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Chapter 12

Dangerous obsession of love - Chapter 12

Dangerous obsession of love

आंशी अर्जुन के ऑफिस आई हुई थी। ऑफिस टाइम होने की वजह से अर्जुन बार-बार आंशी को वहां से जाने के लिए कह रहा था लेकिन उसके बावजूद आंशी जबरदस्ती वहां पर रुकी हुई थी।

“मिल गया आईडिया।” आंशी जोर से चिल्ला कर बोली। इससे सबका ध्यान उसकी तरफ खिंच गया।

“शशश्श्शश।” अर्जुन ने उसे चुप कराया। “तू अपने आइडियाज घर पर जाकर डिस्कस करना। फिलहाल के लिए यहां से चली जा मेरी मां। वरना तेरे साथ-साथ मुझे भी धक्के मार के यहां से बाहर निकाल देंगे।”

“अच्छा अच्छा ठीक है, जा रही हूं। इसमें इतना सेंटी होने जैसा कुछ नहीं है। लेकिन मेरा प्लान तो सुन लो।” आंशी ने बच्चो सा मुंह बनाकर कहा।

“मुझे अभी कुछ नहीं सुनना। तुम अभी के अभी घर जा रही हो।” अर्जुन ने थोड़ा स्ट्रिक्टली कहा।

“ठीक है अर्जुन लूथरा। अब तो मैं तुम्हें कुछ बताने वाली भी नहीं हूं।” आंशी ने मुंह बनाकर कहा और वहां से जाने लगी।

अर्जुन ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। आंशी के जोर-जोर से बात करने की वजह से सब का ध्यान उन्हीं की तरफ था।

“आप लोग अपने काम पर ध्यान देंगे तो बेहतर होगा।” अर्जुन ने चिल्लाकर कहा और वापस अपने क्यूबिकल में आ गया।

________

अर्जुन के ऑफिस से बाहर निकलने के बाद आंशी रोड पर चल रही थी। अर्जुन ने उसका प्लान नहीं सुना था इस वजह से वो काफी गुस्सा थी।

वो सड़क पर चलते हुए खुद से बड़बड़ा कर बातें कर रही थी।

“समझता क्या है खुद को, बिना पूंछ वाला बंदर कहीं का। क्या हो जाता जो मेरा प्लान सुन लेता। अब तो ये आंशी जिंदल सब को सरप्राइज ही देगी। वैसे कुछ भी कहो आईडिया अच्छा दिया है इसने। अगर मैं भी कोई जॉब कर लूं, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट में ये लिखा हो कि मैं 2 साल या कोई भी पर्टिकुलर टाइम पीरियड से पहले नौकरी छोड़कर नहीं जा सकती तो फिर डैड कुछ नहीं कर पाएंगे।” आंशी ने खुश होकर कहा।

“व्हाव आंशी जिंदल.... इतना ब्रिलिएंट आइडिया तुम ही सोच सकती है।” आंशी ने खुश होकर खुद की पीठ थपथपाई।

वो रोड पर मजे से खुद से बातें करती हुई चल रही थी। अचानक उसे महसूस हुआ कि कोई उसका पीछा कर रहा है। आंशी ने मुड़कर देखा तो पीछे कोई नहीं था।

“लगता है खुशी के मारे अब वहम भी होने लगे हैं।” आंशी ने खुद से कहा।

जैसे ही आंशी फिर से आगे बढ़ने लगी, एक आदमी गाड़ी के पीछे से बाहर निकल कर आया और फिर से आंशी के पीछे चलने लगा। लेकिन इस बार ज्यादा सावधानी से वो उसके पीछे आ रहा था।

“हेलो रोबिन सर, उस दिन वो चिल्लाने वाली लड़की मिल गई है। कहो तो अभी बीच रास्ते में ठोक देता हूं।“ चलते वक्त वो किसी से कॉल पर बात कर रहा था।

“ये बेवकूफी भूल कर भी मत करना।” सामने से एक आदमी की भारी आवाज आई, जिसका नाम रॉबिन था। “उस दिन तो बच गया था लेकिन आज किसी ने देख लिया है, तो इससे पहले तेरा काम तमाम होगा। मौका देखकर लड़की को उठा ले। विधिक राणा खुद ही निपट लेगा। उसे ये लड़की जिंदा चाहिए।”

