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Chapter 13

Romantic Fougi - Chapter 13

Romantic Fougi

आंगन में सन्नाटा पसरा हुआ था, लेकिन हवा में तनाव साफ महसूस किया जा सकता था। विमला भाभी की त्यौरियां चढ़ी हुई थीं और उनका चेहरा गुस्से से लाल था। जब जया ने सीधे स्नेहा का नाम लिया, तो विमला भाभी के चेहरे पर एक पल के लिए घबराहट आई। उन्होंने न तो यह माना कि स्नेहा ने उन्हें उकसाया था और न ही इस बात से इनकार किया। उनकी खामोशी ने ही वहां खड़े तमाशबीनों को जवाब दे दिया था।

आस-पास के कमरों की रेलिंग से झांकती औरतें और बच्चे आपस में कानाफूसी करने लगे। इस फौजी क्वार्टर में स्नेहा की छवि एक बहुत ही सीधी-सादी और नेक लड़की की थी, जबकि जया को सब एक मुसीबत समझते थे।

जया ने विमला भाभी की आंखों में सीधे देखते हुए कहा, "विमला भाभी, इस पूरे क्वार्टर में हर कोई जानता है कि स्नेहा के मन में क्या चल रहा है और वह विक्रम के बारे में क्या सोचती है। क्या आपको सच में लगता है कि वह जो कहेगी, वह सच ही होगा? क्या आपने उसकी बातों में आकर बिना सोचे-समझे मुझ पर हाथ उठा दिया?"

विमला भाभी का पारा फिर से चढ़ गया। वह चीखकर बोलीं, "तो क्या मैं तुझ जैसी जुआरी पर भरोसा करूं? अगर मैं स्नेहा पर विश्वास नहीं करूंगी, तो क्या तेरे जैसे चरित्रहीन इंसान की बातों में आ जाऊंगी? स्नेहा कम से कम तेरी तरह बच्चों से टॉफियां तो नहीं छीनती!"

जया ने एक लंबी और ठंडी सांस ली। उसे पता था कि 'पुरानी जया' की छवि इतनी खराब थी कि उसे सुधारने में वक्त लगेगा। लेकिन आज मामला उसकी इज्जत का था। उसने बड़े ही शांत लहजे में कहा, "ठीक है, पुरानी बातों को छोड़िए। अभी की बात करते हैं। आपने कहा कि मैंने आपका नमक चुराया है। मेरा दलिया बनकर तैयार है, पतीला अभी भी चूल्हे पर है। आप खुद चलकर इसे चख क्यों नहीं लेतीं? चखकर देखिए कि इसमें नमक का नामोनिशान भी है या नहीं।"

जया ने अपनी बात जारी रखी, "और ज़रा सोचिए, अगर मुझे सच में चोरी ही करनी होती, तो क्या मैं सबसे पहले एक चम्मच नहीं चुराती? मैं पागलों की तरह पेड़ की टहनी को छीलकर उससे दलिया क्यों चलाती? क्या मेरे पास इतना भी दिमाग नहीं है?"

वहां खड़े लोग अब जया की बातों पर गौर करने लगे थे। बात तो तर्कसंगत थी। कोई नमक क्यों चुराएगा और चम्मच छोड़ देगा?

जया एक कदम और आगे बढ़ी और अपनी बाहें फैला दीं। उसने अपने ढीले-ढाले पजामे और कमीज़ को ज़ोर-ज़ोर से झटका। "चोरी का इल्जाम लगाने से पहले देख तो लीजिए। ये गर्मियों के कपड़े हैं, इनमें कोई जेब नहीं है। अगर मैंने नमक की शीशी या नमक कहीं छिपाया होता, तो अब तक नीचे गिर गया होता। पसीने और धूल के अलावा मेरे पास आपको देने के लिए और कुछ नहीं है।"

विमला भाभी की आंखों में अब थोड़ा संदेह आने लगा था, लेकिन उनकी जिद उन्हें पीछे हटने नहीं दे रही थी।

दृश्य 2: संदीप का दखल और कड़वा स्वाद

तभी विक्रम के साथ खड़े संदीप आगे आए। संदीप इस क्वार्टर में एक रसूखदार अधिकारी थे और विमला भाभी के पति होने के नाते वह इस झगड़े को जल्दी खत्म करना चाहते थे। उन्हें अपने परिवार की बदनामी का डर सता रहा था।

