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Chapter 17

The Contract Marriage - Chapter 17

The Contract Marriage

आदिति को नहीं पता था कि उस आदमी में क्या खास बात थी, या उसने उसकी दादी पर कोई जादू कर दिया था। क्योंकि उसकी दादी को उसके बारे में बात करना बहुत पसंद था और वो उसे अर्पित का सौतेला पिता बनाना चाहती थीं।

आदिति को लगा कि उसे “राघव ” नाम के उस आदमी से जरूर मिलना चाहिए।

“लेकिन ये दुख की बात है कि तेरी माँ अब यहाँ नहीं है,” शांति जी ने अर्पित की फोटो देखकर अफसोस के साथ कहा।

“आदिति , अगर तेरी माँ अभी यहाँ होती, तो वो इतना प्यारा पोता पाकर बहुत खुश होती।”

आदिति की माँ उसके साथ नहीं थी क्योंकि वो छोटी थी। आदिति को अपने पिता और दादी से पता चला कि उसकी माँ बीमार थीं और उसे जन्म देने के बाद उनकी मृत्यु हो गई थी। क्योंकि वो इतने सालों तक अपने पिता के साथ रही थी, “कथित बहन” कृतिका और सौतेली माँ के जन्म के बाद ही उसे होश आया।

“दादी, कोई बात नहीं। जब तक तुम स्वस्थ हो, मेरे लिए यही काफी है,” आदिति ने कहा और अपना सिर शांति जी की गोद में रख दिया।

शांति जी ने अपनी गोद में बैठी आदिति को देखा और फिर फोटो में अर्पित को। क्योंकि आदिति फ्रांस में थी और उसने उसे वापस नहीं आने दिया था, ताकि वो उसकी सेहत की चिंता न करे, उसने अर्पित को पहले कभी नहीं देखा था और बस उसके बारे में सुना था।

पूरी दोपहर ऐसे ही शांति से बीत गई।

दरवाजे पर खटखट हुई।

ये एमिली थी, जो अर्पित को उसकी दादी से मिलवाने अस्पताल ले आई थी।

अर्पित ने गहरे नीले रंग का कोट पहना था और गले में लाल स्कार्फ डाला था। स्कूल ड्रेस में उसका छोटा-सा गोल-मटोल चेहरा और भी प्यारा लग रहा था।

अर्पित ने अपने छोटे कंधों पर एक बच्चे का स्कूल बैग उठाया था और आदिति की तरफ छोटे-छोटे कदमों से चलकर आया।

उसने आदिति की तरफ उलझन भरी नजरों से देखा।

आदिति ने अपने बेटे के नन्हे से सिर को सहलाते हुए कहा, “बेबी, ये मम्मी की दादी हैं, यानी तुम्हारी परदादी।”

“बेबी, उन्हें ग्रेट ग्रैंडमा कहो,” उसने कहा।

अर्पित ने अपनी माँ की बात सुनी और बोला, “दादी माँ।”

“अरे,” शांति जी ने उसकी प्यारी-सी बचकानी आवाज सुनी और उनका दिल खुशी से भर गया।

उन्होंने आगे बढ़कर उसके कंधे से स्कूल बैग उतारने में मदद की और कहा, “अर्पित , अपना स्कूल बैग उतार, तू थक गया होगा।”

अर्पित ने भी उनका साथ दिया और स्कूल बैग उतारते हुए बोला, “थैंक यू, ग्रेट ग्रैंडमा।”

“अरे, कितना अच्छा बच्चा है। कितना प्यारा है,” शांति जी ने कहा।

शांति जी अस्पताल के बिस्तर पर बैठी थीं और अर्पित को सिर से पाँव तक देख रही थीं।

“हमारा अर्पित कितना सुंदर बच्चा है। और उसकी नीली आँखें कितनी प्यारी हैं। उसका चेहरा बहुत सुंदर है। मुझे यकीन है कि जब वो बड़ा होगा, तो बहुत सारी लड़कियों को पसंद आएगा,” शांति जी ने अर्पित की तारीफ की।

लेकिन आदिति ने ये सुना तो हँस पड़ी।

“उसके पिता भी बहुत सारी औरतों को आकर्षित करते थे, और उनके बेटे को भी ये खूबी चुपके से मिल गई है,” उसने कहा।

एमिली, जो पास में खड़ी थी, ये सुनकर मुस्कुराई।

शांति जी ने ये देखा और बोली, “आदिति , तेरी दोस्त बहुत अच्छी है। वो हमेशा मुझसे मिलने आती है और मेरा ख्याल रखती है। तुझे उसका धन्यवाद करना नहीं भूलना चाहिए।”

