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Chapter 2

Tied with destiny - Chapter 2

Tied with destiny

मुंबई के सबसे बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल में अनुष्का का ट्रीटमेंट चल रहा था। वहां की सिक्योरिटी टाइट थी और पुलिस ने मीडिया को अंदर आने से रोक रखा था।

अंदर ऑपरेशन थिएटर में अनुष्का की सर्जरी चल रही थी। डॉक्टर्स की पूरी टीम मौजूद थी। सीनियर डॉक्टर के साथ वहां दो जूनियर डॉक्टर भी थे। उनके साथ नर्स की टीम इस सर्जरी में उन्हें असिस्ट कर रही थी।

“सिस्टर, पेशेंट का ब्लड लेकर लैब जाओ। रिजल्ट 2 मिनट में लेकर आना। हमें ब्लड की जरूरत होगी। ब्लड बैंक में ब्लड का पता करो और फैमिली को भी पूछ लो। किसी का ब्लड ग्रुप इससे मैच करता हो तो उन्हें बोलो वो तैयार रहे।” उनमें से एक जूनियर डॉक्टर ने बोलते हुए जल्दी से ब्लड को एक छोटी सी बोतल में डाला और नर्स को पकड़ा दिया।

नर्स वहां से जाती उससे पहले जूनियर डॉक्टर में से दूसरी डॉक्टर ने कहा, “ओ नेगेटिव.... हर ब्लड ग्रुप इज ओ नेगेटिव।” उसकी आवाज भर्राई हुई थी।

सीनियर डॉक्टर ने उसकी तरफ देखा। चेहरे और बालों में मास्क होने की वजह से सिर्फ उसकी आंखें दिखाई दे रही थी। उसकी लाइट एम्बर ब्राउन आइज नम थी। “क्या तुम दोनों का ब्लड ग्रुप सेम है डॉक्टर आयुष्का?”

सीनियर डॉक्टर के पूछने पर उसने हां में सिर हिला दिया। एक पल के वहां शांति छा गई। अब तक आयुष्का खुद को कंट्रोल करके सर्जरी में पूरी तरह से साथ देने की कोशिश कर रही थी लेकिन अब उसकी आंखों में आंसू आ गए।

समय का बीतता हर सेकंड अनुष्का की जिंदगी के लिए बहुत जरूरी था। आयुष्का खुद ही उसे ब्लड चढ़ाने के लिए तैयारी करने लगी।

उसने नर्स की हेल्प से दूसरा बेड तैयार किया और वहां जाकर लेट गई। उसके हाथ में आइवी लगी थी और अगले 2 मिनट में उसका खून अनुष्का को चढ़ाया जा रहा था।

“मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगी। इस दुनिया में एक साथ आए थे तो जायेगे भी एक साथ ही...। कोई भी हम दोनों को अलग नहीं कर सकता... खुद मौत भी नही।” आयुष्का अपने इमोशंस को कंट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रही थी।

अनुष्का उसकी जुड़वा बहन थी। वही ऑपरेशन थिएटर के बाहर उनकी पूरी फैमिली मौजूद थी। उसके मम्मी पापा, भैया और भाभी बाहर सर्जरी खत्म होने का वेट कर रहे थे। वो एक दूसरे को संभालने की पूरी कोशिश कर रहे थे।

“मॉम आप घबराइए मत.... आपको पता है ना आयु हर काम अच्छे से करती है। वो अपनी अनु को बचा लेगी।” आयुष्का के बड़े भाई रूद्र ने कहा।

वो अपनी मां तारा के पास बैठा था और उसे हिम्मत रखने का कह रहा था तो वहीं दूसरी तरफ आयुष्का के पापा मिस्टर जय सिंह ओबेरॉय खड़े थे। उनके पास रुद्र की वाइफ सिमरन थी।

“डैडी जी, आप देखिएगा, अभी थोड़ी देर बाद आयु ऑपरेशन थिएटर से बाहर आ जाएगी। बाहर आते ही वो हमेशा की तरह अनु की शिकायत लगाएगी कि वो उसे परेशान कर रही है। कुछ नहीं होगा... अपनी अनु ठीक हो जाएगी।” बोलते हुए सिमरन रोने लगी। तभी जय सिंह ओबेरॉय ने उसे गले लगाया।

“पहले खुद को तो संभाल लो बेटा, फिर बाद में मुझे संभालना।” उन्होंने धीमी और शांत आवाज में कहा। उनका दिल भी बहुत घबरा रहा था पर वो स्ट्रांग होने का दिखावा कर रहे थे।

उनसे कुछ दूरी पर खड़ा एक इंस्पेक्टर उन्हें गौर से देख रहा था। उसने अपने कान पर लगा ब्लूटूथ ऑन किया। कॉल कनेक्ट होते ही वो धीमी आवाज में बोला, “सर आपका शक बिल्कुल सही था। कुछ देर पहले आपने होटल साज की टेरेस पर जिसे देखा था, वो आरव खुराना ही था। एक बार इस लड़की को होश आ जाए तो फिर इसके स्टेटमेंट से हम बहुत कुछ प्रुफ कर सकते हैं।”

