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Chapter 11

Tied with destiny - Chapter 11

Tied with destiny

मंथन ने आयु की निगरानी के लिए उसके पीछे एक आदमी लगा रखा था। उसने उसे आयु के फाइट क्लब जाने की बात बताई तो मंथन ने तुरंत मुंबई जाने का डिसाइड किया।

वो अपने सामान के साथ बाहर आया तो साक्षी उसे देख कर चौक गई। उसका बाकी परिवार उस वक्त वहां मौजूद नहीं था।

जाने से पहले मंथन साक्षी के पास गया और कहा, “दी प्लीज हर बार की तरह सब संभाल लेना। आई हैव टू गो मुंबई।”

“नो मंथन, नो आई कांट। ऑलरेडी पिछले एक महीने से घर वालों को बहाने लगा कर परेशान हो गई हूं। तुम्हारे बाहर के काम मुझे देखने पड़ते हैं। और पापा... सोचा है उनको क्या जवाब दोगे?” साक्षी ने कहा।

“मैं नहीं जानता मुझे क्या जवाब देना है पर मेरा मुंबई जाना जरूरी है। वो खुद ही अपने लिए मुसीबत खड़ी कर रही है। अगर अनु होती तो उसे ये करने से जरूर रोकती।” मंथन ने साक्षी को अपने मुंबई जाने का रीजन बताया। बोलते हुए उसकी आवाज भारी होने लगी थी।

उसकी बात सुनकर साक्षी कुछ पल चुप रही और फिर सख्त आवाज में कहा, “मुझे लगा था पिछले एक महीने में तुम समझ गए होगे कि वो वापस नहीं आने वाली। क्यों ये सब बेवकूफियां कर रहे हो? देखा जाए तो अनु की बहन और तुम में कोई भी अंतर नहीं है। वो भी अभी तक उसे लेकर बैठी है और तुम भी...दोनो ही इस चक्कर में अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हो।”

साक्षी की बात का मंथन के पास कोई जवाब नहीं था। उसने अपने लगेज का हैंडल पकड़ा और कहा, “मुझे पता है दी आप देख लोगे।”

वो वहां से जाने लगा लेकिन साक्षी तेज कदमों से चलती हुई उसके आगे आ गई। “ठीक है ये आखिरी बार है पर मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी।”

मंथन को उसकी बात का जवाब देने का मौका नहीं मिला, तभी उसके पापा मिस्टर निशांत आहूजा वहां आ गए। उन्होंने मंथन को लगेज के साथ देखा, तो वो भी हैरान थे।

“कहीं जा रहे हो?” उन्होंने सख्त आवाज में पूछा।

“मुंबई जा रहा हूं। वहां कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करने के बारे में सोच रहा हूं।” मंथन ने नजरें नीची करके जवाब दिया।

“अच्छा तो उसी की तैयारी के लिए खुद को कमरे में बंद कर रखा था।” उसके जाने का कारण जानकर निशांत जी के चेहरे पर हल्की स्माइल आ गई। उन्होंने मंथन के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “ठीक है जो भी करो, उसमें सफल होकर आना। मेरी मदद चाहिए तो बता देना।”

मंथन ने उनकी बात पर हामी भरी। वो काफी दिनों से अपना नया बिजनेस शुरू करने का प्लान कर रहा था तो निशांत जी को उसकी बात पर शक नहीं हुआ।

मंथन वहां से निकलता उससे पहले साक्षी तुरंत बोली, “पापा, इसके साथ मैं भी जा रही हूं।”

“तुमने बताया क्यों नहीं इस बारे में? मेरी ज्यादातर मीटिंग्स तुम ही शेड्यूल करती हो। वर्मा जी से ज्यादा तुम्हें मेरे बारे में पता होता है। तुम चली जाओगी तो मेरा काम रुक जाएगा।” निशांत जी साक्षी के जाने की बात सुनकर खुश नहीं हुए।

“हां, जानती हूं पर मैं ये सब वहां से ही देख लूंगी। ये अकेले वहां ठीक से सेटल नहीं हो पायेगा। इसे सेटल करने के बाद कुछ दिनों में वापस आ जाऊंगी। डोंट वरी मेरे जाने के बाद भी आपका काम नहीं रुकेगा।” साक्षी ने सारा काम संभालने का वादा किया तो निशांत जी ने उसे जाने की हां कह दी।

