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Chapter 20

His forced bride - Chapter 20

His forced bride

मोक्ष ईशानी को मुंबई लेकर आ तो गया था लेकिन जब उसे पता चला कि रुद्राक्ष ईशानी की शादी हो गई है, तो उसने तुरंत रुद्राक्ष को ईशानी की लोकेशन बता दी। रुद्राक्ष वहां पर पहुंचा। मोक्ष के जाने के बाद ईशानी और रुद्राक्ष के बीच बातचीत हुई, जहां रुद्राक्ष ने ईशानी के सामने इस सच को रखा कि उस रात रिशानी के साथ वैनिटी में कोई और नहीं बल्कि रुद्राक्ष ही था। उनके बीच ऐसा वैसा कुछ नहीं हुआ था।

सब कुछ रुद्राक्ष की आंखों के सामने हुआ था। यही वजह थी कि वो आलिया पर यकीन कर रहा था। रुद्राक्ष के सब कुछ सच बताने के बाद भी ईशानी को उस पर यकीन नहीं हुआ और वो रोते हुए कमरे के अंदर चली गई। उसने रुद्राक्ष के मुंह पर दरवाजा बंद किया। कमरे के बाहर तक उसके जोर-जोर से रोने की आवाज़ आ रही थी।

उसके रोने की आवाज सुनकर रुद्राक्ष ने अपने हाथ का पंच बनाया और जोर से दरवाजे पर मारा।

रुद्राक्ष मन ही मन बड़बड़ा कर बोला, “अजीब पागल लड़की है। जब मैंने कह दिया उस रात कुछ नहीं हुआ तो फिर टिपिकल पजेसिव वाइफ की तरह बिहेव कर रही है? वैसे भी शादी हुए सिर्फ दो दिन हुए हैं और हम दोनों के दिल में एक दूसरे को लेकर सिर्फ एक ही फीलिंग है... और वो है नफरत। पता नहीं ये सब करके ये अपनी मुश्किलें और क्यों बढ़ा रही है।”

रुद्राक्ष ने जोर से दरवाजा खटखटाकर कहा, “दरवाजा खोलो वाईफी, वरना तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा। अभी कह रहा हूं अगर अगले 1 मिनट में बाहर नहीं निकली तो मैं दरवाजा तोड़कर अंदर आ जाऊंगा और फिर तुम्हारे साथ जो भी होगा, उसकी जिम्मेदार तुम होगी।”

“मुझे तुमसे डर नहीं लगता है रुद्राक्ष खुराना। तुम्हें जो करना है कर लेना। ज्यादा से ज्यादा मेरे साथ जबरदस्ती करोगे, जैसे मेरी बहन के साथ की थी या मुझे मारोगे पीटोगे, जैसे थोड़ी देर पहले मारा था। जो करना है करो, मुझे तुमसे डर नहीं लगता है।” ईशानी ने रोते हुए कहा। वो रो जरूर रही थी लेकिन उसकी आवाज काफी सख्त थे।

ईशानी की बातें रुद्राक्ष को गुस्सा दिला रही थी। जैसा कि संजना ने कहा कि वो अपने जिद और गुस्से में किसी भी हद तक जा सकता था। रुद्राक्ष तुरंत ईशानी के कमरे के आगे से हटा। उसने ब्लूटूथ पर किसी से कनेक्ट करके सर्द आवाज में कहा, “एक लोकेशन भेज रहा हूं। उसे लेकर वहां पर पहुंचों। मैं ठीक से बात कर रहा हूं तो कुछ लोगों के पर निकल आए हैं, बस उन्हें ही काटने हैं।” कहकर रुद्राक्ष ने कॉल कट कर दिया।

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रुद्राक्ष कॉल कट करके हटा ही था कि तभी का दरवाजा खुला सामने मोक्ष खड़ा था, जो कि लगभग 40 -45 मिनट बाद वापस आया था। उसने रुद्राक्ष की तरफ बढ़ते हुए कहा, “आई होप आप दोनों के बीच सब ठीक हो गया हो।”

रुद्राक्ष ने उसकी तरफ सर्द निगाहों से देखते हुए कहा, “इट्स नन ऑफ़ योर बिजनेस। अगले कुछ घंटे के लिए मुझसे और इस घर से दूर रहो।”

“ठीक है जैसी आपकी मर्जी पर यहां से जाने से पहले एक बार घर आ जाइएगा। कोई और भी है जो आपकी कुछ लगती है। उनके खातिर आ जाइयेगा।” मोक्ष ने सख्त आवाज में कहा और फिर वहां से जाने लगा। अचानक वो दरवाजे के पास जाकर रुद्राक्ष की तरफ पलट कर बोला, “ईशानी थोड़ी जिद्दी है और इतनी आसानी से उसके आंसू नहीं रुकने वाले। एक बार जब वो रोना शुरू कर देती है तो उसकी गंगा जमुना बंद नहीं होती है तो आपको उसे प्यार से मना कर चुप कराना होगा।”

