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Chapter 7

मेरे मां-बाप की जान ले ली

Fanaa Teri Mohabbat mein

" उसके पीछे एक और आदमी था दोनों चलते हुए घर के अंदर आए। नैना का ध्यान इस वक्त उन आदमियों पर नहीं था लेकिन अदम्य ने उन दोनों आदमियों को घर के दरवाजे पर देखा आ अदम्य उठकर उसे आदमी के पास गया और उसका कॉलर पकड़ते हुए कहा, "अब क्या लेने आया है यहां पर? हमसे हमारा सब कुछ तो छीन लिया तुमने। पहले तुमने दीदी की जिंदगी बर्बाद कर दी और अब हमारे सर से उसके मां-बाप का साया भी छीन लिया। सोचा था सालों बाद हमारी मेरी दीदी हमें वापस मिलेगी तो हम चैन से जी पाएंगे लेकिन जब से उसके साथ तुम हमारी जिंदगी में आए थे हमारी जिंदगी तो मानो बर्बाद हो गई। किसी की बुरी नजर लग गई हो हमारी जिंदगी को।"

अदम्य को चीखते चिल्लाते देख नैना ने उस तरफ नजर घुमाई। दरवाजे पर इस वक्त आरव और उसका असिस्टेंट आरव खड़ा हुआ था। आरव को देख नैना को वो फोन कॉल याद आया । जो मरने से पहले उसके पिता ने उसे किया था और साथ ही फोन पर कहा था कि वो आरव के बारे में उसे कुछ बात करना चाहते थे।

उन सब चीजों को याद करते हुए नैना आरव के पास आई और अदम्य को शांत करवाया। और फिर आरव से पूछा, "सिर्फ एक बार पूछूंगी सच-सच जवाब देना। क्या इन सब के पीछे तुम्हारा हाथ है? क्या तुम मुझसे नफरत में इतनी पागल हो गए कि तुमने मेरे मां-बाप की जान ले ली? क्या ये जो कुछ भी हुआ वो तुम्हारी वजह से हुआ?" नैना की बात सुन उसके बगल में खडा अदम्य ने चिल्लाते हुए कहा, "दी अभी भी इससे ये सवाल पूछ रही हो नैना ? तुम बेवकूफ हो क्या? साफ पता चल रहा है कि इसी की वजह से ये सब कुछ हुआ है, ना ही ये हमारी आप कि वीडियो वायरल करता ना ही उस दिन पापा इतने हार्ट अटैक आता ते और ना ही ये हादसा होता है। Ofcourse ये सब कुछ इसी की वजह से हुआ है। बल्कि मुझे तो लगता है कि इसने जानबूझकर आप कि वीडियो वायरल की थी

ताकि हम अपने मॉम डैड को.।"आरव को इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उसने अपने हाथ बांधे और नैना से कहा, "तुम जो सोचना चाहो सोच सकती हो मैं तो बस यहां इन्हें श्रद्धांजलि देने आया था। अगर तुम्हें ऐसा लगता है कि उनकी मौत के पीछे मेरा हाथ है तो तुम मुझ पर केस कर सकती हो मेरा वकील सबूत के साथ मुझे बेगुनाह सबीत करेगा।"आरव की इस बेशर्म और रुखी बातों को सुन नैना को गुस्सा आ गया। नैना अपना गुस्सा नहीं संभाल पाई और उसने अगले ही पल एक जोरदार तमाचा आरव के गालों पर जड़ दिया।"अदम्य सही कह रहा है, ये सब कुछ तुम्हारी ही वजह से हुआ है, मैं ही पागल थी जो तुमसे ये सवाल कर बैठी। उस दिन पापा ने मुझे कॉल पर यही कहा था कि वो तुम्हारे बारे में मुझे कुछ बात करना चाहते थे। I am sure उन्हें तुम्हारी किसी चाल के बारे में पता चल गया होगा और इसलिए वो मुझे.।"नैना अपनी बात पूरी कर पाती उससे पहले ही पीछे से किसी भारी चीज के गिरने की आवाज आई। जब सब ने पीछे मुड़कर देखा तो अदम्य जो अपने मॉम डैड की तस्वीर के पास खड़ा हुआ था वो अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर गया।

