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Chapter 25

Dangerous obsession of love - Chapter 25

Dangerous obsession of love

रात के 8:00 बज रहे थे। लावण्या विधिक के लिए खाना लेकर ऊपर पहुंची। ऊपर जाकर उसने देखा विधिक कहीं जाने के लिए तैयार हो रहा था। उसने डार्क स्यान कलर का सूट पहन रखा था।

“सर आप कहीं जा रहे हैं?” लावण्या ने दरवाजे पर खड़े होकर पूछा।

“मैं नहीं हम..... मैंने तुम्हें सुबह बताया था ना कि कहीं चलना है। अंदर आ जाओ।” विधिक ने उसे अंदर आने के लिए कहा।

लावण्या अंदर गई। वहां बेड पर एक शॉर्ट ड्रेस रखी हुई थी। विधिक ने वो ड्रेस उठाकर लावण्या को पकड़ाते हुए कहा, “मैं डिनर कर रहा हूं, तब तक ये ड्रेस पहन कर तैयार हो जाओ।”

“लेकिन ये ड्रेस.....” लावण्या हिचकिचाते हुए बोली।

लावण्या अपनी बात पूरी कह पाती उससे पहले विधिक बीच में बोल पड़ा, “अब ये मत कहना मैं इस तरह के कपड़े नहीं पहनती। यही किसी रूम में लड़कियों के मेकअप का सामान भी मिल जाएगा। थोड़ा बहुत मेकअप कर लेना ताकि अच्छी दिखो।”

विधिक की बात सुनकर लावण्या उसकी तरफ हैरानी से देख रही थी। उसके देखने के तरीके से वो समझ गया था कि लावण्या क्या कहना चाह रही थी।

“इतना हैरानी से मत देखो। मेरे घर में लड़कियों के मेकअप का सामान इसलिए है कि बहुत बार मेरी गर्लफ्रेंड्स यहां रुकती हैं।” विधिक ने सिर हिलाकर कहा।

“गर्लफ्रेंडस?” लावण्या ने आंखें बड़ी करके कहा।

“हां गर्लफ्रेंड्स..... मुझे जो भी लड़की पसंद आती है। मैं उसे अपने घर ले आता हूं। वो कई दिन तक मेरे साथ रहती है। जब मेरा मन भर जाता है तो वापस भेज देता हूं। अब ज्यादा सवाल मत पूछो और जल्दी से तैयार हो जाओ।” कहकर विधिक कमरे से बाहर आ गया। वो डाइनिंग टेबल पर बैठकर डिनर कर रहा था। डाइनिंग टेबल पर आते ही उसके चेहरे के भाव सख्त हो गए।

“गर्लफ्रेंड्स माय फुट... नो वन कांट बी लाइक माय बटरफ्लाई। उसी का अनयूज्ड सामान ना जाने क्यों अपने साथ लेकर घूमता हूं... इस उम्मीद में कि वो मुझे मिल जाएगा।” विधिक ने मन ही मन कहा।

वही विधिक के जाते ही लावण्या ने कमरा अंदर से बंद किया और ड्रेस चेंज करने के बजाए विधिक के कमरे को देखने लगी।

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“अमन ने इसके लिए दिव्याना को बिल्कुल सही चुना है। दिव्याना को इसे पटाना मुश्किल नहीं होगा। इसे जल्दी से किसी पर भी ट्रस्ट हो जाता है। देखो अब मुझे भी यहां अपने कमरे में छोड़कर बाहर आराम से खाना खा रहा है। अपनी इंपॉर्टेंट मीटिंग में मुझे अपने साथ ले कर जा रहा है जबकि मुझे उससे मिले अभी 1 दिन हुआ है। सोचा नहीं था ये इतना बेवकूफ निकलेगा।” लावण्या बात करते हुए इधर उधर झांक देख रही थी।

तभी लावण्या की नजर सामने लगे सीसीटीवी कैमरा पर गई। उसने जल्दी से खुद को सामान्य किया और बाथरूम में जाकर कपड़े बदलने लगी।

“यहां कैमरा लगा है, तभी ये मुझे इस कमरे में छोड़कर बाहर मजे से खाना खा रहा है। मैंने सोच भी कैसे लिया कि ये इतना बेवकूफ होगा।” लावण्या ने चिढ़कर कहा।

लावण्या ने जल्दी से कपड़े बदले और बाहर गई। विधिक अभी तक खाना खा रहा था। उसने लावण्या को घूर कर देखा और फिर कहा, “कपड़े तो ठीक लग रहे हैं।” बोलते हुए उसने एक कमरे की तरफ इशारा किया। “उस कमरे में जाओ। वहां कुछ एक्सेसरीज और मेकअप का सामान मिल जाएगा।”

