. यह वही नहीं है.

हवा अचानक भारी हो गई.

जैसे किसी ने अदृश्य रूप से पूरे क्षेत्र को जकड लिया हो.

जमीन पर पडा आदमी अचानक हल्का सा हिला.

उसकी उंगलियाँ कांपीं.

यह जाग रहा है.

ध्रुव ने मन ही मन कहा.

लेकिन.

इस बार उसका ध्यान सिर्फ उस आदमी पर नहीं था.

उसकी इंद्रियाँ अब फैल चुकी थीं.

वह महसूस कर सकता था—

चारों तरफ.

कुछ और भी है.

कुछ. जो छिपा हुआ है.

अचानक—

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हूँ.

एक धीमी, गहरी साँस की आवाज.

लेकिन यह आवाज उस आदमी से नहीं आई थी.

यह. कहीं और से आई थी.

ध्रुव की आँखें एकदम सिकुड गईं.

उसने धीरे- धीरे अपना सिर दाईं ओर घुमाया.

अंधेरा.

घना अंधेरा.

लेकिन.

उस अंधेरे के भीतर.

दो चमकती हुई आँखें.

ध्रुव का दिल एक पल के लिए तेज धडकने लगा.

एक और.

उसने बहुत धीमे कहा.

नहीं.

आवाज ने उत्तर दिया.

यह उससे अलग है.

ध्रुव का शरीर अपने आप सतर्क हो गया.

उसने अपने पैरों को मजबूती से टिकाया.

उसकी हथेली में हल्की रोशनी फिर से उभरने लगी.

धीरे- धीरे.

वह आकृति अंधेरे से बाहर आई.

लंबा कद.

पूरी तरह काले कपडों में.

चेहरा छाया में छिपा हुआ.

लेकिन उसकी आँखें.

वह सामान्य नहीं थीं.

वे शांत थीं.

लेकिन बेहद गहरी.

जैसे वह सब कुछ देख रही हों.

ध्रुव ने उसे ध्यान से देखा.

तुम कौन हो.

उसने सीधे पूछा.

कुछ पल सन्नाटा.

फिर—

वह आकृति हल्का सा मुस्कुराई.

दिलचस्प.

उसकी आवाज धीमी थी. लेकिन साफ.

इतनी जल्दी दूसरा पन्ना.

ध्रुव की भौंहें सिकुड गईं.

तुम. इस किताब को जानते हो.

आकृति ने धीरे से सिर झुकाया.

जानता हूँ.

वह हल्का सा हँसा.

मैं तो इसका इंतजार कर रहा था.

ध्रुव का दिल एक पल के लिए रुक गया.

मतलब.

आकृति धीरे- धीरे उसकी ओर बढने लगी.

लेकिन इस बार.

उसके कदमों में कोई जल्दबाजी नहीं थी.

जैसे उसे पता हो—

कि वह कहीं नहीं जा रहा.

अनंत ग्रंथ.

उसने धीरे से कहा.

यह हर किसी को नहीं मिलता.

और जब मिलता है.

तो उसके साथ. मुसीबत भी आती है.

ध्रुव चुप रहा.

उसकी पकड किताब पर और मजबूत हो गई.

तुम मुझसे क्या चाहते हो.

उसने फिर पूछा.

आकृति उसके कुछ ही कदम दूर रुक गई.

मैं.

उसने धीरे से कहा.

मैं सिर्फ देखना चाहता हूँ.

कि तुम. कितनी दूर जा सकते हो.

ध्रुव की आँखें सिकुड गईं.

अगर मैं ना चाहूँ.

आकृति की मुस्कान गहरी हो गई.

तो भी.

क्योंकि अब. तुम रास्ते पर आ चुके हो.

हवा फिर से भारी हो गई.

ध्रुव ने महसूस किया—

यह आदमी.

पहले वाले से अलग है.

यह सिर्फ ताकतवर नहीं.

यह. खतरनाक है.

अचानक—

जमीन पर पडा पहला आदमी जोर से हिला—

आह्ह!

उसकी आँखें खुल गईं.