अदम्य की इस हालत को देख नैना भाग कर उसके पास आई और उसका सर अपनी गोद में लेकर बोली, "आदि क्या हुआ तुम्हें? आंखें खोलो. आंखें खोलो क्या हुआ तुम्हें?" आदि को इस हालत में देखकर आरव भी काफी परेशान हो गया। नैना अदम्य को फौरन अस्पताल ले गए।अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की एक टीम ने आरव के कहने पर शुभ की ट्रीटमेंट शुरू कर दी और उसके सारे टेस्ट करना शुरू कर दिया। एक के बाद एक हो रहे इन हादसों से नैना बहुत ज्यादा परेशान हो गई थी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ वार्ड से कुछ दूरी पर एक बेंच पर बैठे हुए आरव को आदित्य ने कहा। "बोस आप तो यहां पर सच का पता लगाने में उनकी हेल्प करने आए थे तो फिर आपने इस बारे में उन्हें कुछ बताया क्यों नहीं? क्या आपको नहीं लगता ऐसे तो वो आपको ही गलत समझ लेगी?" आरव आदित्य की बात का जवाब देता उसे पहले ही एक डॉक्टर उसे वार्ड से बाहर आया और नैना के पास आकर बोला, "उस बच्चे की हालत क्रिटिकल है, उसे सर्जरी की जरूरत है और इस सर्जरी के लिए कम से कम 25 लाख रुपए चाहिए होंगे। आप जल्दी से जल्दी ये पैसे काउंटर पर जमा करवा दीजिए मैं ऑपरेशन की तैयारी करता हूं।"डॉक्टर की बात सुनकर नैना के पैरों तले जमीन खिसक गई। "20 लाख रुपए लेकिन इतने सारे पैसे हम कहां से लाएंगे? जितनी भी सेविंग्स और प्रॉपर्टी थी वो तो पिछले कुछ महीनों में बर्बाद हो गई । अब हम इतने सारे पैसों का बंदोबस्त कैसे करेंगे?" नैना को समझ नहीं पा रहे थे कि इतने कम वक्त में वो पैसों का अरेंजमेंट कहां से करेंगे। नैना ने कुछ सोच कर कहा, "मेरे कुछ दोस्त है मैं उनसे बात करती हूं, हो सकता है शायद वो हमारे कुछ हेल्प कर दे।"इतना कहकर नैना अपना फोन लेकर कोने में चले गई। उसने बहुत लोगों को कॉल किया लेकिन नैना की मदद किसी ने नहीं की। बहुत उम्मीद से आखिरकार नैना ने एक नंबर डायल किया लेकिन वो नंबर फिलहाल स्विच ऑफ था। नैना इस वक्त खुद को बहुत ज्यादा लाचार और मजबूर महसूस कर रही थी, उसके पास अपने भाई को बचाने के लिए पैसे तक नहीं थे ना ही वो अपने मां-बाप को बचा पाई ना ही अपने भाई को बचा पाएगी यही सोच सोच कर वो अपने आप में ही अंदर ही अंदर घुटती जा रही थी। आरव ने इस सर्जरी और उसके पीछे होने वाले खर्च के बारे में सुन लिया था। कुछ सोचकर उसने आदित्य के कानों में कुछ कहा और वहां से चला गया।

आरव बड़े ही आराम से चलकर नैना के पास आया और उसके कंधे पर हाथ रख कर बोला, "कितनी बुरी सिचुएशन है ना! ना ही तुम अपने मां-बाप को बचा पाई ना ही अपने भाई को। लेकिन मेरे पास एक रास्ता है जिससे तुम अपने भाई की जान बचा सकती हो।"आरव की बात सुन नैना की आंखें चमकने लगी, उसे फाइनली आरव में अपने भाई की जान बचाने की उम्मीद दिखाई दे रही थी। उसने आरव का हाथ पकड़ लिया और कहा, "क्या तुम. तुम शुभ की जान बचाने में मेरी मदद करोगे?नैना की बात सुन आरव उसका हाथ पकड़ कर उसे एक कोने में ले गया और जाकर शान से एक बेंच पर बैठ गया और नैना से आंखें मिलाते हुए बोला, "मैं एक बिजनेसमैन हूं मैं चैरिटी नहीं करता डील करता हूं तो मेरे पास तुम्हारे लिए एक डील है अगर तुम इस डील को एक्सेप्ट कर लेती हो तो मैं तुम्हारे भाई की जान बचाने में तुम्हारी मदद कर सकता हूं।"नैना को आरव की बातें समझ नहीं आ रही थी वो ना समझी में उसकी तरफ देखे जा रही थी। तभी आदित्य वहां पर कुछ पेपर्स लेकर आ गया। आरव ने उन पेपर को लिया और उसके कुछ भी पेज पर साइन कर दिया।खुद साइन करने के बाद उसने वो पेपर नैना की तरफ बढ़ाए और कहा, "इन्हें ध्यान से पढ़ लो, अगर तुम्हें ये सारी शर्तें मंजूर है तो मैं अभी के अभी तुम्हारी भाई की सर्जरी के लिए पैसे दे दूंगा।"नैना ने बहुत ही असमंजस में वो पेपर अपने हाथ में लिए और उसे पढ़ने लगी। पेपर पढ़ने के बाद नैना के चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। उसने वो पेपर आरव के मुंह पर मारे और कहा, "तुम्हें क्या लगता है तुम्हारी इन घटिया शर्तों को मैं मान लूंगी? मैं उस इंसान से शादी करूंगी जिसने मेरे मां-बाप की जान ले ली? जिसकी वजह से मेरा परिवार बर्बादी की कगार पर खड़ा है? कभी नहीं। जिसकी शक्ल तक देखना मुझे गवारा नहीं उस इंसान के साथ अपनी जिंदगी बिताने के बारे में मैं सोच भी नहीं सकती।"नैना की बात सुन आरव को गुस्सा आना चाहिए था लेकिन उसने मुस्कुरा कर कहा, "ठीक है फिर मां-बाप को तो पहले ही खो चुकी हो एक काम करो अपने भाई के चौथ की भी तैयारी कर लो। हो सकता है उसके बाद तुम्हारी ये अकड़ काम हो जाए। वैसे भी कोई और तो है नहीं जो इस वक़्त तुम्हारी मदद करें।"

हालांकि आरव की बातें कड़वी थी लेकिन सच थी। नैना की मदद इस वक्त कोई करने के लिए तैयार नहीं था, अगर वो अपने भाई की जान बचाना चाहती थी तो उसका सिर्फ एक ही रास्ता था कि उसे आरव की शर्तें मानकर उससे शादी करनी पड़ेगी।।‌नैना ने उन पेपर्स को ध्यान से देखा और अपने भाई को याद किया जो इस वक्त जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था।

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