Dangerous obsession of love - Chapter 2
Dangerous obsession of loveआँशी ग्राउंड के बैक डोर पर बेहोश पड़ी थी। अर्जुन उसे ढूंढते हुए उस तरफ आया। उसने आँशी को बेहोश देखा तो उसे होश में लाने की कोशिश करने लगा।
अर्जुन ने आँशी के चेहरे पर पानी छिड़क कर कहा, “आँशी.. आँशी उठो...”
पानी के छींटे गिरने से आँशी ने अपनी आंखें मिचमिचाई। उसने आंखें खोली तो सामने अर्जुन था, जो पानी डालकर उसे उठाने की कोशिश कर रहा था।
“मैं जिंदा हूं ना?” आँशी खड़े होते हुए बोली।
“नहीं.. तुम मर चुकी हो और मैं यमराज हूं।” अर्जुन ने मजाकिया तरीके से कहा। “ऑफ कोर्स तुम जिंदा हो। लेकिन तुम यहां फेयर के पिछले दरवाजे के पास कैसे पहुंची?”
अर्जुन के पूछने पर आँशी याद करने की कोशिश करने लगी। “मुझे याद नहीं आ रहा लेकिन एक आदमी। वो मास्क वाला आदमी... वो मुझे गोद में उठाकर बाहर लाया था।” आँशी खोए हुए स्वर में बोली।
“कौन सा मास्क वाला आदमी?” अर्जुन ने पूछा।
“वही जो लंबा सा था, उसने ब्लैक कलर का सूट पहना था और। और उसके परफ्यूम की स्मेल कमाल की थी।” आँशी उसके बारे में याद करने की कोशिश कर रही थी।
“अच्छा उसके बारे में बाद में सोच लेना। दादी के बार-बार कॉल्स आ रहे हैं। जब से उन्हें यहां बॉम्ब की न्यूज़ का पता चला है, तब से वो बहुत परेशान हो रही है।” अर्जुन ने बताया।
“डैड को तो इस बारे में कुछ पता नहीं चला ना?”आँशी ने परेशान होकर पूछा।
“पता लग कर भी क्या हो जाएगा? उनके हिसाब से तू लंदन में है।” अर्जुन ने मुंह बनाकर जवाब दिया, जिस पर आँशी हंस दी।
उसके बाद अर्जुन पार्किंग एरिया से गाड़ी निकालने चला गया जबकि आँशी की नजरें अभी भी उस आदमी को ढूंढ रही थी, जिसने उसकी जान बचाई थी।
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एक बहुमंजिला इमारत, जिसके ऊपर बड़े बड़े अक्षरों में आर्टिस्टिक लिखा हुआ था, वहां के मीटिंग रूम में वो मास्क वाला आदमी और उसकी टीम मौजूद थी।
वो सब लोग अब बिना किसी मास्क के थे।
“थैंक गॉड, टाइम पर सभी बॉम्ब्स को डिफ्यूज कर दिया गया वरना उस लड़की ने शोर शराबा करके सारा काम ही बिगाड़ दिया था।” एक टीम मेंबर ने कहा।
उस आदमी ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। तभी वहां एक लड़की दौड़ते हुए आई। उसने बिल्कुल टाइट पैंट और ऊपर इन करके लूज़ शर्ट पहन रखा था। वो हाइट में लंबी और पतली थी और किसी मॉडल की तरह लग रही थी। उसके बाल गोल्डन ब्लैक हाइलाइटेड थे, जो कंधे से थोड़े ही लंबे थे।
“आर यू ऑलराइट अमन? तुम लोगों ने मुझे बताना तक जरूरी नहीं समझा।” वो उसके गले लग कर बोली।
“आई एम फाइन लवी। और सब कुछ बहुत जल्दबाजी में हुआ था इसलिए तुम्हें बुलाने का मौका नहीं मिला।” अमन ने उसे खुद से दूर किया और कहा, “वक्त रहते सब कुछ संभाल लिया गया।”
“सही कहा अमन सर ने। वक्त रहते सब कुछ संभाल लिया गया लावण्या मैम, वरना उस चिल्लाने वाली लड़की ने तो सारे मिशन का कबाड़ा कर दिया था।” उनमें से एक लड़का बोला।