“मुझे शक नहीं पूरा यकीन था रावत। तभी मैं आरव के पीछे वहां गया था। अब कुछ भी करके इस एक्ट्रेस का ठीक होना बहुत जरूरी है। इस बार वो हमारे हाथ से बचने वाला नहीं है। हो ना हो सबूत मिटाने के लिए आरव ने ही इसे छत से धकेला हो। मैने उन दोनो को किस करते हुए भी देखा था।” सामने से रोहन की आवाज आई। वो वही इंस्पेक्टर था जो टेरेस पर आरव का पीछा कर रहा था। कॉल कट करने से पहले उसने कहा, “ठीक है तुम नजरें बनाए रखो। मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता।”

“जी सर।” इंस्पेक्टर ने जवाब दिया और कॉल कट कर दिया। वो रोहन के ऑर्डर फॉलो करते हुए वहां वेटिंग एरिया में ओबेरॉय फैमिली के साथ सर्जरी कंप्लीट होने का इंतजार कर रहा था।

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अंदर ऑपरेशन थिएटर में भी माहौल काफी सीरियस था। अनुष्का को ब्लड चढ़ाया जा चुका था। सर्जरी को शुरू हुए लगभग 2 घंटे से भी ज्यादा का टाइम बीत चुका था। अचानक डॉक्टर ने देखा अनुष्का की पल्स रेट गिरने लगी। हार्ट मॉनिटरिंग मशीन में उसकी हार्ट लाइंस सीधी आने लगी थी।

“एईडी मशीन रेडी करो। क्विक... हार्ट रेट गिर रही है... हमें शॉक थेरपी यूज करनी होगी।” सीनियर डॉक्टर चिल्ला कर बोला। आयुष्का अनुष्का के पास आ गई और उसका हाथ पकड़ लिया।

वो जानती थी इस तरह की सिचुएशन में इमोशनल सपोर्ट भी काफी काम कर सकता है। वो अनुष्का का हाथ सहलाने लगी और रोते हुए बोली, “नो, नो..न... नो.. नो यू कांट लूज हॉप्स.... याद है ना हम दोनों ने बेट लगाई थी... तीन सालों में दोनों में से कौन ज्यादा सक्सेसफुल होगा। अभी तो सिर्फ एक साल बिता है। 2 साल अभी बाकी है। कम ऑन गेट अप।”

जैसे ही एईडी मशीन रेडी हुई, आयुष्का अनुष्का से दूर हो गई। सीनियर डॉक्टर जल्दी-जल्दी अनुष्का को मशीन के जरिए शॉक दे रहे थे। तभी अचानक मशीन में तेज बीप की आवाज आई। अनुष्का की हार्ट रेट लाइंस बिल्कुल सीधी हो गई थी। फिर भी डॉक्टर ने दो से तीन बार फिर से शॉक देकर उसे रिवाइव करने की कोशिश की। फिर भी अनुष्का की हार्ट रेट फिर से नहीं लौट सकी।

इसी के साथ डॉक्टर ने अपनी थेरेपी रोक दी। कुछ देर के लिए वहां बिल्कुल शांति छा गई। उस कमरे में आयुष्का के रोने के अलावा और कोई आवाज नहीं आ रही थी।

“नहीं... तुम ऐसे कैसे जा सकती हो। तुम ये जानबूझकर मुझे तंग करने के लिए कर रही हो ना ताकि मॉम डैड तुम्हें अच्छा समझे और मुझे बुरा.... देखो तुम्हारी ये ट्रिक यहां काम नहीं आएगी... तुम उठो। गेट अप...” आयुष्का उसका हाथ पकड़ कर बुरी तरह रोने लगी।

सीनियर डॉक्टर ने अपना मास्क निकला। वो डॉक्टर अयान सिंघानिया थे। न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर डॉक्टर, जो लगभग 26 साल के थे। लंबी हाइट और लाइट ग्रे आईज के साथ कर्ली हेयर।

अयान ने आयुष्का के कंधे पर हाथ रखा। “स्टे स्ट्रॉन्ग डॉक्टर..।” वो उसे सिंपैथी देने की कोशिश कर रहा था, तभी आयुष्का ने उसका हाथ हटाया और उसकी तरफ देखकर कहा, “आप... आप मुझे सिंपैथी क्यों दे रहे हो डॉक्टर? इसे कुछ नहीं हुआ है। आप मशीन रेडी करो। वी विल रिवाइव हर... एक बार और ट्राई करके देखते है।”

“खुद को संभालो डॉक्टर आयुष्का... शी इज नो मोर। बाहर तुम्हारी फैमिली को भी इस बारे में बताना है।” अयान ने धीमी लेकिन सख्त आवाज में कहा।

