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Chapter 14

N - Chapter 14

Superme Dragon Yoddha

अविनाश ने दूर क्षितिज की ओर देखा, जैसे उसे वह दिन याद आ रहा हो जब उसने पहली बार राजपूत परिवार की मुख्य हवेली में कदम रखा था।

तब वह एक भोला लड़का था, बड़े सपनों से भरा दुनिया देखने और जीतने के सपनों से।

लेकिन बाद में ज़िंदगी की कठोर सच्चाइयाँ, बचपन की प्रेमिका का धोखा, और दूसरों की तिरस्कार भरी हँसी इन सबने उसे तेज़ी से बड़ा कर दिया।

वह कितना चाहता था कि एक दिन वह पहाड़ की चोटी पर खड़ा हो, उन लोगों को ज़ोरदार तमाचा जड़े जिन्होंने कभी उसे तुच्छ समझा था—उन्हें यह दिखाने के लिए कि जिनको वे चींटी समझते थे, वही एक दिन उनका सम्मान पाने पर मजबूर कर सकते हैं।

इस बार, वह किसी भी क़ीमत पर हार नहीं सकता था!

“अब जब मैं मेरिडियन ओपनिंग रियल्म के आठवें स्तर तक पहुँच चुका हूँ, तो अगर राघव से सामना भी हुआ, तो मैं उससे लड़ सकता हूँ!”

“राहुल , राघव —बस इंतज़ार करो!”

अविनाश ने मुट्ठियाँ भींच लीं।

उधर, बहुत दूर स्थित राजपूत परिवार में— राहुल और राघव आँगन में बैठे थे। राहुल का चेहरा पीला पड़ा था। उस दिन अविनाश की बेरुखी याद कर वह ग़ुस्से से बोली,

“भाई यी, वह निकम्मा अविनाश मुझे इस तरह नज़रअंदाज़ करने की हिम्मत कैसे कर सकता है! कल तुम ज़रूर मेरा बदला लेना!”

“फ़िक्र मत करो! अगर वह मासिक परीक्षा में आने की हिम्मत करेगा, तो मैं उसे अपने हाथों से अपाहिज बना दूँगा!”

राघव ने ठंडी मुस्कान के साथ कहा। उसकी नज़रों में अविनाश पहले ही एक मरा हुआ इंसान था।

वह रात—कई लोगों के लिए—नींद से ख़ाली रहने वाली थी। और सबके इंतज़ार के बीच, अगली सुबह सूरज फिर से इस धरती पर उगा।

सब लोग जल्दी उठे, नहाए-धोए, सजे-धजे—क्योंकि सब जानते थे कि आज महीने का सबसे अहम दिन था।

मासिक परीक्षा का दिन।

सुबह होते ही राजपूत परिवार में तैयारियाँ शुरू हो गईं। जो परिवारजन बाहर साधना कर रहे थे, वे भी लौट आए, क्योंकि मासिक परीक्षा उनके लिए महीने का सबसे महत्वपूर्ण दिन होती थी।

मासिक परीक्षा मुख्य रूप से बाहरी निवास क्षेत्र में आयोजित की जाती थी। इसका उद्देश्य परिवार के सबसे प्रतिभाशाली सदस्यों का चयन करना था। केवल वही लोग, जो इस परीक्षा में सफल होते, मुख्य राजपूत परिवार के निवास में रहकर आगे साधना करने और भरपूर संसाधन पाने के योग्य होते।

जो लोग मासिक परीक्षा में अंतिम सौ स्थानों में आते, उन्हें उनके मूल छोटे कस्बों में वापस भेज दिया जाता—और उनका जीवन साधारणता में ही बीत जाता।

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अविनाश इस दिन के लिए पूरे एक महीने से तैयारी कर रहा था।

वह युद्ध-कला मैदान पहुँचा। जो जगह आमतौर पर काफ़ी खुली लगती थी, आज कुछ भीड़भाड़ वाली प्रतीत हो रही थी।

राजपूत परिवार के सभी सदस्य उत्साह से भरे हुए थे और परीक्षा शुरू होने का इंतज़ार कर रहे थे।

तभी एक जगह से आती बातचीत उसके कानों में पड़ी।

“अरे! सुना तुमने? कहते हैं कि ब्लड डेमन कामदेव मारा गया!”

“क्या? सच में?“बिल्कुल! सुना है वह ट्रू युआन रियल्म के तीसरे स्तर पर था। न जाने किस महान विशेषज्ञ ने उसे मार गिराया होगा—इतना निर्दयी आदमी था!”

“हाँ! अगर कभी उस विशेषज्ञ से मिलने का मौका मिला, तो वह तो ज़िंदगी की सबसे बड़ी किस्मत होगी!”

“सही कहा! मैं तो उसी को अपना लक्ष्य बनाऊँगा और एक अद्वितीय योद्धा बनूँगा!”