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“उठाने में बहुत रिस्क है। ये लड़की मुझे देखते ही पहचान लेगी और फिर से जोर जोर से चिल्लाने लग जाएगी।” उस आदमी ने जवाब दिया।

“पागल मत बन जॉनी, जितना कहा है उतना कर। लड़की को एक खरोच भी आई तो विधिक राणा तेरे शरीर पर इतने घाव करेगा। तुझे जिंदा भी नहीं छोड़ेगा और मरने भी नहीं देगा।” रॉबिन बोला।

जॉनी ने रोबिन की बात पर हामी भरी। इसी के साथ कॉल कट हो गया। वो दबे पांव आंशी के पीछे चल रहा था। आंशी अभी भीइस बात से अंजान थी कि कोई उसका पीछा कर रहा है।

“जॉब ढूंढने से पहले वैकेंसी देखनी पड़ेगी। वैकेंसी के लिए सीवी तैयार करना पड़ेगा। आई होप कि 1 दिन में सब कुछ हो जाए। एक तो खाली पेट कुछ आइडियाज भी नहीं आते। ऐसा करती हुं, पहले कुछ खा लेती हूं।” आंशी ने सोचा।

उसने अपना मोबाइल निकाल कर आसपास किसी रेस्टोरेंट को खोजा और खाना खाने के लिए चली गई। जॉनी अभी भी उसके पीछे था। वो उसके साथ रेस्टोरेंट में दाखिल हो चुका था और उसके पीछे की सीट पर बैठकर उस पर नजर बनाए हुए था।

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लावण्या अमन के कहे अनुसार विधिक राणा के बारे में पता लगाने के लिए जा चुकी थी। उसके जाने के बाद उसका काम भी अमन को संभालना पड़ रहा था।

“अभी तो लवी को गए हुए 2 घंटे भी नहीं हुए और मेरे सर में दर्द होने लगा है। थैंक गॉड तुम यहां पर हो, वरना जॉब और ऑफिस को एक साथ संभालना मेरे लिए नामुमकिन होने वाला था। तुम हर लिहाज से मेरे लिए परफेक्ट हो लवी।” अमन काम करते हुए खुद से बोला।

काम करते वक्त अमन के फोन का अलार्म बजा।

“पता ही नहीं चला कि लंच टाइम कब हो गया।” उसने फोन का अलार्म बंद किया और वहां की फाइलों को समेटकर एक तरफ रख दिया।

अमन अपने ऑफिस से बाहर आया और पास के एक रेस्टोरेंट में चला गया। रेस्टोरेंट में ज्यादा भीड़ मौजूद नहीं थी। आंशी भी उसी रेस्टोरेंट में बैठी थी।

खाना ऑर्डर करने के बाद अमन रेस्टोरेंट के वॉशरूम गया। लौटते वक्त उसने एक आदमी को कॉल पर बात करते सुना।

“मैं समझ गया सर आप क्या चाहते हैं। हमारा काम सिर्फ यहां दहशत फैलाना है। देखना आप ये काम हम इतनी परफेक्टली करेंगे कि चंडीगढ़ की आम जनता अपने घरों से बाहर निकलने से पहले दो बार सोचेगी।” वो आदमी दबी आवाज में बोला।

उसकी बात सुनते ही अमन सतर्क हो गया। “ये लोग कभी नहीं सुधरेंगे। हमारे होते हुए इस देश की जनता बाहर भी निकलेगी और सुरक्षित भी महसूस करेगी।” अमन ने सोचा और जल्दी से बेक अप टीम को कॉल किया।

अमन ने देखा कि वो आदमी वहां से निकल कर किसी टेबल पर जाकर बैठ गया, ताकि उसे आम लोगों के बीच पहचाना ना जा सके। अमन ने उसके ऊपर नजरे बनाई हुई थी।

वो रेस्टोरेंट के मैनेजर के पास जाकर बोला, “इस रेस्टोरेंट में कोई बैक डोर है?”

“जी सर लेकिन आप क्यों पूछ रहे हैं?”

