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Chapter 5

Tied with destiny - Chapter 5

Tied with destiny

रात के लगभग 8 बजे आयुष्का दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर निकली। उसने स्काई ब्लू बैगी पैंट्स के साथ लॉन्ग स्लीव्स ब्लैक क्रॉप टॉप पहना था। वहां से चेक आउट करने के बाद वो कैब लेकर मंथन के घर पहुंची।

वो इस समय दिल्ली के सीएम के घर के आगे खड़ी थी। मंथन के पापा मिस्टर निशान्त आहूजा दिल्ली के मुख्यमंत्री थे। अंदर जाने से पहले सिक्योरिटी ने उसे रोक लिया।

“मुझे मंथन आहूजा से मिलना है। मेरी पहले से ही उनसे मीटिंग फिक्स थी। आप चाहे तो कॉल करके पूछ सकते हैं।” आयुष्का ने सिक्योरिटी गार्ड से कहा।

सिक्योरिटी गार्ड ने उसकी बात पर हामी भरी और अंदर कॉल लगाया। बात करने के बाद उसने आयुष्का को अंदर जाने की परमिशन दे दी थी।

“आप बाहर मीटिंग रूम में पहुंचे। मंथन सर आते ही होंगे।” सिक्योरिटी गार्ड ने कहा और आयुष्का को अंदर मीटिंग रूम तक ले जाने लगा।

उधर मंथन को उसके आने का पता चला तो वो खुद उसे लेने चला गया। मंथन अनुष्का के साथ पिछले 2 साल से रिलेशनशिप में था। वो लगभग 27 साल का था। छह फीट से भी लंबी हाइट, मस्कुलर बॉडी, हल्का गेरुआ रंग और गहरी काली आंखे... मंथन की फिजिकल अपीयरेंस काफी इंप्रेसिव थी।

आयु आज उससे पहली बार मिल रही थी। मीटिंग रूम में पहुंचकर वो मंथन के आने का इंतजार करने लगी। अंदर आते ही मंथन ने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। वो एक साउंडप्रूफ रूम था।

जैसे ही मंथन और आयु की आंखें मिली। उन दोनों की आंखें उनके दिल का हाल बता रही थी। दोनों की ही आंखें लाल थी।

आयुष्का की आंखों में देखते हुए मंथन ने तुरंत अपनी नजरें फेर ली और कहा, “अगर तुम्हारे पास आई वियर है, तो पहन लो।”

“और वो क्यों? मेरी आंखें देखकर उसकी याद आ रही है? लगता नही कि तुम्हें उसकी मौत से कुछ फर्क भी पड़ा होगा।” आयुष्का ने गुस्से में कहा।

“ओह जस्ट शट अप...” मंथन गुस्से में उसकी तरफ मुड़ा और उसके कंधों से पकड़ लिया। अब वो आयु की आंखों में आंखें डालकर बात कर रहा था। “अगर इस दुनिया में किसी को उसके मरने पर सबसे ज्यादा फर्क पड़ा है, तो वो मैं हूं। तुम अच्छे से जानती हो मैं किस पोजीशन पर हूं। मैं तुम लोगों की तरह अपना दुख सबके सामने जाहिर नहीं कर सकता इसका मतलब ये नहीं कि मुझे तकलीफ नहीं हो रही।”

“छोड़ो मुझे...” आयुष्का ने उसे खुद से दूर किया और कहा, “अगर तुम्हें उसकी मौत का इतना ही फर्क पड़ रहा है तो तुम चुप क्यों हो? मेरी बहन का मर्डर हुआ है। तुम इतनी बड़ी पोजीशन पर हो कि सामने वाले को सजा दिला सकते हो। फिर क्यों कुछ नहीं कर रहे हैं?”

“तुम्हारे पास कोई प्रूफ है उसका मर्डर ही हुआ है?” मंथन ने पूछा तो आयु चुप हो गई। उसके चुप्पी ने मंथन के सवाल का जवाब दे दिया था। “गेट आउट... आगे से कभी भी मेरे सामने मत आना।” मंथन ने चिल्लाकर कहा।

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“हां नहीं आऊंगी और मुझे भी कोई शौक नहीं है तुमसे मिलने का। अच्छे से पता चल रहा है तुम उससे कितना प्यार करते थे। तुम भी बाकी लड़कों की तरह पजेसिव और शक्की मिजाज इंसान हो। तुमने उसे आरव खुराना के साथ देखा तो अपने सारे रिश्ते तोड़ दिए ना... जबकि सच ये है कि आरव ने ही उसे धक्का दिया था। तुम मेरी बहन के जाने के बाद उसके प्यार पर शक कर रहे हो।” आयु ने गुस्से में काफी कुछ बोल दिया। मंथन ने उसे जाने के लिए कह दिया था तो उसके पास अपने दिल की भड़ास निकालने का आखरी मौका था।

