Tied with destiny - Chapter 22
Tied with destinyआयु पार्टी से निकल कर बाहर आ गई। अंदर जो भी हुआ, उसकी वजह से वो गुस्सा थी और काफी बेपरवाही से चल रही थी। उसके लिए इतनी हेवी ड्रेस अकेले संभाल पाना मुश्किल साबित हो रहा था।
जल्दबाजी में चलते हुए आयु का पैर मुड़ गया और उसकी एक हील टूट गई।
आयु ने अपनी हील उतारी और उसे हाथ में पकड़ कर देखने लगी, “हद है यार... इसे भी अभी टूटना था। आज का तो दिन ही बेकार था। सुबह इतनी एक्साइटेड होकर शॉपिंग की थी लेकिन पार्टी में सब बेकार साबित हुआ। पहले आरव खुराना के साथ डांस करना पड़ा तो अब ये...अब इस टूटी हुई हील और हेवी ड्रेस के साथ में घर कैसे जाऊंगी? मेरे पास तो खुद की गाड़ी भी नहीं।” आयु लाचारी से उसे देखने लगी।
वो कुछ पल वहां बैठी उसे यूं ही देखती रही। फिर उसने अपनी दूसरी हील भी निकाल दी। “जो भी हो, घर तो जाना ही पड़ेगा।” आयु ने खुद से कहा।
वो वहां से उठी और रोड पर चलते हुए कैब का वेट करने लगी। उसके एक हाथ में अपनी हील्स थी तो दूसरे हाथ से वो मुश्किल से अपनी ड्रेस और पर्स को संभाले हुए जा रही थी।
तभी एक गाड़ी तेज गति से उसके पास से गुजरी तो आयु जोर से चिल्लाई, “प्लीज... स्टॉप।”
उसके आवाज लगाने के बावजूद गाड़ी आगे निकल गई। वो पीछे से जोर से चिल्लाई। “अरे क्या हो जाएगा जो किसी इंसान की हेल्प कर दोगे... तुम्हारी हाइट थोड़ी ना कम हो जाएगी। हद हो गई यार...भलाई का तो जमाना ही नहीं है।”
आयु वहीं रुक गई, तभी वो गाड़ी वापस पीछे आई। उस गाड़ी में मंथन था। उसने रियर मिरर से आयु को देखा तो गाड़ी बैक ले ली।
मंथन ने गाड़ी का शीशा डाउन किया और अपना मुंह बाहर निकाल कर कहा, “क्या हुआ? तुम्हारे बॉयफ्रेंड ने तुम्हें यहां अकेले छोड़ दिया।”
“देखो बकवास करके मेरा दिमाग खराब मत करो। मैं ऑलरेडी परेशान हूं।” आयु ने गुस्से में जवाब दिया।
मंथन ने एक नजर आयु को ऊपर से नीचे तक देखा तो उसके कपड़े मेसी हो गए थे। बाल भी बिखरे हुए थे और हाथों में टूटी हुई हील्स देखकर वो उसका हाल अच्छे से समझ गया।
उसने गहरी सांस लेकर छोड़ी और धीमी आवाज में कहा, “चलो आओ, बैठो। आई विल ड्रॉप यू।”
आयु ने उसे और बहस नहीं की और उसके पास वाली सीट पर आकर बैठ गई। वो काफी थकी हुई थी इस वजह से सीट पर लीन हो गई।
“अगर इतना ही थकी हुई थी तो क्या जरूरत थी इतनी देर तक रुकने की?” मंथन ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा।
“बस किसी खास की वजह से आना पड़ा। एक काम करो मुझे भी अपने घर ले चलो। इतनी रात को मेरे घर गई तो मेरी मॉम फिर से मेरी क्लास लगा देगी।” आयु ने कहा। उसने आंखें बंद कर रखी थी।
“एक बात बताओ, तुम्हारी अपने घर वालों से बनती क्यों नहीं? मैने अनु से भी अक्सर सुना था तुम घर से ज्यादा बाहर रहना पसंद करती हो।” मंथन ने बातों बातों में पूछा।
आयु ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। मंथन ने एक नजर आयु की तरफ देखा तो वो सो चुकी थी।
“ये लड़की भी ना... पहले इसकी वजह से हमारी रिलेशनशिप आगे नहीं बढ़ पाई और अब मैं आगे नहीं बढ़ पा रहा। कैसे संभालू मैं इसे अकेले..” मंथन ने सिर हिला कर कहा।
कुछ ही देर में वो दोनों मंथन के अपार्टमेंट के आगे थे। उसने गाड़ी पार्क की और फिर आयु को उठाने की कोशिश की लेकिन थके होने की वजह से वो गहरी नींद में थी। मंथन ने उसे अपनी गोद में उठाया और लिफ्ट की तरफ बढ़ा।
“इससे ज्यादा वजन तो इसकी ड्रेस में है।” मंथन ने बड़बड़ा कर कहा।
