Dangerous obsession of love - Chapter 9
Dangerous obsession of loveआँशी के घर में घुसते ही एक आवाज आई। “वेरी गुड आँशी जिंदल। एमबीए की कौन सी क्लासेस रात को क्लब में लगती है, जहां लेशंस के बजाय ड्रिंक सर्व की जाती है।”
जैसे ही आँशी और अर्जुन घर में घुसे उनके सामने से आवाज आई। तभी घर की लाइट ऑन हुई और प्रीतो जी व्हीलचेयर चलाते हुए उनके सामने आई।
“क्या हो, जो इस वक्त तुम्हारे पापा यहां पर मौजूद हो और वो तुम्हें इस तरह नशे की हालत में देखें? क्या ये सब करने के लिए तुम चंडीगढ़ में यहां रह रही हो?” प्रीतो जी आँशी को नशे में देखकर काफी गुस्सा थी।
“दादी वो।” आँशी ने अपनी सफाई देने के लिए मुंह खोला ही था कि प्रीतो जी फिर बोल पड़ी, “मुझे कुछ नहीं सुनना आँशी। 2 दिन बाद तुम्हारे पापा यहां आ जाएंगे। उनसे मिलकर तुम वापस लंदन जा रही हो।”
“मैं लंदन नहीं जाऊंगी।“ आँशी चिल्ला कर बोली और अपने कमरे में चली गई।
“कुछ हुआ है क्या दादी? हम जब भी आँशी से वापस लंदन जाने की बात करते हैं, वो साफ मना कर देती है। उसके चेहरे पर एक डर झलकता है।“ अर्जुन ने परेशान होकर पूछा।
आँशी का ये रवैया देख कर प्रीतो जी भी परेशान थी। “मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी अर्जुन।तुम्हें इतनी रात को अकेले आँशी को बाहर नहीं जाने देना चाहिए था। वो नशे में हैं और ऐसी हालत में उसके साथ कुछ भी हो सकता था।”
“आपकी बात भी सही है दादी लेकिन मैं अपने काम में बिजी था। आँशी बार-बार बाहर जाने की जिद कर रही थी, इसलिए मैने उसे नही रोका।” अर्जुन ने सिर झुका कर कहा।
“तुम बच्चे आखिर समझते क्यों नहीं हो कि हम बड़े तुम लोगों को किसी काम के लिए रोकते हैं, तो तुम लोगों की भलाई के लिए ही। मैं चाहती हूं कि कल तुम आँशी से खुलकर बात करो और पूछो कि वो लंदन क्यों नहीं जाना चाहती।” प्रीतो जी ने गंभीर स्वर में कहा।
“आप सही कह रही है दादी, पहले तो मुझे सब कुछ नॉर्मल लगता था। लेकिन आज कल जब भी इससे लंदन जाने की बात करो तो वो गुस्से में जोर जोर से चिल्लाने लगती हैं।” अर्जुन ने बताया।
“रात बहुत हो गई है। सुबह बात करते हैं।” प्रीतो जी ने जवाब दिया और अपनी व्हीलचेयर कमरे की तरफ बढ़ा ली। उनके जाने के बाद अर्जुन दबे पांव आँशी के कमरे में गया और मोबाइल की टॉर्च जला के आँशी की अलमारी में कुछ ढूंढने लगा।
“आँशी को डायरी लिखना बहुत पसंद है। जरूर उसने अपनी डायरी में सब कुछ लिखा होगा।” अर्जुन ने अपने मन में कहा और अलमारी में आँशी की डायरी देखने लगा।
आँशी की अलमारी में एक हिस्सा किताबे रखने के लिए बनाया गया था। उस हिस्से में आँशी की काफी सारी डायरीज पड़ी थी, जो उसने अब तक लिखी थी।
डायरी उठाने से पहले अर्जुन ने आँशी की तरफ देखा तो वो आराम से सो रही थी। फिर उसने डायरीज की डेट के हिसाब से दो-तीन डायरी उठाई और अपने कमरे में आ गया।
“आई नो आँशी तुम्हें बिल्कुल पसंद नहीं है कि कोई तुम्हारी डायरी कोई पढ़े। लेकिन तुम्हारी परेशानी का कुछ तो हल निकालना होगा।” बोलते हुए अर्जुन डायरी के पन्ने बदलने लगा।
उसने जल्दी-जल्दी डायरी के पन्ने बदले लेकिन उसे कुछ खास नजर नहीं आ रहा था। सब में उसकी नॉर्मल दिनचर्या लिखी हुई थी।
