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Chapter 1

Fanaa Teri Mohabbat mein - Chapter 1

Fanaa Teri Mohabbat mein

शहर की सुलगती राख के ऊपर मंडराता हुआ वह चॉपर दूर आसमान में ओझल हो चुका था, लेकिन अंश राणा के दिमाग में अपनी जीत का जुनून था। उसे किसी भी कीमत पर अपनी नैना चाहिए थी दूसरी ओर,बस हदासे के बाद, नदी के किनारे सुबह का उजाला धीरे-धीरे फैल रहा था। टूटे बस के मलबे के बीच से नैना की धीमी आवाज सुनाई दी। उसने अदम्य का हाथ कसकर पकड़ा हुआ था। पानी की तेज लहरों के बीच दोनों भाई-बहन किसी तरह बस के मलबे से बाहर निकलने में कामयाब हुए। चारों तरफ सन्नाटा था। बचने वाले लोगों की आवाजें दूर-दूर तक सुनाई नहीं दे रही थीं।नैना ने कांपती आवाज में कहा, "अदम्य, हम...हम कहां जाएंगे? हमारे पास अब कोई नहीं बचा।"अदम्य, जो खुद डरा हुआ था, उस ने अपना डर छिपाते हुए कहा,"दीदी, हमें मजबूत रहना होगा। हमें पापा-मां के क़तील का हर हाल में बदला लेना है