अमन ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और इधर-उधर देखने लगा। उसने देखा कि वहां पर लगभग अस्सी से सौ लोग मौजूद थे।

“मुझे हल्का जुकाम है। क्या मुझे मास्क मिल सकता है?” अमन ने कहा।

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मैनेजर ने उसकी बात पर हां में सिर हिलाया और वेटर को भेजकर उसके लिए मास्क मंगवाया।

उसे थैंक्स बोलने के बाद अमन ने मास्क पहन लिया और अपनी आंखों पर गॉगल्स चढ़ा लिए। वो आदमी धीरे से उठा और बाहर चला गया।

इससे पहले कि अमन उसके पीछे जा पाता, रेस्टोरेंट के किचन में एक बड़ा धमाका हुआ। ऐसा होते ही वहां पर अफरा-तफरी मच चुकी थी।

सिलेंडर फटने की वजह से वहां पर भारी आग लग चुकी थी। वहां से लोग कैसे भी करके अपनी जान बचाकर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे।

“इसने अपना काम पहले ही कर दिया था। फायर ब्रिगेड पहुंचेगी तब तक यहां के लोग जल के मर जाएंगे।” अमन ने सोचा। उसे बहुत गुस्सा आ रहा था। कुछ ही पलों में उसके सामने इतनी बड़ी घटना हो गई और वो कुछ नहीं कर पाया।

“देखिए प्लीज, पैनिक मत होइए। हम आपको यहां से बाहर निकाल लेंगे।” अमन ने चिल्लाकर कहा।

“कैसे निकालेंगे सर यहां पर। यहां पर मेन डोर आग में झुलस रहा है और आप बाहर निकालने की बात कर रहे हैं।” एक लड़की रोते हुए बोली।

“आप हिम्मत से काम लीजिए। हम कर लेंगे।” अमन ने उससे कहा और फिर मैनेजर से चिल्लाकर पूछा, “आपने कहा था कि यहां पर बैक डोर मौजूद है। क्या इमरजेंसी में हम उसका यूज कर सकते हैं।”

“मैं नहीं जानता आप कौन है और आपने इस बारे में क्यों पूछा था। अभी इन सब का टाइम भी नहीं है लेकिन बैक डोर किचन के पिछली तरफ बनाया हुआ है। किचन के पास होने की वजह से सबसे पहले वही जल रहा होगा।” मैनेजर ने घबराई आवाज में कहा।

अमन ने इधर उधर नजर दौड़ाई। रेस्टोरेंट चारों तरफ से आग में घिर चुका था और वहां गर्मी बढ़ने लगी थी। शॉर्ट सर्किट होने की वजह से आग और भी फैल चुकी थी।

“मैं इन्हें ऐसे ही नहीं मरने दूंगा।” सोचते हुए अमन खिड़की की तरफ बढ़ा और जैसे तैसे उसका दरवाजा खोला। “क्या पानी मिल सकता है?” उसने पूछा।

“टेबल्स के अलावा और कहीं भी पानी मौजूद नहीं है।” एक व्यक्ति ने कहा।

“शुक्र मनाओ कि कुछ तो है। फिलहाल के लिए यही एक खिड़की है, जो सबसे कम जली है। प्लीज आप लोग खिड़की के पास आ जाए और अपने-अपने टेबल्स पर मौजूद पानी को ले आइए। साथ ही टेबल पर बिछे कपड़े को अपने चारों तरफ लपेट लीजिए ताकि आपकी स्किन ना जले।” अमन ने तेज आवाज में कहा।

अमन की बातों ने उन लोगों को उम्मीद की किरण दी। वो लोग जल्दी-जल्दी उसके बताए हुए इंस्ट्रक्शंस फॉलो करने लगे।

ब्लास्ट के अंदर किचन स्टाफ बुरी तरह जल चुका था, वहां मौजूद लोगों की अभी कोई खबर नहीं थी।

अमन ने वहां मौजूद लोगों की मदद से उन्हें बाहर निकाला। जॉनी ने भी आंशी के बजाय अपनी जान बचाना जरूरी समझा और वो भी वहां से निकल गया।

कुछ ही देर में वहां पर फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस दोनों ही पहुंच चुकी थी। वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका था। फायर ब्रिगेड की टीम आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी। कुछ लोग अंदर फसे लोगों का रेस्क्यू करने में भी जुट गए थे।

इन सबके बीच आंशी आग को देखकर काफी घबरा गई थी। वो कोने में अपनी टेबल के पास बेहोश पड़ी थी।

“थैंक गॉड। वक्त रहते इन लोगों को बाहर निकाल दिया गया।” अमन ने मन ही मन भगवान का शुक्रिया किया और वहां से जाने लगा।

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