उनकी बातें सुनकर अविनाश हँस पड़ा।

“हूँ?”उसकी हँसी सुनते ही सबने ग़ुस्से से पीछे मुड़कर देखा। जब उन्होंने देखा कि हँसने वाला अविनाश है, तो उनके चेहरों पर उपहास उभर आया।

“अरे कचरा, तू हँस किस बात पर रहा है?”

“सिर्फ़ इसलिए कि तूने नीरज को हरा दिया, खुद को बड़ा मत समझ। बता दें—बाहरी निवास में सातवें नंबर के व्यक्ति को हराना कोई बड़ी बात नहीं है!”

अविनाश ने सबकी हँसी उड़ाती नज़रों को देखकर शांत स्वर में कहा,

“अगर इस बार मैं सिर्फ़ नीरज को हराने तक सीमित नहीं रहूँगा— मैं मासिक परीक्षा में पहला स्थान भी हासिल करूँगा!”

यह सुनते ही सब लोग सन्न रह गए, जैसे उन्होंने किसी पागल की बात सुन ली हो।

“हाहाहाहा…”राजपूत परिवार के कई शीर्ष रैंक वाले लोग ज़ोर-ज़ोर से हँस पड़े, मानो दुनिया का सबसे मज़ेदार चुटकुला सुन लिया हो।

“अविनाश , लगता है हाल की थोड़ी-सी सफलता ने तुझे अपनी औक़ात ही भुला दी है!”

“इतना ही ताक़तवर है, तो यह भी कह दे कि ब्लड डेमन कामदेव को तूने ही मारा था—शायद तब हम मान लें…”

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“हाहाहा! ऐसा कैसे हो सकता है!” यह कहकर सब ठहाके लगाने लगे। उनके लिए अविनाश बस एक पागल था।

अविनाश ने सिर हिलाया और वहाँ से हट गया।

आजकल सच बोलने पर भी कोई भरोसा क्यों नहीं करता? इसी बीच, राजपूत परिवार के कई बड़े व्यक्ति ऊँचे मंच पर आ पहुँचे।

“वह क्या राघव हैं—राजपूत परिवार के मुखिया?” मंच के बीच खड़े उस अधेड़ व्यक्ति को देखकर अविनाश ने मन ही मन कहा।

तभी दूर से कई और शक्तिशाली लोग आए—जिनमें कई बड़े कुलों के प्रतिष्ठित व्यक्ति भी शामिल थे।

“अरे!” अचानक अविनाश की नज़र एक युवती पर ठहर गई। वह बैंगनी पोशाक में थी, और उसकी चमकीली आँखें उसकी ओर मुस्कुरा रही थीं।

“अनवी !” उसे उम्मीद नहीं थी कि वह भी यहाँ आएगी!

“अविनाश , मैंने बड़ी मुश्किल से पिताजी से अनुमति ली है। तुम्हें पूरी कोशिश करनी होगी!”

अनवी ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।“मैं अंत में ऊँचे मंच पर तुम्हारा इंतज़ार करूँगी!” अविनाश कुछ कह पाता, उससे पहले ही अनवी मुड़कर चली गई।

उन दोनों की यह झलक तुरंत सबका ध्यान खींच ले गई—आख़िर शहर-प्रमुख की बेटी सबकी देवी जो थी।

लेकिन किसी को उनकी बातचीत का असली मतलब नहीं पता था, इसलिए लोग तरह-तरह की अटकलें लगाने लगे।

युद्ध-कला मैदान के बीचोंबीच, राघव और राहुल ने भी यह दृश्य देखा और दोनों की भौंहें तन गईं।

“वह शहर-प्रमुख की बेटी को कैसे जानता है?”

राहुल का चेहरा असहज हो गया। राज काउंटी की सबसे सुंदर स्त्री का एक निकम्मे अविनाश से कोई संबंध हो—यह बात उसे बिल्कुल स्वीकार नहीं थी।

“हेहे! चिंता मत करो।” पास खड़ा राघव ठंडे भाव से मुस्कुराया।

“तुम्हारा मतलब?” राहुल ने उलझन से पूछा।

“सुना है कि शहर-प्रमुख युन इन दिनों अपनी छोटी राजकुमारी के लिए एक निजी अंगरक्षक चुन रहे हैं।”

“सब जानते हैं कि अनवी एक साधारण लड़की है—जो साधना नहीं कर सकती। “लगता है अविनाश ऊँचे रिश्ते बनाने के चक्कर में खुद ही आगे कूद पड़ा है।”

“और अभी अनवी का आना—असल में उस पर ठंडा पानी डालने जैसा था।” राघव ऐसे बोल रहा था, मानो उसने यह सब अपनी आँखों से देखा हो।

यह सुनकर राहुल ने राहत की साँस ली और फिर ठंडी मुस्कान के साथ सिर हिलाया। क्या यह निकम्मा सच में इतना गिर चुका है? आख़िरकार, वे दोनों अलग-अलग दुनिया के लोग थे।

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