“ठीक है तो जाने से पहले एक बार तुम्हारी मम्मी से मिल लेना। वरना उनके सवालों की झड़ी शुरू हो जाएगी।” निशांत जी ने कहा और वहां से चले गए।

उनके जाने के बाद मंथन ने साक्षी की तरफ नाराजगी भरी नजरों से देखा। “अब अगर मम्मी को पता चला तो वो सौ सवाल पूछेंगी। आपको भी पैकिंग करनी है। इतना सब कुछ करने के चक्कर में मैं लेट हो जाऊंगा।” मंथन ने कहा।

“हां तो क्या हो गया जो 2 घंटे लेट हो जाओगे? वैसे भी इन दो-तीन घंटों में वो लड़की कुछ भी उल्टी-सीधी हरकत नहीं करेगी।” साक्षी ने जवाब दिया और वहां से चली गई।

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मंथन के पास उसका वेट करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था। कुछ ही देर में साक्षी अपने सामान के साथ वापस आ गई थी और उसने जाने से पहले अपनी मम्मी को भी इस बारे में बता दिया था।

साक्षी के आते ही मंथन तुरंत उसके साथ मुंबई जाने के लिए निकल गया।

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शाम के लगभग 5:00 बज रहे थे। खुराना इंडस्ट्रीज में आरव अपने केबिन में बैठा था‌। आयु ने उसकी गाड़ी खराब कर दी थी, इस वजह से वो मीटिंग में भी नहीं गया था।

“उस लड़की की हिम्मत कैसे हुई आरव खुराना की गाड़ी खराब करने की। मेरी गाड़ी खराब की थी ना, मैं उसकी जिंदगी खराब कर दूंगा। मिलने दो मुझे उससे... मिलने से याद आया, कबीर को काफी टाइम हो गया लेकिन अभी तक उसने उस लड़की का पता नहीं लगाया।” गाड़ी खराब होने की वजह से आरव बच्चों की तरह मुंह फुला कर बैठा था।

उसने तुरंत कबीर को कॉल करके कहा, “मैंने शायद तुम्हें आज एक काम दिया था। तुमने अभी तक पता नहीं लगाया कि मेरी गाड़ी किसने खराब की थी। आई डोंट नो एनीथिंग अभी के अभी मेरे केबिन में आओ।” अपनी बात कहकर आरव ने उसकी बात सुने बिना ही कॉल कट कर दिया।

वही कबीर अपने हाथ में आईपैड लेकर बैठा था। उसके पास उस स्कूटी से जुड़ी हुई डिटेल आ गई थी। वो आरव को कुछ कहता उससे पहले ही उसने कॉल कट कर दिया था।

“एक गाड़ी ही तो खराब हुई है यार। उसके लिए इतना ओवर, रिएक्ट करने की क्या जरूरत है? ये तो ऐसे बिहेव कर रहे हैं जैसे इनके पास वो एक ही गाड़ी हो। वैसे भी वो पुरानी हो चुकी थी... और मैंने पता नहीं लगाया? रियली? कभी सामने वाले की बात पूरी सुनते भी हैं या नहीं।” कबीर ने बड़बड़ा कर कहा। वो वहां से आरव के फ्लोर पर जाने के लिए लिफ्ट की तरफ गया।

कुछ ही मिनटों में वो आरव के फ्लोर पर था। अंदर जाने से पहले उसने दरवाजा खटखटाया।

“यस कम इन...” आरव ने तेज़ आवाज़ में कहा।

आरव कुछ कहता उससे पहले ही कबीर ने अपना आईपैड उसके टेबल पर रख कर कहा, “इसमें सारी डिटेल्स है। वो स्कूटी एक लड़की के नाम पर रजिस्टर्ड है। लड़की का नाम भव्या द्विवेदी है और वो लाइफ केयर हॉस्पिटल में एक नर्स के तौर पर काम करती हैं।”

“अच्छा तो मेरे ही हॉस्पिटल में काम करके मेरी ही गाड़ी खराब कर दी।” आरव ने जवाब दिया।