संदीप ने मेज पर रखे चम्मचों में से एक उठाया और बड़े पतीले के पास गए। उन्होंने पतीले का ढक्कन हटाया। चूंकि लड़ाई काफी देर से चल रही थी और चूल्हे की आंच तेज थी, इसलिए दलिया नीचे से थोड़ा जलने लगा था और उससे एक अजीब सी गंध आ रही थी।

संदीप ने सावधानी से थोड़ा सा दलिया निकाला और उसे चखा। कुछ सेकंड तक उन्होंने उसे अपने मुंह में रखा, फिर अपना चेहरा सिकोड़ लिया। "हम्म... इसमें नमक बिल्कुल नहीं है। यह पूरी तरह फीका है और थोड़ा जल भी गया है।"

यह सुनते ही विमला भाभी का चेहरा उतर गया। वह जो अब तक शेरनी की तरह दहाड़ रही थीं, अचानक बिल्ली की तरह भीगी बिल्ली बन गईं। उन्होंने अजीब सी नज़रें फेर लीं और इधर-उधर देखने लगीं।

संदीप को अपनी पत्नी की इस हरकत पर बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। एक अफसर होने के नाते उन्हें अपनी पत्नी का दूसरों पर बिना सबूत हाथ उठाना बहुत बुरा लगा। उन्होंने माहौल को संभालते हुए विक्रम की ओर देखा।

"विक्रम भाई, मुझे माफ कर दो। यह सब एक बहुत बड़ी गलतफहमी थी। मेरी पत्नी को किसी ने गलत जानकारी दी और यह गुस्से में आपा खो बैठी। मैं अपनी पत्नी की तरफ से जया जी से माफी मांगता हूं।" संदीप ने भारी मन से कहा।

विक्रम, जो अब तक खामोश खड़ा था, उसने संदीप की ओर देखा और फिर शांति से अपनी उंगली जया की ओर उठाई।

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"माफी मुझसे मत मांगो संदीप भाई," विक्रम की आवाज में एक कड़कपन था। "झगड़ा जया के साथ हुआ है, थप्पड़ उसे लगा है और चोरी का झूठा आरोप भी उसी पर लगा है। इसलिए माफी जया से मांगी जानी चाहिए। और यह फैसला भी जया ही करेगी कि वह आपको और आपकी पत्नी को माफ करना चाहती है या नहीं।"

विक्रम के मुंह से यह बात सुनकर जया को अपनी पिछली जिंदगी के सारे संघर्ष याद आ गए। वह हैरान थी कि विक्रम, जो खुद उससे नफरत करता था और उसे तलाक देना चाहता था, इस वक्त न्याय के लिए उसके साथ खड़ा था। यह पहली बार था जब किसी ने इस क्वार्टर में जया का पक्ष लिया था।

संदीप अब पूरी तरह फंस चुके थे। उन्होंने जया की ओर देखा, "जया जी, वो... अभी जो हुआ उसके लिए..."

जया ने बीच में ही हाथ हिलाकर उन्हें रोक दिया। "संदीप जी, आपको माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है। मुझे आपने नहीं मारा, न ही आपने मुझ पर इल्जाम लगाया। थप्पड़ आपकी पत्नी ने मारा था, तो माफी भी उन्हीं को मांगनी होगी।"

संदीप ने अपनी पत्नी विमला की ओर एक सख्त निगाह डाली। विमला भाभी, जो स्वभाव से बहुत जिद्दी थीं, उन्होंने अपने दांत पीसे। लेकिन जब उन्होंने देखा कि उनके पति की साख दांव पर लगी है, तो उन्होंने बहुत ही धीमी और दबी हुई आवाज में कहा, "ठीक है... मुझे माफ कर दो!"

दृश्य 3: जया का पलटवार और मुआवज़ा

जया इतनी आसानी से मानने वाली नहीं थी। उसने अपनी खरोंचें दिखाते हुए कहा, "सिर्फ 'माफ कर दो' कहने से काम नहीं चलेगा। आपने मुझे बिना किसी वजह के मारा है। देखिए, मेरा चेहरा और हाथ नाखूनों की खरोंचों से भर गए हैं। मेरी खाल तक निकल आई है। अगर इन घावों के निशान रह गए और मेरा चेहरा खराब हो गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?"