“काफी अच्छे से जानते हो उस लड़की को? उसे अच्छे से जानते हो तो एक बात मेरे बारे में भी जानते होंगे कि मुझे किसी से प्यार से चुप करवाना नहीं आता है, खासकर ऐसे लोगों से तो बिल्कुल नहीं, जिन्होंने मुझे चोट पहुंचाई हो।” रुद्राक्ष ने मोक्ष की आंखों में देखते हुए कहा।

उसकी बात सुनकर मोक्ष ने कुछ पल सोचा और फिर कहा, “ठीक है जैसे आपकी मर्जी। मैं तो सिर्फ इतना कह सकता हूं कि आप जिन पर आंखें बंद करके भरोसा कर रहे हैं वो उसे भरोसे के लायक नहीं है। उस फैमिली के लिए आप पूरी दुनिया से लड़ जाते हैं, जबकि वो आपको अपना तक नहीं समझते हैं। आई होप देर से ही सही अगर आपको ये बात समझ आ जाए। बाकी मैंने रिशानी की डायरी देखी थी। ईशानी ने एक बार मुझे दिखाया था। जो भी हुआ उसमें आलिया...”

मोक्ष की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि रुद्राक्ष बीच में ही जोर से चिल्ला कर बोला, “मैं यहां अपनी फैमिली के खिलाफ लोगों के उल्टी सीधी बातें सुनते नहीं आया हूं। मुझे कुछ घंटे के लिए ये घर खाली चाहिए तो बेहतर होगा कि बिना तमाशा किए हुए चले जाओ।”

मोक्ष ने आगे कुछ नहीं कहा। उसने उसकी बात पर हामी भरी और वहां से जाने लगा। उसके जाते ही रुद्राक्ष वहां एक चेयर पर बैठ गया और किसी के आने का इंतजार करने लगा। ईशानी को कमरे में बंद हुए आधे घंटे से भी ज्यादा का टाइम बीत चुका था, फिर भी वो बाहर नहीं आई थी बल्कि उसके रोने की आवाज ही बाहर तक आ रही थी।

रुद्राक्ष को इससे काफी इरिटेशन हो रहा जा। उसके सिर में दर्द होने लगा था तो वो अपना सिर पकड़ कर बोला, “ये लड़कियां इतनी इरिटेटिंग क्यों होती है? ये लड़की अपने मरी हुई बहन के चक्कर में अपना प्रेजेंट तक खराब करने के लिए तैयार हो गई। खुद के साथ जो भी करें आई डोंट गिव ए डैम लेकिन मेरी बहन को साथ में लेकर नहीं डूबने दूंगा।”

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वो खुद से बातें कर रहा था तभी डोर बेल बजी। रुद्राक्ष ने दरवाजा खोला तो सामने दो आदमी एक औरत के साथ थे। उन्होंने धीरे से औरत की कमर पर बंदूक रख रखी थी, जिसकी वजह से डर के मारे वो उनकी बात मान रही थी। वो औरत कोई और नहीं ईशानी की मां दीपिका थी।

रुद्राक्ष ने दीपिका के चेहरे की तरफ देखा तो उस पर डर के भाव थे। रुद्राक्ष ने उनकी तरफ देखकर सर्द आवाज में कहा, “मुझे आप पर तरस आ रहा है। आपकी दोनों बेटियों ने अपनी जिंदगी खुद बर्बाद कर ली और बुढ़ापे में आपका कोई सहारा नहीं रहने वाला है मिसेज शर्मा।”

दीपिका हैरानी से रुद्राक्ष की तरफ देख रही थी। वो उनकी बात समझ नहीं पा रही थी कि तभी रुद्राक्ष ने उन्हें रुकने का इशारा किया वो कमरे के दरवाजे के पास आया और गेट खटखटाकर इविल स्माइल करते हुए बोला, “डिअर वाइफी, बाहर आओ, तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है।”

ईशानी ने दरवाजा खोला तो सामने उसकी मां खड़ी हुई थी। दीपिका ईशानी की तरफ गौर से देख रही थी। उसने साड़ी पहनी थी। उसके गले में रुद्राक्ष के नाम का मंगलसूत्र था और मांग में उसी का भरा हुआ सिंदूर।

“मैं... मैं आपको एक्सप्लेन...” ईशानी अचानक उन्हें वहां देखकर घबराकर उनकी तरफ बढ़ने लगी, तभी रुद्राक्ष ने ईशानी की बाजू को कसकर पकड़ लिया।

“मैंने कहा था ना वाइफी डर लगेगा और लगना जायज भी है।” रुद्राक्ष इविल स्माइल करते हुए कहा। उसका इशारा सीधे-सीधे दीपिका की तरफ था। वो उनके साथ क्या करने की सोच रहा था ये ईशानी की समझ से परे था। ईशानी गुस्से में रुद्राक्ष की तरफ देख रही थी। उसने जानबूझकर उसकी मां को उसे खेल में इंवॉल्व कर लिया था ताकि वो उसे कमजोर कर सके और ईशानी के चेहरे के एक्सप्रेशन साफ बता रहे थे रुद्राक्ष चाहता था वो उसमें कामयाब हो गया।

°°°°°°°°°°°°°°°°!

क्या लगता है ईशानी रुद्राक्ष की बात मानकर आ जायेगी?

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