लावण्या ने उसकी बात पर हामी भरी और थोड़ी देर बाद वो तैयार होकर बाहर आई।‌ विधिक उसे लेकर किसी अनजान जगह जाने के लिए निकल पड़ा। मौका पाकर लावण्या ने अपनी लोकेशन अमन और दिव्याना को सेंड कर दी थी। दूसरी तरफ दिव्याना भी विधिक राणा से मिलने के लिए तैयार थी।

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विधिक लावण्या को लेकर चंडीगढ़ के सबसे फेमस होटल मे गया। सब कुछ उसकी सोच से परे था।

वहां पहुंचते ही लावण्या ने सोचा, “मुझे लगा था ये किसी खुफिया जगह पर अपनी मीटिंग करने वाला है। ये तो मुझे लोगों की भीड़ के बीच ले आया। ये इंसान इतना मिस्टीरियस क्यों है?”

लावण्या वहां खड़ी विधिक के बारे में सोच रही थी। विधिक उसके पास आया और कहा, “तुम यहीं बैठकर मेरा इंतजार करो। मैं कुछ देर में आ जाऊंगा। अगर मुझे तुम्हारी जरूरत पड़ी तो मैं तुम्हें फोन कर दूंगा।”

“लेकिन मैं अकेले यहां कैसे?” लावण्या ने डरते हुए कहा।

“मैं यहां तुम्हें किसी डेट पर लेकर तो आया नहीं। यहां बैठकर अच्छा खाना ऑर्डर करो और खाओ। अंदर कुछ गड़बड़ हुई, तो उस वक्त तुम मेरे काम आओगी।” विधिक ने रूखे तरीके से जवाब दिया।

विधिक ने लावण्या के जवाब का इंतजार भी नहीं किया और वहां से ऊपर जाने लगा। लावण्या वहां एक टेबल पर बैठ गई और विधिक के लौटने का इंतजार कर रही थी।

इसी बीच दिव्याना वहां पहुंची। उसकी नजर लावण्या पर पड़ी तो वो उसके पास पहुंची।

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“हेलो.....” दिव्याना उसके पास जाकर बोली।

“तुम्हें यहां मेरे पास नहीं आना चाहिए था। अगर हम दोनों को किसी ने साथ देख लिया तो उन्हें शक हो जाएगा।” उसे वहां देखकर लावण्या गुस्सा हो गई।

“तुम मुझ पर चिल्ला क्यों रही हो? गुस्सा तो मुझे तुम पर होना चाहिए। तुमने मुझसे मेरा अमन छीन लिया और अब.....” दिव्याना चिढ़कर बोली।

तभी लावण्या ने उसकी बात बीच में काट कर कहा, “अपनी बकवास बंद करो। मेरा अमन? ओ रियली? ये बात तुम्हें अब याद आ रही है कि अमन तुम्हारा था। उस वक्त तुम्हारा प्यार और अपनापन कहां गया था जब तुम.....”

लावण्या की बात सुनकर दिव्याना को गुस्सा आने लगा। वो अपनी बात पूरी कर पाती उससे पहले दिव्याना वहां से चली गई।

“अब तो इसमें सच सुनने की भी हिम्मत नहीं है। तुम बिल्कुल विधिक राणा की तरह हो, उतनी ही मिस्टीरियस और अजीब..... जो अपने अंदर पता नहीं कितने राज छुपाए बैठी हैं।” लावण्या ने कहा।

लावण्या ने विधिक का इंतजार करने के बजाय ऊपर जाने का सोचा। वो अपनी टेबल से उठी और विधिक के पीछे ऊपर जाने लगी।

ऊपर काफी देर ढूंढने के बाद भी उसे विधिक नहीं मिला। उसने देखा सामने से एक वेटर आ रहा था, जिसकी सर्विंग ट्रॉली में काफी सारे खाली गिलास और वाइन की बोतल थी।

“जरूर ये मीटिंग वाले रूम से ही ये सामान लेकर आ रहा होगा। अब तो मुझे इससे ही पूछना होगा।” लावण्या तेज कदमों से चलते हुए वेटर के पास गई।

“एक्सक्यूज मी.....क्या आप बता सकते हैं कि मीटिंग कौन से रूम में हो रही हैं? मैं यहां लेट पहुंची थी, मेरे पार्टनर अंदर जा चुके हैं।” लावण्या ने उसके पास जाकर काफी पोलाइटली बात की।

“आप किसके साथ हैं?” वेटर ने पूछा।

“मैं यहां विधिक राणा के साथ आई थी।” लावण्या के उसकी जवाब देते ही वेटर ने उसे एक कार्ड पकड़ाया।

लावण्या ने देखा कार्ड पर रूम नंबर लिखा हुआ था। वेटर वहां से जा चुका था। लावण्य उस कमरे की तरफ बढ़ रही थी, तभी अचानक से किसी ने उसका मुंह बंद किया और उसे पीछे की तरफ खींच लिया।

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