विमला भाभी ने ताना मारते हुए पलटकर कहा, "अरे रहने दे! तेरा चेहरा पहले से ही किसी उबले हुए आलू जैसा है, इस पर दो खरोंचें आ भी गईं तो क्या फर्क पड़ जाएगा? कौन सा तू किसी फिल्म की हीरोइन है जो डर रही है?"

जया ने अपनी भौहें चढ़ाईं और एक कदम आगे बढ़कर विमला के बिल्कुल सामने खड़ी हो गई। उसने ठंडे स्वर में पूछा, "मेरा चेहरा कैसा है, यह मेरा निजी मामला है। लेकिन क्या मैंने आज तक आपके घर का एक दाना भी खाया है? या क्या मेरा चक्कर आपके पति के साथ चल रहा है जो आपको मुझसे इतनी मिर्ची लग रही है?"

"ओए! क्या बकवास कर रही है तू!" विमला भाभी गुस्से से आगबबूला हो गईं।

जया ने बिना डरे जवाब दिया, "सच कड़वा होता है भाभी! मेरी बदसूरती मेरी अपनी है, लेकिन मैं कम से कम किसी के हाथ की कठपुतली तो नहीं हूं। किसी ने आपको आकर कान में कुछ कहा और आप नाचने लगीं। आप तो मोहरा बन गईं, और वह भी स्नेहा जैसी लड़की का!"

विमला भाभी अवाक रह गईं। उन्हें अहसास हुआ कि जया ने उनके और स्नेहा के बीच की बातचीत को भांप लिया है।

संदीप को अब बहुत तेज़ सिरदर्द होने लगा था। उन्हें लगा कि अगर यह बहस और बढ़ी, तो बात थाने तक पहुंच जाएगी। उन्होंने सोचा कि आम तौर पर जब कोई माफी मांगता है, तो दूसरा इंसान "कोई बात नहीं" कहकर बात खत्म कर देता है। लेकिन यह औरत, जो किसी भालू की तरह दिखती है, इतनी अड़ियल कैसे हो सकती है?

"अच्छा, कॉमरेड... मेरा मतलब है, बहन..." संदीप ने हिचकिचाते हुए कहा।

जया ने उन्हें तुरंत टोका, "मेरा नाम जया है। आप मुझे जया जी या जया कह सकते हैं।"

संदीप ने अपनी बात सुधारी, "ठीक है जया जी, अब आप ही बताइए कि आप इस मामले को कैसे सुलझाना चाहती हैं? हम इस बात को यहीं खत्म करना चाहते हैं।"

जया ने कुछ पल सोचा। उसे पता था कि उसके पास न पैसे हैं और न ही घर चलाने का सामान। "देखिए संदीप जी, यह मेरे साथ एक बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। मैं बेकसूर थी फिर भी मुझे जलील किया गया। मुझे सिर्फ आपकी सूखी माफी नहीं चाहिए। मुझे मुआवज़ा चाहिए।"

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संदीप और वहां खड़े लोग हैरान रह गए। "मुआवज़ा? कैसा मुआवज़ा?"

इससे पहले कि जया कुछ और मांगती, विक्रम को बहुत शर्मिंदगी महसूस होने लगी। उसे लगा कि जया अब पैसों की मांग करेगी और पूरे क्वार्टर में उसका नाम और खराब होगा। उसने बिना कुछ सोचे जया का हाथ पकड़ा।

"बहुत हो गया! यह सब एक गलतफहमी थी और अब यह खत्म हो चुकी है। चलो, अब घर चलो!" विक्रम ने भारी आवाज में कहा।

जया ने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की, "अरे! तुम मुझे खींच क्यों रहे हो? अभी बात पूरी नहीं हुई है!"