लाल चमक फिर से लौट आई.

ध्रुव तुरंत उसकी ओर मुडा—

यह फिर से—”

लेकिन.

अगले ही पल—

धप्प!

वह आदमी अचानक शांत हो गया.

जैसे किसी ने उसकी शक्ति को दबा दिया हो.

ध्रुव ने चौंक कर उस दूसरी आकृति की ओर देखा.

वह अब भी वहीं खडा था.

बिना हिले.

लेकिन.

उसकी आँखों में हल्की सी चमक थी.

बेकार.

उसने धीरे से कहा.

यह तुम्हारे लायक नहीं था.

ध्रुव के अंदर हल्का सा गुस्सा उठा.

तुम. कौन हो.

उसने इस बार और गहरी आवाज में पूछा.

आकृति कुछ पल चुप रही.

फिर उसने कहा—

अभी. तुम्हारे लिए कोई नहीं.

लेकिन भविष्य में.

शायद. तुम्हारा सबसे बडा दुश्मन.

ध्रुव की मुट्ठी कस गई.

लेकिन.

उसने खुद को रोका.

क्योंकि उसके अंदर की आवाज ने कहा—

अभी नहीं.

एक पल का सन्नाटा.

और फिर—

वह आकृति धीरे- धीरे पीछे हटने लगी.

अंधेरे में घुलती हुई.

मजबूत बनो.

उसकी आवाज गूंजी.

क्योंकि अगली बार.

मैं देखने नहीं आऊँगा.

और अगले ही पल—

वह गायब हो गया.

पूरी तरह.

हवा फिर से हल्की हो गई.

लेकिन.

ध्रुव के अंदर जो हुआ.

वह अब शांत नहीं होने वाला था.

उसने अपनी मुट्ठी कस ली.

उसकी आँखों में अब एक नई आग थी.

तो. यही है रास्ता.

उसने धीरे से कहा.

और उसने आसमान की ओर देखा.

इस बार.

वह जवाब नहीं ढूंढ रहा था.

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वह तैयार हो रहा था.

सबसे बडे युद्ध के लिए. रात की वह गहराई. अब पहले जैसी नहीं रही थी.

सब कुछ शांत था. लेकिन यह शांति भीतर तक उतरने वाली नहीं थी.

ध्रुव राज वहीं खडा था. उसकी नजरें उस दिशा में टिकी थीं जहाँ वह रहस्यमयी आकृति अभी कुछ ही क्षण पहले गायब हुई थी.

हवा अब हल्की थी. लेकिन उसके भीतर जो कंपन रह गया था. वह अभी भी महसूस किया जा सकता था.

ध्रुव ने धीरे- धीरे अपनी साँस छोडी.

उसकी मुट्ठियाँ अब भी कसी हुई थीं.

सबसे बडा दुश्मन.

उसने मन ही मन दोहराया.

उसके भीतर एक अजीब सी भावना उठी.

डर नहीं.

लेकिन पूरी तरह शांति भी नहीं.

यह रास्ता आसान नहीं होगा.

अंदर की आवाज फिर गूंजी.

ध्रुव ने हल्का सा सिर झुकाया.

मुझे आसान रास्ता चाहिए भी नहीं.

उसने बहुत धीमी लेकिन दृढ आवाज में कहा.

कुछ पल तक सन्नाटा रहा.

फिर उसकी नजर धीरे- धीरे जमीन पर गई.

वह पहला आदमी.

अब पूरी तरह निष्क्रिय पडा था.

उसकी काली ऊर्जा अब पूरी तरह गायब हो चुकी थी.

जैसे उसकी सारी शक्ति छीन ली गई हो.

ध्रुव उसके पास गया.

धीरे- धीरे.

हर कदम सोच- समझ कर.

वह उसके पास झुका.

उसने ध्यान से उसके चेहरे को देखा.

अब वह सामान्य लग रहा था.

जैसे कोई साधारण इंसान.

यह कौन था.

ध्रुव ने मन ही मन पूछा.

एक साधारण मोहरा.