उसकी बात सुनकर मंथन हल्के से हंसा और फिर कड़वाहट भरी मुस्कुराहट के साथ कहा, “अनु बिल्कुल ठीक कहती थी। तुम उससे सिर्फ 10 मिनट छोटी हो लेकिन तुम्हारा दिमाग अभी भी बच्चों जैसा है। पूअर गर्ल...।”

उसके ऐसा कहने पर आयु ने उसकी तरफ घूर कर देखा। मंथन ने आगे कहा, “तुम्हें क्या लगता है एक वीडियो देखने के बाद मैं उससे अपने सारे रिश्ते तोड़ दूंगा या उस पर शक करूंगा कि उसका आरव खुराना के साथ अफेयर था। तुम्हारी इंफॉर्मेशन के लिए बता दूं तुम्हारी बहन एक एक्ट्रेस थी। मूवी में किस सीन से लेकर और भी बोल्ड सीन शूट होते थे। तब भी मैंने उसे कुछ नहीं कहा तो वो छोटा सा वीडियो, जिसका सच हम दोनों ही नहीं जानते, उसके चलते मैं उससे रिश्ता कैसे तोड़ सकता हूं।”

“तो फिर तुम कुछ कर क्यों नहीं रहे? तुम्हें ही कुछ करना होगा। आरव खुराना की पहुंच बहुत आगे तक है। मैं कभी उससे लड़ नहीं पाऊंगी। लड़ना तो दूर की बात है मैं तो उस तक पहुंच भी नहीं पाऊंगी लेकिन तुम्हारे साथ ऐसा नहीं है। तुम और तुम्हारे डैड जिस पोजीशन पर हो, उस पर तुम आराम से उसे सजा दिलवा सकते हो।” आयु ने अपना पॉइंट रखा।

पूरी बात सुनने के बाद मंथन ने गहरी सांस लेकर छोड़ी। “जब वही इस दुनिया में नहीं रही है तो मुझे उन लोगों से कोई लेना देना नहीं है। चली जाओ यहां से... तुम्हारी... तुम्हारी आंखें... मुझे नहीं पता था तुम दोनों की आंखें बिल्कुल एक जैसी होगी। मुझे तुम उसकी याद दिला रही हो। उसके जाने के बाद मुझे किसी से कोई मतलब नहीं है। जिसको जो करना है, समझना है, समझने दो। मुझे अकेला छोड़ दो।” मंथन ने भारी आवाज में कहा। उसकी आवाज से उसका दिल का दर्द साफ नजर आ रहा था।

मंथन तुरंत वहां से निकल गया । आयु ने उसके पीछे जाकर उसे रोकने की कोशिश भी की लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ। मंथन अपने बंगलों के अंदर जा चुका था तो वहीं आयु वहां बिना परमिशन के नहीं जा सकती थी।

दुखी मन से वो वापस मुंबई जाने के लिए उसके घर से निकल गई तो वही कोई दूर से उन दोनों को देख रहा था। वो मंथन की बड़ी बहन साक्षी थी।

“तुम कौन हो मैं नहीं जानती पर मंथन तुमसे मिलने आया है, तो जरूर तुम उससे जुड़ी हुई हो। मेरे भाई ने उसके बारे में मेरे अलावा किसी को नहीं बताया और आज उसके जाने के बाद 3 दिन बाद वो अपने कमरे से बाहर निकला है तो तुमसे मिलने के लिए। जरूर तुम उसी से जुड़ी हुई हो। तुम ही हो, जो उसे इस दर्द से निकाल सकती हो।” साक्षी को आयु के रूप में मंथन के लिए कुछ उम्मीदें नजर आ रही थी।

वो अंदर चली गई तो वही जाने से पहले आयु ने एक नोट लिखा। गार्ड को उसे मंथन तक पहुंचाने का बोल कर वहां से चली गई। उसके जाने के बाद सिक्योरिटी गार्ड ने वो नोट मंथन तक पहुंचाया।

मंथन अपने कमरे में अनुष्का और अपनी फोटोज देख रहा था लेकिन जैसे ही उसने वो नोट पढ़ा उसने गुस्से में अपना आईपैड फेंक दिया।

“तुम्हारी बहन सच में बहुत जिद्दी है अनु... अब समझ आ रहा है मुझे... तुम उसके हर मोमेंट की खबर क्यों रखती थी। तुम तो चली गई पर... ना चाहते हुए भी तुम्हारी बहन की रिस्पांसिबिलिटी मुझे उठानी पड़ रही है। सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए अनु... तुम अपनी बहन से इतना प्यार करती थी और आज जिंदा होती तो उसे किसी मुसीबत में कभी नहीं देख पाती। तुम्हारे प्यार के लिए उस पागल लड़की का ख्याल अब मुझे ही रखना होगा।” मंथन ने अपना सिर पकड़ कर कहा और फिर किसी को फोन किया।