आदिति ने सिर हिलाया और कहा, “हाँ, मुझे पता है।”

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एमिली ने आदिति की बात मानते हुए कहा, “दादी, आपको थैंक्यू मुझे नहीं, उस सज्जन को करना चाहिए जिसने पिछले छह सालों से आपका ध्यान रखा है।”

“तू भी उसे जानती है?” आदिति ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।

“नहीं, मैं उसे नहीं जानती। लेकिन दादी अक्सर राघव के बारे में बात करती थीं। कहती थीं कि वो सुंदर, अमीर, और अच्छे दिल वाला इंसान है। और तो और, वो बिल्कुल तेरे जैसा है। वो भी तलाकशुदा है और उसका एक बच्चा भी है,” एमिली ने कहा।

एमिली रुकी और आदिति को चिढ़ाने वाली मुस्कान के साथ देखकर बोली, “तुम दोनों एकदम परफेक्ट जोड़ी हो।” आदिति ने ये सुना और अपनी “अच्छी दोस्त” को गुस्से से देखा। “तो इसलिए तू मुझे उन मर्दों से मिलवाती रही।”

जब वो फ्रांस में थी, एमिली ने उसे कई ब्लाइंड डेट्स के लिए बुलाया था। लेकिन हर आदमी जो उससे मिला, वो तलाकशुदा था या उसका एक बच्चा था।

वो अलग-अलग नस्लों के भी थे।

अब जाकर उसे इसका कारण समझ आया।

ये सब उसकी दोस्त की चाल थी।

“हाँ,” एमिली ने सिर हिलाया।

एमिली ने उसकी तरफ देखा और आगे बोली, “मेरा हमेशा से मानना है कि प्यार में बराबरी होनी चाहिए। अगर तूने किसी ऐसे इंसान से शादी की जो पहले शादीशुदा नहीं था, तो बाद में तुम्हारे बीच असंतुलन की वजह से बहुत झगड़े और मतभेद होंगे। मैं ये सब तेरे लिए कर रही हूँ।”

“हाँ, हाँ, एमिली सही कह रही है,” शांति जी ने कहा।

शांति जी ने उसकी तरफ देखा और सिर हिलाया। “हाँ, तू और राघव दोनों एक जैसे हो। अगर तुम दोनों की शादी हो गई, तो सब कुछ बराबर हो जाएगा।”

एमिली ने भी सहमति में सिर हिलाया।

आदिति ने उनकी तरफ देखा और हैरान रह गई।

“तू राघव को भी जानती है?” उसने पूछा।

“नहीं, लेकिन दादी अक्सर उसके बारे में बात करती थीं। पर मैंने उसे कभी देखा नहीं और ना ही उसके बारे में ज्यादा जानती हूँ,” एमिली ने जवाब दिया।

“ओह,” आदिति ने कहा।

अब आदिति उस आदमी से और भी ज्यादा मिलना चाहती थी। उनकी बातों की वजह से वो “राघव ” नाम के उस आदमी से मिलने के लिए और उत्सुक हो गई थी। अचानक सबने ब्लाइंड डेट और उस आदमी के बारे में बात शुरू कर दी, लेकिन वो उस छोटे बच्चे को भूल गए जो स्टूल पर बैठा था और उन्हें देख रहा था।

अर्पित ने सामने खड़ी तीनों औरतों को नाखुश होकर देखा। वो अपनी बातों में इतनी डूब गई थीं कि उसे भूल गईं। ऐसा लग रहा था जैसे वो अदृश्य हो गया।

उसकी सारी अटेंशन राघव नाम के उस आदमी ने चुरा ली थी। इसलिए उसने जानबूझकर अपनी आवाज तेज की, “मुझे भूख लगी है। मैं खाना चाहता हूँ।”

उसकी छोटी-सी बचकानी आवाज सुनकर अब जाकर उन्हें याद आया कि वार्ड में एक बच्चा भी है। पाँच साल के बच्चे के सामने ब्लाइंड डेट की बात करना ठीक नहीं था। सौतेला पिता, दूसरी शादी जैसी बातें भी हो रही थीं।

शांति जी ने उसकी बात सुनी और फट से पास की मेज से कुछ फल, बिस्किट, और दूध उठाकर अर्पित को दे दिया।

उन्होंने उसकी तरफ देखा और कहा, “अर्पित , मुझे माफ कर दे। मेरी गलती है, मैंने ध्यान नहीं दिया। ये खा और बता तुझे पसंद आया या नहीं। अगर तुझे पसंद नहीं आया, तो मैं किसी और से तेरे लिए कुछ और मँगवाऊँगी।”