“चिल्लाने वाली लड़की? कौन चिल्लाने वाली लड़की?” लावण्या ने अमन की तरफ देखकर पूछा।
“हां थी एक लड़की, जो अपनी तरफ से सब की जान बचाने की कोशिश कर रही थी। उसने वहां पर बॉम्ब देख लिया था और हंगामा मचा दिया था, जिससे अफरातफरी मच गई।” अमन ने जवाब दिया।
उसकी बात सुनकर लावण्या ने अपनी आंखें घुमा कर कहा, “अक्सर लोग बहादुरी दिखाने के चक्कर में बेवकूफियां करते हैं और हम सीक्रेट एजेंट्स की मुश्किलें बढ़ा देते हैं।”
“लेकिन वो नहीं जानती थी ना कि वहां पर कोई सीक्रेट एजेंट मौजूद है।” टीम में से एक लड़के ने आँशी के सपोर्ट में कहा।
लावण्या उसकी तरफ घूर कर देखने लगी। “उसकी इस नेक दिली के चक्कर में अगर वहां मौजूद लोगों को कुछ हो जाता तो? अफरा तफरी की वजह से हमारी टीम मेंबर्स की जान भी जा सकती थी।” लावण्या ने हल्के गुस्से में कहा।
“ओके बस भी करो लवी....“ अमन ने बीच में बोलकर लावण्या को शांत कराया, “सिचुएशन अंडर कंट्रोल है। जो नहीं हुआ उसके बारे में सोच कर क्या फायदा....गाइज अब तुम लोग यहां से जल्दी निकलो, सर को बाकी की अपडेट कर देना।”
“हां ये आर्टिस्टिक्स का ऑफिस है ना कि कोई सीक्रेट एजेंट्स की मीटिंग करने की जगह। इट वुड भी बेटर नेक्स्ट टाइम तुम लोग अपनी मीटिंग यहां ना करो।” लावण्या ने कहा।
लावण्या की बात सुनकर बाकी के टीम मेंबर वहां से खड़े होकर जाने लगे। उनमें से एक लड़का बड़बड़ा कर बोली, “हां जैसे हमें पता ही नहीं कि ये आर्टिस्टिक का ऑफिस है और हमारे बॉस एक सीक्रेट एजेंट होने के साथ-साथ इस कंपनी के मालिक भी हैं....उनका तो समझ आता है लेकिन ये लावण्या मैम उनके साथ क्यों चिपकी रहती है?”
लावण्या ने उसकी बात सुन ली थी लेकिन उसने कोई रिस्पांस नहीं किया। उनके जाने के बाद उसने अमन की तरफ देखा और फिर से गले लग गई।
“तुम्हें मुझे बता देना चाहिए था। मैं परेशान हो गई थी।” लावण्या परेशान स्वर में बोली।
“मैंने कहा ना लवी, सब कुछ हैंडल कर लिया गया है। बाकी तुम इन सब की बातों पर ध्यान मत दो। हम सिक्रेटली कोई भी काम करें लेकिन लोगों के सामने, मैं आर्टिस्टिक का मालिक अमन कपूर हूं और तुम मेरी मैनेजर लावण्या बजाज।” अमन ने उसके बालों में हाथ फिरा कर कहा।
“और मुझे लावण्या बजाज से मिसेस लावण्या कपूर बनने का वेट है। उसके बाद एक-एक को देख लूंगी।” लावण्या ने कहा।
अमन ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी। एक दूसरे को गुड नाइट बोलने के बाद दोनों अपने अपने घर को जा चुके थे।
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दूसरी तरफ से आँशी और अर्जुन घर पर पहुंचे। उसे देख कर उसकी दादी जल्दी से व्हीलचेयर चलाती हुई उसके पास आई।
“आँशी, मेरी बच्ची, तू ठीक तो है?” वो भारी आवाज में बोली। आँशी उनके पास बैठी और उनका हाथ पकड़ कर कहा, “हां दादी, मुझे कुछ नहीं हुआ। आपको तो अपनी पोती पर प्राउड होना चाहिए कि मैंने वहां पर इतने लोगों की जान बचाई।”
“ये कब हुआ?” आँशी की बात सुनकर अर्जुन ने बड़बड़ाकर कहा।
