Fanaa Teri Mohabbat mein - Chapter 2
Fanaa Teri Mohabbat meinमुंबई, "Welcome to the hell नैना कपुर । आज से तुम्हारी ज़िंदगी का बुरा वक़्त शुरू होता है।" मुंबई के एक हाई क्लास इलाके की 7 स्टार होटल के 20 वे फ्लोर पर एक कमरे में एक आदमी इस वक्त किसी तस्वीर के आगे खड़ा हुआ खुद से ही बड़बड़ाए जा रहा था। उसी वक्त कमरे की डोर बेल बजी। जैसे ही उसने बेल की आवाज सुनी उसने तुरंत अपनी आंखें दरवाजे कि और रूख मुड़ लिए । उसकी लाल आंखें बहुत ज्यादा डरवान थी । दिखने में वो लड़का किसी फरिश्ते से कम नहीं था मगर उसकी आंखें उसकी पर्सनालिटी के बारे में कुछ और ही कह रही थी।जैसे ही उसने दरवाजा खोल दरवाजे के सामने एक लड़की डरी सहमी खड़ी हुई थी और पीछे एक ब्लैक कलर के सूट में एक आदमी खड़ा हुआ था। इस लड़के ने उस लड़की को ऊपर से नीचे तक देखा और उस आदमी की तरफ अपना सर हिलाकर इशारा किया जिसके बाद वो आदमी वहां से चला गया। उस आदमी के जाते ही वो लड़के ने उस लड़की का हाथ कस कर पकड़ा और उसे जबरदस्ती कमरे के अंदर खींच लिया और कमरा अंदर से बंद कर दिया। उस लड़की के कमरे में दाखिल होते ही उस लड़के का बिहेवियर पूरी तरह से बदल गया। वो उसे घूर-घूर कर ऐसे देख रहा था मानो अगले पल मौका मिलते ही उसे खा जाएगा। लेकिन उस लड़की ने अब तक उस लड़के को आंख उठा कर देखा भी नहीं था। "मेरी तरफ देखो रसभरी look at me." उस लड़के ने अपनी भारी आवाज में नैना को पुकारते हुए अपनी तरफ देखने के लिए कहा लेकिन अभी भी नैना ने उसे एक नजर देखा भी नहीं। नैना के इस बर्ताव से उस लड़के को और गुस्सा आ गया, उसने नैना को दरवाजे पर धक्का दिया और दरवाजे से सटाकर जबरदस्ती उसकी गर्दन दबाते हुए कहा, "मुझे अपनी बातें दोहराना पसंद नहीं है,चार साल पहले तुम अपने किसी मकसद से आई थी ना, और आज मेरे ! क्या तुम चाहती हो कि मैं अपना वादा तोड़ दूं?"जैसे ही उस लड़के ने इतना कहा नैना ने अपनी नजरे उठाकर उसे देखा। अब तक रो-रो कर नैना की light brown आंखें लाल हो चुकी थी, अभी भी उसकी आंखों में मोटे-मोटे मोती जैसे आंसू भरे हुए थे जो उस लड़के की आवाज सुनकर उसकी आंखों से बाहर निकल आए। जैसे ही एक आंसू लुढ़क कर नैना की आंखों से बाहर निकाला उस लड़के ने अपनी उंगली से उस आंसू को पकड़ लिया और उसे अपनी जीभ पर रखते हुए बोला, "जहां तक मैं तुम्हें जानता हूं तुम्हें तो ये सब बहुत पसंद है ना!अलग-अलग मर्दों के साथ सोना, उन्हें खुश करना ये तो तुम्हें बहुत अच्छा लगता है तो फिर मेरे सामने ये सती सावित्री वाला नाटक क्यों कर रही हो?" उस लड़के की आंखों में इस वक्त नफरत साफ दिखाई दे रही थी। अपने सामने खड़ी नैना को वो नफरत भरी निगाहों से घुर रहा था।
"क्या तुम सच में मेरे बारे में ऐसा सोचते हो आरव ?" उसका सवाल सुनते ही उस लड़के के चेहरे के एक्सप्रेशन तुरंत बदल गए और उसने गुस्से में कहा, "क्यों तुम ही बताओ ना कुछ गलत कहा क्या मैंने? क्या तुम्हें नहीं अच्छा लगता अलग-अलग लड़कों के साथ राते बिताना, यही वजह थी ना तुमने 4 साल पहले मुझे छोड़ दिया था? और आज देखो आज कहां आकर खड़ी हो तुम? वैसे अब तो तुम्हें मेरे साथ रात बिताने में या मुझे खुश करने में कोई तकलीफ नहीं होगी right? आखिर मैं तुम्हें 7 star होटल में जो लाया हूँ।" हालांकि इस वक्त नैना बहुत कमजोर थी लेकिन फिर भी उसने कठोर आवाज में कहा, "ये तुम भी जानते हो और मैं भी कि मैं आज इस वक्त यहां पर क्यों हूं? अगर मेर मजबूरी नहीं होती, अगर मेरे भाई को मेरी जरूरत नहीं होती तो मैं यहां कभी नहीं आती और ये बात तुम अच्छे से जानते हो।" पहले तो नैना