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Chapter 19

Fanaa Teri Mohabbat mein - Chapter 19

Fanaa Teri Mohabbat mein

"तुम्हें तो मेरे कुछ भी कहने, करने या सोचने से फर्क नहीं पड़ता ना तो फिर अब मेरे इतना करीब आने से फर्क क्यों पड़ रहा है?"आरव ये सब कुछ नैना के कानों की बहुत पास आकर बोल रहा था जिस वजह से नैना के शरीर में एक अजीब सी हलचल हो रही थी जिसे वो कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। उसके हाथ अपने खुले जिस्म को ढकने की कोशिश कर रहे थे लेकिन साथ-साथ कांप भी रहे थे।नैना को अनकंफर्टेबल होते देख आरव ने बिना अपनी नजरे हटाए बगल में से एक टॉवल उठाया और नैना के चारों तरफ लपेटकर उसे कहा,"बहुत अच्छा लगता है मुझे जब तुम इस तरह मेरे सामने होती हो, चुपचाप, लाचार, बेबस इसी बीच अचानक नैना का हाथ नल से टकरा गया और उसमें से गर्म पानी बहने लगा जो नैना के हाथ पर गिर गया। गर्म पानी लगने से नैना के मुंह से आंह निकल गई।नैना के मुंह से दर्द भरी आवाज सुनते ही आरव का ध्यान उसके हाथों पर चला गया। अगले ही पल उसने नैना का हाथ अपने मुंह में ले लिया और हल्की-हल्की फूंक मार कर उसके हाथ को सहलाने लगा। वही दूसरी ओर