उसने कॉल पर कहा, “एक लड़की की फोटो भेज रहा हूं उसकी हर मूवमेंट पर नजर रखना... उसे किसी की भी तरह की हेल्प की जरूरत पड़ सकती है जो कि लीगल किसी भी तरीके से नहीं है। ध्यान रखना उसे एक खरोंच भी नहीं आनी चाहिए।”

उससे बात करने के बाद मंथन ने कॉल कट कर दिया। उसने फिर एक नजर आयु के लिखे नोट की तरफ देखा।

“तुम्हारा प्यार कैसा है मुझे नहीं पता पर मैं इस दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार अपनी बहन से करती हूं। कुछ मोमेंट ऐसे थे जब मुझे कोई नहीं समझ पाता था, तब भी वो बिना कहे मेरे दिल की बात समझ लेती थीं। वो मेरे लिए मेरा सब कुछ थीं और उसे मुझ से छीनने वाले को मैं वही मौत दूंगी, जो उसे मिली थी। देखना जैसे मेरी बहन की न्यूज़ सब जगह वायरल हो रही थी, एक दिन आरव खुराना की न्यूज़ भी सब जगह वायरल होगी। उसी होटल साज़ की टेरेस से गिरकर उसकी मौत होगी।”

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आयु के लिखे नोट के पढ़ने के बाद मंथन ने सिर हिलाकर कहा, “बेवकूफ लड़की...”

___________

रात के लगभग 11:00 बज रहे थे। अयान अपने बेडरूम में परेशानी में इधर-उधर चहल कदमी कर रहा था। आयु आज हॉस्पिटल नहीं आई थी इस वजह से अयान उसे बार-बार कॉल कर रहा था।

“समझ नहीं आ रहा, तुम्हें कैसे रोकूं? एक तो तुम जिद्दी भी बहुत हो। किसी चीज की जिद्द पकड़ लेती हो तो बच्चों की तरह जब तक जिद्द पूरी नहीं हो जाए, मानती भी नहीं...” अयान ने खुद से कहा।

वो फिर से आयु को कॉल लगाने जा रहा था तभी किसी ने उसके कमरे का दरवाजा खटखटा कर कहा, “हमारी लविंग मॉम गई है ब्रो... इस बार पूरे ढाई महीने बाद। फाइनली उन्हें हमारी याद आ गई। चलो कुछ और नहीं तो जाकर उनकी शक्ल ही देख लेते है।” बाहर से एक लड़की की आवाज आई।

“जस्ट कमिंग रायशा।” अयान ने आंखें घुमा कर जवाब दिया।

इतने बड़े सिंघानिया मेंशन में अयान और रायशा अकेले रहते थे। रायशा 20 साल की थी। दिखने में मासूम और चेहरे पर हमेशा मीठी सी मुस्कान लिए रायशा हर सिचुएशन में पॉजिटिव रहती थी।

अयान और रायशा के बीच की बॉन्डिंग अच्छी थी। उसकी पॉजिटिविटी देख कर अयान उसे अक्सर ये कहकर छेड़ा करता था कि उसके सामने अगर किसी का मर्डर भी हो रहा होता तो वो मर्डरर को एक गिलास जूस पिलाकर गाड़ी में आराम से उसकी मर्जी से पुलिस स्टेशन छोड़ कर आती।

अयान बाहर निकल कर आया तो उसकी मॉम मिसेस छवि सिंघानिया बाहर अपने असिस्टेंट के साथ खड़ी थी। वो उम्र में लगभग 50 साल के करीब थी पर दिखने में काफी जवान नजर आती थी। उन्होंने ब्लैक मिड थाई ड्रेस पहनी थी। उनके मिड बैक तक के स्ट्रेट बाल गोल्डन ब्लैक हाई लाइटेड किए हुए थे।

“आई मिस्ड यू मॉम...” कहकर रायशा उनके गले लग गई।

“मैंने भी तुम्हें बहुत मिस किया बेबी। भाई कहां है?” छवि ने इधर उधर देखा तो उसे अयान सामने से आता दिखाई दिया।

“वेलकम होम मॉम... आई विश इस बार आप और जल्दी चली जाए और वापिस... आप ना भी आए तो चलेगा।” अयान ने उनसे काफी रूखे तरीके से बात की और बाहर चला गया।

“मैं देखती हूं मॉम...” रायशा उसके पीछे दौड़कर गई।

उसकी बाते सुनकर छवि अपना गुस्सा कंट्रोल करने की कोशिश कर ही रही थी कि उसके मैनेजर ने उसके पास कहा, “आरव खुराना... उसने फिर हमारा काम बिगाड़ दिया।”

“आरव...” इस बार छवि से उसका गुस्सा काबू नही हुआ तो वो जोर से चिल्लाई और पास रखा स्टेच्यू उठाकर फेंक दिया।

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