Fanaa Teri Mohabbat mein - Chapter 3
Fanaa Teri Mohabbat mein"तुम्हारी आंखों में आज भी आंसू पसंद नहीं है मुझे। नैना की आंखें चिख चिख कर आरव से कह रही थी कि वो जैसा सोच रहा था वैसा कुछ भी नहीं था लेकिन उसने अपने होठों से एक भी लफ्ज नहीं कहा, "जब तुमने डिसाइड कर ही लिया है तो फिर मेरी कुछ कहने या ना कहने से कोई फर्क नहीं पड़ता। ना तब तुमने मेरी बात समझने की कोशिश की थी ना अब तुम मेरी बात समझने की कोशिश कर रहे हो। तुमने तब भी मेरी एक नहीं सुनी थी और आज भी तुम वही कर रहे हो।" नैना की बात सुनकर एक पल को आरव के चेहरे की सारी नफरत सारा गुस्सा हवा हो गया और वो नैना के चेहरे को सहलाने लगा। जैसे नैना का दर्द उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। कुछ सोचने के बाद वो नैना के ऊपर से उठा और ठीक तब भी तुम्हारा फैसला यही था तुम मुझे छोड़ कर जाना चाहती थी और मैंने तुम्हें जाने दिया था तो मैं तुम्हें आज भी नहीं रोकूंगा। अगर तुम्हारा इस कमरे में रहना तुम्हारी मजबूरी है तो तुम यहां से जा सकती हो, मैं तुम्हें नहीं रोकूंगा।" आरव की बात सुन नैना की आंखों में उम्मीद चमकने लगी। उसने उम्मीद भरी नजरों से आरव की तरफ मुस्कुराकर देखा और अपने कपड़े ढूंढने लगी।
अपनी किसी मजबूरी के चलते नैना आरव के साथ होटल के कमरे में थी जहां आरव उसके साथ जानवरों जैसा बर्ताव कर रहा था लेकिन अचानक कुछ देर बाद उसे नैना पर तरसने लगा और उसने उसे वहां से जाने की इजाजत दे दि नैना ने अपने कपड़े उठाए और उन्हें पहनने लगी। उसने एक नजर उठा कर भी आरव की तरफ नहीं देखा और अपना पर्स लेकर चुपचाप वहां से जाने लगी। लेकिन नैना दरवाजे पर पहुंचती उससे पहले ही पीछे से आरव की डरावनी और घमंड भरी आवाज सुनाई दी, "तुम यहां से जाना चाहती हो तो जाओ लेकिन एक बात याद रखना अगर तुमने इस कमरे से अपना कदम बाहर निकाला तो मैं तुम्हारे बाप की मदद नहीं करूंगा, उसके बाद जो कुछ भी होगा उसकी जिम्मेदार सिर्फ तुम होगी।"कुछ देर पहले आरव की जिस बात सुनकर नैना की आंखों में उम्मीद चमक रही थी वही उम्मीद एक ही पल में टूट कर आंसुओं के साथ उसकी आंखों से बहने लगी उसने मुड़कर आरव की तरफ देख लाचारी भरी आवाज में कहा, "तुम मेरे साथ ये खेल क्यों खेल रहे हो आरव ? आखिर तुम चाहते क्या हो? मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? क्यों तुम मुझे इस तरह तड़पाना चाहते हो?"नैना की बात सुन आरव जिसके चेहरे पर घमंड और हैवानियत थी वो तुरंत गुस्से में बदल गई और वो उसके पास आकर उसकी गर्दन कसकर पकड़ कर बोला, "ये तुम मुझसे पूछ रही हो कि मैं ये सब क्यों कर रहा हूं? खुद से पूछो, अपनी तड़प तो तुम्हें दिख रही है लेकिन 4 साल तक जो दर्द, जो तड़प तुम मुझे देकर गई थी उसका हिसाब कौन करेगा?" नैना अपनी कोई सफाई देती उससे पहले ही आरव वापस आकर बिस्तर पर बैठ गया और डेविल स्माइल के साथ नैना की तरफ देख कर बोला, "खैर पुरानी बातों को भूल जाओ फिलहाल अगर तुम चाहती हो कि मैं तुम्हारे भाई की मदद करूं और तुम्हारा भाई इस मुसीबत से बाहर निकल आए तो तुम्हें वो काम करना होगा जिसे करने के लिए तुम यहां आई हो। लेकिन इस बेचारेपन के साथ नहीं खुशी-खुशी। क्या तुम्हें मंज़ूर है?" नैना की पकड़ उसके पर्स के ऊपर मजबूत हो गए। उसके चेहरे को देखकर साफ पता लगाया जा सकता था कि वो आरव की शर्त नहीं मनाना चाहती थी लेकिन ये बात भी उतनी ही साफ थी कि उसके पास कोई और चारा नहीं था। इसलिए उसने सिर्फ हा में अपना सर हिलाया। नैना की लाचारी देख आरव के चेहरे पर डेविल smile आ गई औ उसने उसे सर से पांव तक घूरते हुए कहा, "ठीक है फिर उसकी शुरुआत अभी यहीं से करते हैं। अब तुम अपनी मर्जी से अपने सारे कपड़े मेरे सामने उतरोगी और हां आंखों से एक भी आंसू जमीन पर नहीं गिरना चाहिए वरना.।" नैना की आंखों में इस वक्त आरव के लिए नफरत साफ दिख रही थी। रोने की वजह से उसकी आंखें लाल हो चुकी थी धीरे-धीरे उसके शरीर की जान निकल रही थी लेकिन फिर भी वो आरव की शर्त पूरी करने वाली थी। एक-एक करके नैना ने अपने सारे कपड़े उतारना शुरू कर दिया। सबसे पहले उसने अपनी येलो कलर की टॉप उतार कर वही नीचे फेंक दी ।नैना को अपनी आंखों के सामने इस तरह देख आरव बिस्तर से उठा और उसके पास आकर उसके गर्दन की तरफ झुककर बोला, "