“उसे थोड़ी ना पता होगा कि वो हॉस्पिटल आपका है? उसका सारा काम दादी ने किसी और को सौंप रखा है। ये तो वहां काम करती है... वो भी नर्स के तौर पर। आपको पता ही है कि वो हॉस्पिटल आपके दादा जी के पापा ने बनवाया था। आपने खुद तो गलती से भी वहां कदम रखा नही... फिर वो कैसे सब जान सकती है।” कबीर ने शांत लहजे में जवाब दिया।

“अच्छा ये बात है। ठीक है तो फिर सबको बता दो कि वो हॉस्पिटल आरव खुराना का है।” जैसे ही आरव ने कहा कबीर हैरानी से उसकी तरफ देखने लगा।

कबीर ने ना में सिर हिलाया और धीमी आवाज में कहा, “आपका पता नहीं लेकिन ऐसा करने पर दादी सच में मुझे मार डालेगी।”

“हां खतरा तो मुझे भी है। पर देखा ना तुमने, उस ने बेवजह मेरी गाड़ी खराब कर दी। वो कोई छोटी बच्ची है क्या?” आरव ने बच्चों जैसे बनाकर कहा।

“मैंने बात कर ली है, वो डेंट ठीक हो जाएगा और आपके लिए एक नई गाड़ी भी रजिस्टर करवा दी है। अब तो बच्चों की तरह बिहेव करना बंद कीजिए। वो गाड़ी है आपकी गर्लफ्रेंड नहीं।” कबीर अपनी तरफ से आरव को समझाने की कोशिश कर रहा था।

“मेरी गाडियां ही मेरी गर्लफ्रेंड है तो आगे से ये मत कहना और रही बात वो डेंट ठीक करने की, तो वो अब तभी ठीक होगा जब उस लड़की से मैं अपना बदला ले लूंगा। मुझे जानबूझकर गलती करने वाले लोगो से सख्त चिढ़ है। अभी के अभी हॉस्पिटल चलो।” आरव वहां से उठा और बाहर जाने लगा।

कबीर को आगे कुछ कहने का मौका नहीं मिला। मजबूरन उसे भी आरव के पीछे जाना पड़ा। आरव अपने केबिन से बाहर निकला ही था कि तभी उसकी पर्सनल असिस्टेंट युवानी वहां आई।

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युवानी उसके लिए लगभग 2 साल से भी ज्यादा समय से काम कर रही थी लेकिन अब तक वो उससे ज्यादा बार मिली नही थी। बिजनेस मीटिंग्स आरव कबीर के साथ ही अटेंड करता था।

युवानी को आरव से बहुत डर लगता था। जैसे ही उसने अपने सामने आरव को देखा वो जल्दी से हड़बड़ा कर बोली, “वो... वो सर मीटिंग सच में बहुत जरूरी है।”

“मैं फिलहाल के लिए बिजी हूं और कोई मीटिंग के लिए नहीं जाऊंगा। तुम्हें कितनी बार कहा है अगर किसी मीटिंग में मेरी प्रेजेंस चाहिए तो मुझे 12 घंटे पहले बताया करो।” आरव ने गुस्से में जवाब दिया तो युवानी और भी घबरा गई।

उसने एक नजर कबीर की तरफ देखा, जिस ने आंखों ही आंखों में सब संभालने का कहा। युवानी के बजाय कबीर ने जवाब देते हुए कहा, “मीटिंग कल है सर और मैंने ही इसे आज इन्फॉर्म करने के लिए कहा था।”

“तुम क्या इसके वकील हो जो इसकी तरफ तरफदारी कर रहे हो?” आरव ने कबीर की तरफ घूरते हुए देखा। फिर वो कुछ सेकंड के लिए चुप रहा और अजीब नजरों से उन दोनों को देखते हुए कहा, “कहीं ये वो लड़की तो नहीं जिससे तुम आधी रात को गार्डन में टहलते हुए बातें करते हो? तुम दोनों रिलेशनशिप में हो क्या?”

“न... नहीं...” युवानी उसे ना कहने वाली थी तभी पहले ही कबीर बीच में बोल पड़ा, “हां ये वही है।”

“दादी को इस बात का पता चला तो तुम दोनों को काम से निकाल दूंगा। मुझे इस बात का लेक्चर नहीं सुनना कि तुम रिलेशनशिप में हो कबीर और मैं अब तक सिंगल।” आरव ने इतना ही कहा और फिर लिफ्ट में चला गया।

कबीर अभी भी युवानी के पास था। उसने युवानी का हाथ पकड़ कर कहा, “तुम्हें इनसे इतना डर क्यों लगता है? मैंने तुम्हें बताया था ना कि मैं इनके साथ किस वजह से हूं?”

