Manav Aur Jadui Academy - Chapter 2
Manav Aur Jadui Academyखैर, उसे इस जगह से निकलना था। अनजान जगह खतरनाक होती है!
इसलिए वो फिर उठा और दरवाजे की तरफ बढ़ा। चक्कर आने के बावजूद उसने दीवार पकड़ ली। तभी उसे खिड़की के शीशे में अपना अक्स दिखा।
'ये क्या है...'
उसने हॉस्पिटल के कपड़े नहीं पहने थे, लेकिन अपने रोज के कपड़े भी नहीं।
'ये किसी वर्दी जैसा लगता है?'
उलझन में उसने अपने कपड़ों को फिर से देखा। उसने ऐसे कपड़े पहले कभी नहीं पहने थे।
तभी उसे खिड़की के बाहर का नजारा याद आया। कुछ कदम और पास जाने पर उसे नीचे एक शहर दिखा। लेकिन... ये शहर उसके घर के आसपास का नहीं था। मानव ने चारों ओर देखा... बड़ी-बड़ी अजीब इमारतें, अलग तरह की कारें, अनजान चेहरे। दुकानों के नाम एक ऐसी भाषा में लिखे थे, जो उसे पूरी तरह नहीं आती थी, लेकिन वो किसी तरह उन्हें पढ़ पा रहा था। अब उसे एहसास हुआ कि वो एक ऐसी भाषा में बात कर रहा था, जो उसने कभी सीखी ही नहीं थी।
'सचमुच, क्या हो रहा है? क्या ये कोई और सपना है?'
यही एकमात्र तार्किक बात थी। उसे फिर से जागना था।
थप्पड़।
खुद को जगाने के लिए उसने अपना चेहरा थपथपाया।
"तुम ये क्या कर रहे हो?"
"ये काम नहीं कर रहा।"
मानव ने उस लड़के को नजरअंदाज किया और अपने "असली जिंदगी में वापस जाने" के मिशन पर लगा रहा।
थप्पड़, थप्पड़, थप्पड़।
उसने तब तक खुद को थप्पड़ मारे, जब तक उसका चेहरा सुन्न नहीं हो गया। लेकिन होश में आने की बजाय, उसका सिरदर्द और चक्कर बढ़ गया। अचानक चक्कर आने से वो लड़खड़ाने लगा।
"अरे, अरे, कै...मानव!"
किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
उस लड़के ने मानव को ऐसे देखा, जैसे कोई करीबी दोस्त हो। टमाटर की तरह लाल और सूजा चेहरा लिए मानव ने सवालिया नजरों से उसे देखा और अपनी बाँह छुड़ाने की कोशिश की। लेकिन लड़के ने उसे जोर से पकड़ रखा था।
"तुम कौन हो...?"
"...क्या... मज़ाक बंद करो, ठीक है?"
"अरे, तुम मुझे डरा रहे हो!"
"अपना नाम बताओ...?"
"...र-रेयान?"
हाँ, बिलकुल। जैसा मानव ने सोचा था! वो उसे नहीं जानता था! एक लंबी खामोशी छा गई। दोनों एक-दूसरे को घूर रहे थे। रेयान घबराया हुआ था, इधर-उधर हिल रहा था, जैसे समझ नहीं पा रहा हो कि क्या करे।
"अरे, तुम बिलकुल ठीक नहीं हो। मैं डॉक्टर बुलाता हूँ, ठीक है?"
"और ये कौन सी जगह है? अकादमी, तुमने कहा?"
"हाँ... हाँ..."
"माफ करना, लेकिन मैं तो यूनिवर्सिटी से पास हो चुका हूँ... क्या तुम बता सकते हो कि मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ?"
"क्या बकवास है! तुम ऐसे बात कर रहे हो, जैसे मुझसे पहली बार मिले हो!"
"हाँ, बिलकुल। मैंने तुम्हें पहले कभी नहीं देखा। और क्या तुम मेरा हाथ छोड़ सकते हो?"
"..."
