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Chapter 4

Tied with destiny - Chapter 4

Tied with destiny

अनुष्का के अंतिम संस्कार होने के बाद अगले दिन फॉर्मेलिटी के लिए केस कोर्ट पहुंचा। ओबेरॉय फैमिली से वहां उनके लॉयर के अलावा कोई नही पहुंचा था। आरव के लॉयर मिस्टर खन्ना ने हादसे के वक्त उसके ऑफिस में होने के प्रूफ पेश कर दिए थे तो वही होटल साज की सीसीटीवी फुटेज से भी कुछ साबित नही हो पाया। कोर्ट ने इस केस को एक्सीडेंट का नाम देकर पहली सुनवाई में ही बंद कर दिया।

पहले अनुष्का के मरने की तो अब केस बंद होने की न्यूज सब जगह वायरल थी।

आयुष्का अपने घर पर रूम में बैठी थी। उसने वो न्यूज देखी तो उसके चेहरे पर गुस्सा था।

“ये तो होना ही था। तुम जैसे लोग क्राइम करते है और बच कर निकल जाते है। लेकिन इस बार नही... मैं केस रीओपन करवाउगी और अपनी बहन को इंसाफ दिला कर रहूंगी।” आयुष्का बोल ही रही थी कि उसके कानों में उसकी मॉम तारा जी की आवाज पड़ी।

“बस करो आयु... जब तुम्हे उसे बचाने की बारी आई, तब तो तुम कुछ नही पाई.. तो अब ये दिखावा किसलिए?” तारा ने सख्त लहजे में कहा।

“मॉम आप बार बार मुझे क्यों ब्लेम कर रही है? आप ऐसे बिहेव कर रही है जैसे मैंने अनु को टेरेस से धक्का दिया हो।” आयु ने चिढ़कर कहा।

उसकी बात सुनकर तारा ने सिर हिलाया। उनके हाथ में खाना था। खाने की ट्रे को बेड साइड पर रखने में बाद वो बोली, “खाना खा लेना।” कहकर वो जाने लगी। दरवाजे के पास जाकर तारा जी रुकी और आयु की तरफ देखकर नम आंखों से कहा, “तुमने उसे नही धकेला होगा... पर तुम उसे नही बचा पाई। इसके लिए मैं कभी तुम्हे माफ नही करूंगी आयु।”

उनकी बात सुनकर आयु की आंखों से आंसू लुढ़क गए। “आप तो क्या मॉम, मैं भी खुद को माफ नही कर पाऊंगी। जिस दिन मैं अनु के कातिल को जेल के पीछे पहुंचा दूंगी, उस दिन हक से आपसे माफी मांगने आऊंगी।”

आयुष्का ने अपना मोबाइल उठाया। उसने किसी का कांटेक्ट नंबर निकाला और उसे देख कर कहा, “आई वंडर कि तुम अब तक आगे क्यों नहीं आए हो? ऐसे टाइम में तुम ही हो, जो मेरी हेल्प कर सकते हो। मुझे तुमसे मिलना ही होगा।”

कांटेक्ट लिस्ट में मौजूद नंबर को आयुष्का ने कुछ देर देखा और फिर उस पर कॉल किया। “मुझे तुमसे मिलना है... आज ही।” कॉल रिसीव होते ही आयुष्का तुरंत बोली।

“पर मैं तुमसे नहीं मिलना चाहता। आगे से मुझे कॉल मत करना।” सामने से एक लड़के की आवाज आई। वो अपनी बात कह कर कॉल कट करने वाला ही था कि आयु तुरंत जल्दी से बोली, “रात को डिनर पर मिलते हैं।”

लड़के ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और कॉल कर कर दिया। उसके कॉल कट करने के बाद आयुष्का ने अपने मोबाइल में एक इमेज निकाली। उसमें अनुष्का किसी लड़के के साथ थी। दोनों साथ में खुश नजर आ रहे थे।

“तुम दोनों के रिलेशनशिप हाइड करने का कारण मुझे समझ आता है पर उसकी मौत के बाद भी तुम चुप कैसे रह सकते हो मंथन आहूजा। यू हैव टू आंसर मी... सिर्फ तुम ही हो जो आरव खुराना से टक्कर लेने की हिम्मत रखता है। तुम्हें मेरी हेल्प करनी ही होगी।”

