minifm
Previous
Next
Chapter 16 of 110 15%
Chapter 16

His forced bride - Chapter 16

His forced bride

माया खुराना को जब ईशानी के रिशानी की बहन होने की सच्चाई पता चली तो उन्होंने ईशानी को घर से निकाल दिया था। रुद्राक्ष उस वक्त घर पर नहीं था इसलिए ईशानी का कोई बस नहीं चला और वो रात के वक्त रुद्राक्ष के घर के आगे थी। ठंड काफी होने की वजह से थोड़ी ही देर में ईशानी की हालत खराब हो चुकी थी।

1 घंटे तक बाहर रहने के बाद ईशानी ने ठिठुरुते हुए कहा, “ऐसे तो नहीं चलने वाला। पूरी रात यहां रही तो मेरी ठंड से आइसक्रीम जम जानी है। मुझे किसी न किसी की हेल्प लेनी ही होगी।”

ईशानी ने इधर-उधर देखा तो उसे गार्ड्स के अलावा और कोई नजर नहीं आया। उसे तो रुद्राक्ष के नंबर तक नहीं पता थे। ईशानी गार्ड के पास गई और रिक्वेस्टिंग वे में बोली, “मुझे रुद्राक्ष से बात करनी है। प्लीज आप अपना मोबाइल दे दीजिए। मेरे पास उनके नंबर नहीं है तो आप डायल करके दे दीजिए।”

“बड़ी मालकिन ने हमें किसी की भी मदद करने से मना किया है और उनके फैसले के खिलाफ जाना अपनी नौकरी से हाथ धोना होगा। सॉरी पर हम आपकी कोई मदद नहीं कर पाएंगे।” गार्ड ने कॉल लगाने से सीधे-सीधे मना कर दिया था।

ईशानी ने लाचारी से कहा, “मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगी और रुद्राक्ष को भी बोल दूंगी। प्लीज कॉल करने दीजिए। मुझे बहुत ठंड लग रही है और मेरा यहां कोई नहीं है जिसके पास में जा सकूं।”

“सॉरी मैम बट आई कांट हेल्प यू इन दिस मैटर।” गार्ड ने नज़रे झुका कर कहा, जिससे ईशानी समझ गई कि वो उसके सामने कितना भी गिड़गिड़ा ले लेकिन वो उसकी मदद नहीं करेगा।

ईशानी की आंखें नम होने लगी थी और इस वक्त उसे अपनी मां की याद आ रही थी। अचानक ही ईशानी के दिमाग में रिशानी की यादें ताजा हो गई। उसने उसकी डायरी में पढ़ा था जब सब ने उससे रिश्ता तोड़ दिया था तब वो बिल्कुल अकेली पड़ गई थी और सुसाइड करने के अलावा और उसे कुछ समझ नहीं आया।

Advertisement

“मैं आपकी हालत समझ सकती हूं दी। बदकिस्मती से आज मैं भी इस मुकाम पर खड़ी हूं, जहां मेरा साथ देने के लिए कोई नहीं है। मां को तो ये लग रहा होगा कि मैं मुंबई में अपना काम कर रही हूं पर अफसोस की बात है कि हम दोनों एक ही फैमिली के जाल में फंस गए हैं। मुझे किसी न किसी से हेल्प मांगनी ही होगी।” ईशानी ने भारी आवाज में कहा। उसने खुद को मजबूत किया और वहां से जाने के लिए मुड़ी।

ईशानी काफी देर तक दरवाजे के आगे किसी न किसी के इंतजार में खड़ी थी और गार्ड को उसे इस हालत में देखकर काफी दया आ रही थी पर वो चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहा था। ईशानी जब वहां से चली गई तो उसने राहत की सांस ली।

ईशानी कुछ कदम आगे पहुंची ही होगी कि उसके सामने एक गाड़ी तेज गति से चलकर आई। वो एरिया रुद्राक्ष के विला के आगे का था तो उसी की टेरिटरी में आता था। ईशानी को एक पल के लिए लगा रुद्राक्ष वहां आया है तो वो रुक गई लेकिन जैसे की गाड़ी का दरवाजा खुला ईशानी की आंखें हैरानी से बड़ी हो गई।

“मोक्ष।” ईशानी ने धीरे से कहा।

गाड़ी में से एक लड़का निकला जो लगभग 26 साल के करीब था। लंबी हाइट, गोरा रंग और गहरे भूरे बाल दिखने में काफी हैंडसम था। उसके आईज का कलर ओलिव ग्रीन कलर का था।