रेयान ने झिझकते हुए उसकी पकड़ ढीली की।
मानव के लिए भागने का ये सही मौका था, लेकिन वो भाग नहीं सका, क्योंकि उसका सिर बुरी तरह घूम रहा था। वो रेयान को डॉक्टर बुलाने के लिए दौड़ते देख सकता था, लेकिन उसे इसकी परवाह नहीं थी।
बिस्तर पर बैठकर वो सोचने लगा। वो उस सपने के बारे में सोच रहा था—सूर्यग्रहण, ग्रह, दरारें। वो सपना इतना सजीव था कि उसे सिर्फ सपना कहना मुश्किल था। उसे अब भी वो दर्द याद था, जो उसने महसूस किया था।
'क्या ये मुमकिन है कि... वो कोई सपना नहीं था...?'
ऐसा कैसे हो सकता है? अगर वो सपना नहीं था, तो ग्रहण के बाद क्या हुआ? कुछ सेकंड में ही इतनी तबाही मच गई थी। अगर ऐसा था, तो अब सब कुछ इतना शांत क्यों है? और वो आखिर किस देश में था?
मानव ने ढेर सारे वेबटून और वेब उपन्यास पढ़े थे। क्या कहानियों में ग्रहण के बाद ज़ॉम्बी हमला या ऐसा कुछ नहीं होता? बेशक, वो काल्पनिक कहानियों से हकीकत का अंदाजा नहीं लगा सकता था।
'लेकिन उस वक्त... वो एहसास...'
उसे याद था कि एक अजीब-सी रोशनी ने उसके शरीर को ढक लिया था, और फिर सब कुछ सफेद हो गया था। उस पल, उसे वो एहसास याद आया... जैसे उसे कहीं ले जाया जा रहा हो। जैसे कोई उसे जबरदस्ती दूसरी जगह फेंक रहा हो। उस वक्त वो इस पर ध्यान देने की हालत में नहीं था, लेकिन अब... ये सब अजीब लग रहा था।
उसे एक अशुभ एहसास हुआ। कुछ उसे बता रहा था कि ये जगह उसका घर नहीं है। उसे पता लगाना था कि उसके साथ क्या हुआ था। उसने सोचा...
'क्या ये मुमकिन है कि ये जगह...'
वो आगे कुछ सोच पाता, इससे पहले रेयान एक डॉक्टर के साथ वापस आ गया।
"मैं कह रहा हूँ, तुमने मुझे किसी और के साथ गलत समझ लिया है!"
"क्या तुम पागल हो? खिड़की की चौखट छोड़ दो!"
"मैं नहीं छोड़ूँगा! तुम मुझे जाने दो!"
"तुम गिर जाओगे! पागल, तुम खुद को मार डालोगे! तुमने सिर्फ अपनी याददाश्त ही नहीं खोई, दिमाग भी खो दिया है!"
"चुप रहो, गंदे अपहरणकर्ता! मैं पूरी तरह ठीक हूँ!"
एक हाथ से खिड़की की चौखट पकड़े, मानव ने पास रखी कुर्सी उठाई और उसे पीछे की ओर फेंक दी। उसका निशाना? रेयान का सुंदर चेहरा। वो रेयान से बचना चाहता था, जो उसे पीछे से पकड़कर कमरे में खींचने की कोशिश कर रहा था।
लेकिन उसका प्लान काम नहीं किया। कुर्सी अचानक छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट गई और रेयान के चेहरे पर जा लगी।
"..."
"..."
'ये फिर से क्या बकवास!'
अपना एकमात्र हथियार खोने की वजह से, मानव को एक बार फिर असहाय होकर कमरे में घसीटा गया।
मिशन पूरी तरह नाकाम।
ऐसा कितनी बार हुआ? मानव को नहीं पता था। उसने कई बार भागने की कोशिश की, लेकिन सारे प्रयास नाकाम रहे। सामने खड़ा ये परेशान करने वाला लड़का था। रेयान दिखने में कमजोर नहीं लगता था, और वाकई बहुत ताकतवर था। उसके इरादे बुरे तो नहीं लग रहे थे, लेकिन उसने मानव को कहीं जाने भी नहीं दिया।
"तुम्हें लगता है, तुम क्या कर रहे हो?"