अयान के गुस्सा करने पर आयुष्का वहां से दौड़कर ओटी के वॉशरूम में गई। अनुष्का की जुड़वा बहन होने के बावजूद दोनो की शक्ल बिल्कुल अलग थी, बस उनकी आंखें एक जैसे थी, लाइट एम्बर ब्राउन कलर की आंखे। आयु ने अपना मास्क निकाला। उसका गोरा चेहरा रोने की वजह से लाल हो गया। आयुष्का हिचकियां लेते हुए रोने लगी।

“आई कांट इमेजिन माय लाइफ विदाउट यू... तुम... तुम मुझे छोड़कर कैसे जा सकती हो।” आयुष्का का सारा दर्द रोते हुए बाहर आ रहा था। अनुष्का के बिना उसे खुद को संभालना मुश्किल साबित हो रहा था।

आयुष्का अंदर रो रही थी तभी बाहर से अयान ने दरवाजा खटखटाकर कहा, “तुरंत बाहर आओ डॉक्टर.... वी नीड यू।”

आयुष्का ने अपना मुंह धोया और वॉशरूम से बाहर आई। वो लगभग 24 साल की थी। अनुष्का एक्ट्रेस थी लेकिन आयुष्का दिखने में उससे भी ज्यादा खूबसूरत थी। लगभग 5 फुट 6 इंच हाइट, गोरा चेहरा और कमर से भी लंबे बाल। अनुष्का उसे अक्सर हीरोइन कहकर चिड़ाया करती थी। उसे ये हॉस्पिटल ज्वाइन किए हुए 8 महीने का वक्त ही हुआ था। उसने अभी तक सर्जरी वाली ड्रेस ही पहन रखी थी और बालों को पिगटैल में बांध रखा था।

बाहर आते ही अयान ने उसे गले लगा लिया और उसे सहलाने लगा, “जो हुआ, उसे चेंज नहीं किया जा सकता। तुम्हें खुद को और अपनी फैमिली को संभालना होगा आयु।”

आयुष्का ने उसकी बात पर हामी भरी और उससे अलग होकर ओटी से बाहर जाने लगी। पूरी टीम एक साथ बाहर निकली। उन्हें देखते ही ओबेरॉय फैमिली उनके पास आ गई।

आयुष्का का चेहरा उतरा हुआ था और आंखें लाल थी। उसे देखकर उसकी मां तारा जी ने कहा, “तुम... तुम रो क्यों रही थी? बोलो... मेरी अनु कहां है।”

“सॉरी मिसेज ओबेरॉय... वी कांट सेव हर।” सीनियर डॉक्टर होने के नाते अयान ने सारी जिम्मेदारी लेते हुए तारा जी को अनुष्का के मरने की बात बताई।

तारा जी रोते हुए नीचे गिर गई। आयुष्का ने नीचे बैठकर उन्हें गले से लगाया और संभालने लगी। उन्होंने रोते हुए आयुष्का को खुद से दूर धकेला।

तारा ने सुबकते हुए कहा, “एक काम भी ठीक से नहीं होता तुमसे.... पहले गलतियां करती थी तो संभालने के लिए अनु आगे रहती थी लेकिन तुमने तो.... तुम उसे क्यों नहीं बचा पाई।”

तारा जोर-जोर से रोने लगी, तभी जय जी उनके पास आकर उन्हें संभालने लगे। “आयु की इसमें कोई गलती नहीं है। तारा, आप उसे ब्लेम नहीं कर सकती।”

“तो मेरी अनु को किसने छीना है मुझसे? मुझे नहीं पता... मुझे वो वापस चाहिए।” तारा रोते हुए बच्चों की तरह जिद करने लगी जबकि उन्हें इस तरह रोता देख आयुष्का वहां से दौड़कर चली गई।

अनुष्का की मौत का सुनकर इंस्पेक्टर का चेहरा भी उतर गया। वो तुरंत वहां से हट गया और कॉल करके रोहन को अनुष्का की मौत की खबर दी। अनुष्का के मरने के साथ उनकी भी आखिरी उम्मीद खत्म हो गई थी।

वही आयुष्का हॉस्टिपल लॉबी से बाहर आ रही थी, तभी उसकी नज़र टीवी स्क्रीन पर गई। टीवी में वही आरव और अनुष्का की न्यूज आ रही थी। साथ ही उनका वीडियो भी चल रहा था। उसे देखने के बाद आयुष्का के चेहरे पर दुख के साथ-साथ गुस्से के मिले-जुले भाव थे।

“आरव खुराना....तो तुमने किया है ये। तुम कैसे हो, ये पूरी मुंबई जानता है। अपनी हरकतों से बहुत नुकसान पहुंचा दिया औरो को.... लेकिन वो और ही थे। आई चैलेंज यू आरव खुराना... आई विल रूइन यू।” आयुष्का की आंखों में आरव के लिए नफरत थी।

बाकी दुनिया की तरह अनुष्का के इस एक्सीडेंट के लिए आयुष्का भी आरव को ही दोषी समझ रही थी।

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