आवाज ने उत्तर दिया.

मोहरा.

हाँ. ऐसे कई होंगे.

ध्रुव कुछ पल के लिए चुप हो गया.

उसके मन में एक नई बात स्पष्ट हो गई—

यह सिर्फ एक घटना नहीं थी.

यह एक शुरुआत थी.

और शायद.

बहुत कुछ आने वाला था.

ध्रुव ने धीरे से खडे होकर अपनी नजरें फिर आसमान की ओर उठाईं.

तारे अब साफ दिखाई दे रहे थे.

लेकिन अब.

वे सिर्फ तारे नहीं लग रहे थे.

जैसे हर एक के पीछे.

कोई रहस्य छिपा हो.

कोई दुनिया.

कोई शक्ति.

उसने अपनी मुट्ठी हल्की सी खोली.

अनंत ग्रंथ अब भी उसके हाथ में था.

शांत.

लेकिन जीवित.

उसने उसे धीरे से देखा.

अब आगे क्या.

उसने पूछा.

कुछ पल की खामोशी.

फिर—

अभ्यास.

आवाज ने कहा.

समझ.

और. नियंत्रण.

ध्रुव ने सिर हिलाया.

तो. यहीं से शुरू करते हैं.

वह धीरे- धीरे उस जगह से हटकर थोडी खुली जगह पर आया.

उसने अपने पैरों को जमीन पर जमाया.

आँखें बंद कीं.

और गहरी साँस ली.

इस बार.

वह पहले से अलग था.

वह सिर्फ ऊर्जा को महसूस नहीं कर रहा था.

वह उसे निर्देश दे रहा था.

उसके शरीर के अंदर बहती हुई ऊर्जा.

धीरे- धीरे एक दिशा में सिमटने लगी.

उसके हाथ की ओर.

उसकी हथेली में.

एक हल्की सी रोशनी उभरी.

लेकिन इस बार.

वह पहले से ज्यादा स्थिर थी.

ज्यादा नियंत्रित.

ध्रुव ने धीरे- धीरे अपनी आँखें खोलीं.

उसने उस रोशनी को देखा.

और फिर.

उसे धीरे से आगे बढाया.

जा.

रोशनी आगे बढी.

धीरे.

बहुत नियंत्रित तरीके से.

और सामने पडे एक पत्थर से टकराई—

ठक.

पत्थर हल्का सा हिला.

लेकिन टूटा नहीं.

ध्रुव ने भौंहें सिकुडीं.

कमजोर.

फिर से.

आवाज ने कहा.

ध्रुव ने फिर से ध्यान लगाया.

इस बार.

उसने और गहराई से ऊर्जा को इकट्ठा किया.

उसकी साँसें धीमी हो गईं.

उसका शरीर स्थिर हो गया.

और फिर—

उसकी हथेली में रोशनी फिर उभरी.

पहले से ज्यादा घनी.

ज्यादा तेज.

अब.

उसने उसे आगे बढाया—

धड!

पत्थर इस बार टूट गया.

ध्रुव की आँखों में हल्की सी चमक आई.

बेहतर.

उसने गहरी साँस ली.

और उसी पल—

अनंत ग्रंथ फिर से चमका.

इस बार.

बहुत हल्का.

जैसे वह प्रतिक्रिया दे रहा हो.

जैसे वह कह रहा हो—

तुम सही रास्ते पर हो.

ध्रुव के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई.

उसने किताब को अपने सीने के पास लाया.

मैं रुकूँगा नहीं.

उसने धीरे से कहा.

उसकी आँखों में अब एक अजीब सी शांति थी.

लेकिन उस शांति के पीछे.

एक तूफान छिपा था.

एक ऐसा तूफान.

जो धीरे- धीरे तैयार हो रहा था.

और बहुत जल्द.

पूरी दुनिया उसे महसूस करने वाली थी.

रात बीत रही थी.

लेकिन ध्रुव राज के लिए.

अब हर रात.

एक नई शुरुआत बनने वाली थी.

और उसकी शक्ति. अभी बस जागी थी.

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