“अब मेरे पास इतना टाइम भी नहीं कि इसकी एक एक लाइन को पढ़ सकूं।” बोलते हुए अर्जुन ने दूसरी डायरी उठाई। वो उसे देखकर थोड़ा हैरान हुआ।
“इसमें ऐसा क्या लिखा हुआ हो सकता है, जो आँशी ने इसके पन्ने फाड़ दिए। इसका मतलब बात जरूर कुछ और है जो आँशी हम सब से छुपा रही हैं। कहीं वो बात उसके लंदन जाने से तो नहीं जुड़ी।” डायरी के फटे हुए पन्ने देखकर अर्जुन परेशान हो गया।
उसने जल्दी-जल्दी उन फटे हुए पन्नों की फोटोज ली और वापस जाकर उन्हें आँशी के अलमारी में रख दिया। उसके बाद वो भी सोने जा चुका था।
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अगली सुबह आँशी की मैड शांति उसके घर कमरे की सफाई कर रही थी। सामान इधर-उधर रखने की आवाज सुनकर आँशी की नींद टूटी।
“गुड मॉर्निंग शांति दीदी।” आँशी ने अंगड़ाई लेते हुए कहा।
“क्या दीदी, आपके तो मजे हैं। जब मन चाहे रात को घर पर आओ। जब मन चाहे सुबह देरी से उठो।” शांति ने सफाई करते हुए कहा।
“तो आपको किसने रोका है शांति दीदी? जब आपका मन करे तब सो जाइए। और जब आपका मन करें तब उठा कीजिए।” आँशी ने उन्नींदी आवाज में कहा।
“हो, ये मजे तो सिर्फ मां बाप के घर पर होते हैं। आपको पता है जब मेरी शादी नहीं हुई थी तो मैं भी इतने ही मजे से रहती थी। यहां आई तो पैसे की तंगी होने की वजह से ये काम करना पड़ रहा है।” शांति काम छोड़कर आँशी के बेड के पास बैठ गई।
“अच्छा शांति दीदी, आप कहां से हो?” आँशी भी उनसे बातें करने लगी।
“दीदी मैं तो महाराष्ट्र के एक गांव से हूं। शादी हो गई तो पति के साथ रहने यहां पर आ गई। देखना आपकी भी शादी होगी तो आपको भी अपना घर छोड़कर उनके घर पर रहने जाना होगा।” शांति ने कहा।
“अगर मेरी शादी हो गई तो मुझे अपने पति के घर जाना होगा। दैटस ग्रेट।” आँशी के चेहरे पर चमक थी। वो जल्दी से अपने बिस्तर से उठी और दौड़ कर बाहर आई, बाहर आकर उसने देखा दादी और अर्जुन साथ में बैठे ब्रेकफास्ट कर रहे थे।
आँशी को देखते ही प्रीतो जी ने मुंह बना कर कहा, “अर्जुन बोल दे इसे कि मुझे इससे कोई बात नहीं करनी। और हां, इसके लिए नाश्ते में शराब की बोतल मंगवा रखी है, जो फ्रीज में रखी हुई है।”
“क्या दादी, आप अब टोंट मारने पर आ गई?” आँशी उनके पास जाकर बैठ गई।
“नाराज तो मैं भी हूं इससे दादी। चलिए हम कहीं और जाकर बैठते हैं।” अर्जुन ने दादी की हां में हां मिलाई।
वो दोनों वहां से उठकर जाने लगे। उन्हें जाता देखकर आँशी अपने मन में बोली, “दादी का तो समझ आता है लेकिन ये अर्जुन मुझसे नाराज क्यों है?“
आँशी जल्दी से अपनी जगह से उठी और दौड़ कर उनके पीछे गई। “मुझे शादी करनी है।” आँशी ने हांफते हुए कहा।
“क्या?” प्रीतो जी और अर्जुन दोनों चौंकते हुए एक साथ बोले।
“लगता है दादी इसकी अभी कल रात वाली उतरी नहीं है। उठते ही बहकी बहकी बातें करने लगी है।“ अर्जुन ने आंखें तरेर कर कहा।
“अरे आप लोग मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए। दादी शांति दीदी ने बताया कि शादी के बाद वो अपने पति के घर पर रहने आ गई, अगर ऐसे मेरी भी शादी हो जाए और मैं अपने पति के घर पर रहने चली जाऊं, फिर तो पापा मुझे लंदन वापस नहीं भेज पाएंगे ना?” आँशी ने एक सांस में अपना प्लान उन्हें बता दिया था।
