Tied with destiny - Chapter 24
Tied with destinyआरव ने साक्षी को अपने घर डिनर पर इन्वाइट किया था। उन दोनों की वीडियो कॉल हो रही थी तभी उसने वहां आयु को देख लिया था। साक्षी ने जल्दबाजी में कॉल तो कट कर दिया था पर दोनों के चेहरे पर घबराहट के भाव थे।
मंथन और साक्षी ने एक दूसरे की तरफ देख कर गहरी सांस ली और फिर साक्षी ने कहा, “आरव ने किसी के बारे में पूछा है... उसका मतलब जानते हो ना?”
“हां मैं इसे जल्दी से यहां से लेकर जाता हूं इससे पहले कि वो यहां पहुंचे।” मंथन ने जवाब दिया।
“उसने जिस हिसाब से रिएक्ट किया, उससे ये तो साफ है ये दोनो एक दूसरे से पहले भी मिल चुके है।” साक्षी ने अंदाजा लगाते हुए कहा।
“हां कल रात पार्टी में आरव वहां थे। अनु की बहन भी वहां आई हुई थी तो दोनों मिल लिए होंगे।” मंथन ने कहा। फिर वो आयु की तरफ बढ़ा।
आयु काफी वीक फील कर रही थी इस वजह से वो वहां काउच पर बैठ गई। मंथन उसके पास गया और उसे उठाने के लिए उसका हाथ पकड़ कर कहा, “चलो मैं तुम्हें तुम्हारे घर ड्रॉप कर देता हूं। सुबह हो गई है। अब तुम्हारे घर वाले कुछ नहीं कहेंगे।”
“लेकिन मुझे कहीं नहीं जाना। आई... आई नीड माय मेडिसिंस।” वो थके हुए स्वर में बोली। आयु को चक्कर आ रहे थे इसलिए उसने मंथन के कंधे पर अपना सिर टिका लिया।
वही उसकी हालत खराब देखकर साक्षी जल्दी से उसके पास आई। उसने आयु के माथे पर हाथ रख कर देखा तो उसका बॉडी टेंपरेचर नॉर्मल था।
“फीवर तो नहीं है। फिर तुम्हारी हालत इतनी खराब कैसे हुई? और तुम किसी मेडिसिन की बात कर रही हो? कहीं तुम ड्रग्स तो नहीं लेती।” साक्षी ने हल्का डांटने के लहजे में पूछा।
उसकी बात सुनकर आयु ने अपना सिर उठाया और उसकी तरफ घूर कर देखने लगी। उसे चक्कर आ रहे थे तो उसने मंथन का हाथ पकड़ लिया।
“सुबह-सुबह मेरा बीपी बहुत लो होता है। रात को मैंने मेडिसिंस नहीं ली थी। लगता है ब्लड शुगर डाउन हो रहा है।” आयु ने उन्हें अपनी वीकनेस की वजह बताई। फिर उसने मंथन की तरफ देखकर कहा, “तुम ऐसा करो मेडिकल जाओ। मैं तुम्हें कुछ मेडिसिंस लिख कर दे देती हूं। मुझे वो अभी चाहिए।”
“आर यू श्योर तुम एक डॉक्टर ही हो? फिलहाल तो तुम मुझे एक डॉक्टर कम मरीज ज्यादा नजर आ रही हो।” मंथन ने उसकी तरफ देखकर पूछा।
“ये डॉक्टर हो या मरीज... इस बात को छोड़ो। अभी के लिए इसे यहां से जाना होगा। वी डोंट हैव मच टाइम। सुबह-सुबह तो ट्रैफिक भी ज्यादा नहीं होता कि उसे आने में टाइम लग जाए।” साक्षी ने मंथन को याद दिलाया।
“कौन आने वाला है?” आयु ने पूछा।
“कोई नहीं...” साक्षी के बजाय मंथन ने जवाब देते हुए कहा। फिर वो साक्षी से बोला, “दी आप ऐसा कीजिए चॉकलेट्स या कुछ स्वीट्स पड़ी होगी, वो लेकर आई। मीठा खाने के बाद इसे नॉर्मल फील होगा।”
“मंथन हमें आए हुए यहां ज्यादा टाइम नहीं हुआ है। यहां जरूरत के समान के अलावा और कुछ नहीं है।” साक्षी ने जवाब दिया।