की बात सुन आरव को बहुत गुस्सा आया लेकिन फिर वो पागलों की तरह जोर-जोर से हंसने लगा। उसकी हंसी में शैतान की झलक थी। "ठीक है तो मजबूरी ही सही लेकिन मजबूरी में भी तुम्हें आज वो काम करना होगा जो करना तुम्हें बहुत पसंद है। दूसरे लड़कों को तो बहुत खुश कर दिया अब जरा मैं भी तो देखूं कि आखिर तुम्हारे बदन में ऐसी क्या खास बात है?" इतना कहकर आरव ने फिर से उसकी गर्दन को अपने हाथों में झकड लिया और जबरदस्ती अपने होठों को नैना के होठों पर रखकर उसे बहरेमी से किस करने लगा। आरव ने नैना के दोनों हाथों को पड़कर उसे ऊपर की तरफ कर दिया था और अपने आप को पूरी तरह से नैना के शरीर के साथ चिपका दिया था। आरव का पूरा वजन इस वक्त नैना के शरीर पर था जिस वजह से वो हिल भी नहीं पा रही थी।आरव के होंठ लगातार नैना के होठों को सक किए जा रहे थे और कभी-कभी बाइट भी कर रहे थे। आरव खुद भी जानता था कि इस वक्त वो नैना के साथ कितना कठोर हो रहा था।हालांकि नैना आरव की इस बहरहमी को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी लेकिन फिर भी उसने अपने होठों से उफ्फ़ तक नहीं निकाला। आरव कब से नैना के साथ जानवरों जैसा बर्ताव कर रहा था लेकिन फिर भी नैना उसे सहन कर रही थी पर उसकी आंखों से बहते आंसू उसके दर्द को साफ-साफ बयां कर रहे थे।जब नैना को काफी देर के बाद सांस लेने में दिक्कत होने लगी तब जाकर आरव ने नैना के होठों को छोड़कर उसकी गर्दन पर अपने होंठ रखें और उसे भी किस और बाइट करने लगा।इतनी बहरहम किस की वजह से नैना की होठों से हल्का सा खून निकलने लगा था, वही हालत उसकी गर्दन की भी थी। उस की गर्दन पर जगह-जगह लाल रंग के निशान पड़ चुके थे।अब जाकर आरव ने नैना के हाथों को अपने हाथों से छोड़ा और उसके येलो कलर की टॉप की स्लीव को खींचकर उसे फाड़ दिया और उसके कंधों पर किस करने लगा। धीरे-धीरे नैना की सांस गहरी होती जा रही थी, उसकी आंहे उस कमरे में गूंज रही थी। कुछ ही देर में आरव ने नैना के टॉप को उसके शरीर से अलग कर दिया और उसकी baki कपड़े खोलने लगा। अब जाकर नैना होश में आने लगी, उसे समझ आ रहा था कि अगले पल उसके साथ क्या होने वाला था। उसने आरव को खुद से दूर करने की कोशिश की।उसके धक्के की वजह से आरव उससे हल्का सा दूर हुआ लेकिन अगले ही पल उसने नैना के दोनों हाथों को अपने एक हाथ से पड़कर उसकी आंखों में आंखें डालकर काफी करीब आकर कहा, "आज नहीं, आज नहीं। जो कुछ भी तुमने मेरे साथ 4 साल पहले किया था उसका हिसाब आज बराबर होगा, तुम्हें भी पता चले किसी को कितना दर्द होता है।"इतना कहकर आरव ने नैना को अपनी बाहों में उठा लिया और उसे अपने साथ बिस्तर पर ले गया। उसने बहुत ही बुरे तरीके से बिना नैना की परवाह किए ही उसे बिस्तर पर फेंक दिया और नैना के ऊपर आ गया।अब नैना के शरीर पर सिर्फ नाम के कपड़े बचे हुए थे आरव के हाथ लगातार नैना के शरीर के अलग-अलग हिस्सों को एक्सप्लोर कर रहे थे साथ ही उसके होंठ लगातार नैना के पेट, उसके कंधे, उसकी गर्दन और उसके होठों को किस कर रहे थे। आरव का एक हाथ नैना की thigh को सहला रहा था और दूसरा उसके बचे हुए कपड़ों को निकालने की कोशिश कर रहा था।नैना अपने साथ हो रही इस नाइंसाफी को रोकना चाहती थी लेकिन शायद कुछ ऐसा था जिसने उसे अब तक रोक कर रखा था। वो चाह कर भी आरव से ना तक नहीं कह पा रही थी। वो बस अपनी आंखों से आंसू बहाकर अपनी मजबूरी पर रो सकती थी। नैना को रोते देखा कुछ पल के लिए आरव रुक गया। नैना को रोते देख उसके चेहरे की नफरत फिक्र और हमदर्दी में बदल गई। कुछ सोचने के बाद उसने उसकी आंखों से आंसू पोंछते हुए कहा,