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Chapter 22

Dangerous obsession of love - Chapter 22

Dangerous obsession of love

दोपहर के 1:00 बज रहे थे। होटल में अपने घर पर मौजूद

विधिक अभी तक सो रहा था। एक फोन की घंटी से उसकी नींद टूटी।

“बोलो मेलिसा इतनी सुबह कॉल क्यों किया है?” मेलिसा का नंबर देखकर विधिक ने फोन उठा कर कहा।

“नींद से जागो विधिक राणा..... दिन की शुरुआत हुए काफी वक्त बीत चुका है। अगर ऐसे ही सोते रहोगे तो काम कब करोगे?” मेलिसा ने सारकास्टिक वे में कहा।

विधिक बिस्तर से उठ कर बैठा और मेलिसा की बात का जवाब देते हुए कहा, “तुम्हें अच्छे से पता है कि हमारा काम दिन में नहीं रात में होता है। बाकी इन सब को छोड़ो..... बताओ किस लिए कॉल किया था?”

“मिस्टर एंड्रयू आज लंदन से आ रहे हैं। रात को मीटिंग है। बस उसी का बताने के लिए कॉल किया था।” मेलिसा ने जवाब दिया।

“ठीक है, मैं पहुंच जाऊंगा।” कहकर विधिक ने कॉल कट कर दिया। वो बाथरूम में गया और अपनी जरूरी दिनचर्या निपटा कर बाहर आया।

उसने लंच के लिए नीचे वेटर को कॉल किया। “आधे घंटे में मुझे लंच पहुंचा देना। और हां आज मेरा इटेलियन खाने का मन कर रहा है।”

“जी सर आधे घंटे में इटालियन खाना आपके लिए ऊपर पहुंच जाएगा।” वेटर ने जवाब दिया।

“खाना लेकर उसी लड़की को भेजना, जो कल रात को आई थी।” विधिक बोला। वो यहां लावण्या की बात कर रहा था।

वेटर ने उसकी बात पर हामी भरी और कॉल कट कर दिया। लगभग आधे घंटे बाद लावण्या विधिक के लिए लंच लेकर ऊपर पहुंची। उसके पास वो वीडियो मौजूद था, जो कल रात डमी को जलाते वक्त अमन ने बनाया था।

उसके आते ही विधिक ने पूछा, “काम हो गया?”

लावण्या ने उसकी बात पर हामी भरी और अपने मोबाइल में मौजूद उस वीडियो को विधिक को दिखा दिया। उस वीडियो को देखने के बाद विधिक तिरछी निगाहों से लावण्या की तरफ देखने लगा।

उसने लावण्या का फोन उसे लौटा दिया। वो धीमे कदमों से चलते हुए लावण्या की तरफ बढ़ रहा था। लावण्या को इन सब से बहुत घबराहट हो रही थी और वो अपने कदमों को पीछे ले रही थी।

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“सर कुछ हुआ है क्या?” उसने बिल्कुल धीमी आवाज में पूछा।

विधिक जल्दी से लपक कर उसके पास गया और उसके दोनों हाथों को पीछे की तरफ करके पकड़ लिया। उसने अपने दूसरे हाथ से टेबल पर पड़ी छूरी उठाई और लावण्या के गर्दन पर लगा दी।

“सच सच बताओ तुम कौन हो?” विधिक ने सर्द लहजे में पूछा।

घबराहट के मारे लावण्या की जान सांसें अटक गई थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या जवाब दें। उसे लग रहा था मानो विधिक राणा ने उसकी चोरी पकड़ ली हो।

लावण्या ने उसकी बात कोई जवाब नही दिया। घबराहट के मारे उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी।

“जल्दी बताओ, तुम कौन हो?” विधिक ने फिर से चिल्लाकर पूछा।

“मेरा नाम दीप्ति है।” लावण्या ने नजरें नीची करके कहा।

विधिक लावण्या को घूरते हुए कहा, “मैंने तुमसे तुम्हारा नाम नहीं पूछा। तुमने काम को काफी प्रोफेशनली किया है और उसका वीडियो तक बना डाला। इसे देखकर साफ जाहिर है कि ये सब तुमने पहली बार नहीं किया होगा।”

“पहले मुझे भी बहुत डर लगा था। मैंने श्मशान घाट के मालिक को कुछ पैसे भी दिए थे उस लाश को जलाने के लिए..... फिर मुझे लगा कहीं आपको मेरी बात झूठी लगी और आपने मेरा यकीन नहीं किया तो..... बस यही सोच कर मैंने वो वीडियो बनाया।” लावण्या ने घबराते हुए एक झूठी कहानी विधिक के सामने रख दी।

विधिक ने उसे उसी वक्त छोड़ दिया और टेबल पर बैठकर लंच करने लगा। उसके बर्ताव की वजह से लावण्या अभी भी घबराई हुई थी। लावण्या ने विधिक की तरफ देखकर अपने मन में कहा,“ये कितना अजीब है, एक पल में तो इतना अग्रेसिव हो जाता है कि सामने वाले की जान लेने को उतारू हो जाता है और कभी एकदम नॉर्मल..... मैं अमन से बात करके जल्द ही दिव्याना को यहां भेजने का कहती हूं।” वो विधिक की तरफ देख रही थी, जो आराम से बैठकर खाना खा रहा था।

खाना खत्म होने के बाद विधिक ने लावण्या से कहा, “मुझे तुम अच्छी लगी। वेट्रेस के तौर पर तुम्हें क्या सैलरी मिलती है?”