वही मोक्ष ने भी जब ईशानी को वहां देखा तो उसके चेहरे पर हैरानी के भाव थे। वो उसके पास आया और सिर हिला कर कहा, “कहीं मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा हूं? तुम ईशानी शर्मा हो, जो विकास खन्ना के साथ काम करती हैं। विकास हमारी ही लो फर्म हमसे जुड़ा हुआ है लेकिन तुम यहां खुराना मेंशन में क्या कर रही हो?” मोक्ष चेहरे पर गहरे परेशानी के भाव थे।

जैसा कि मोक्ष ने बताया विकास उसी की लो फर्म के लिए काम करता था और ईशानी और मोक्ष पहले भी कई बार मिल चुके थे। वो एक दूसरे को अच्छे से जानते थे। ईशानी विकास से ज्यादा मोक्ष के लिए काम करती थी। इस सच से अब तक सभी अनजान थे। मोक्ष जब भी ईशानी से मिलता था तब ऐसे ही जाहिर करता था जैसे उन दोनों का रिश्ता बस सिर्फ काम से जुड़ा हुआ हो।

ऐसे वक्त में भी मोक्ष के फॉर्मली बात करने पर ईशानी ने चिढ़कर कर कहा, “इस सिचुएशन में तो आप मुझसे ऐसी बातें मत कीजिए। मुझे गुस्सा आ रहा है।”

Advertisement

मोक्ष ने सिर हिला कर कहा, “और मुझे हैरानी हो रही है।” बोलते हुए मोक्ष ने इधर-उधर देखा कि कहीं उनकी बात कोई सुन ना ले। मोक्ष ने फिर दबी आवाज में कहा, “साड़ी, सिंदूर मंगलसूत्र, और मेरा घर? कोई सफाई देनी है तुम्हें?”

“ये आपका घर है? पर कैसे हो सकता है आपका नाम तो मोक्ष सिंघानिया है और ये खुराना हाउस है।” अब हैरान होने की बारी ईशानी की थी और उसने उसी लहजे में पूछा।

“ये सब बताने में बहुत टाइम लगेगा कभी डिटेल में सब समझाऊंगा। मुझे ये बताओ तुम यहां क्या कर रही हो?” मोक्ष ने बात को टालते हुए कहा।

ईशानी को मोक्ष के रूप में अपनी उम्मीद नजर आ रही थी। अब तक वो ये सोच रही थी कि उसे इंडिया जाने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था और ना ही कोई जान पहचान वाला। भगवान ने एक साथ ही उसे इंडिया जाने का रास्ता भी भेज दिया था और एक ऐसा शख्स भी, जिस पर वो खुद से ज्यादा यकीन करती थी।

“ओके फाइन, एक पागल आदमी मुझे किडनैप करके यहां लेकर आ गया। उसने मुझसे जबरदस्ती शादी कर ली। उसके घर वाले इस शादी से खिलाफ थे तो उन्होंने मुझे घर से निकाल दिया और वो पता नहीं कहां गायब है। देखो मुझे उसकी शादी और घरवालों में कोई इंटरेस्ट नहीं है तो प्लीज मुझे यहां से इंडिया भिजवा दो। मुझे इस घर में घुटन हो रही है मुझे यहां आए हुए लगभग 35 घंटे बीत चुके और इस 35 घंटे में वो इंसान 35 से भी ज्यादा बार गिरगिट की तरह रंग बदल चुका है।” ईशानी ने एक सांस में रुद्राक्ष को सब कुछ बता दिया।

उसने यहां रुद्राक्ष का नाम नहीं लिया था और मोक्ष ने भी इस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उसने ईशानी को गाड़ी में बैठने का इशारा किया और वहां से ले जाने लगा। ईशानी नहीं जानती थी कि मोक्ष खुराना हाउस से किस तरह जुड़ा हुआ है तो वही मोक्ष भी रुद्राक्ष और ईशानी की शादी से अनजान था।

ईशानी उसके लिए काम करती थी इसलिए मोक्ष उसे बिना सोचे समझे वहां से दूर लेकर जा रहा था। इस बात से अनजान कि अगर रुद्राक्ष को इस मामले में मोक्ष के इंवॉल्व होने का पता चला तो वो उसका जीना हराम कर देगा।

°°°°°°°°°°°°°°°°

Was this chapter good?