आयुष्का जल्दी से तैयार हुई और अपना बैग लेकर मंथन से मिलने के लिए निकल गई।

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जब तक अनुष्का और आरव की न्यूज़ ज्यादा चर्चा में थी, तब तक आरव अपने घर नहीं गया था। उसने सभी न्यूज़ चैनल्स और सोशल नेटवर्किंग साइट्स से अपनी वीडियो और नाम हटवा दिया था तो वहीं अब अनुष्का का केस भी बंद हो चुका था। आरव की तरफ से चीजें क्लियर होने के बाद उसे किसी बात का डर नहीं था।

रात के लगभग 9 बजे के करीब आरव कबीर के साथ घर पहुंचा। वो दोनों घर आए, तब लिविंग रूम में अंधेरा था और टीवी ऑन था।

टीवी स्क्रीन पर यूट्यूब चल रहा था। वो किसी होटल रूम की क्लिप थी, जहां आरव एक लड़की के साथ होटल रूम में गया था। उसी की क्लिप वायरल हो चुकी थी।

“अब ये क्या नया सियापा है?” कबीर ने आरव से धीमी आवाज में पूछा। “आपने मुझे इसके बारे में क्यों नहीं बताया।”

आरव उसकी बात का कोई जवाब देता उस से पहले लिविंग रूम की लाइट्स ऑन हो गई। आरव और कबीर ने देखा सामने आरव की दादी गौरवी जी खड़ी थी।

गौरवी जी लगभग 75 साल की थी। वो दिखने में अपनी उम्र से लगभग 10 साल छोटी लगती थी। उन्होंने डिजाइनर नाइट सूट पहना था। उनके ब्राउन और ब्लैक मिक्स कलर्ड हेयर कंधे से थोड़े नीचे तक के थे।

“व्हाट इज दिस आरव?” गौरवी जी ने गुस्से में कहा।

“आ... आई डोंट नो दादी... मैं बस वहां मीटिंग के लिए गया था।” आरव उनके पास जाते हुए बोला।

गौरवी जी को मनाने के लिए आरव ने उन्हें हग कर लिया तो वहीं उन्हें साथ देकर कबीर ने बड़बड़ा कर कहा, “कौन सोच सकता है कि आरव खुराना जैसा रफ एंड टफ इंसान अपनी दादी से इतना डरता है।”

“मुझे अच्छे से पता है तुम्हारी वहां कौन सी मीटिंग हो रही थी। आए दिन मुझे इस तरह के वीडियोस देखने को मिल जाते हैं। तुम्हारी वजह से किटी पार्टी की लेडीस मुझे मैसेज करके उल्टी-सीधी बातें सुनाती है।” गौरवी जी ने मुंह बनाकर कहा।

“हां तो आप उन्हें बुलाते ही क्यों है हमारे घर पर? अगली बार जब भी वो आए, मुझे कॉल कर दीजिएगा। मैं एक एक से निपट लूंगा।” आरव ने जवाब दिया।

“मुझे अच्छे से पता है तुम कैसे निपटोगे। वैसे भी तुम्हारे डर से कोई भी यहां आना नहीं चाहता, ऊपर से जो आ रहे हैं उन्हें भी तुम भगाना चाहते हो। मुझे कुछ नहीं सुनना। मुझे लोगों की गॉसिप और इन बेफिजूल के विडियोज से छुटकारा चाहिए।” गौरवी जी ने सख्त आवाज में कहा।

आरव ने उनकी बात पर हां में सिर हिलाया और फिर कबीर की तरफ देख कर कहा, “कबीर, ऐसा करो घर के वाईफाई कनेक्शन कट करवा दो। हम दोनों और हाउस हेल्पिंग स्टाफ के अलावा अगर कोई यहां पर कदम भी रखे तो...”