“तो प्लीज एक गिलास चीनी का पानी ही लाकर दे दीजिए वरना ये यहां बेहोश होकर गिर जाएगी और सब गड़बड़ हो जाएगा।” मंथन ने चिढ़कर कहा।
साक्षी किचन एरिया की तरफ चली गई जबकि मंथन वही आयु के पास खड़ा था। उसने आयु को बिठाया। कुछ ही देर में साक्षी उसके लिए पानी का गिलास लेकर आई। मंथन ने आयु को जबरदस्ती उसे पिला दिया।
“तुम्हें यहां से जाना होगा। यहां से जाने के बाद तुम हॉस्पिटल में एडमिट हो या फिर खुद के लिए दवाइयां खरीदो... देट्स योर प्रॉब्लम पर तुम यहां नहीं रुक सकती।” मंथन ने रूखे तरीके से कहा। वो आयु को फिर से उठाने लगा।
“थोड़ा तो टाइम दो। इतनी देर में तो मेडिसिंस का भी असर शुरू नहीं होता। कैसे इंसान हो तुम? एक बीमार इंसान को अपने घर से निकाल रहे हो। अपने घर जाना तो दूर मुझसे तो खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा।” आयु ने उसकी तरफ मुंह बनाकर कहा।
मंथन ने गहरी सांस लेकर छोड़ी और फिर आयु को अपनी गोद में उठा लिया। वो बाहर की तरफ जाते हुए बोला, “दी प्लीज आप सब संभाल लेना। मैं इस बीमार डॉक्टर को इसके हॉस्पिटल में ही एडमिट करके आता हूं।”
मंथन आयु को लेकर उसी के हॉस्पिटल में गया जबकि पीछे से साक्षी अकेली थी। मंथन को आयु की परवाह करते देखा उसे अच्छा लग रहा था।
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दूसरी तरफ आरव आयु को साक्षी के घर देखते ही उससे मिलने के लिए साक्षी के घर जाने लगा। उसे खुद अपने बर्ताव पर थोड़ी हैरानी हो रही थी। आज से पहले उसने कभी किसी लड़की में इंटरेस्ट नहीं दिखाया था।
“आई नो मैं जो कर रहा हूं वो गलत है। लेकिन तुम्हें देखने के बाद मेरा दिल बेकाबू हो रहा है। तुम मेरे बारे में गलत सोचती हो। दुनिया मेरे बारे में कुछ भी सोचे, मेरी कोई भी इमेज बनाकर रखें आई रियली डोंट केयर... पर तुम नहीं। पहली बार किसी के साथ टाइम बिताने का मन कर रहा है। मुझे तुम्हें और जानना है और वो मैं जान कर रहूंगा।” आरव गाड़ी ड्राइव करते हुए खुद से बोला। आगे ट्रैफिक होने की वजह से उसे टाइम पास करने के लिए म्यूजिक प्ले किया।
ये भी पहली बार ही हो रहा था कि उसने म्यूजिक सुनने के बारे में सोचा। गाने सुनते वक्त उसके दिल में आयु के ही ख्याल चल रहे थे।
“कोई दिल बेकाबू कर गया और इश्काँ दिल में भर गया,
आँखों-आँखों में वो लाखों गल्लां कर गया ओए
ओ रब्बा मैं तो मर गया ओये
शदायी मुझे कर गया, कर गया, कर गया ओए।
अब दिल चाहे ख़ामोशी के होठों पे मैं लिख दूँ
प्यारी सी बातें कई,
कुछ पल मेरे नाम करे वो, मैं भी उसके नाम पे
लिखूँ मुलाकातें कई,
आरव के होठों पर हल्की सी मुस्कुराहट थी और वो आयु के बारे में सोच रहा था।
पहली ही तकनी में बन गयी जान पे
नैणा-वैणा उसके मेरे दिल पे छपे
अब जाऊँ कहाँ पे, दिल रुका है वहाँ पे
जहाँ देख के मुझे वो आगे बढ़ गया
ओ रब्बा मैं तो मर गया ओए...