मंथन उसे अपने फ्लोर पर लेकर पहुंचा। वो घर आया तब तक साक्षी सो चुकी थी। वो आयु को लेटाने के लिए गेस्ट रूम में गया। उसे बेड पर लिटाते हुए मंथन का पैर आयु की ड्रेस में अटक गया। उस के ऊपर गिरने से पहले मंथन ने खुद के हाथ का सहारा ले लिया।
मंथन आयु के ऊपर गिरने से तो बच गया था लेकिन आयु के चेहरे के बिल्कुल करीब था। आयु सोते हुए बिल्कुल किसी मासूम बच्चे की तरह लग रही थी इसलिए मंथन उसके चेहरे में खो गया।
“अनु...” अचानक मंथन के मुंह से निकला।
आयु ने सोते हुए करवट बदलते हुए नींद में बड़बड़ा कर कहा, “अनु... मुझे नहीं जाना है घर पर। मुझे तुम्हारे अलावा और कोई प्यार नहीं करता।”
उसके मुंह से भी अनु का नाम सुनकर मंथन को होश आया। वो तुरंत उसके ऊपर से उठ गया।
“तुम मेरी अनु नहीं हो और ना ही उसकी जगह ले सकती हो।” मंथन ने कहा और वहां से चला गया।
आयु के साथ रहते हुए उसके लिए अनुष्का को भुलाना और भी मुश्किल साबित हो रहा था।
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दूसरी तरफ मीटिंग खत्म होने के बाद आरव माहिरा को लेकर होटल पहुंचा। रास्ते में दोनों इस मीटिंग के बारे में बात करते हुए होटल तक आए थे।
वहां पहुंचते ही आरव ने माहिरा को हल्का सा हग दिया और उससे अलग होकर कहा, “हम कल सुबह मिलते हैं। आई हैव टू गो।”
“लेकिन मुझे लगा था हम आज की रात साथ बिताएंगे।” माहिरा ने मायूसी के साथ कहा।
“मैं रुक जाता लेकिन दादी का कॉल आ गया। तुम जानती हो ना उनकी हेल्थ कंडीशन सही नहीं है। आई कांट इग्नोर हर।” आरव ने अपने ना रुकने की सफाई दी।
माहिरा ने हां में सिर हिलाया और जवाब में कहा, “ठीक है फिर मैं कुछ दिनों के लिए और रुक जाती हूं। आई वांट टू स्पेंड टाइम विद यू। मैं तुमसे कहना तो नहीं चाहती थी पर उस मीटिंग में मौजूद हर एक शख्स खास था और वो इतनी काबिलियत रखता है कि हमारे खिलाफ इजीली कुछ कर सकता है। सबके सामने हमने अपने रिश्ते की बात की है तो छवि सिंघानिया जरूर सच साबित करने की कोशिश करेगी कि हमारे बीच कुछ नहीं है।”
“हां जानता हूं और डोंट वरी उसे कभी पता नहीं चलेगा।” आरव ने मुस्कुरा कर कहा। फिर उसने माहिरा के गाल पर हल्के से किस किया और उसे बाय बोलकर चला गया।
माहिरा उसे रोकना चाहती थी पर गौरवी जी की वजह से वो उसे रोक भी नहीं पाई तो वहीं दूसरी तरफ आरव ने जल्द से जल्द उस से पीछा छुड़ाया और अपनी गाड़ी घर की तरफ ली।
उसकी आंखों में अभी भी आयु का चेहरा था। “अब तो तुम्हें और अच्छे से जानना बनता है माय एम्बर आईड गर्ल... व्हाट एवर... तुम किसी की भी गर्लफ्रेंड हो, पर अब तुम आरव खुराना की पसंद बन गई हो। पता नहीं क्यों तुम मुझे अपनी तरफ अट्रेक्ट कर रही हो। देयर इज समथिंग डिफरेंट जो मुझे तुम्हारी तरफ खींच रहा है।”
आयु का ख्याल आरव के दिल से जा ही नहीं रहा था। वो अपने घर पहुंचा तब तक गौरवी जी और कबीर सोने जा चुके थे। आरव जल्दी से अपने कमरे में गया और कमरे के अंदर जाकर उसने अपने क्लोसेट रूम के अंदर बनी अलमारी का दरवाजा खिसकाया।
दरवाजे के उस पार आगे एक और कमरा था, जो कि काफी बड़ा था। उसमें चारों तरफ पेंटिंग्स टंगी हुई थी। कैनवास पर एक अधूरी बनी पेंटिंग थी, जिसके ऊपर सिर्फ आंखें बनी हुई थी। वो आंखें हुबहू आयु जैसी थी। छोटी और खूबसूरत एंबर आईज।
“फाइनली इन आंखों को एक चेहरा मिल गया।” आरव ने खुद से कहा।
उसने कलर्स उठाए और उस अधूरी पेंटिंग को पूरा करना शुरू कर दिया।