लेकिन विक्रम की पकड़ बहुत मजबूत थी। वह एक फौजी था और जया का भारी शरीर भी उसके सामने टिक नहीं पाया। वह उसे लगभग घसीटते हुए सीढ़ियों की तरफ ले गया। पीछे विमला भाभी और संदीप हैरान-परेशान खड़े उन्हें देखते रहे।

दृश्य 4: घर के अंदर की लड़ाई

जैसे ही वे अपने कमरे के अंदर पहुंचे, विक्रम ने जया का हाथ छोड़ दिया और दरवाजा ज़ोर से बंद कर दिया। जया गुस्से से लाल थी।

"अरे, विक्रम! तुम्हारा मतलब क्या है? तुमने मुझे वहां से ऐसे क्यों खींच लिया जैसे मैंने कोई चोरी की हो? मैं अपनी हक की बात कर रही थी!" जया ने चिल्लाते हुए पूछा।

विक्रम ने उसे एक ठंडी और नफरत भरी नज़रों से देखा। "हक की बात? तुम मुआवज़ा मांग रही थीं? क्या तुम जानती हो कि तुम क्या कर रही थी? संदीप भाई मेरे सीनियर हैं। तुमने सरेआम उनकी पत्नी को जलील किया और अब तुम उनसे भीख मांग रही थी?"

जया ने मेज पर हाथ पटकते हुए कहा, "भीख? तुम्हें यह भीख लगती है? उसने मुझे थप्पड़ मारा, सबके सामने मुझे चोर कहा, मेरे बाल नोचे! क्या मेरा कोई आत्म-सम्मान नहीं है? क्या सिर्फ इसलिए कि मैं मोटी हूं और जुआ खेलती थी, कोई भी राह चलता मुझे पीट देगा?"

विक्रम थोड़ा शांत हुआ, लेकिन उसका गुस्सा अभी पूरी तरह ठंडा नहीं हुआ था। "मैं जानता हूं कि उसने गलत किया। और इसीलिए मैंने उससे माफी मंगवाई। लेकिन मुआवज़ा मांगना... यह हमारे संस्कार नहीं हैं।"

जया हंसी, एक कड़वी हंसी। "संस्कार? जब तुम्हारे घर में नमक का एक दाना नहीं था, तब तुम्हारे संस्कार कहां थे? जब वह स्नेहा मुझे 'चर्बी की बोरी' कह रही थी, तब तुम्हारे संस्कार कहां थे? विक्रम, तुम एक फौजी हो सकते हो, लेकिन तुम्हें यह नहीं पता कि जब किसी औरत की इज्जत पर बात आती है, तो उसे अपनी लड़ाई खुद लड़नी पड़ती है।"

विक्रम के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था। उसने जया को गौर से देखा। उसके चेहरे पर खरोंचें थीं और उसकी आंखों में आंसू तो थे, लेकिन वे कमजोरी के नहीं बल्कि गुस्से के थे।

जया ने अपनी बात जारी रखी, "तुम मुझे तलाक देना चाहते हो, ठीक है। मुझे यहाँ से निकालना चाहते हो, वह भी ठीक है। लेकिन जब तक मैं तुम्हारी पत्नी कहला रही हूं, मैं किसी को भी अपना अपमान करने की इजाज़त नहीं दूंगी। चाहे वह विमला भाभी हों या तुम्हारी लाडली स्नेहा।"

विक्रम ने एक ठंडी सांस ली और खिड़की की तरफ मुड़ गया। "दलिया जल चुका है। अब उसे फेंक दो। मैं मेस से तुम्हारे लिए खाना ले आऊंगा।"

"मुझे तुम्हारे मेस का खाना नहीं चाहिए!" जया ने पीछे से चिल्लाकर कहा। "मैं भूखी सो जाऊंगी, लेकिन अपनी शर्तों पर जिऊंगी।"

विक्रम बिना कुछ बोले कमरे से बाहर निकल गया। कमरे में अब सिर्फ सन्नाटा था और जले हुए दलिए की गंध। जया बिस्तर पर बैठ गई और अपने ज़ख्मों को सहलाने लगी। उसे पता था कि यह तो बस शुरुआत है। इस फौजी क्वार्टर में अपनी जगह बनाने के लिए उसे अभी बहुत सारी लड़ाइयां लड़नी थीं।

उसने मन ही मन तय कर लिया—अगली बार वह सिर्फ अपना बचाव नहीं करेगी, बल्कि हमला करने वालों को ऐसा सबक सिखाएगी कि वे दोबारा उसका नाम लेने से भी डरेंगे।

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