“हां जानती हूं तुम माहिरा लूथरा के असिस्टेंट थे और इन दोनों के बीच का कनेक्शन बनने के लिए तुम इनके साथ काम करने लगे हो। माफिया वर्ल्ड से तुम जुड़े हुए हो लेकिन डर मुझे इन से लगता है।” युवानी ने बताया तो कबीर हंसने लगा।

“ऐसा कुछ नहीं है। मैं पिछले 6 साल से इनके साथ हूं। इनका बिहेवियर बिल्कुल बच्चों की तरह है। इन्हें पूरी अटेंशन खुद पर चाहिए होती है और कोई थोड़ा सा भी इन्हें हर्ट कर दे तो फिर बच्चों की तरह उनसे बदला लेना होता है।” कबीर ने जवाब दिया।

युवानी ने उसकी बात पर हामी भरी, तभी कबीर के पास आरव का कॉल आया। उसने कॉल पर कहा, “तुम दोनों का रोमांस करना हो गया हो तो नीचे आ जाओ।” अपनी बात कह कर आरव‌ ने कॉल कट कर दिया।

“ठीक है मैं चलता हूं। यू टेक केयर।” कबीर ने कहा। जाने से पहले उसने युवानी के माथे पर हल्का सा किस किया और वहां से चला गया।

कुछ ही देर में कबीर और आरव लाइफ केयर हॉस्पिटल में थे। वहां आरव हॉस्पिटल के सीईओ के साथ उसके केबिन में मौजूद था और उसके सामने वो नर्स खड़ी थी जिसकी स्कूटी लेकर आयु गई थी।

“तो भव्या द्विवेदी, तुम्हें पता है एक्जेक्टली मेरी गाड़ी कितने रुपए की है, जिस पर बहुत प्यार से आज तुमने अपनी हील से बड़ा सा डेंट दे दिया।” आरव भव्या द्विवेदी के सामने खड़ा था और उससे सर्द लहजे में बात कर रहा था।

वो तो आरव का लहजा देखकर ही घबरा गई थी। उसने ना में सिर हिलाते हुए कहा, “मैं... मैंने कुछ नहीं किया है सर। मैं तो आज पूरा दिन जनरल वॉर्ड में बिजी थी। आप चाहो तो सीसीटीवी देख सकते हो।”

“अच्छा तो मैं क्या झूठ बोल रहा हूं और तुम्हारी स्कूटी के पास कुछ मैजिकल पावर्स है, जो वो खुद ही उड़ कर मेरी गाड़ी के पास चली गई और... आई डोंट नो एनीथिंग। मुझे मेरी गाड़ी उसी हालत में वापस चाहिए।” आरव ने जिद करते हुए कहा।

“देखो अभी भी टाइम है। अपनी गलती कबूल कर लो। हो सकता है बाद में ये तुम्हें उसके लिए माफ भी कर दे।” हॉस्पिटल के सीईओ मिस्टर कपूर ने भव्या को समझाने की कोशिश की।

उनकी बात सुनकर आरव ने तुरंत कहा, “नहीं, माफ तो मैं इसे नहीं करने वाला। इसकी हिम्मत कैसे हुई मेरी गाड़ी खराब करने की।”

“सर जब मैं कह रही हूं मैं पूरा दिन बिजी थी, आप सबूत के तौर पर सीसीटीवी देख सकते हैं। फिर आप मेरी बात सुन क्यों नहीं रहे? मेरी स्कूटी बहुत बार वॉचमैन भैया भी यूज़ करते हैं। उन्होंने किसी को दे दी होगी। आप उनसे बात कर लीजिए।” भव्या ने कहा।

“ठीक है अभी सब साफ हो जाएगा। मैं गार्ड को बुलाता हूं।” मिस्टर कपूर ने कहा और इंटरकॉम पर कॉल करके सभी सिक्योरिटी गार्ड्स को अंदर ऑफिस में आने के लिए कहा।

उन गार्ड्स में वो भी मौजूद था, जिसने सुबह आयु को स्कूटी दी थी और इन सबसे बेखबर आयु अयान के साथ ओटी में सर्जरी में बिजी थी।

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