शदायी मुझे कर गया, कर गया, कर गया ओए।
कुछ ही देर में ट्रेफिक क्लियर हो गया था और आरव आयु से मिलने साक्षी के घर पहुंचा। मंथन उसे पहले से ही लेकर जा चुका था। आरव को वहां देखकर साक्षी को जरा सी भी हैरानी नहीं हुई। वो उसके नेचर को बखूबी जानती थी।
“कैसी हो तुम?” आरव ने साक्षी को देखते ही उसे हल्के से हग किया और फिर उस से अलग होकर कहा, “तुमने कहा तुम कुक कर रही हो तो मुझसे रुका ही नहीं गया। मुझे तुम्हारे हाथ का बना खाना आज भी याद है... जबकि तीन साल पहले तुमने मेरे लिए कुक किया था। अच्छा बताओ, क्या बनाया है... देख लो तुम्हारे हाथ का खाना खाने के लिए मैं यहां तक आ गया।”
उसकी बात सुनकर साक्षी ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया और फिर आरव के माथे पर हाथ रखकर कहा, “तबीयत तो ठीक है ना तुम्हारी? तुम मेरी तारीफ कर रहे हो। शक्ल से भी पहली बार नर्वस नजर आ रहे हो।”
“हां अचानक आ गया ना तो थोड़ा... थोड़ी झिझक महसूस हो रही है।” बोलते हुए आरव अपनी नजरों से घर को स्कैन कर रहा था पर उसे साक्षी के अलावा वहां कोई नहीं मिला।
साक्षी ने उसकी नजरों को पढ़ते हुए कहा, “तुम जिसे ढूंढ रहे हो आरव खुराना, वो यहां से जा चुकी है।”
“मतलब तुम्हें पता है कि मैं उसी के लिए यहां आया था।” आरव ने मायूसी के साथ कहा। फिर वो काउच पर बैठ गया और साक्षी से बोला, “जरूर तुमने ही उसे यहां से भगाया होगा। मैं अच्छे से जानता हूं तुम्हें... तुम्हें मेरी खुशी बर्दाश्त ही नहीं होती। जाओ मेरे लिए कॉफी लेकर आओ।”
“वैसे ब्रेकफास्ट भी है।” साक्षी ने जवाब दिया।
“कोई जरूरत नहीं है कुछ भी लाने की। मैं भुला नहीं हूं। 3 साल पहले तुम्हारे हाथ का खाना खाया था। सच कह रहा हूं उसके बाद 2 दिन तक मैंने खाने की तरफ देखा तक नहीं था। मुझे डर लग रहा था कि सामने पड़ा खाना उतना ही वाहियात ना हो, जितना तुमने बनाया था।” पहले आरव उसकी कुकिंग की तारीफ कर रहा था वहीं अब उसने उसकी बुराई में काफी सारी लाइंस बोल दी थी।
“बस करो। इतना भी बुरा नहीं था और अब मैंने कुकिंग सीख ली है।” साक्षी ने मुंह बनाकर कहा।
“जी नहीं... उतना ही बुरा था, जितना तुम सोच रही हो। जब वो यहां से चली गई थी तो कॉल करके बात नहीं सकती थी? मेरा टाइम वेस्ट कर दिया।” आरव बच्चों की तरह कंप्लेंन कर रहा था।
“तुम ना एक नंबर के सड़ू ही रहोगे। तुम्हारा नाम आरव खुराना नहीं खडूस खुराना होना चाहिए।” साक्षी ने आंखें दिखा कर कहा।
आरव ने आगे कुछ नहीं कहा और वो वहां से जाने लगा। जाते हुए लिफ्ट के पास पहुंच कर उसने तेज आवाज में कहा, “शाम को डिनर पर मिलते हैं और हां, उसे लेकर जरूर आना।”
“कभी नहीं खड़ूस खुराना...” साक्षी ने भी गुस्से वाली टोन में जवाब दिया।
आरव चाहता तो साक्षी से आयु के बारे में काफी कुछ पूछ सकता था लेकिन उसने कुछ नहीं पूछा और सीधे ही वहां से चला गया। इस बात की हैरानी साक्षी को भी हो रही थी पर अब वो आरव और आयु को दूर रखने के बारे में सोचने लगी।
जहां आरव के दिल में आयु की एक अलग ही जगह बन रही थी तो वही आयु के ख्यालात उससे बिल्कुल उल्टे थे। ऐसे में उनका एक दूसरे के सामने आना खतरनाक साबित हो सकता था।