रवि की माँ प्रतिभा जी अपने बेटे की बातों से अनजान, गृह प्रवेश और शादी की तैयारियों की योजनाओं में खोई हुई थीं। वहीं, रवि के चेहरे पर संघर्ष के भाव साफ झलक रहे थे। वह मन ही मन सोच रहा था, "मॉम, आप नहीं जानतीं कि इस वक्त मैं किन हालातों से गुजर रहा हूँ। नैना ही मेरी बीवी है और वही आपकी बहू बनने के लायक है।"रवि वही बैठा अपनी माँ की बातें सुन रहा था। तभी कुणाल वापस आया और बोला, "सर, डिस्चार्ज की फॉर्मेलिटीज पूरी हो गई हैं। अब आप अपनी माँ को घर ले जा सकते हैं।"रवि ने एक गहरी सांस ली और अपनी माँ के पास जाकर बोला, "मॉम, चलिए। अब हम घर चलें।"प्रतिभा जी ने मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक है, बेटा। लेकिन याद रखना, मुझे अपनी बहू से मिलना है। उसे घर लाना मत भूलना।"रवि ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप उन्हें व्हीलचेयर पर बिठाकर कार की ओर ले गया।‌मान्यता अब तक घर लौट चुकी थी। वह रवि की बातों को याद करके अपने कमरे में रो रही थी। उसने खुद से कहा, "मैंने जो सपना देखा था, वह टूट चुका है। लेकिन फिर भी मैं इस रिश्ते को निभाने की कोशिश करूंगी, चाहे रवि मुझे स्वीकार करे या नहीं।आरव को अपनी केयर करते देख नैना को एक पल के लिए समझ नहीं आया कि आरव की कौन सी साइड सही थी, जब वो उसके साथ बुरा बर्ताव कर रहा था तब या फिर जब उसकी केयर करता था तब नैना आरव की तरफ बस एक टक देखे ही जा रही थी तभी आरव ने अपनी नजर उठाकर नैना की आंखों में देखा। जैसे ही उन दोनों की नजरे टकराई नैना ने अपना हाथ पीछे खींच लिया और यहां वहां देखने लगी। "मुझे कपड़े बदलने हैं यहां से बाहर निकालो।"नैना ने बड़ी ही रूडली आरव को बाहर जाने के लिए कह दिया लेकिन आरव किसी ढीढ़ इंसान की तरह दीवार का सहारा लिए वही खड़ा रहा और बोला।"अगर याद ना हो तो बता दूँ ये घर मेरा है और तुम भी मेरी हो। तुम दोनों पर सिर्फ मेरी मर्जी चल सकती है लेकिन फिर भी अगर तुम चाहती हो कि मैं यहां से बाहर चला जाऊं तो थोड़ा प्यार से कह कर देखो शायद मैं मान जाऊं।"नैना को अब आरव से अलग चिढ़ होने लगी थी उसने अपने दांत पीस लिए और जबरदस्ती बोली। "आरव जी क्या प्लीज आप इस बाथरूम से बाहर जा सकते हैं? मुझे अपने कपड़े बदलने हैं।"आरव मुस्कुराया और बोला, "कुछ सुनाई नहीं दिया, थोड़ा जोर से बोलो।" इस बार नैना ने ऊंची आवाज में कहा, "आरव जी क्या प्लीज आप इस बाथरूम से बाहर जा सकते हैं? मुझे अपने कपड़े बदलने हैं प्लीज।"आरव ने कुछ देर सोचने का नाटक किया और फिर बोला, "जा तो सकता हूं लेकिन एक बात समझ नहीं आ रही, तुम्हें कपड़े बदलने के लिए मुझे यहां से बाहर जाने की क्या जरूरत है? वैसे भी तुम्हारे शरीर का वो कौन सा हिस्सा है जो अभी तक मैंने नहीं देखा?"आरव ने बहुत ही बेशर्मी से ये बात कही और नैना की गर्दन की तरफ झुकते हुए उसके गले पर अपने गर्म सांस छोड़ने लगा। अगले ही पल उसने उस टॉवल को खींच लिया जो कुछ देर पहले उसने खुद नैना को दिया था।टाउल वहीं जमीन पर गिर गया, आरव ने अगले ही पल नैना को अपनी गोद में उठा लिया और उसे उसी हालत में वहां से बाहर ले गया। वही दूसरी ओर मान्यता अपने कमरे में बैठी हुई थी। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वह खुद को संभालने की कोशिश कर रही थी। उसने खुद से कहा, "शायद रवि मुझे कभी नहीं अपनाएगा। लेकिन मैं इस रिश्ते को निभाने की पूरी कोशिश करूंगी।"तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। मान्यता ने अपने आँसू पोंछे और दरवाजा खोला। सामने रवि खड़ा था। उसका चेहरा सख्त था, जैसे उसने अपने भीतर किसी लड़ाई को खत्म कर लिया हो।"तुमसे बात करनी है," रवि ने बिना किसी भावना के कहा।मान्यता ने सिर हिलाया और उसे अंदर आने दिया। रवि कमरे में आकर खड़ा हो गया और बोला, "मैं साफ-साफ कहता हूँ, मान्यता। ये रिश्ता सिर्फ मेरी माँ की आखिरी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए था। मैं इसे दिल से कभी नहीं मान सकता।"मान्यता ने उसकी बात सुनी और गहरी साँस लेते हुए कहा, "रवि, मैं जानती हूँ कि तुम मुझसे प्यार नहीं करते। लेकिन मैंने तुमसे शादी सिर्फ इसलिए की क्योंकि मैं तुम्हारी माँ की हालत देख नहीं सकती थी। मैं उन्हें दुखी नहीं देखना चाहती थी।"रवि ने उसकी तरफ देखते हुए कहा, "तो अब क्या चाहती हो? तुम जानती हो कि मैं नैना से प्यार करता हूँ। मेरे लिए इस शादी का कोई मतलब नहीं है।"मान्यता ने उसकी आँखों में देखा और बोली, "मैं तुमसे कुछ नहीं चाहती, रवि। बस इतना चाहती हूँ कि हम इस रिश्ते को एक मौका दें। भले ही तुम मुझे बीवी का दर्जा मत दो, लेकिन कम से कम एक इंसान की तरह मुझे सम्मान दो।"रवि ने कुछ पल तक मान्यता की तरफ देखा, फिर कठोर स्वर में बोला, "ठीक है। लेकिन याद रखना, मैं इस रिश्ते को सिर्फ एक समझौता मानता हूँ। तुमसे कोई उम्मीद मत रखना।"यह कहकर रवि कमरे से बाहर चला गया। मान्यता वहीं खड़ी रही, उसकी आँखों से आँसू फिर बहने लगे। उसने मन ही मन कहा, "शायद यही मेरी किस्मत है। लेकिन मैं इस रिश्ते को निभाने की हर मुमकिन कोशिश करूँगी।"‌आरव के रूम में‌ कमरे में लाते हैं आरव ने नैना को बिस्तर पर लेटा दिया और खुद अपनी शर्ट निकाल कर उसके ऊपर आ गया।

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