दोनों ने आसपास नजर घुमाई। नदी के किनारे कुछ लोग मौजूद थे, जो घायलों की मदद कर रहे थे। एक बुजुर्ग ने उन्हें पास बुलाया और कहा,"बेटा, भगवान का शुक्र है कि तुम दोनों बच गए। अब आगे क्या करोगे?" नैना ने दुख भरी आवाज में कहा,"हमें नहीं पता, बाबा। हमारे अपने अब इस दुनिया में कोई नहीं रहा । हमें बस एक रहने की जगह चाहिए।" उधर, अंश राणा… अंश का शैतानी चेहरा मुस्कान तैहर गई । उसे पता चल चुका था कि नैना और अदम्य जीवित हैं। वह अपने असिस्टेंट्स को बोल दिया था,"मैं उन्हें आसानी से मरने नहीं दूंगा। अब उनके जीने का हर दिन उन्हें मौत से बदतर लगेगा। नैना को मेरे पास आना ही होगा। और अदम्य...वो बस मेरे खेल का एक मोहरा बनेगा।" और नैना उस आरव से बेहद नफरत करेगी उस नौकर के लिए मुझपे हाथ उठाया था ना ये कहते हूई बेहद खतरनाक लग रहाथा । उसने अपने आदमी को कहा कि नैना और अदम्य की लोकेशन ट्रैक की जाए। इसे ही कुछ दिन बीत गई । वही दूसरी तरफ नैना को पुरा विश्वास था । कि उस कि मम्मी पापा की डेथ के पीछे आरव का हाथ। आरव से बहुत नफरत करने लगीं थीं। नैना इस वक्त ड्रेसिंग टेबल के आगे घुटने टेक बैठीं थीं। उस के हाथ में एक तस्वीर थी सायाद उस की मम्मी पापा कि । नैना कि आंखें बंद थी जैसे कुछ याद कर रही हो । रो। ऱो कर उस के अंशु सुख गई थे । उस ने आपने आंखों को धिरे धिरे खोला ओर एक टक अपना चेहरा ऊपर कर सीलन को घूर रही थी I hat you mr आरव माहिया वंशी आप तक तो बस आप ने मेरा मासूम चेहरा देखा था । अब आप देखेंगे कि नैना कपूर क्या चीज है । ना जाने अंश क्या साजिश रच रहा था । कोई प्यार में फना होने को तैयार था। तो कोई किसी से सब कुछ छीन लेने की फराक पर था पर भाना किसी को भी नहीं थी आगे जिंदगी में क्या मोड लाने वाली है । वही दूसरी ओर मुंबई के एक हाई क्लास इलाके की 7 स्टार होटल के 20 वे फ्लोर पर एक कमरे में एक आदमी इस वक्त बाथरूम में खड़ा हुआ खुद से ही बड़बड़ाए जा रहा था। गर्म पानी की बूंदे धीरे-धीरे उसके शरीर पर बरस रही थी और उसकी मस्कुलर बॉडी को और चमका रही थी। उस कमरे की ग्लास वॉल के ठीक सामने बड़ा सा समंदर था जिसमें लहरे गोते खा रही थी। बाथरूम में खड़े उस आदमी की आंखें बंद थी और वो एक-एक बूंद को महसूस कर रहा था। इस वक्त उसकी मुट्ठियाँ कसी हुई थी और उसके हाथों में उभरती हुई साफ दिखाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो अपने गुस्से को दबाने की कोई ना कामयाब कोशिश कर रहा हो। उसी वक्त कमरे की डोर बेल बजी। जैसे ही उसने बेल की आवाज सुनी उसने तुरंत अपनी आंखें खोली। उसकी भूरे रंग की वो आंखें बहुत ज्यादा अट्रैक्टिव थी और उसका फेस कट भी बहुत खूबसूरत था। दिखने में वो लड़का किसी फरिश्ते से कम नहीं था मगर उसकी आंखें उसकी पर्सनालिटी के बारे में कुछ और ही कह रही थी। उसने अपने शरीर के निचले हिस्से में सिर्फ एक टावर लपेटा और बाथरूम से बाहर आ गया। उसकी शरीर और बालों से टिप टिप गिरता पानी उसे और अट्रैक्टिव बना रहा था। जैसे ही उसने दरवाजा खोल दरवाजे के सामने एक लड़की खड़ी हुई थी उस को देखते ही उस के मुंह से एक शब्द निकला जिसे सुन आगे खड़ी लड़की घबरा गई डर के मारे उसने अपने कपड़े को भिंच लिया । उस ने डर की आवाज में कहा क्या मिस्टर माहिया वंशी में अंदर आ सकती हूं । ये सुन आरव के होश उड़ गए। क्योंकि ये पहली बार हो रहा था कि नैना खुद आरव के पास आ रही थी। आरव आपने ही खयालों में था । कि एक बार फिर उसके कानों में आवाज आई । क्या मैं अंदर आ सकती हूं। अब जा कर आरव आपने सेंस में वापस आया । और दरवाजा से हट गया । आरव के हटते ही नैना अंदर आ गई। आरव ने दरवाजा बंद कर दिया और वापस अंदर आ गया। उस ने एक नजर नैना को देख। और कहा मुझे सेड्यूस करने आईं हो क्या , आरव कि बात सुन नैना घबरा गई। और खुद को समलते हुए कहा क्या बात कररहे हैं आप । तुम्हारे कपड़े से तो ये ही बात पता चल रही है। Sorry पर आपने कहा था ना कि मैं आप के सब काम करूं तो बता दीजिए मुझे कौन सा काम करना है । ऐ सुन आरव एक मिनट रोका और कहा वैसे सार कम तो मेड कर गाई है तुम मेरे कपड़े पर स्त्री कर दो । नैना ने हलकि मुस्कान के साथ कहा जी अभी कर रही हूं। नैना कपड़ों में स्त्री करने लगी और आरव वही सोफ़ा पर बैठे कर वाइन पीने लगा पर उस कि बारबार नजर नैना पे थी । याद नैना कि चाल का पहले से ही पता हूं । वही नैना भी मंद-मंद मुस्कुरा रही थी जैसे कोई बड़ी साजिश रच रही हो । लि जिए मिस्टर माहिया वंशी हो गई। आरव ने शट को नैना के हाथ से ले लिया और पहने लगा। आरव शट को नहीं पहन पा रहा था , क्योंकि उस का शरीर उस का साथ नहीं दे रही थी उस के कदम लड़खड़ा रहे थे । उस समझते देर नहीं लगा किसकी ड्रिंकिंग में ड्रेस मिलाया गया था । स्ट्रॉवरी तुम ने अच्छा नहीं किया। नैना ने फुल एटीट्यूड के साथ कहां पहले खुद को तो समाल लो तब मेरा कुछ करना , ये कहते हुए नैना वही सैफा पर बैठ गई। ओर आरव को तड़पता हुआ देखा रही थी। आरव को तड़पता देख उस के दिल को सुकून मिला रहा था। और ऊपर से नैना आरव सेड्यूस कर रही थी और आरव बिना पानी मछली कि तरह तड़प रहा था। नैना आरव के करीब हो। कर भी उस से दूर थी । स्ट्रॉवरी इस कि सजा तुमसे मिलकर रहेगी। इसी के साथ आरव आपने बदन को नोचने लगा है तो वहीं नैना आरव को वैसा ही तड़पता हुआ छोड़ दिया । अब दोनों के मन में सिर्फ सिर्फ नफरत थी। जो एक दुसरे को बर्बाद करने के लिए हर एक चल रहे थे पर जीत दोनों में से किसी की नहीं हो रही थी। नैना के पास अब परिवार कहने के लिए उस का भाई ही था । नैना ने शहर भी छोड़ दिया था। अब उस कि जिंदगी का एक ही मकसद था। वो हर हाल में आरव से बादल लेंगी पर सबुत तो उस के पास भी नहीं था। कि आरव ही है। उस के मम्मी पापा का गुनहगार ये तो समय ही बताएगा कौन है। असली गुनहगार।

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