“तुम पागल तो नहीं हो गई हो आँशी? यहां रुकने के लिए अब तुम शादी करोगी?” अर्जुन बोला।
“इस शांति से कितनी बार कहा है कि शादी और ससुराल की बातें इस घर में मत किया करें। पता नहीं बच्ची से क्या कह दिया, जो सुबह-सुबह ऐसी फालतू बातें कर रही है।” प्रीतो जी बोली।
उन दोनों को ही आँशी का प्लान अच्छा नहीं लगा।
“मुझे तुम्हारा प्लान बिल्कुल पसंद नहीं आया। मतलब तुम यहां रुकने के लिए शादी कर लोगी? तुम बताओगी कि 2 दिन में लड़का कहां से ढूंढोगी और शादी? अगर लड़का मिल भी गया तो किसी अनजान इंसान से 2 दिन में शादी कैसे कर लोगी?” अर्जुन ने कहा।
“बात तो तुम सही कह रहे हो। दो दिन में लड़का कहां से ढूंढूंगी?” आँशी सोचते हुए बोली। “बाय द वे मुझे लड़का ढूंढने की क्या जरूरत है? ये इंडिया है। यहां ज्यादातर अरेंज मैरेज होती है। इसलिए लड़का ढूंढने की जिम्मेदारी भी घर वालों की होती है। दादी मैं कुछ नहीं जानती, मुझे पापा के यहां आने से पहले शादी करनी है तो मेरे लिए लड़का ढूंढ दीजिए।”
“ये लड़की सच में पागल हो गई है। और अपनी बातों से मुझे भी पागल कर देगी।” प्रीतो जी बड़बड़ा कर बोली और अपनी व्हीलचेयर अंदर ले जाने लगी।
“क्या तुम्हें भी मेरा प्लान पसंद नहीं आया?“ आँशी ने मुंह बनाकर अर्जुन की तरफ देखा।
“बिल्कुल भी नहीं। अब मुझे ऑफिस जाने दो। मुझे अपनी प्रेजेंटेशन देनी है, ना की शादी के लिए रिश्ते लेकर जाना हैं।” अर्जुन ने आँशी को साइड किया और वहां से अपने कमरे में लैपटॉप लाने के लिए चला गया।
आँशी वहां पर खड़े होकर सोच रही थी। अर्जुन ऑफिस जा रहा था। उसके मन में शांति की बातें बैठ गई थी।
“अब तो कुछ भी हो जाए, मैं अपने लिए 2 दिन में दूल्हा ढूंढ कर रहूंगी।” आँशी ने खुद से कहा और वहां से प्रीतो जी के पास गई।
“दादी, एक अच्छा दूल्हा ढूंढने के लिए क्या करना होता है?” आँशी उनके पास जाकर बोली।
“बेटा सबसे पहले अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ती है जो कि तुम बीच में छोड़कर यहां पर आ गई हो।“ प्रीतो जी ने मुंह बनाकर जवाब दिया।
“इनकी सुई तो हमेशा मुझे लंदन भेजने पर ही अटकी रहती हैं।“ आँशी ने धीरे से कहा और वहां से चली गई।
वो अंदर आई तो शांति सफाई कर रही थी। उसे देखकर आँशी ने सोचा, “शांति दीदी से पूछती हूं। जब ये मुझे इतना ब्रिलिएंट आइडिया दे सकती है तो आगे भी हेल्प कर ही देगी।”
आँशी मुस्कुराते हुए शांति की तरफ बढ़ी।
“क्या हुआ आँशी दीदी? कुछ चाहिए?“ शांति ने पूछा।
“अच्छा शांति दीदी, अगर अच्छा लड़का ढूंढना हो तो हमें क्या करना होता है?” आँशी ने पप्पी आइज बनाकर कहा।
“बस इतनी सी बात। मैं आपको एक एक चीज डिटेल में बता दूंगी। उसके बाद मैं आपको सुंदर सा तैयार करती हूं। फिर हम दोनों अच्छा सा फोटो सेशन करवाएंगे और आपकी फोटो लड़के वालों को भेजेंगे।“ शांति उसे सब कुछ समझाने लगी।
आँशी ने उसकी बात पर हामी भरी। शांति ने आँशी की अलमारी खोली और उसमें रखा एक यैलो और वाइट कलर का सूट निकाला।
आँशी शांति की बातें चुपचाप मान रही थी। कुछ ही देर में शांति ने उसे तैयार कर दिया। तैयार होने के बाद आँशी खुद को आईने में देख रही थी।
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