"यहाँ से भाग रहा हूँ! तुम मुझे जबरदस्ती रोक रहे हो! ये गैरकानूनी है! मैं पुलिस बुलाऊँगा!"
"अच्छा? ठीक है! जा, पुलिस बुला!"
मानव ने इधर-उधर देखा और पलंग के पास रखी मेज की तरफ बढ़ा। उसने मेज पर रखा फोन उठाया और पुलिस को कॉल किया।
"..."
काम नहीं किया...
'क्या यहाँ पुलिस का नंबर अलग है?'
मानव स्क्रीन को घूरता रहा। कुछ बार पलकें झपकाने के बाद उसने रेयान की तरफ देखा।
"उम... क्या तुम बता सकते हो कि पुलिस से कैसे संपर्क करूँ?"
"..."
रेयान ने फोन लिया, एक नंबर डायल किया और उसे वापस दे दिया।
"..."
-हैलो, मैं पुलिस अधिकारी हूँ। आपकी क्या मदद कर सकता हूँ?
'इसने सचमुच पुलिस बुला दी!'
"हाँ, हैलो। मैं एक अपराध की शिकायत करने के लिए फोन कर रहा हूँ!"
-क्या आप और जानकारी दे सकते हैं?
मानव ने गंभीर आवाज में बोलना शुरू किया।
"हाँ! मुझे जबरदस्ती एक कमरे में बंद रखा गया है। वो मुझे जाने नहीं दे रहे, और मैं भाग भी नहीं सकता!"
-आप वहाँ कैसे पहुँचे?
"मुझे नहीं पता..."
जब उसने दोबारा पूछा, तो अधिकारी की आवाज और गंभीर हो गई।
-क्या आपको पता है कि आपको कहाँ रखा गया है?
"मैं हॉस्पिटल में हूँ..."
वो फिर कहाँ था?
"स्पेशल फोर्सेज अकादमी का हॉस्पिटल।"
उसने रेयान की आवाज सुनी।
'हाँ, ठीक है। उसने मुझे पहले भी बताया था।'
"हाँ, मुझे स्पेशल फोर्सेज अकादमी के हॉस्पिटल में रखा गया है।"
-...
कोई जवाब नहीं आया।
"क्या आप मदद के लिए आएँगे?"
-...
"...मैम?"
मानव को अधिकारी की थोड़ी गुस्से वाली आवाज सुनाई दी।
-...आपको पता है सर, हम लोगों की मदद करने में बहुत व्यस्त हैं। आपकी गलत शिकायतें उन लोगों को नुकसान पहुँचा सकती हैं, जिन्हें सचमुच मदद की जरूरत है। ये एक अच्छे नागरिक का काम नहीं है। प्लीज अपनी बचकानी हरकतें बंद करें।
बीप बीप।
अधिकारी ने फोन काट दिया।
'क्या?'
मानव ने एक आह भरी। उसने देखा कि रेयान उदास आँखों से उसे देख रहा था। डॉक्टर की बात सुनने के बाद, रेयान उसके पास ही रहा और उसे एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ा।
मानव के तीव्र संघर्ष और उसकी जाँच के बाद, डॉक्टर ने कहा कि शायद सदमे की वजह से उसकी याददाश्त चली गई है। फिर उसने कहा कि अभी कुछ पक्का नहीं है, और बाद में उसकी हालत फिर से जाँचनी होगी।
यह सुनकर रेयान इतना हैरान हुआ कि उसने डॉक्टर को लगभग पीट ही दिया! डॉक्टर के भाग जाने के बाद उसका आश्चर्य दुख में बदल गया। वह बीच-बीच में आहें भरता और उदास आँखों से मानव को देखता, फिर मुँह से कहता, "उसके साथ ऐसा क्यों हुआ?"