“क्या सच में?” आँशी की दादी हैरानी से बोली।
“हां सच में दादी। आपको पता है मैंने वहां पर एक आदमी को पकड़ा, जिसके पास में एक बड़ा सा बैग था। पता है उसने उसके अंदर बहुत सारे बॉम्ब्स डाल रखे थे। वो तो मुझसे छूटकर भाग निकला लेकिन मैंने वहां पर जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया, जिससे लोग अपनी जान बचाकर वहां से बाहर भागने लगे। उनमें से कुछ लोगों को तो मैंने खुद बाहर निकाला था। उनमें से एक आदमी सुन नहीं सकता था। मैंने दादी.... आपकी इस पोती ने अपनी जान जोखिम में डालकर उस लड़के को बचाने के लिए अंदर गई।” आँशी उन्हें अच्छी खासी एक लंबी चौड़ी कहानी सुना रही थी। वहां की पूरी कहानी बताते वक्त आँशी उस आदमी की यादों में खो गई, जिसने उसे बचाकर बाहर निकाला था।
“हाय मैं मर जावा। फिर क्या हुआ?“ उसकी दादी प्रीतो ने पूछा जो कि बड़ी ही गौर से उसकी बातें सुन रही थी।
दादी की आवाज सुनकर उसका ध्यान टूटा और उसने आगे बताते हुए कहा, “वो तो कोई कमजोर सा हल्का-फुल्का नाजुक सा आदमी था। आप यकीन नहीं करेंगी बॉम्ब देखकर वो तो बेचारा बेहोश हो गया था। फिर मैंने उसे अपने नाजुक हाथों से उठाया और बाहर लेकर आई।“
“बहुत अच्छा किया।” आँशी की दादी ने उसकी बलैया ली।
आँशी की कहानी का ये वर्जन सुनकर अर्जुन उसकी तरफ घूर कर देख रहा था।
“अच्छा दादी, इन सब को छोड़िए, वहां पर इतनी भगदड़ मच गई थी कि कुछ खाने का मौका ही नहीं मिला था। खाने में क्या बना है?”
“अच्छा तुम्हें भूख भी लगी है। मुझे लगा इतनी लंबी-लंबी छोड़ने के बाद तुम्हारा पेट भर गया होगा।” अर्जुन ने मुंह बनाकर कहा।
“ये ऐसे ही बकवास कर रहा है दादी, आप इसकी बात पर ध्यान मत दो। खाने में क्या है?” आँशी ने अर्जुन की बात को घुमा दिया।
“खाने में तो कुछ नहीं है। तुम लोग बाहर घूमने गए थे तो मुझे लगा कि खाना खाकर ही आओगे। शांति आई थी खाना बनाने के लिए, सिर्फ मेरे लिए बना कर चली गई।” दादी ने जवाब दिया।
“कोई बात नहीं दादी। ये अर्जुन है ना।” बोलते हुए आँशी अर्जुन की तरफ मुड़ी और कहा, “दुनिया का बड़ा सा बड़ा सैफ फेल है दादी, अर्जुन इतनी अच्छी मैगी बनाता है।”
“ये ना झूठी तारीफें करने की कोई जरूरत नहीं है। जा रहा हूं किचन में। प्रीतो दादी, मैं आपकी फ्रेंड का पोता हूं लेकिन आप की पोती ने मुझे अपना पर्सनल नौकर बना कर छोड़ दिया है।” कहकर अर्जुन किचन में चला गया।
“हां तो क्या हुआ? तुम भी तो हमारे घर पर फ्री में रह रहे हो। हमने तो कभी नहीं कहा कि लाओ अर्जुन, महीने का किराया दो। देखा दादी आपने, दोस्त होने के नाते ये मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकता।“ आँशी पीछे से चिल्ला कर बोली।
उन दोनों की नोकझोंक देखकर प्रीतो जी मुस्कुरा दी।
“अच्छा ठीक है बाबा... आ रही हूं हेल्प करने..“ बोलते हुए आँशी भी अर्जुन के पीछे चली गई।
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आँशी की तो अलग ही कहानी चल रही है। वैसे काफी लंबी लंबी छोड़ी है उसने... पढ़कर कमेंट जरुर करना।