आरव बोल रहा था तभी गौरवी जी ने उसकी बात के बीच में कहा, “मुझे ऐसे भी छुटकारा नहीं चाहिए कि तुम सब का आना जाना ही बंद कर दो। या तो तुम कुछ करो या फिर मैं कुछ करूंगी।”

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“हम दोनों को ही कुछ नहीं करना है दादी, चलिए डिनर करते हैं। आई एम हंगरी।” आरव ने बात को टालने के लिए कहा। वो गौरवी जी का हाथ पकड़कर उन्हें डाइनिंग टेबल के पास ले जाने लगा।

कबीर भी उनके पीछे-पीछे आ रहा था। तभी उसकी नजर टीवी स्क्रीन पर पड़ी। कुछ देर उसे देखने के बाद कबीर ने फिर उसे बंद कर दिया।

वीडियो देखने के बाद कबीर ने अपने मन में कहा, “ऐसा कैसे हो सकता है कि इस तरह का कोई वीडियो वायरल हो और आरव सर को पता ही ना चले।”

उसे कुछ समझ नहीं आया तो वो भी उनके साथ डाइनिंग टेबल पर चला गया। गौरवी जी कबीर को अपने पोते की तरह ही मानती थी। वो भी उनके साथ डिनर ले रहा था।

“तुम कब इन हरकतों को बंद करोगे? तुम्हारी इन्हीं हरकतों की वजह से आज कल तो रिश्ते भी आने बंद हो गए हैं।” गौरवी जी चेयर पर बैठते हुए बोली।

“व्हाट दादी? मैंने कोई ऐसी वैसी हरकत नहीं की। आप चाहे तो मेरा मेडिकल टेस्ट करवा सकती है आई एम स्टिल वर्जिन...” आरव ने खाते हुए कहा। उसकी बात सुनकर कबीर और गौरवी जी उसकी तरफ आंखें फाड़ कर देख रहे थे।

“मुझे कोई टेस्ट वेस्ट नहीं करवाना और ना ही मेरी इतनी हिम्मत है कि मैं रोज रोज तुमसे बहस कर सकूं। आई वांट कि मैं मरने से पहले तुम्हारी शादी होते देखूं। कम से कम मेरी...” गौरवी जी बोलते हुए रुक गई क्योंकि आरव उनकी तरफ सर्द निगाहों से देख रहा था। उसने खाना खाना भी बंद कर दिया था।

उसके देखने के तरीके से गौरवी जी समझ गई थी कि हर बार की तरह आरव को उनके इस तरह के बात करने पर गुस्सा आ रहा था। उन्होंने बात को बदलते हुए कहा, “अच्छा ठीक है। नहीं कहूंगी आगे से, पर तू मेरी इतनी सी विश पूरी नहीं कर सकता क्या? मुझे इस घर में और भी मेंबर चाहिए।”

आरव ने अपनी खाने की प्लेट उठाई और कमरे की तरफ जाने लगा। उसने पीछे बिना देखे तेज आवाज में कहा, “कबीर, घर के पीछे का हिस्सा रेंट के लिए अवेलेबल करवा दो। दादी को इस घर में और भी लोग चाहिए।”

आरव अपना खाना लेकर कमरे में चला गया तो वही कबीर और गौरवी जी एक दूसरे की तरफ देख रहे थे।

“वो फिर मुझसे नाराज हो गया।” गौरवी जी ने कबीर की तरफ देख कर कहा।

“हां तो आप बार बात पर मरने की बात क्यों करती हो? सिर्फ आप ही हो, जिनके सामने सर थोड़ा सॉफ्ट हार्टेड हो जाते हैं। आप उन्हें लड़कियों को लेकर भी कुछ मत कहा कीजिए। आप जानते हैं ना वह...”

“वो औरतों से नफरत करता है। मुझसे बेहतर मेरे आरव को कौन जान सकता है। उसकी नफरत की वजह कौन है, ये तुमसे भी नही छिपा है। भगवान उस मनहूस औरत को कभी खुशियां नही देंगे, जिसने मेरे आरव को अकेला छोड़ा।” गौरवी जी ने उसकी बात काट कर कहा। उन्हें गुस्सा आ रहा था तो कबीर ने उन्हें पानी का ग्लास पकड़ाया।

गौरवी जी चेहरे पर परेशानी के भाव थे और वो कबीर को वहीं पर छोड़ कर चली गई।

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