“बीस हजार रुपए.....” लावण्या ने हिचकते हुए बताया।

“मैं तुम्हें महीने के एक लाख दूंगा और साथ में एक आदमी भी..... मैने देखा रात को तुम्हें लाश को उठाने में काफी दिक्कत हो रही थी। मैं चाहता हूं कि अब से तुम परमानेंटली मेरे लिए लाशे ठिकाने लगाने का काम करो।” विधिक ने खाते हुए कहा।

“लेकिन सर.....” लावण्या ने ना कहने के लिए अपना मुंह खोला ही था कि विधिक बीच में बोल पड़ा, “मैंने तुमसे पूछा नहीं तुम्हें बताया है। चलो अब जाओ और तुम्हें नीचे ज्यादा काम करने की जरूरत नहीं है। मैं हेड वेटर को सब समझा दूंगा। रात को फिर से तैयार रहना, तुम्हें मेरे साथ कहीं चलना होगा। ठीक 9:00 बजे डिनर लेकर ऊपर आ जाना।”

विधिक ने लावण्या को सारी बात समझा दी। वहां से नीचे आते ही लावण्या ने सबसे पहले अमन को कॉल किया।

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“लवी, मैंने तुम्हें रिस्क लेकर कॉल करने से मना किया था ना.....” फोन उठाते ही अमन ने कहा।

“जानती हूं तुम ने मना किया था लेकिन बात बहुत जरूरी थी। विधिक राणा को पहले तो मुझ पर डाउट हुआ लेकिन मैंने उसे कोई झूठी कहानी सुना दी। उसने मुझे परमानेंटली अपने लिए लाशे ठिकाने लगाने के काम पर रख लिया है।” लावण्या ने ऊपर जो भी हुआ, वो सब अमन को बता दिया।

“तो क्या एक सीक्रेट एजेंट अब एक अंडरवर्ल्ड डॉन के लिए लाश ठिकाने लगाने का काम करेगी?” अमन ने बिल्कुल धीमी आवाज में कहा।

“मुझे भी यही लगा था और मैं ना भी कहने वाली थी लेकिन उसके आगे मैं कुछ नहीं कह पाई। वो आज रात कहीं जाने वाला है, वो भी मुझे साथ लेकर। तुम बस मुझे ट्रैक करते रहना।” लावण्या ने कहा।

“ठीक है लेकिन मैं नहीं चाहता कि तुम और वहां रुको। मैं दिव्याना को वहां भेजने के अरेंजमेंट्स करवाता हूं।” कहकर अमन ने कॉल कट कर दिया।

लावण्या से बात करने के बाद उसने तुरंत दिव्याना को कॉल करके आर्टिस्टिक के ऑफिस आने के लिए कहा।

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कुछ देर बाद दिव्याना आर्टिस्टिक के ऑफिस पहुंच चुकी थी। वो अमन से मिलने के लिए खास तैयारी करके आई थी। उसने काफी रीवीलिंग शॉर्ट ब्लैक आउटफिट पहना था।

लिफ्ट में उसके साथ आंशी भी मौजूद थी। आंशी ने उसके कपड़ों की तरफ देखा जो कि काफी बोल्ड और रिवीलिंग थे।

“क्या तुम यहां कोई जॉब करने आई हो?” आंशी ने उसकी तरफ घूर कर देखा और पूछा।

“तुम्हें उससे मतलब.....” दिव्याना ने फुल एटीट्यूड से जवाब दिया।

“मैं तो तुम्हारे भले के लिए ही कर रही हूं। देखो अगर तुम यहां काम करने आई हो तो खुद को पहले अच्छे से ढक लो। इस कंपनी के ओनर मिस्टर अमन कपूर को फॉर्मल कपड़े पहनने वाले लोग पसंद है, ना कि इस तरह के रीवीलिंग क्लोथ पहनने वाले।” आंशी ने सिर हिलाकर कहा।

“यहां के ओनर अमन कपूर को क्या पसंद है और क्या नहीं, ये मुझसे बेहतर और कोई नहीं जान सकता।” दिव्याना ने रहस्यमई मुस्कुराहट के साथ जवाब दिया।

आंशी उसकी तरफ हैरानी से देख रही थी। ‌ उसने कुछ देर सोचा और फिर कहा, “तुमसे बेहतर अमन सर को कोई नहीं जान सकता..... आई थिंक तुम उनकी गर्लफ्रेंड हो।”

उसकी बात सुनकर दिव्याना का चेहरा उतर गया। उसने जल्दी से खुद के इमोशंस को कंट्रोल किया और फिर जवाब में कहा, “उससे भी कहीं बढ़कर.....” बोलते हुए उसके चेहरे पर फुल कॉन्फिडेंस था।

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