अर्पित ने अपने हाथ में खाना देखा और मुँह बनाया।

उसे ये पसंद नहीं था।

उसे चाट और समोसा जैसे स्नैक्स पसंद थे।

फ्रांस में तो ये ज्यादा नहीं मिलते, लेकिन यहाँ ढेर सारे थे।

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शांति जी ने खाने को देखा और कहा, “आदिति , ये सारे फल राघव ने खरीदे हैं। वो कितना अच्छा इंसान है। उसे डर था कि मुझे एक ही तरह का खाना ज्यादा देर तक पसंद नहीं आएगा, इसलिए वो हर बार कुछ अलग लाता है।”

आदिति ने ये सुना और सिर हिलाया। उसे पता था कि उसकी दादी क्या कहना चाहती हैं।

उन्हें उसकी तारीफ करना बहुत पसंद था।

आदिति ने अर्पित के हाथ से सेब लिया, उसे छीला और उसे देते हुए कहा, “बेबी, अभी ये खा ले और थोड़ा दूध पी ले। फिर मैं तुझे बाहर कुछ स्वादिष्ट खाने ले जाऊँगी।”

अर्पित ने अपनी माँ की बात सुनी और सिर हिलाया।

फिर उसने उसके हाथ से सेब लिया और आज्ञाकारी ढंग से खाने लगा। शांति जी उसके पास बैठी थीं और उसे प्यार से देख रही थीं।

अर्पित ने अभी सेब का पहला टुकड़ा भी नहीं निगला था कि तभी दरवाजे पर खटखट हुई। तीन बार खटखट हुआ, वो भी बहुत शानदार ढंग से। ना बहुत तेज, ना बहुत धीमा।

आप उसके खटखटाने के तरीके से ही बता सकते हैं कि दूसरा आदमी बहुत विनम्र और भरोसेमंद है।

शांति जी इतने समय से ये खटखट सुन रही थीं कि वो बिना दरवाजा खोले ही बता सकती थीं कि बाहर कौन है।

वो फट से खड़ी हुईं और बोलीं, “ये राघव ही होगी, जो काम से छुट्टी मिलने के बाद मुझसे मिलने आई होगी।”

अपनी बात खत्म करने के बाद, वो जल्दी से दरवाजा खोलने चली गईं। आदिति भी अपनी दादी के पीछे-पीछे दरवाजा खोलने गई।

अचानक एक जानी-पहचानी शक्ल उनके सामने आकर खड़ी हो गई।

“आरके?” आदिति ने हैरानी से कहा।

ये आदमी यहाँ क्या कर रहा है?

सुबह भी उसने वही काला सूट और पतलून पहना था। उसके काले चमड़े के जूते चमक रहे थे। मोम की वजह से उसके बाल खड़े थे, जिससे वो और भी खूबसूरत लग रहा था।

उसकी नीली आँखें गहरे समुद्र जैसी थीं। किसी के लिए भी ये समझना मुश्किल था कि वो क्या सोच रहा है या उसकी भावनाएँ क्या हैं।

उसका पूरा शरीर एक बिजनेसमैन की चमक से भरा था। इस वक्त उसके कपड़े और अंदाज इस जगह से बिल्कुल मेल नहीं खा रहे थे।

इससे पहले कि आदिति उससे पूछ पाती कि वो अस्पताल में उसके पीछे क्यों आया, वो अंदर आ गया और बोला।

शायद उसकी आकर्षक मौजूदगी की वजह से उसे नजरअंदाज करना मुश्किल था। कोई भी उसे एक नजर में देख सकता था।

“नमस्ते, दादी माँ। आप कैसी हैं?” उसने कहा।

आदिति हैरान थी।

वो उसकी दादी से मिलने आया था।

उसे उसकी दादी के बारे में कैसे पता?

आदिति शांति जी के पास हैरानी से खड़ी थी। शांति जी ने उसके हाथ में फल और टॉनिक देखा और उसे ले लिया। उन्होंने उसकी तरफ देखकर कहा, “तुम मेरे लिए इतना सामान क्यों लाए? मैं तुझे देखकर ही बहुत खुश हूँ, राघव ।”

राघव ? वो वही राघव है, जिसके बारे में उसकी दादी बात कर रही थीं।

ये कोई इत्तेफाक नहीं था कि उनके नाम एक जैसे थे।

वो वही आदमी था।

आदिति को समझ नहीं आया कि क्या कहे।

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